भाई और बेहन का ट्रेन का वासना भरा सफ़र

हेलो दोस्तों, मेरा नाम साहिल है. मैं महाराष्ट्रा का रहने वाला हू. मैं अपनी सिटी मेन्षन नही करूँगा फॉर सम प्राइवसी. तो दोस्तों ये मेरी पहली स्टोरी है. उमीद करता हू आप सब को पसंद आएगी. कुछ ग़लती होगी तो सॉरी. ज़्यादा टाइम ना खराब करते हुए स्टोरी पर आते है.

मेरी आगे 23 है. मैं अपनी ग्रॅजुयेशन कंप्लीट कर चुका हू. आज जो कहानी मैं सुनने जेया रहा हू, वो मेरी मूह बोली बेहन के बारे में एक सॅकी घटना है. उसका नाम खुश्बू है (बदला हुआ नाम). वो मेरी ही उमर की है.

वो मेरे कॉलेज में साथ पढ़ती थी. हम दोनो कुछ ही टाइम में आचे दोस्त बन गये. वो मुझे भाई बोलती थी. मैं भी उसे अपनी बेहन ही मानता था. उसके घर आना-जाना भी था, और उसकी सारी फॅमिली ही मुझे जानती थी. उसके घर में उसके पापा-मम्मी, एक बड़ी बेहन, और एक बड़ा भाई भी था.

उसकी बेहन की शादी हो गयी थी, और भाई एक नंबर का लोफर था. ये बात आज से कुछ 1 महीना पहले की है. उसका मुझे मेसेज आया-

खुश्बू: भाई आप से एक काम था.

मैने कहा: हा बोलो ना.

तो उसने बताया: भाई मुझे जॉब के इंटरव्यू के लिए बंगलोरे जाना है. बुत पापा जी की तबीयत खराब है, और भैया भी नही आ रहे है. क्या आप मेरे साथ चल सकते हो?

मैं भी अपने काम से तोड़ा ब्रेक लेना चाहता था, तो मैने सोचा घूमना भी हो जाएगा, और इसका काम भी. मैने हा कर दी. वो खुश हो गयी. उसके अगले दिन मुझे उसका कॉल आया, और उसने कहा-

खुश्बू: मैने घर पे बता दिया की मैं साहिल भाई के साथ जेया रही हू. घर पे सब ने हा कहा.

मैने बोला: ओक.

फिर उसका शाम को कॉल आया: आपकी और मेरी टिकेट्स करवा रहे है भाई. आप घर आ सकते हो क्या?

मैं घर गया. हम बैठे, सब बातें की, और हमारा जाना फिक्स हो गया. हमे अगले हफ्ते जाना था. मैं घर आया और सब काम निपटने लगा. मेरे घर में भी मैने बता दिया, की मैं जेया रहा था. मेरे घर भी किसी को प्राब्लम नही थी क्यूंकी सब जानते थे अब तक मेरे मॅन में उसके लिए कोई ग़लत विचार नही था.

फिर हमारे जाने से एक रात पहले हमारी बात हुई. वो बहुत एग्ज़ाइटेड थी.

उसने कहा: भाई फाइनली आज़ादी के साथ कुछ टाइम बाहर घूमने और एंजाय करने मिलेगा. आपको कोई प्राब्लम तो नही ना?

मैने कहा: मेरी बेहन से मुझे क्या प्राब्लम होगी?

वो ये सुन के खुश हो गयी. तो उसने कहा-

खुश्बू: भाई हम लोग वाहा मज़ा करेंगे, घूमेंगे, पार्टी करेंगे.

मैने हा कहा. फिर हमारी नॉर्मल बात हुई, और हम दोनो गुडनाइट बोल के सो गये. अगले दिन मुझे उसका कॉल आया-

खुश्बू: भाई रात में 9 बजे की है ट्रेन. आप आ जाना.

मैने कहा: ठीक है.

फिर मैं स्टेशन पहुँचा, तो वाहा खुश्बू, उसके पापा, और उसकी मम्मी खड़े थे. मैं गया तो खुश्बू को देखता ही रह गया. उसने ब्लॅक टाइट लोवर और ब्लॅक क्रॉप टॉप पहना था, जिसमे उसका पेट और नाभि दिख रहे थे. वो ऐसे कपड़े पहले भी पहना करती थी, पर मैने कभी ऐसे ध्यान नही दिया. पर आज वो मस्त माल लग रही थी. मैने अंकल आंटी को बाइ कहा, और हम ट्रेन में चढ़ गये.

हमे एसी कोच में एक कपल रूम जो ट्रेन में होता है, वो मिला था. खुश्बू के पापा के पास पैसों की कमी नही है, तो उन्होने ही टिकेट्स करवाई थी. मैं और वो वाहा गये, हमारा समान रखा, और ट्रेन चल पड़ी. वो बहुत खुश थी, की अब 4-5 दिन एंजाय होगा, और साथ ही जॉब भी लग गयी तो मज़े ही मज़े.

हम लोग बातें करने लगे, और मैने खाना नही खाया था. तो मैने उससे कहा.

उसने बोला: मुझे पता था आप इतनी जल्दी नही खाते.

मुझे आदत है 10 के बाद खाना खाने की. तो उसने बाग से तिफ्फ़िं निकाला, और मुझे दिया. मैने देखा तो खुश होके मैने उसके गाल खींच के बोला-

मैं: थॅंक योउ खुश्बू. तू मेरा कितना ख़याल रखती है.

फिर उसने गाल को सहलाते हुए कहा: भाई ऐसे कों थॅंक्स बोलता है? और ख़याल आप भी तो रखते हो मेरा.

तो मैने बोला: फिर कैसे थॅंक्स बोलते है?

उसने कहा: मैं तो गले लग के बोलती हू.

तो मैने उसे हग कर लिया. जब उसे हग किया तो उसके बूब्स मुझे टच हुए. मुझे करेंट लगा हो जैसे और वो भी थोड़ी शॉक हो गयी, कॉज़ आज तक कभी हमने ऐसे नही किया था. मैं आपको उसका बारे में बताना भूल गया.

वो मस्त माल है. गोरा रंग, मस्त फिगर 32-28-34 साइज़ का. उसके बूब्स और गांद मस्त है. कमर तो सूपर हॉट. वो किसी मॉडेल से कम नही. नाउ बॅक तो थे स्टोरी.

मैं और वो थोड़ी देर चुप हो गये. फिर मैने खाना खाना शुरू किया. मेरा लंड खड़ा हो गया था, और में जीन्स पंत में था, तो उसे बार-बार सही कर रहा था. ये उसने देख लिया. फिर मेरा खाना हो गया. हम दोनो बातें कर रहे थे. फिर वो वॉशरूम चली गयी, और वापस आके बोली-

खुश्बू: भाई कितना गंदा वॉशरूम है.

मैने कहा: ट्रेन है, होता ही है. अड्जस्ट कर लो.

फिर मैं अपने फोन में बिज़ी हो गया. वो भी अपने फोन में लग गयी. मैने सोचा चेंज कर लेता हू, इस पंत में तो मेरे लंड की चटनी बन जाएगी. तो मैं वॉशरूम में गया अपने कपड़े लेके. पर वो सच में बहुत ज़्यादा गंदा था. वाहा कपड़े बदलना मतलब सोच लीजिए आप लोग. मैं फिर वापस आके बैठ गया.

उसने पूछा: क्या हुआ भाई? आप चेंज करने गये थे.

तो मैने बोला: खुश्बू योउ अरे रिघ्त, वो बहुत गंदा है. अब चेंज कैसे करूँगा?

फिर उसने कहा: यहा कर लो.

मैने बोला: तुम्हारे सामने?

तो वो बोली: मैं बाहर चली जाती हू.

मैने कहा: नही.

बाहर कुछ लड़के खड़े थे, तो मुझे सही नही लगा.

मैने कहा: ठीक है, मैं यही कर लेता हू.

फिर मैने अपनी शर्ट निकली, और त-शर्ट पहन ली. अब पंत निकली तो मेरा 7 इंच का लंड एक-दूं टाइट था. वो सीट पे लेती हुई थी. सामने ही मिरर था. उसको मेरा लंड दिखा अंडरवेर पर से ही, और वो बिना पालक झपकाए उसे ही देख रही थी.

मुझे भी उसके सामने ऐसे रह के कुछ हो रहा था, जिससे मेरा लंड एक-दूं टाइट हो गया था. वो भी ये देख के हल्की गरम हो रही थी. फिर मैने चेंज किया, और सीट पे बैठ गया. तब मैने उससे कहा-

मैं: तू चेंज नही करेगी?

तो उसने कहा: भाई आक्च्युयली आपसे एक पर्मिशन चाहिए थी.

मैने कहा: यार तू भी ना. अभी जब तक हम लोग साथ है, तू आज़ाद है. जो मॅन में आए कर. बता क्या बात है?

तब उसने कहा: भाई मैं घर पे 3/4 पहन के सोती हू (हाफ पंत).

मैने कहा: तो?

उसने कहा: तो भाई मैं वो पहनु तो कोई प्राब्लम?

मैने कहा: पागल कुछ भी पहन ले तू.

तब उसने कहा: पर पहनु कहा? यहा तो बातरूम का कबाड़ा हो रखा है.

मैने कहा: यही पे, जैसे मैने पहना.

तो वो बोली: भाई आपके सामने?

मैने बोला: मैने भी तो पहने ना.

तो वो बोली: हा.

मैने बोला: मैं फेस उधर करता हू, पहन ले.

तो उसने हा कर दी.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पढ़ने को मिलेगा.

यह कहानी भी पड़े  ननद के पति से अपनी चूत चुदवाने की कथा


error: Content is protected !!