भाई की हवस बहन और उसकी बेटी के लिए

गार्डेन से घर आ कर, और काम निपटा कर, मैं सो गया. इतनी आराम से नींद आई की पता ही नही चला. शाम को मोबाइल की रिंग बजने से मेरी आँखें खुल गयी. देखा तो दी की 3 मिस्ड कॉल पड़ी थी. इतनी मिस्ड कॉल्स देख कर मेरे दिमाग़ के घोड़े दौड़ने लगे की क्या हुआ होगा.

क्या दी को सच पता चल गया? क्या कायरा ने दी को सब सच बता दिया होगा? ये सब सोचते हुए मैने सोचा की जो होगा देखा जाएगा. दी की छूट तो मार ली है. अब कुछ भी हो, कोई टेन्षन नही. और दी की सेल्फ़ डिक्लरेशन भी रेकॉर्डेड थी वीडियो पे, की वो अपनी मर्ज़ी से छुड़वा रही थी.

किसी को क्या पता की कैसे ये जुगाड़ किया था. क्यूंकी यहा जो दिखता है वही बिकता है, और वीडियो को ही आज कल सच माना जाता है. ऐसे ख़याली पुलाव पकते हुए मैने धड़कते दिल के साथ दी को कॉल लगाई.

मेरा दिल ज़ोरो से धड़क रहा था. कुछ देर रिंग बजने के बाद कॉल को उठाया. सामने फोन पर कायरा की आवाज़ थी. ये सुन कर मैं एक-दूं रिलॅक्स हो गया.

कायरा: अंकल, कब से कॉल लगा रही हू. फोन उठाया क्यूँ नही?

मे: अर्रे बेटा, वो मैं सो रहा था. इसलिए नही उठा पाया. क्या हुआ, सब ठीक तो है ना?

कायरा: इतनी शाम को कों सोता है?

मे: अर्रे, वो तोड़ा रिलॅक्स कर रहा था (मॅन तो किया की उसे बोल डू, की ये तेरी मों को छोड़ने के बाद का रिलॅक्सेशन है). तू बता, तेरे घर पे माहौल कैसा है? तेरी मों को कोई डाउट तो नही हुआ?

कायरा: नही अंकल, अपना प्लान तो ठीक गया लगता है. मों अभी किचन में है, पर उन्हे किसी बात की टेन्षन लगती है.

मे: ह्म, घर की लॅडीस को कुछ ना कुछ टेन्षन तो होती ही रहती है घर को लेकर. बच्चो की पढ़ाई को लेकर. हब्बी को लेकर. इट’स नॉर्मल.

पर मुझे पता था की दी को किस चीज़ की टेन्षन थी. मैने कॉल को स्पीकर के उपर डाल कर, वो अपनी दूसरी वाली इंस्था ईद ओपन की, जिसे मैने दी को फॉर्वर्ड की थी. पर दी का कोई मेसेज नही आया था. शायद वो यही सोच रही होंगी की वो मुझे मेसेज करे या ना करे.

मैने सोचा की पहले दी को मौका देते है. अगर उसका मेसेज नही आया 1 से 2 दिन में. तो फिर मैं उसे सामने से अप्रोच करूँगा.

कायरा: हेलो, हेलो, कहा खो गये?

मे: अर्रे कुछ नही.

कायरा: मैं पूच रही थी की मेरा फोन कहा पे है?

मे: अर्रे तुम्हारा फोन, वो तो मैने तुम्हारे (और उसी टाइम किचन मैं कुछ आवाज़ आई. तो मैं फोन रख कर वाहा देखने गया, तो वाहा पे बिल्ली ने कुछ गिरा दिया था. मैं उसे भगा कर वापस अपने कमरे में आया, तो कायरा हेलो-हेलो कर रही थी).

मैने हेलो बोला.

कायरा: आप क्या कह रहे थे? की मेरे जाने के बाद आपने. कही उसे बेच तो नही दिया? (उसकी आवाज़ में बेचैनी थी)

मे: ऐसा ही कुछ समझो. (मैने फोन नही बेचा था, पर मैं उसके मज़े लेना चाहता था)

कायरा: क्या अंकल. आप ऐसा कैसे कर सकते है?

मे: अर्रे बेटा. मैं रिस्क नही ले सकता था. अगर तुम्हारी मों या पापा उसकी चोरी होने की कंप्लेंट लिखते, और पोलीस उसे ट्रॅक करती, तो मैं फ़ासस जाता ना उसमे.

कायरा: पर उसे देने से पहले मुझसे एक बार पूछना तो चाहिए था ना?

मे: बात तो तेरी सही है, पर हड़बड़ी में सब हो गया. क्या उसमे कुछ इंपॉर्टेंट था?

कायरा: एस, अंकल. तभी तो मैने कॉल किया.

मे: ओह, ई सी. (और कायरा ने निराश होके फोन रख दिया).

उसके बाद मेरे दिमाग़ में कुछ क्लिक हुआ, और मैं फ्रेश हो कर गाड़ी लेके निकल पड़ा. मैने फिर शॉप से पिज़्ज़ा कोल्डद्रिंक पॅक करवाया, और दी के घर पहुँच गया.

मैने डोरबेल बजाई तो कायरा ने गाते खोला. गाते ओपन होते ही मैं उसको देखता रह गया.

टाइट त-शर्ट और कपड़े पहने थे उसने. त-शर्ट भी उसका लो नेक था, जिसमे से उसके छ्होटे बूब्स की क्लेवगे दिखाई दे रही थी. पहली बार मैने उसे इस तरह देखा. उसको देख के मैं हक्का-बक्का रह गया.

कायरा: हेलो, क्या हुआ? क्या देख रहे हो?

मे: कुछ नही, वो तुम आज कुछ अलग लग रही हो.

कायरा: वो तो मैं हू ही खूबसूरत.

मे (उसकी क्लेवगे को घूरते हुए): पर आज तो कुछ एक्सट्रा खूबसूरत लग रही हो. (ये सुन कर वो स्माइल करने लगी)

मे: सच काहु तो, बिल्कुल अपनी मों के जैसी. वो भी तेरी आगे मैं कुछ ऐसी ही दिखती थी (ये सुन कर वो ब्लश करने लगी).

मे: मों कहा है?

कायरा: किचन में.

तो फिर मैं किचन में गया, और देखा की दी खाना बना रही थी. मैने धीरे से उसके पीछे जेया कर उसकी कमर में हाथ डाल कर, उसको अपनी आगोश में जाकड़ लिया.

दी: अर्रे तुम आ गये? (और उसने पीछे मूड के देखा, तो मैं था. मुझे देख कर वो सर्प्राइज़्ड थी)

मे: एस डार्लिंग, तुम्हारी याद मुझे यहा खींच लाई (और मैने अपने हाथ उसके बूब्स पे रख कर उसे हल्का सा मसालने लगा).

दी: छ्चोढो मुझे, कायरा देख लेगी. (और उसने मुझे अलग किया) क्यूँ आए हो?

मे: बस, तुमसे मिलने का दिल किया, इसलिए आ गया. आज दोपहर को तुमने कुछ ऐसा जलवा दिखाया, की अब तुमसे बिना मिले रहा नही जाता (उतने में कायरा अंदर आ गयी).

मे: देखो कायु, मैं तुम्हारे लिए पिज़्ज़ा और कोक लेकर आया हू.

कायरा: वाउ!

दी: पर मैं अभी खाना बना तो रही हू?

मे: दी, एक बार पिज़्ज़ा को खा लेने से कहा कोई पेट भर जाएगा? और ये ऐसी चीज़ है जिसे कितना ही खाओ, पेट भरता ही नही. क्यूँ कायरा? (ये कहते हुए मैने दी की छूट की और देखा, और वो मेरा इशारा समझ गयी)

कायरा: एक-दूं सही कहा.

और कायरा किचन से ग्लास और डिश उठा कर, मैं रूम में पिज़्ज़ा खाने लगी. मैने टीवी ओं कर दी, और यहा-वाहा देखने लगा. आक्च्युयली मेरा यहा आने का रीज़न था कायरा को उसका मोबाइल देना, जो मैने उसकी बाग की लास्ट पॉकेट में रखा था.

मैने मैं रूम में देखा तो वाहा पे नही थी बाग. फिर मैं कायरा के रूम में गया, तो वाहा एक तरफ वो पड़ी थी. मैने फटाफट उसको ओपन किया, तो वाहा वो फोन था, जिसे लेकर मैने अपने बाग में च्छूपा दिया.

फिर मैं बाहर आया, तो कायरा टीवी देख कर पिज़्ज़ा खा रही थी. मैं सीधा वापस किचन में गया. और दी को फिरसे हग किया पीछे से. दी इस बार सर्प्राइज़्ड नही हुई.

यह कहानी भी पड़े  मेरे भैया ने मुझे अपने कॉलेज के दोस्तों से चुदवाया


error: Content is protected !!