भाई के दोस्त की वर्जिनिटी ली

हेलो दोस्तों मेरा नाम सोनम है, और यह मेरी पहली कहानी है. जिसने मुझे एक पूरी रंडी बना दिया. तो बात २ साल पहले की है जब मैं कॉलेज के पहले साल में थी और मेरी जवानी उभर कर बाहर आ रही थी, मेरे बूब्स काफी बड़े हो चुके थे. मैं अब 32 साइज की ब्रा पहनती थी और मेरी गांड भी परफेक्ट शेप में आ गई थी. ज्यादा बड़ा नहीं था पर जब भी मैं स्किन टाइट जींस पहनती थी और सारे लड़के मुड़-मुड़कर मुझे देखने लगते थे, मैं ज्यादातर जींस पहनती थी और मेरे मोहल्ले के शायद सारे लड़कों ने मेरे बारे में सोचकर मुठ जरूर मारी होगी, लगभग आधे से ज्यादा लड़कों ने मुझे लव लेटर दिया हुआ था पर अभी तक मैंने किसी का प्रपोजल एक्सेप्ट नहीं किया था, क्योंकि मैं कोई रिलेशन नहीं चाहती थी और वैसे भी पहली चुदाई अपने कजिन ब्रदर के साथ होने के बाद अब मैं कोई रिलेशन नहीं बल्कि एक और जोरदार चूदाई चाहती थी.

तो अब कहानी पर आते हैं, जैसे कि मैंने अपनी पहली कहानी में बताया कि कैसे मेरे कजिन भाई ने मुझे तीन पत्ती खेलते हुए चोदा या कहें कि मैंने खुद उससे चुद गई, पर यस चुदाई के बाद में चुदाई की दीवानी हो चुकी थी. मम्मी पापा वापस आ गए थे और मेरा कजिन ब्रदर भी बहुत बिजी रहने लगा था. कभी कभी घर आता था पर मेरी मां हमेशा घर पर ही रहती थी तो हमें कभी दुबारा चूदाई करने का मौका नहीं मिला, पर जब भी वह घर आता तो जैसे तैसे करके मेरे बूब्स दबा लेता या मुझे किस कर लेता, और मैं सीधे उसके लंड को अपने हाथों से दबाने लगती मम्मी से नजर बचाकर.. लेकिन इन सब हरकतों ने मेरे अंदर की आग और भी बढ़ा दी थी और अब मुझ से रहा नहीं जा रहा था. मैं रात को मम्मी पापा की चूदाई छुप-छुपकर दरवाजे के छेद से देख कर अपनी चूत रगड़ने लगती, मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था, मानो कि जैसे मैं पागल हो रही थी. चुदाई के लिए कॉलेज में बहुत सारे लड़के थे पर जैसे कि मैंने कहा मैं कोई रिलेशन नहीं चाहती थी और एक दिन मानो मेरी मुराद पूरी हो गई.

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उस दिन पापा के ऑफिस जाने के बाद मम्मी मार्केट में चली गई मेरी भाई का कोई दोस्त आने वाला था जिसके हाथ उसके लिए कुछ सामान भेजना था. तो मम्मी कुछ ज्यादा टाइम लगाने वाली थी, तो मैंने अपने कपड़े उतारे और मेरे बूब्स को देखकर दबाने लगी और फिर चूत में उंगली डाल कर हिलाने लगी. मैं बड़े मजे से अपनी उंगली से अपनी चूत चोद रही थी और तभी डोर बेल बजी, मैं मानो जैसे कि सपने से जाग गई मैंने टावेल लपेटा और दरवाजा खोलने चली गई. मुझे लगा कि मां होगी पर जब दरवाजा खोला तो देखा कि एक लड़का करीब १७ साल का होगा, लंबा चौड़ा अच्छी बॉडी थी उसकी और देखने की भी गोरा चिट्टा था, एक दम जवान मजबूत बोडी वाला लड़का मेरे सामने था. मैंने पूछा वह बोला दीदी मैं संदीप, रोहित का फ्रेंड हूं उसने कहा था कि आप लोग उसके लिए कुछ भेजने वाले हैं, तो मैं लेने आया हूं.

मैंने कहा यह शोर प्लीज अंदर आओ. मैंने अपनी टॉवेल थोड़ी ठीक की और फिर उसे बैठने को कहा और किचन से कोल्ड ड्रिंक लेकर आई. मैंने कहा १ मिनट प्लीज मैं चेंज करके आती हूं. उसने कहा कोई बात नहीं. मैंने उसे देखा तो उसकी आंखों में मुझे एक चमक दिखाई दिया जैसे कि मानो उसकी आंखें मुझे बोल रही थ कि इस टॉवल को भी उतार दो. में अपने रुम में चली गई जो की ड्राइंग रूम के बिल्कुल सामने था. मैंने जानबूझकर अपने रुम का दरवाजा बस थोड़ा खींचा पर पूरा बंद नहीं किया, अब दरवाजे पर इतना गेप था कि उसे बाहर से अंदर का दिखाई दे सके.

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मैंने अंदर जाते ही अपना टॉवल निकाल दिया और पूरी नंगी हो गई. मैंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा लेकिन मिरर में देखा तो संदीप मेरी तरफ देख रहा था. मैंने धीरे से ब्रा उठाया और धीरे से पहनने लगी और फिर उसकी तरफ मुड़ कर अपने बूब्स को थोड़ा दबाया मैं उसकी तरफ बिल्कुल नहीं देख रही थी, फिर मैं दूसरी तरफ मुड़ी ताकि मेरा पिछवाड़ा उसकी तरफ हो जाए. और फिर अपनी पैंटी उठाकर पहनने लगी. पर जब पैंटी पहने तो मैंने पूरा नीचे झुक गई ताकि उसे मेरी गांड दिखाई दे सके और फिर जब मैंने मिरर में देखा तो संदीप मेरी तरफ देखकर अपने लंड को पैंट के ऊपर से सहला रहा था. फिर मैंने एक छोटी सी शॉर्ट स्कर्ट पहनी और ऊपर एक टाईट टॉप डाल दी और बाहर आई तो संदीप झट से अपने आप को ठीक कर रहा था और यहा वहां देखने लगा, पर अपने लंड को भूल गया जो उसके पैंट के अंदर से ही टेंट बना रहा था. उसके लंड से बने उस टेंट को देख कर मैं तो अभी उस पर टूट जाना चाहती थी पर फिर सोचा कि नहीं उसे पहल करने देते हैं.

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