भाई के बहन की चूत चूसने की मस्त कहानी

हेलो रीडर्स, सॉरी फॉर लाते पोस्टिंग. इसका रीज़न मैं आपको नेक्स्ट पार्ट में बतौँगा. लेट’स स्टार्ट और स्टोरी:

दी मेरे उपर और मैं उनके नीचे था. 3 बार चुदाई से दी की चूत, और मेरा लंड भी थकान महसूस कर रहे थे. जीजू ने अपनी गाड़ी पार्किंग में लगाई, और हम तीनो नीचे उतरे. दी मुझसे नज़रे चुरा रही थी.

जीजू: चलो, समान जल्दी उतारते है, मुझे ऑफीस भी जल्दी रिपोर्ट करना है. मेरा आज फर्स्ट दे है.

मे(दी की और देखते हुए): हमारा भी.

जीजू: क्या मतलब?

मे: मेरा मतलब की दी और मेरा भी आज फर्स्ट दे है ना माइज़ॉयर में (दी तोड़ा सा ब्लश कर रही थी).

मे: समान नीचे उतारने में तो टाइम लग जाएगा जीजू. आप ऐसा क्यू नही करते की टॅक्सी लेकर ऑफीस चले जाइए, और हम यहा सब समान संभाल कर उतार लेंगे. क्यूँ दीदी?

दी (हड़बड़ते हुए, जैसे किसी ने उसको नींद से उठाया हो): क्या?

मे: मैं बोल रहा था, की जीजू को टॅक्सी में ऑफीस जाने दो. हम यहा सब कुछ उतार लेंगे. (दीदी के कपड़ो को देखते हुए) एक-एक करके, बारी-बारी सब उतारूँगा मैं.

दी मेरे कहने का मीनिंग समझ गयी, और उसने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें झुका ली.

दी: ठीक है जी, आप अभी ऑफीस टॅक्सी से चले जाइए. ये हम उतार लेंगे.

जीजू: ठीक है फिर, मैं चला जाता हू ऑफीस. शाम को मिलते है (मेरी और देख कर). शाम को रेडी रहना.

ये सुन कर मेरा मूह लटक गया. जिसको दी ने भी नोटीस किया. और जीजू हमे फ्लॅट की चाबी देकर चले गये.

दी: क्या हुआ, कों सी बात कर रहे थे तेरे जीजू?

मे: दी, वो मैने आते वक़्त जीजू से बोला था, की जो समान बाकी है, उसको हम दूसरी बारी में ले आएँगे, और मैं उनके साथ चलूँगा. और इन 2-3 दीनो में आप बोर ना हो, इसलिए आपके लिए ये टीवी रखवाया था.

दी: ओह अछा जी, तो इस तरह तुमने अपने जीजू को पटाया टीवी रखने के लिए.

मे: मैने ये भी बोला था, की अगर आप ये पुराना टीवी नही ले जाओगे, तो दी नये टीवी की ज़िद करेगी, और आप का खर्चा होगा. तब जेया कर वो अग्री हुए.

दी: कमीने, तूने अपने फ़ायदे के लिए मुझे विलेन बना दिया.

मे: फ़ायदा तो हम दोनो का ही हुआ ना दी.

दी: बदमाश! (दी ने भी मुस्कुरा दिया, और हम समान सब उतारने लगे, और दी मुझसे बातें कर रही थी. )

मे: समान सब बाद में उतारते है ना. अभी चलो ना रूम में.

दी: अर्रे तका नही क्या तू? तोड़ा सबर कर, मैं कहा भागी जेया रही हू. पहले सब समान उतार ले, तो फिर टेन्षन फ्री हो कर करते है ना. (और दी ने मुझे आँख मार दी)

फिर हम सब समान उतारने लगे. और पूरा वाहा पे अंदर ड्रॉयिंग रूम और स्टोर रूम में रख दिया. मैं वाहा से तोड़ा समान शिफ्ट करने लगा, तो दी ने माना कर दिया, और बोली बाद में करेंगे. फिर हम थके हारे बेडरूम में सो लिए. कुछ देर बाद दी ने मुझे उठाया,

दी: उठ भाई, दोपहर हो गयी है. छाई ले आ तू नीचे कही से.

मे(उठते हुए): आज छाई नही दूध पियुंगा.

दी: अब दूध कहा से लाउ तेरे लिए?

मे (दी को खींच कर बेड पे लिटाते हुए): यही पीला दो अपने बूब्स में से.

और मैं दी के बूब्स को मसालने लगा. एक हाथ उसकी कमर पर रखा, और एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा. वो मस्त मोन करने लगी. उसकी आँखें बंद थी, और वो कराह रही थी.

मैने फिर धीरे से उसका टॉप निकालने के लिए तोड़ा उपर किया. वो मेरा इरादा भाँप गयी, और उसने अपनी कमर को उपर उठाया, और मैने टॉप को निकाल दिया. अब वो ब्रा में मस्त लग रही थी.

लड़किया बिना कपड़ो से ज़्यादा सुंदर कम कपड़ो में लगती है. ये मैने उस टाइम फील किया. कल जब दी ने अपना टॉप निकाल कर मुझे अपने नंगे बूब्स दिखाए थे, वही बूब्स उससे ज़्यादा सेक्सी आज इस ब्रा में लग रहे थे.

मे: हे, अपनी आँखें तो खोलो.

दी: मुझे शरम सी आ रही है.

मे: इतना सब तो हो गया. अब कैसी शरम?

दी (अपनी आँखें खोलते हुए): जो हुआ, वो गाड़ी में या अंधेरे जैसे माहौल में हुआ. पर अपने ही बेडरूम में अपने बेड के उपर किसी गैर मर्द के हाथो से नंगी हो रही हू. अब शरम तो आएगी ही ना.

मे: क्या मैं गैर हू?

दी: भले तुम गैर नही, पर मर्द तो गैर ही हुए ना, मेरे पति तो नही हो.

मे: ह्म, पर तुम टेन्षन ना लो, आज तो तुम्हे इतना मज़ा दूँगा, की तुम सोचने लगोगी, की काश मैं तुम्हारा हब्बी होता.

दी: देखते है.

और दी ने मेरी कमर पे हाथ डाल कर मुझे अपनी और खींचा, और अपने होंठ मेरे होंठो पे रख दिए. वो मेरे हाथो को अपने बूब्स पे रख कर मसलवाने लगी. दी भी अब गरम हो गयी थी. फिर दी ने खुद से ही अपनी ब्रा के हुक्स खोल कर मेरे मूह को बूब्स के उपर दबा दिया.

दी: आ भाई, ले पी ले अपना दूध. बुझा ले अपनी बरसों की प्यास.

मे(जी भर के दी के बूब्स चूसने के बाद): हा दी, बरसो की ही प्यास है. पर तुम्हारे बूब्स से तो सिर्फ़ गला ही गीला होगा, असली प्यास तो तुम्हारी छूट से ही बुझेगी.

दी: ह्म तो बूजाओ ना, किसने तुझे रोका है? यहा तो अभी तेरे जीजू की भी टेन्षन नही.

मे: हा दी, सही कहा.

और मैने दी को बेड के उपर लिटा कर उनके नीचे के कपड़े निकाल दिए. अब दी सिर्फ़ पनटी में थी, और शर्मा रही थी. वो कुछ बोले इससे पहले मैने पनटी को निकाल दिया, और दी की छूट दिखने लगी.

दी की छूट आज भी गुलाब के पंखुड़ी के माफिक दिख रही थी. मुझे यकीन नही हो रहा था, की इसी छूट को मैं आज 3 बार छोड़ चुका था.

दी: क्या देख रहा है ऐसे?

मे: आपकी इस सेक्सी छूट को.

दी: 3 बार तो इसका मज़ा तू आज ले ही चुका है.

मे: हा, पर इस तरह इतमीनान से तो नही मिली ना ये. तीनो बार सब कुछ जल्दी में ही किया, अब आराम से करूँगा.

दी: क्या?

मे: तुम्हारी छूट का रस्स-पॅयन.

मैं अपने होंठो को दी की छूट के उपर रख के उसको चूसने लगा. दी भी अचानक मेरे इस सर्प्राइज़ से चौंक गयी, पर उसने मुझे रोका नानी.

दी: आ भाई, ये क्या कर रहा है?

मे: वही, जो तुम्हे पसंद है.

दी: हा भाई, सभी लड़कों को अपना लंड लड़कियों से चुसवाना अछा लगता है. पर उन्हे ये एहसास नही होता, की उस लड़की को भी अपनी छूट चुसवानी होती है.

मे: नाइस डाइलॉग दी, मैं याद रखूँगा. बाइ थे वे जीजू ने कभी चूसा है इसको?

दी: नही, पर तू है ना अपने जीजू की सारी कमी पूरी करने वाला. (और दी ने एक आँख मारते हुए मेरे उठे हुए सिर को अपनी छूट के उपर वापस दबा दिया)

मैं फिरसे दी की छूट के दाने को सहलाते हुए उसकी छूट को चूसने लगा. कभी दाने को लॉलिपोप की तरह चूस्टा, तो कभी छूट में अपनी ज़ुबान डाल कर उसको अंदर-बाहर करता (जैसे मैने पॉर्न मोविए में देखा था).

दी भी अछा खुल के मोन कर रही थी. अगर जीजू गाते पे होते, तो उन्हे पक्का सुनाई देता. पर हमे पता था की शाम तक हम चुदसियो को कोई रोकने-टोकने वाला नही था.

कुछ देर बाद दी ने मेरे सर को और ज़ोर से दबाया, और उसकी छूट में से पानी निकालने लगा. मैं दी का इशारा समझ गया, और उस पानी को पीने लगा. मेरी इचा तो नही थी पीने की, पर आगे मुझे दी को अपने घर लेजा कर उसकी गांद भी मारनी थी, सो इतना तो करना ही पड़ना था.

फिर मैने दी को इशारा किया, तो उसने मेरे लंड को अपने मूह में लेकर उसको चूस कर टाइट किया, और अपनी छूट को फैला कर उसको अंदर ले लिया.

दी मेरे उपर उछाल-उछाल कर मज़े ले रही थी. उसके बूब्स भी साथ में मस्त उछाल रहे थे. दी को जितना छोड़ता, उतना कूम लग रहा था.

ऐसे ही मज़े लेते हुए हम एक-दूसरे में झाड़ गये. चुदाई के बाद दी को एक लंबा किस किया, और उसकी आँखों में देखा.

मे: दी, कैसा लगा तुम्हे? अपने भाई को चान्स देकर कैसा फील हो रहा है?

दी: सच काहु तो अगर तूने ये सब प्लान ना किया होता, तो तुझे ये चान्स मिलता ही नही. पर मुझे खुशी है की तूने ये चान्स लिया. और मेरी सूनी सेक्स लाइफ को फिर से कलर्फुल बना दिया.

मे: थॅंक्स दी.

दी: पर तुझसे एक शिकायत है?

मे: वो क्या दी?

दी: इतना टाइम क्यू लगा दिया तूने ये चान्स लेने में? अगर तू शादी के कुछ ही दीनो बाद ही यहा आ जाता, तो हम दोनो का काम निकल जाता.

मे: वो मुझे लगा आप नाराज़ हो जाओगी, इसलिए.

दी: ह्म.

मे: और भी एक बात है, एक सीक्रेट. जो मैं आपको बता नही सकता. मैने किसी से प्रॉमिस करा हुआ है.

दी: नही, तुम्हे बताना ही होगा. तुझे मेरी कसम.

मे(गहरी साँस लेते हुए): ठीक है दी. पर आपको मेरी दो बातें माननी पड़ेगी.

दी: कौन सी?

मे: जिस जगह पे और जिस हालत में तुमको शादी के दिन अधूरा छ्चोढा था, वही पे तुम्हे उन्ही कपड़ो में मैं छोड़ना चाहता हू.

दी(कुछ सोचने के बाद): ओक मंज़ूर है. और दूसरी बात?

मे: वो पहला वाला टास्क पूरा होने के बाद बतौँगा.

दी: ठीक है, अब बता, क्या सीक्रेट की बात कर रहा था?

मे: शादी वाले दिन जब मैं आपको छोड़ने वाला था, तब गाते पर किसने और क्यूँ नॉक किया था?

दी: मों ने किया था. वो शादी के मुहूरत का टाइम हो गया था इसलिए.

मे: आक्च्युयली दी, मों ने जान-बूझ कर नॉक किया था. क्यूंकी उनको पता था की आप मुझसे चूड़ने को रेडी थी. इसलिए हमारी चुदाई ना हो पाए, इसकी वजह से मों ने नॉक किया और आपको वाहा से ले गयी.

दी: क्या?

अगली कहानी नेक्स्ट पार्ट में. कॉमेंट ज़रूर कीजिएगा.

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