भाई का लंड चूस्टे देख पापा ने चोदा

ही फ्रेंड्स, मैं प्रीथनका गुप्ता अपनी अगली बाप-बेटी सेक्स स्टोरी लेके आई हू. मेरी पहले की स्टोरीस को प्यार देने के लिए थॅंक योउ. जिन रीडर्स ने मेरी पिछली कहानियाँ नही पढ़ी है, वो उनको भी ज़रूर पढ़ ले. चलिए बढ़ते है आज की कहानी की तरफ.

पहले मैं अपने बारे में बता डू. मैं 24 साल की हो गयी हू, और मेरा फिगर 34-29-36 है. मैं पुंजब के लुधियाना शहर में रहती हू, और नौकरी करती हू. मुझे देख कर लड़के और मर्द मेरे दीवाने हो जाते है, और मेरी चुदाई करना चाहते है. लेकिन मैं इतनी आसानी से हाथ नही आती.

ये कहानी कुछ वक़्त पहले की है. मेरा नया-नया बाय्फ्रेंड बना था, और हम लोग च्छूप-च्छूप कर मिलते थे. पहले-पहले तो हम लोग किस्सिंग करते थे. फिर किस्सिंग के साथ वो मेरे बूब्स और छूट सहलाने लगा. फिर एक दिन उसने मुझे अपना लंड पकड़ाया. उस दिन मुझे एक अलग ही फीलिंग आई.

एक दिन मैं अपने बाय्फ्रेंड के साथ एक गार्डेन में झाड़ियों के पीछे बैठी थी. वहाँ आस-पास कोई नही था, तो मेरे बाय्फ्रेंड ने मुझे ब्लोवजोब देने को कहा. मैने उससे पहले कभी ब्लोवजोब नही दी थी, हा देखी ज़रूर थी पॉर्न वीडियोस में.

मैने उसको हा कहा, और उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया. उस दिन मैने पहली बार लंड छाता, और चूसा. पहले-पहले मुझे बहुत अजीब सा लगा, लेकिन फिर मुझे मज़ा आने लगा. उसके बाद हर बार मैं उसका लंड चूसने लगी.

धीरे-धीरे मुझे लंड चूसने की आदत हो गयी. लेकिन एक दिन झगड़े की वजह से हमारा ब्रेकप हो गया. ब्रेकप होने तक मुझे लंड चूसने की आदत हो चुकी थी. अब कोई था तो नही, जिसका लंड चूस साकु, लेकिन तलब हर रोज़ लगती थी.

फिर एक रात मेरी नज़र मेरे भाई के खड़े हुए लंड पर पड़ी. मैं और मेरा भाई एक ही रूम में सोते है. वो कॉलेज में पढ़ता है. रात का वक़्त था, और उसका लंड खड़ा था. उसके खड़े लंड को देख कर मेरे अंदर लंड चूसने की तलब जागने लगी. पहले मैने सोचा की मैं अपने भाई का लंड कैसे चूस सकती थी. लेकिन फिर मैने सोचा की लंड तो लंड है, फिर चाहे किसी का भी हो.

ये सोच कर मैं उसके पास गयी, और उसको धीमी आवाज़ में पुकारा. मैं चेक करना चाहती थी, की कहीं वो कक़ची नींद में तो नही था. लेकिन जब उसका कोई रेस्पॉन्स नही आया, तो मैं समझ गयी की वो गहरी नींद में था.

फिर मैने हल्के से उसके खड़े लंड को हाथ लगाया. लंड पूरा सख़्त हो रखा था. उसको हाथ लगते ही मेरे बदन में करेंट सा दौड़ गया. फिर मैने उस पर कपड़े के उपर से किस किया, और उसकी खुश्बू को महसूस करने लगी.

अब मुझसे रहा नही जेया रहा था. मैने धीरे से भाई का पाजामा नीचे किया. फिर अंडरवेर नीचे किया, तो मुझे उसके लंड का टोपा नज़र आने लगा. उसका लंड देख कर मैं खुश हो गयी. फिर मैं अपना मूह आयेज करने लगी, और उसके लंड पर जीभ फेर दी. मुझे इसमे बहुत मज़ा आया.

ये सब करते हुए मुझे ये बिल्कुल भी पता नही था की पापा मुझे देख रहे थे. वो कब हमारे रूम में आए, क्यूँ आए, और कब से मुझे ये रणदीपना करते देख रहे थे, मुझे कुछ नही पता. उधर मैं मस्त होके भाई का लंड चाट रही थी, की तभी पापा पीछे से आए, और मेरे कंधे पर ताप किया.

मैं दर्र गयी, और पीछे मूडी. पीछे पापा खड़े थे. उनको देख कर मैं बहुत घबरा गयी, और मेरी सिट्टी-बिट्टी गुल हो गयी. फिर पापा धीमी आवाज़ में बोले, ताकि भाई जाग ना जाए-

पापा: ये तुम क्या कर रही थी?

मैं: मैं पापा, वो मैं, मैं चादर ओढ़ा रही थी भाई को.

पापा: मैने सब देख लिया है प्रीथनका, तुम उसका लंड चूसने वाली थी. मुझसे झूठ मत बोलो.

मैं: ई आम सॉरी पापा. मुझसे ग़लती हो गयी. मुझे इसकी आदत लग चुकी है, तो कंट्रोल नही हुआ.

पापा: कोई बात नही बेटी. इस उमर में ये सब होता है. आओ मैं तुम्हारी मदद कर देता हू.

पापा के ये मदद वाले शब्द सुन कर मैं हैरान हो गयी. इससे पहले की मैं कुछ समझ पाती पापा मेरे सामने पुर नंगे हो गये, और मेरे सिंगल बेड पर बैठ गये. पापा का लंड बहुत बड़ा था, मेरे बाय्फ्रेंड से भी ज़्यादा बड़ा. लंड देख कर मेरी प्यास फिर से जाग गयी.

फिर पापा बोले: आओ बेटी, शरमाओ मत.

मैने सोचा जब पापा को सब पता चल ही गया था, तो अब शरमाने की ज़रूरत नही थी. फिर मैं आयेज बढ़ी, और ज़मीन पर घुटनो के बाल बैठ कर पापा के लंड को हाथ में लिया. उसके बाद मैने किसी रंडी की तरह लंड चाटना शुरू किया. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

अब मैं पापा का लंड चूस रही थी, और पापा मेरे बालों में हाथ घुमा रहे थे. फिर पापा ने मुझे बालों से पकड़ कर खड़ा किया, और बेड पर सीधा लिटा दिया. मैने शॉर्ट्स और त-शर्ट पहनी थी. पापा मेरी शॉर्ट्स उतारने लगे तो मैने पूछा-

मैं: पापा ये आप क्या कर रहे हो?

पापा: बेटी तुमने लंड चूसना सीखा है, उससे चूड़ना नही. आज वो मैं तुम्हे सीखौँगा.

मैं: लेकिन पापा इससे तो मेरी वर्जिनिटी टूट जाएगी. कल को मेरी शादी होगी तो मेरे पति को पता चल जाएगा.

पापा: किसी को घंटा पता नही चलेगा.

फिर पापा ने मेरी शॉर्ट्स और पनटी उतार दी, और मेरी छूट चूसने लगे. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, और मैं आ आ करने लगी. मैं धीमी आवाज़ में मोन कर रही थी, ताकि भाई जाग ना जाए.

कुछ देर छूट चूसने के बाद पापा मेरे उपर आए, और मेरी छूट पर लंड सेट किया. जैसे ही उन्होने प्रेशर डाला, मुझे बहुत दर्द हुआ, और मैं उनको धक्का देने लगी. पापा बहुत भारी शरीर के है, तो मेरे धक्को का उन पर कोई असर नही हुआ.

पापा का लंड मेरी छूट चीरता हुआ अंदर घुसता गया, और मेरी जान निकालने वाली हो गयी. आख़िरकार पूरा लंड डाल कर वो रुक गये. मैं तो बेहोश होने वाली थी. पापा मेरे होंठ और बूब्स चूसने लगे. इससे मुझे थोड़ी राहत मिलने लगी.

कुछ देर बाद जब मेरा दर्द कम हुआ, तो पापा ने मुझे छोड़ना शुरू कर दिया. वो लंड अंदर-बाहर करने लगे, और मेरा दर्द मज़े में बदल गया. अब मैं आ आ करते हुए छुड़वाने लगी.

धीरे-धीरे पापा ने स्पीड बधाई, और तेज़ी से धक्के देने लगे. कमरे में ठप-ठप की आवाज़ गूंजने लगी. मुझे तो दर्र लगने लगा की कहीं भाई जाग ना जाए. लेकिन ऐसा नही हुआ. 20 मिनिट मुझे छोड़ने के बाद पापा ने लंड छूट से निकाला, और मेरे मूह पर माल निकाल दिया.

फिर पापा चले गये, और मैं वहीं किसी रंडी की तरह पड़ी रही. मुझसे उठा नही जेया रहा था, तो मैं वहीं सो गयी. उस रात के बाद पापा अक्सर मेरी छूट मारते है रात को आ कर.

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