भाई बेहन का प्यार

पिछले पार्ट में अपने पढ़ा की कैसे अपनी लाइफ में पहली बार मैने अपने पापा के लंड को देखा. जिससे देख कर मेरी आँखे फटी की फटी और मेरा मूह खुला का खुला रह गया. क्यूंकी पापा का लंड बिल्कुल घोड़े जैसा काफ़ी लंबा और बहुत मोटा था. जिससे देखते ही मैं एकद्ूम से शोकेड गयी.

फिर कैसे मैने हॉस्पिटल में अपने बीमार पापा की खुशी के लिए ना चाहते हुए काफ़ी हिम्मत करके अपने पापा के लंड को पकड़ा. अपने दोनो हाथो से पापा का लंड पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से आयेज पीछे करके उनकी मूठ मारी और पापा को खुश करा.

अब आयेज…

अपने हाथो से पापा के लंड की मूठ मरने के बाद पापा बहुत खुश थे. उनके चेहरे और आँखो में मैं वो खुशी सॉफ देख सकती थी. और मैं भी पापा को खुश देख कर बहुत जाड़ा खुश हुई.

फिर पापा और मैने थोड़ी देर बाते करी और फिर से नॉर्मली हसी मज़ाक मस्ती करने लगे. मैं पापा को और पापा मुझे बाते कर कर के हसने लगे.

पापा को मैने कुछ फ्रूट खिलाया और दवाई दी और पापा को थोड़ी देर सोने को कहा. फिर पापा भी लेट गये और रेस्ट करने लगे और मैं भी अब टेन्षन फ्री हो कर काफ़ी खुश थी. मैं भी आराम से फिर थोड़ी देर लेट गयी.

मैं काफ़ी रेलेक्ष फील कर रही थी. क्यूकी मेरे माइंड में पापा को ले कर बहुत से सवाल और बहुत सी टेन्षन्स जो चल रही थी वो सब अब ख़तम हो चुकी थी.

मेरा दिल काफ़ी हल्का महसोस कर रहा था. क्यूकी पापा भी अब पहले से ठीक थे और खुश थे. उन्हे खुश देख कर मैं भी बहुत खुश थी. और मैने म्न में सोच लिया की पापा की खुशी के लिए मैं उनको ऐसे ही अपने हाथो से प्यार देती रहूंगी.

क्यूकी पापा को मैं ऐसे बीमार बिकुल नही देख सकती थी. और मम्मी भी पापा को वो प्यार नही दे रही थी जो एक हज़्बेंड को अपनी वाइफ से ज़रूरत होती है.

इसलिए मैने पापा की खुशी के लिए अपनी लिमिट्स क्रॉस की और पापा ओर मेरे बीच ये फाइनल हुआ की पापा मुझे कभी भी न्यूड देख सकते हैं और टच कर सकते हैं. और मैं पापा को अपने हाथो से प्यार करूँगी. इससे जयदा कुछ नही. इससे जयदा पापा और मेरे बीच कुछ नही होगा. और पापा भी इतने से प्यार में बहुत खुश थे.

मैं ये सोच सोच कर बहुत खुश थी की अब सब ठीक हो जाएगा. और पापा के ठीक होने के बाद मैं छोटा भाई मम्मी पापा हम पहले की तरह सब मिल कर खुश रहेंगे. यही सब सोचते सोचते मैं सो गयी.

शाम के 6 बाज गये.

अभी पापा और मैं थोड़ी देर लेट कर रेस्ट करने के बाद उठ कर बेते ही थे और बाते कर रहे थे की तभी मम्मी घर से हॉस्पिटल आ गये. मम्मी ने आते ही पापा का हाल चल पूछा और मेरे से भी मम्मी की बात हुई.

मम्मी – नीलम बेटा. दवाई वगेरा दे दी थी शाम की अपने पापा को???

मैं – हन मम्मी.. मैने पापा को कुछ फ्रूट्स वगेरा खिलाया और उसके बाद शाम की दवाई भी दे दी थी. फिर पापा लेट कर रेस्ट कर रहे थे. ब्स अभी आपके आने के थोड़ी देर पहले ही उठे हैं.

मम्मी – ओके गुड. तूने कुछ खाया. या ब्स सुबा से ब्रेकफास्ट कर के ही बेती है?

मैं – नही मम्मी.. मैं ब्स घर से ब्रेकफास्ट कर के ही आई थी. उसके बाद से मैने कुछ नही खाया.

मम्मी – तू पागल है. फ्रूट्स वगेरा खा लेती. चल मैं तेरे लिए भी खाने का ले कर आई हू. खा ले जल्दी से. इतनी देर से भूकी बेती है.

मैं – ओके मम्मी.

(मम्मी पापा और मेरे लिए घर से ब्रेड और टी वगेरा ले कर आए थे. और पापा के लिए बाहर से जूस भी बनवा के आए थे)

फिर मैने पापा को पहले जूस डाल के दिया और मैने खाने के लिए ब्रेड लिए और टी वगेरा पी. और उसके बाद मम्मी पापा और मैं आपस में बेते रहे और बाते वगेरा करने लगे.

शाम के 7:30 बाज गये.

मम्मी – नीलम बेटा अब तुम घर जाओ. मैं तुम्हारे और कार्तिक के लिए रात का खाना बना कर आई हू. खाना गरम कर के दोनो खा लेना.

मैं – ओके मम्मी.

हॉस्पिटल से निकालने से पहले मैने पापा को हग किया. और मैने पापा को एक प्यारी सी स्माइल दी.

मैं – (पापा को हग करते हुए सिंले के साथ) – अपना ख़याल रखना पापा और जल्दी से अब ठीक हो जाओ.

पापा – ओके नीलम बेटा.

फिर मैने मम्मी को भी जाने से पहले हग किया.

मैं (मम्मी से) – ध्यान रखना पापा का. मैं रात को कॉल कर के हाल चल पूछती रहूंगी.

मम्मी – ह्म.. तू टेन्षन मत ले. मैं यहाँ हू. तू वहाँ अपने छोटे भाई का ध्यान रख. वो अकेला घर पर बेता है. उसको जल्दी खाना खिला के टाइम से सुला डियो और तू भी खाना खा के टेन्षन फ्री हो कर सो जइओ.

मैं – ओके मम्मी…

फिर मैने मम्मी पापा दोनो को गुड नाइट विश की और बाइ बोल के वहाँ से चल पड़ी.

फिर मैं हॉस्पिटल से घर आ गयी. मेरे हॉस्पिटल से घर आते ही छोटे भाई ने मुझे हग किया और पापा का हाल चल पूछा.

छोटा भाई भी काफ़ी टेन्षन में परेशन लग रहा था.

छोटा भाई – (परेशानी में) नीलू दीदी.. पापा अब कैसे हैं???

मैने छोटे भाई को हग करते हुए बोला…

मैं – (हग करते हुए) ठीक हैं… अब पहले से काफ़ी आचे हैं. तू टेन्षन मत ले पापा जल्दी ही ठीक हो जाएँगे.

छोटा भाई को पापा की बहुत टेन्षन हो रही थी. इसलिए मैं उसकी टेन्षन दूर करने क लिए उसके साथ तोड़ा हसी मज़ाक करने लगी और फिर थोड़ी देर तक भाई और मैं पापा की बाते करने लगे.

रात के 9:00 बाज गये.

उसके बाद मैने भाई और अपने लिए खाना गर्म किया. फिर छोटे भाई और मैने खाना एक साथ खाया.

फिर मैने घर का का तोड़ा काम किया और रसोई की थोड़ी बहुत सॉफ सफाई करने लगी और छोटा भाई भी इतने त.व देखने लगा.

रात के 11 बाज गये.

मैं काफ़ी तक गयी थी. घर की सॉफ सफाई करने के बाद मैने सोने के लिए अपने कपड़े चेंज किए. मैने अपनी ब्रा और पनटी उतार कर एक खुली नाइट त-शर्ट और लोवर पहन ली. और अपने बेड पर सोने के लिए आ कर बेत गयी.

छोटा भाई अभी तक त.व देख रहा था.

मैं (छोटे भाई से) – चल भाई त.व बंद कर और अब तू भी कपड़े चेंज कर के अपनी नाइट ड्रेस पहन ले और सोजा आराम से जल्दी से.

छोटा भाई – ओके नीलू दीदी…

छोटा भाई भी अपने कपड़े चेंज करके नाइट त-शर्ट और लोवर पहन कर सोने के लिए बेड पर आ गया. और सोने के लिए लेट गया.

फिर मैने मम्मी को कॉल कर के पापा का हाल चल पूछा. और थोड़ी देर तक मम्मी से मेरी कॉल पर बात हुई.

फिर मैं थोड़ी देर बेड पर बेत्ने के बाद आँखे बंद कर के सोने के लिए रेलेक्ष हो कर लेट गयी. थोड़ी देर लेटने के बाद मेरे दिमाग़ में बहुत आने लगा.

जब मैने सोने के लिए आँखे बंद करी तो मेरी आँखों के आयेज मेरे और पापा के बीच आज हॉस्पिटल में जो भी हुआ वोही सब सीन मेरी आँखों के आयेज आने लगे.

पापा का घोड़े जैसा मोटा कला और लंबा लंड बार बार मेरी आँखों के आयेज आ रहा था.

पूरी रात मेरी आँखों के आयेज अपने दोनो हाथो से पापा के लंड को ज़ोर ज़ोर से आयेज पीछे कर के मूठ मरते हुए सब सीन आ रहे थे. उस टाइम ऐसा लग रहा था मानो जैसे वोही सब फिर से मेरी आँखों के आयेज हो रहा हो.

मैने अपनी ज़िंदगी में कभी नही सोचा था की मैं अपने खुद के पापा का लंड देखूँगी.

मैं ब्स यही सोच सोच के हेरान हो रही थी की किसी इंसान का घोड़े जैसा इतना लंबा और मोटा लंड भी हो सकता है और वो भी मेरे खुद के पापा का. क्यूकी मैने कभी इतना मोटा और इतना लंबा लंड पॉर्न मूवीस में भी किसी इंसान का नही देखा था.

मेरे खुद के पापा का इतना मोटा कला और इतना लंबा घोड़े जैसा लंड होगा मैने कभी इमॅजिन नही किया था.

मुझे यकीन ही नही हो रहा था की मैने आज पापा के लंड को देखा और अपने हाथो से उनके लंड को आयेज पीछे कर के उनकी मूठ मारी. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था की ये हुआ क्या है.

और मैं कभी स्प्ने में भी नही सोच सकती थी की मैं अपने पापा का नंगा लंड देखूँगी और अपने दोनो हाथो में ले कर उनके लंड को आयेज पीछे करके उनकी मूठ मारूँगी और मैं अपने हाथो से पापा के लंड को झाड़ कर उनके लंड का पानी निकालूंगी. मैने ये सब कभी अपनी लाइफ में नही सोचा था.

यही सब सोचते सोचते मुझे बहुत जयदा अजीब लगने लगा और मेरे म्न में बहुत से सवाल आने लगे.

क्या एक बाप बेटी आपस में गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड बन सकते हैं? की क्या एक बेटी अपने खुद के बाप का लंड देख सकती है?

क्या बाप का अपनी सग़ी बेटी को नंगा (न्यूड) देखना शी है या क्या बेटी का अपने सगे बाप को कपड़े चेंज करते हुए अपने आप को बिल्कुल नंगा (न्यूड) हो कर दिखना सही है?

क्यूकी पापा और मेरे बीच ये सब हो चुका था इसलिए मेरे दिमाग़ में ऐसे बहुत से सवाल मुझे बहुत परेशन कर रहे थे. और मैं यही सब सोच सोच के बहुत परेशन हो रही थी.

लेकिन कहीं ना कहीं मैं ये भी सोच रही थी की अपनी फॅमिली की खुशी सब्से पहले है. मैं अपने पापा को ऐसे हॉस्पिटल में बीमार नही देख सकती थी.

इसलीते मुझे उनकी खुशी के लिए ये सब करना प्डा. क्यूकी मैं अपनी फॅमिली और अपने पापा से बहुत जयदा प्यार करती हू. मुझे फिर यही लगने लगा था की बस जो होता है आचे के लिए होता है. शायद इशी में मेरी फॅमिली और पापा की खुशी है. और अब सब ठीक हो जाएगा.

यही सब सोचते सोचते कब सुबा के 5 बाज गये और मुझे पता ही नही चला. मेरे दिमाग़ से पूरी रात इतना कुछ चल रहा था की मैं काफ़ी परेशन हो गयी थी. मैं सोने की काफ़ी कोशिश करने लगी और मैं पूरी रात बस करवाते ही बदलती रही.

मई सोचते सोचते छोटे भाई की तरफ अपना मूह कर के सोने लगी की तभी अचंक मेरी नज़र छोटे भाई पर पड़ी. मैं बेड की एक साइड कोने पर सो रही थी और छोटा भाई मेरे पास मेरे सामने बेड के दूसरी साइड कोने पर सो रहा था.

मैने देखा की छोटा भाई मेरी साइड मूह कर के सो रहा था और उसकी तरफ मेरी नज़र पड़ी तो मुझे उस टाइम छोटा भाई सोते हुए बहुत क्यूट और मासूम सा लगने लगा. क्यूकी छोटा भाई उस टाइम एक प्यारे से छोटे बचे की तरह सो रहा था और नींद में स्माइल कर रहा था. शायद छोटा भाई उस वक़्त कोई अछा सपना देख रहा था.

छोटा भाई उस टाइम ऐसे सो रहा था जैसे मानो काफ़ी तका हुआ हो और उसके फेस पर बहुत जयदा क्यूटनेस और मासूमियत झलक रही थी. उशे देखते ही मेरे फेस पर हल्की सी स्माइल आई और एकद्ूम से मेरे दिमाग़ और म्न में जो कुछ भी चल रहा था वो सब शांत हो गया.

छोटे भाई को देख कर मुझे काफ़ी सकूँ सा मिलने लगा. मैं फिर काफ़ी देर तक उसको ही देखती रही. और सोचने लगी की जब से पापा बीमार हुए हैं तब से घर में सब परेशन हैं. इस वजह से छोटे भाई पर कोई ध्यान नही दे पा रहा.

जब से पापा बीमार हुए टीबी से मैं भी अपने छोटे भाई पर, उसकी केर और उसके खाने पीने पर जयदा ध्यान नही दे पा रही थी. छोटा भाई भी पापा की बहुत टेन्षन ले कर परेशन हो रहा था. मम्मी और मैं हॉस्पिटल आते जाते रहते तो छोटा भाई बेचारा घर पर ही अकेले रहता.

मैं आराम से लेट कर छोटे भाई को ही देख कर उसके बारे में ही सोच रही थी की थोड़ी देर में ही उसने अपनी आँखे खोल ली.

(छोटे भाई ने अपनी जैसे ही आँखे खोली मैं हेरान हो गयी की शायद उसको नींद में ही पता चल गया की मैं उसको इतने प्यार से देख रही हू और उसके बारे में सोच कर उशे याद कर रही हू. शायद मैं जयदा ही ध्यान से और प्यार से उशे देख रही थी.)

छोटे भाई ने जैसे ही अपनी आँखे खोली तो छोटे भाई ने मुझे देख लिया की मैं उसकी तरह ही देख रही हू.

छोटा भाई के जागते ही एकद्ूम से मैं और भाई बोले…

मैं – (हेरनी में) ओईईए पागालुउउ तू क्यू जाग गया एकद्ूम से???

छोटा भाई (हल्की नींद में) – नीलू दीदी आप सोए नही अभी तक?

मैं – ब्स सोने ही लगी थी मैं…

छोटा भाई इतना प्यारा लग रहा था की उसकी क्यूटनेस देखते हुए मुझे उसको हग करने का म्न किया. मैने अपने दोनो हाथ खोल कर छोटे भाई को हग का इशारा करते हुए अपने पास आने को कहा और उशे अपने पास बुलाया.

मैं – (दोनो हाथो को खोल कर उशे हग का इशारा करके प्यार से बुलाते हुए) – पागालुउउ मेरे तू क्यू जाग गया. इधर आ मेरे पास आजा. मेरे पास सोजा.

छोटा भाई हल्की नींद में था. वो बेड पर लेते लेते ही आयेज हो कर मेरे पास आ गया. उसके मेरे पास आते ही मैने उसको ज़ोर से टीएट हग किया और अपनी दोनो बाहों में उसको भर लिया और उसके सर पर किस की.

आयेज की कहानी अगले पार्ट मे जल्दी ही आएगी. कॉमेंट ज़रूर करे.

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