भाई की ख़ुशी के लिए बहिन ने दी अपनी चूत

भाई ने चोदी जवान बहन की चूत बगीचे मे रानी की चुदाई करके रोहित को बड़ी चैन की नींद आई. लेकिन वही रानी पूरी रात बस यही सोचती रही की आज शाम को जो कुछ भी बगीचे मे हुआ सब ग़लत था. और यही सोचते सोचते रानी सो गयी.

सुबा जब रोहित उठा तो उसकी नज़र बस रानी को दूनद रही थी. अब रानी रोहित के लिए उसकी बेहन नही थी बल्कि उससे कही गुणना उन दोनो का रिस्ता बढ़ गया था.

थोड़ी देर इधर उधर दूनधने के बाद उसकी नज़र मे रानी आई. लेकिन रोहित को देख कर ही उसने अपनी नज़रे चुरा ली. (उससे अब भी ये सब ग़लत लग रहा था.)

बहुत कोशिस के बाद जब रोहित रानी से बात नही कर पाया. तो उसने अपना इंजिनियर वाला दिमाग़ लगाया और बातरूम मे जाके रानी को आवाज़ लगाई.

रोहित – राणिि…. पानी की बालती लेके आना.

अब रानी को मजबूरन पानी की बाल्टी लेके जाना पड़ा. जेसे ही रानी बालती लेके बातरूम मे गयी.

रोहित – बाल्टी को तोड़ा आयेज सरका देना.

जेसे ही बालती सरकने रानी झुकी रोहित ने बातरूम का गाते लगा के रानी का घग्रा उठा दिया. लाल कलर की पनटी देख के रोहित मदहोश सा हो गया और उससे हल्के से नीचे उतार दिया.

रानी हल्की आवाज़ मे बोलती रही.. “भैया नही भैया ये ग़लत है, मा – बाबू को पता लग जाएगा. भैया क्रपिया करके चोर दीजिए ना कोई आ जाएगा भैया आप समाज क्यू नही रहे हो, ये सब ग़लत कर रहे हो अप.”

लेकिन रोहित ने रानी की किसी बात पे ध्यान नही दिया और उसकी लाल पनटी को निकल ही दिया. और पाजामे से अपना लंड निकल कर रानी की गांद के छेड़ पे रख कर कसकर एक ज़ोर दार झाटका मारा. तो रानी की हिचकी निकल आई.

उसके बाद को रोहित ने रानी के मूह पेर हाथ रख धक्के मारता चला गया. थोड़ी देर बाद बातरूम का गाते खुला और रानी चुपके से बाहर चारो तरफ देखा कोई नज़र ना आने पे जल्दी से वाहा से निकल कर भागी. फिर रोहित आराम से नहा कर आया.

तैयार हो कर अपने रूम से बाहर आया. तो देखा रानी चुले के शाने खाना बना रही थी साथ मे उसकी मा भी थी. रोहित वाहा गया और रानी के बगल मे बैठ गया. जिससे रानी को गब्रत सी होंने लगी (कही फिर कुछ ना करने लगे.)

रोहित – मा आज काया बना रही हो?

मा – तेरी मनपसंदीदा पूरी सब्जी बना रही हू, सहर मे जाके तो सेहरी कहना खा खा कर बोर हो गया होगा.

रोहित – हन मा बोर तो हो ही गया हू.

मा – रानी तू पूरी बेल मे तेल लेके आती हू.

ये कहकर मा उठ गया और रोहित और रानी फिर अकेले हो गये. रोहित ने अचानक से रानी का हंत पकड़ कर अपने लंड पेर रख दिया. महसूस होने पेर रानी ने झट से हाथ हटा लिया.

रोहित ने दोबारा वही करा लेकिन इश्स बार उसका हंत पकड़ा रहा और हल्के हल्की सहलाने लगा. और धीरे से एक हाथ रानी के बूब्स पे रख कर दबाने लगा.

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लेकिन ये थोड़ी पल के लिए ही चला और उनकी मा आ गयी. और झट से दोनो ने अपने हंत वापस अपने पास ले लिए. लेकिन रोहित का लंड खड़ा हो गया था. जिसे वो रानी को इशारा करके बता रहा था और इशारो मे कह रहा था की-

“लंड को अपने मूह मे लेके शांत कर.”

रानी भी इशारो मे उसे माना करे जा रही थी. तंग आकर उसने रानी से कहा.

रोहित – रानी चल बगीचा मेी अपने लोककर की चाबी भूल गया हू.

मा – केसी चाबी बेटा?

रोहित – बहुत ज़रूरी चाबी थी मा.

मा – रानी बेटा जल्दी जेया और चाबी दूनद कर ला.

रानी मजबूरन उठी और जाने को तैयार हो गयी. उससे पहले रोहित ने रानी को पकड़ कर अपने कमरे मे ले जाकर अपना लंड चुस्वाया. और लंड का माल रानी के मूह मे ही चोर दिया.

फिर दोनो बगीचे के लिए जाने लगे… आधे दूर आने के बाद…

रानी – भैया एसा क्यू कर रहे हो आप, मैं बेहन हू आपकी अपनी बेहन के साथ ये सब करना ग़लत बात होती है.

रोहित – मुझे पता है छोटी लेकिन तुझे एक बात बतौ?

रानी – बताओ भैया.

रोहित – सहर मे मैं बस मा बापू के सपने के लिए बस पढ़ाई करता रहता हू, उसके लिए मैने अपनी खुशी, सुख सब तैयाग दिया है और अब जब मैने उनका सपना पूरा कर दिया है. तो मेरी कुशी और सुख की किसी को परवा नही. गॅव आया तुझे देखा तो तुझमे मैने अपनी खुशी डूँदने लगा, लेकिन तू भी मेरी वजह से…

ये कहकर रोहित रोने लगा, रानी ने रोहित को गले लगा कर-

रानी – सॉरी भैया मुझे आपके इस त्याग के बारे मे पता ही नही था. मुझे पता है भैया अपने बचपन से घर के लिए बहुत पढ़ाई की. इसलिए मेरा भी फ़र्ज़ बनता ही आपको सुख और खुशी डू. अब से मई आपकी हू, आप जब जहा बोलेगे मई आपके लिए तैयार हू.

ये कह कर रानी ने अपने ब्लाउस का बटन खोल के ब्रा नीचे करके रोहित के मूह मे बूब्स का निपल देकर वही झाड़ियो मे बैठ गयी.

रोहित – तेरे बूब्स तो सही मे बहुत मुलायम है.

रानी – अब आपके भी है भैया.

नीचे से रोहित ने रानी की घग्रा मे हंत गुस्सा कर उसकी छूट मे उंगली गूसने लगा. उंगली महसूष कर रानी ने अपनी टाँगे हल्की फेला ली और बड़े आराम से रोहित की उंगली अपने छूट मे लेने लगी.

रोहित भी मज़े से दूध पिता पिता छूट मे उंगली देने का मज़ा लेने लगा. काफ़ी देर बाद अपनी हालत सही करके दोनो उठे और बगीचे मे पहुचे. और पेड़ पेर चाड कर दोनो के दूसरे के बहो मे लग कर होंठो वाली किस्सिंग करने लगे. साथ ही रानी ने अपने हंत मे लंड और रोहित के हंत मे रानी के बूब्स पकड़ रखा था.

रानी ज़ोर ज़ोर से लंड हिला रही थी. जिसे उतेज़ित होकर रोहित कस कस कर रानी के बूब्स दाबनाए लगे. और पूरे जोश से एक दूसरे को किस करने लगे. जिससे पेड़ हिलने लगा.

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दोनो पेड़ से उतरे और बगल की खूटिया मे गुश गये. अंदर हल्का अंडरा था. दोनो को बस एक दूसरे का चेहरा दिख रहा था. इसलिए दोनो ने दोबारा के दूसरे से लिपट कर चूमने लगे. (चूमन करते करते रोहित ने रानी का घग्रा का नडा खोल कर गिरा दिया. वही रानी ने भी रोहित के पाजामे का नडा खोल कर पाजामा गिरा दिया.)

रानी लंड से रोहित पनटी के उपेर से ही छूट का मज़ा लेने लगा. (उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा.)

छूट गीली होने पेर रोहित गुटनो पे बैठ गया और रानी की छूट चाटने लगा. तभी रानी ने छूट से गरम गरम मट की दार निकली जििसे रोहित का मूह पूरा धूल गया. लेकिन छूट चटाना चोरना नही. छूट पे से मूत के एक एक बूँद को सॉफ करके खड़ा हुआ.

और इस बार रानी के मूह मे अपना लंड देकर ब्लोवजोब का आनंद उठाने लगा. रोहित भी मज़े से कम पे से ज़ोर लगा के रानी की मूह की चुदाई करने लगा.

रानी का मूह बालो से पकड़ कर रोहित ने रानी का मूह माल से भर दिया. और उसको खड़ा करके दोबारा उसके होंठ को चूमने लगा.

दोनो किस करते करते खाट पे लेट गये और फिर रोहित उसके बूब्स को चूमता हुआ उसके छूट का पहुचा. तो उसका लंड फिर से तन्ना हुआ था. हल्का सा थूक छूट पे लंड पे गिरा कर चिकना करके छूट पे लंड से निशाना लगा के पहले झटके मे ही पूरा लंड रानी के अंदर गुस्सा दिया. और उसके दोनो पैरो को मोड़ कर धक्के बाजी शुरू कर दिया.

रोहित – तू असली मायने मे बेहन है, जो अपने भाई का दुख समझ सकती है.

रानी – आप जब घर का दुख समझ सकते हो तो क्या मई आपका दुख नही समझ सकती.

रोहित – हन रानी बिल्कुल, अब मुझे दर लग रहा है कही ग़लती से तेरे पेट मे मेरा बच्चा पल गया तो..

रानी – अब बस चुदाई पे ध्यान दो बाकी मुझे पे चोर दो.

ये सुनकर रोहित ने ढ़ाके की स्पीड तेज़ कर दी. रानी में निकल गया आह्हः अहहह अहाआआ… कह कर रोहित ने सारा माल रानी की छूट में ही चोर कर उसके बगल में सो गया.

दोनो वही एक दूसरे से लिपट कर थोड़ी देर के लिए सो गये. जब दोनो की आँखे खुली तो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे और एक दूसरे एक होंठो को चूम कर खाट से उतरे.

रानी अपनी पनटी पहने लगी तब तक रोहित मे अपना पेजमा पहना. रानी को पनटी पहनता देख बोला-

रोहित – पनटी पहन लेगी तो बगीचा केसे देख पौँगा?

रानी – बगीचा बगीचा मे ही धीकेगा और कही नही.

रोहित – मत पहन ना पनटी रानी..

ये सुनकर उसने पनटी उतार कर रोहित के हाथो मे रख कर बोली-

रानी – लीजिए नही पहनती पनटी अब से.

कह कर घग्रा पहना और दोनो मस्ती से घर की तरफ निकल गये.

अब आयेज की कहानी अगले पार्ट मे.


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