भाभी सेक्स कहानी अब तक-
भाभी मेरे कमरे आ चुकी थी. अब बस उन्हे मेरी बात मानना था. लेकिन वो मानने से इनकार कर रही थी. पर मैं भी कहाँ मानने वाला था. क्यूंकी मुझसे अब रहा नही जेया रहा था. मैं बस मेरी भाभी की छूट लेना चाहता था. अब आयेज-
भाभी ने मेरी रंडी बनने से बिल्कुल माना कर दिया की वो सिर्फ़ अपने पति की ही बीवी बन के रहेंगी. किसी की रंडी नही बनना उन्हे.
भाभी: मैं कोई रंडी नही हू,, और भूल मत मैं सिर्फ़ तेरी भाभी हू, और भाई की बीवी. इससे आयेज कुछ सोचना भी मत. हा, लेकिन मैने जो वादा किया है, उसे मैं निभाने के लिए तैयार हू.
अब मेरे पास कुछ शब्द नही बचे थे बोलने के. यहाँ मैं भाभी से क्या कहता? फिर मैने सोचा ये ऐसे नही मानेगी. इसका कुछ इंतेज़ां करना पड़ेगा. मैने भी उनसे कहा-
मैं: ठीक है, जैसा तुम कहो. मत बनना मेरी रंडी. लेकिन तुम्हे मेरे साथ हर रात सोना पड़ेगा. बोलो मंज़ूर है अब?
भाभी ने सोचते हुए हा कर दी और मैं रेडी था मेरा अगला प्लान लेकर की तू एक बार हा कर, और इस बार तू माना भी नही कर पाएगी.
मैने भाभी से कहा: तो अब क्या मैं कुछ कर सकता हू?
भाभी ने नीचे गार्डेन करके हा कर तो दी. लेकिन अब मैं उन्हे छोड़ने वाला नही था. मैने धीरे से उनको मेरे करीब खींचा, और उनके होंठो पर किस करना चालू कर दिया. मैं मेरी जीभ उनके मूह मैं डाल कर उन्हे चूसने लगा, और उनकी जीभ से अंदर खेलने लगा.
फिर उनके गले तक अपनी जीभ घुसने की कोशिश करता रहा, और अपने मूह से थूक उनके मूह में डालता, और उनको पिलाता रहा. बीच-बीच में उनके बूब्स हल्के से दबाता, और फिर तेज़-तेज़ दबाने लग गया था. अब वो धीरे गरम होने लगी थी.
मैने उनके मूह से जीभ निकाल कर नीचे बैठ गया, और उनकी सारी उठाने को कहा. वो बिना कुछ कहे उठा कर सारी उनकी कमर तक ले गयी. मैं उनके पैर से उनकी जाँघ तक उन्हे चूम कर और गरम करने लगा. फिर मैने उनकी चड्डी पर किस की, और उनकी छूट के नीचे अपनी जीभ से चाटने लगा.
भाभी का एक हाथ सीधे मेरे सर पर आ गया था और वो हल्के से मेरे बालों से खेलने लगी. मैं लगातार उनकी चड्डी चाट कर गीली करता गया, और उनका भी कुछ-कुछ पानी उनकी चड्डी मैं रिस्ता गया.
मैने अपने हाथो से उनकी टाँगों को तोड़ा डोर करा, और उनकी चड्डी उतरी. चड्डी ब्लू कलर की थी, जिसमे से सॉफ उनकी छूट का गीलापन दिख रहा था.
चड्डी उतार दी मैने और उनकी छूट पर हाथ रखा. फिर उनकी छूट के दाने को हल्के-हल्के रगड़ने लगा, जिससे वो अपने आप को संभाल नही पा रही थी, और धीरे से हल्की-हल्की आवाज़े निकल रही थी आ आ आ की.
उनकी मोनिंग इतनी लस्टफुल थी, की मेरा लंड एक-दूं टाइट रोड की तरह हुंकारे भर रहा था. मैं उनी छूट के दाने को आचे से रग़ाद रहा था, ताकि भाभी का मूड बीच में बदले नही, और आचे से गरम हो जाए. वो बार-बार आह… आह… आह… करे जेया रही थी.
फिर मैं मेरा मूह उनकी छूट की तरफ लाया और उनकी छूट की खुश्बू लेने लगा, अपनी नाक लगा कर सूंघने लगा. अगर आपने कभी किसी औरत की छूट सूँघी हो तो पता होगा की कितनी जोश देने वाली खुश्बू आती है. मैने छूट पर नाक लगा दी, और सूंघने लगा. भाभी अब कंट्रोल खो रही थी, और बस मेरे सर में हाथ ही घुमा रही थी. मुझे छूट की खुश्बू और ज़्यादा भाभी के लिए पागल कर रही थी.
मैने अपनी जीभ निकली, और भाभी की छूट पर, हल्के से उनकी गांद के च्छेद के पास से, उनकी छूट के दाने तक नीचे से उपर तक जीभ निकाल के फेर दी. इससे उनकी एक-दूं से कपकपि छ्छूती और वो तर्रा गयी की क्या हुआ. उनकी ज़ोर की अहह… और गहरी साँस निकली.
ऐसा ही मैने बार-बार किया और उनकी छूट का पानी मेरी जीभ पर लगे ही जेया रहा था. वो सीधे मेरे मूह में बह रहा था. मेरी थूक और भाभी की छूट का पानी नीचे गिरने लग गया था. क्यूंकी अब उनकी छूट बहुत पानी निकाल रही थी. अब मैने छूट में जीभ घुसा दी, और भाभी ने मेरे बाल खीच लिए.
उन्होने ह… ह… करी और ज़ोरो से साँस लेने लगी. मेरी जीभ अभी भी उनकी छूट के अंदर ही थी, और मैं अब अंदर बाहर करके उनकी छूट में मेरी जीभ से उनका पानी निकाल रहा था गद्दा खोद-खोद के. क्या बतौ, आज तक इतना मज़ा नही आया था, जितना भाभी की छूट से पानी पीने और निकालने मैं आया हो.
भाभी की आ.. श.. एयेए.. एम्म.. अहम्.. अब बंद होने का नाम नही ले रही थी. मैं समझ गया था की भाभी अब गरम हो चुकी थी, और अब सही मौका था उनकी छूट में मेरा लंड डालने का. फिर मैं उठा और भाभी की आँखों में देखने लगा. उनकी आँखें नशे में हो चुकी थी पूरी, और बहुत कम खुल रही थी.
मैं उनके होंठो को चूमने लगा, और अपनी जीभ उनके मूह मैं डाल कर उनकी छूट के रस्स का स्वाद उनको देता रहा.
मैने कहा: भाभी, तुम्हारी छूट का पानी किसी अमृत से कम नही है. एक बार जो इसे चख ले, वो तुम्हारा दीवाना हो जाए.
और उनको चूमता ही गया, रुका ही नही मैं. मैने भाभी के कान के पास जेया कर उनसे कहा-
मैं: कपड़े निकाल दो.
और चूम लिया उनके कान को. वो और मदहोश और नशे मैं हो आगाई. और कहा-
भाभी: तुम ही निकाल दो जल्दी से.
मैने देर ना करते हुए उनकी सारी पहले उतरी, और वहीं ज़मीन पर फेंक दी. फिर मैने उनके पेटिकोट का नाडा खोला, और वो ज़मीन पर गिर गया.
उसके बाद मैने उन्हे कहा: पीछे घूमओ.
तो वो इतनी जल्दी घूमी, और मैने उनका ब्लाउस भी खोल दिया. अब वो सिर्फ़ मेरे सामने ब्रा और चड्डी मैं थी. वो ब्लू कलर की चड्डी में और क्रीम कलर की ब्रा में इतनी हॉट लग रही थी, की मेरा लंड उनकी छूट में गाड़ने लगा था. मेरा हाथ उनकी कमर पर जैसे ही लगा, वो मुझसे लिपट गयी और मेरा खड़ा लंड उनकी छूट में ज़ोरो से गाड़ने लगा. मुझे मज़ा आ रहा था की चलो आज तो ये मेरे काबू में आ गयी थी, तो आज इसको अपनी रांड़ तो बनौँगा.
मैने भाभी को पीछे घुमा कर उनके कान में कहा: आज तुम मुझे अपना गुलाम बना रही हो. आज के बाद मेरा लंड सिर्फ़ तुम्हारी छूट की और गांद की ही सेवा करेगा. तुम आज से मेरी जान हो.
और उन्हे बेपनाह उनके पुर जिस्म पर चूमने लगा एक-दूं किसी हवासी की तरह. उनको मैने बेड पर झुका दिया, और उनकी गांद पर अपना लंड रगड़ने लगा चड्डी के उपर ही. वो भी फुल आह… हह… एयेए… एम्म… किए जेया रही थी.
मैने अब उनसे कुछ भी नही पूच रहा था, सिर्फ़ अपनी मनमानी किए जेया रहा था. मैने उनकी ब्रा को खोल दिया, और उनके बूब्स मुझे बेड पर झूलते दिखने लगे. इससे मुझे जोश चढ़ने लगा. फिर मैने उन्हे उठाया, और सीधा करके उनके बूब्स चूसने लगा और काटने लगा. इतने सॉफ्ट बूब्स आज तक मैने कहीं नही देखे थे.
भाभी मेरी उनको मुझसे च्छूपा कर रखती थी, की कहीं मैं उनका रस्स ना निचोढ़ लू. मैं उनके बूब्स पर काटने लगा और चूसने लगा. चूसने से उनके बूब्स पर लाल-लाल निशान बना दिए थे मैने, लेकिन उसका उन्हे कोई ध्यान नही था. अछा ही था, अगर पता होता तो वो मुझे निशान बनाने नही देती.
मैं लगातार उनके निपल को काट रहा था और उनकी आह.. अम.. हह.. एम्म.. एयेए सुन रहा था. उन्होने अपने हाथ मेरे गले में डाले और मैं उनके बूब्स चूस्टा रहा और निपल को काट-ते रहा. मैं बार-बार उनकी गर्दन को भी काट-ता रहता. उनकी गर्दन के एक और हल्के से निशान बन चुके थे लाल कलर के. लेकिन अब वो कुछ कर नही पा रही थी. क्यूकी अब उन पर मेरा ज़ोर चल रहा था.
मैने अपने गले से उनके हाथ निकाले, और उन्हे घुमा कर बेड पर ज़ोर से धक्का दिया, ताकि मैं उनकी चड्डी निकाल डू. मैं उनको झुका कर नीचे बैठा और उनकी गांद के पास बैठ गया, और उससे घूरता रहा, और उसे सूंघटा रहा.
उनकी गांद सूंघते हुए मेरे मूह से अचानक काफ़ी कुछ निकल रहा था जैसे, “ओह मेरी जान की ये गांद. मेरी जान की ये गांद आज मेरी हो गयी. कितनी प्यारी गांद है मेरी जान की, मॅन कर रहा है खा जौ इसे.”
किसी ने अगर किसी औरत को बेड पर गिरा कर, उसकी गांद की और बैठ कर, उसकी गांद कभी निहारी हो, तो उसे पता होगा की जब औरत की गांद की और देखते है, तो कितनी हसीन लगती है वो औरत और उसकी गांद. अगर गांद औरत की मोटी हो, तो बहुत ही मज़ा आता है.
भाभी अब खुद को संभाल नही पा रही थी, और साँसे लिए जेया रही थी. मैने हल्के से उनकी चड्डी साइड से हटाई, और देखा उनकी गांद का वो च्छेद जो मुझे मिलने वाला था. भाभी के साँस लेने से वो गांद का च्छेद बार-बार हल्का सा खुल रहा था. मुझे उसे देखने में मज़ा आ रा था.
मैं मेरी उंगली उसी गांद के च्छेद मैं धीरे से डालने लगा, बिना चड्डी उतारे, बस साइड से थोड़ी सी हटाई थी. और उनकी गांद के च्छेद से खेलने लगा. जब भाभी साँस लेती, तो उनका वो च्छेद हल्का सा खुल जाता, और मैने उसी का फ़ायदा उठाया, और जब उन्होने साँस ली तो मैने उस च्छेद में उंगली एक बार में ही घुसा दी, जिससे भाभी एक-दूं से चिल्ला दी-
भाभी: मॅर गयी… एयाया… हाए मेरी गांद.
मैं तुरंत उठा और उनके मूह पर हाथ रख के कहा: चुप हो जेया मेरी जान. अभी बस ज़रा ही घुसाया है. अब आराम से जाएगा.
और वो चुप हो कर वापस लेट गयी. मैं वापस नीचे बैठ गया और इस बार मैने चड्डी को उतार दिया. मैने अपने हाथो से भाभी की गांद फल्लाई और उनका च्छेद देखने लगा. इतना प्यारा च्छेद मैने आज तक नही देखा था.
एक-दूं टाइट च्छेद था और मैं खुश था की ये च्छेद अब मेरा होगा, और इसे रोज़ मैं ही खोलूँगा. मैने उनकी गांद को फैलाए रखा और उनकी साँसों का मज़ा लेने लगा. जब-जब वो साँस लेती, उनकी गांद का वो च्छेद खुल जाता. मैने उनकी गांद फैलाए रखी, और अपनी जीभ उनकी गांद के छेड़ पर रख दी, जिससे भाभी तड़पने लगी.
मैने जीभ से उनकी गांद का च्छेद चाटना शुरू कर दिया, और मैं उनकी गांद चाट-ता रहा. गांद से स्मेल तो आ रही थी, लेकिन जब आप फुल जोश में हो, तो वो स्मेल भी आपको अची लगने लगती है. मैने नीचे से 5-6 बार उनके च्छेद पर जीभ ज़ोरो से फेरी, और उनकी छूट से उनकी टाय्लेट गिरने की मुझे आवाज़ आई. मैने देखा की उनकी टाय्लेट निकल गयी थी, जिससे मेरे रूम की टीले पर उनकी टाय्लेट निकल गयी थी, और कुछ मेरा बेड गीला हो गया था.
मैं रुका नही देख कर, और फिर से मैं उनकी गांद का च्छेद चाटने लगा. फिर मैं तोड़ा उनको बेड से हल्का सा पीछे खिसका दिया, ताकि मैं पीछे से उनकी टाँगों के बीच में आ जौ और उनकी छूट के साथ उनकी गांद का च्छेद भी चाट पौ.
छूट को चाट-ते हुए भी मज़ा आ रहा था, क्यूंकी अभी उनकी टाय्लेट मैने निकाल दी थी उनकी गांद चाट कर. मैं स्लर्प.. स्लर्प… स्लर्प… करके उनकी छूट को चूस रहा था, और खा रहा था. अब वो मुझे कहने लग गयी थी की-
भाभी: खा जेया मेरी इस छूट को. भूल जेया की मैं तेरी भाभी हू. जो तूने कहा था वो बना ले मुझे. बना ले मुझे अपनी रांड़ और कर ले इस रांड़ का हर एक अंग अपने बस में. करता रह, मैं अब से तेरी ही रांड़ बन कर रहूंगी. तू जो बोलेगा वही करूँगी. अब से तू मेरा राजा है मेरे राजा, खा जेया मेरी इस छूट को. मेरी छूट का पानी पी ले पूरा. कर ले अपने मॅन की, मैं तेरी हू अब से. बना ले मुझे अपनी आज.
भाभी: मैं अब तेरी भाभी नही हू, तेरी बीवी बन चुकी हू. कमी रह गयी है बस सुहग्रात और मंगलसूत्रा की. तो वो भी हम करेंगे मेरे राजा. तू मेरा है, आज से और मैं तेरी हू मेरे राजा.
भाभी की ये बात सुन के मैं इतना खुश हो गया था की खुद पर ही गर्व करने लग गया था, की अब भाभी मेरी हो चुकी थी. अब मैं जैसे चाहु वैसे भाभी करेंगी. हमेशा मेरी ही रांड़ बन कर रहेंगी. अब मैं उनसे मेरे बच्चे पैदा करूँगा.
फिर मैं उठा, और भाभी को सीधा किया. उन्होने मेरी आँखों में देखा जो आधी खुली हुई थी, और मैने उनसे पूछा-
मैं: कैसा लगा मेरी जान तुझे मेरा तेरी छूट और गांद का चाटना?
वो नशे में तो थी ही सही, और कहते जेया रही थी: अब से तू मेरा है मेरे राजा. मैं तेरी बीवी बन जौंगी अब. तू मुझे रोज़ छोड़ सकता है. मेरी गांद अब से तेरी हुई. तू ही मेरे आयेज होने वाला बच्चे का बाप होगा मेरे राजा. तू मेरा पति है. अब तू ही मेरी छूट की आग को मिटाएगा. तू भी मुझे अब से तेरी बीवी समझ.
भाभी: तूने आज मुझे वो सुख दिया है जो कभी तेरे भाई ने नही दिया. उसने आज तक मेरी छूट और गांद ऐसे नही छाती, ना खाई, जैसे तूने आज मेरी खाई है. तू कुछ भी कर ले मेरे साथ, मैं माना नही करूँगी तुझे अब से. आजा मेरी जान, लग जेया मेरे गले और बना ले मुझे अपनी.
मैने अब अपना बात करने का अंदाज़ बदल दिया था. मैने कहा-
मैं: जान तूने मुझे तेरी छूट तो खिला दी. अब मेरी भी इस खड़ी तलवार की धार कार दे, ताकि ये आचे से तेरी छूट और गांद को चियर सके.
मैने उसके कंधे पर हाथ रख कर उसे नीचे बिता दिया, और मेरा लंड उसके सामने कर दिया. उसने हल्के हाथो से मेरा लंड पकड़ा, और ज़रा सा उसने पीछे खींचा जिससे मेरा टोपा बाहर आया जो एक-दूं गोरा और लाल था. उसे देखते ही भाभी अपना मूह हल्का सा करीब लाई, और उसे सूंघने लगी.
मेरा लंड पानी छ्चोढ़ रहा था. उसने पहले उसके पास में पड़े ब्लाउस से मेरे लंड से पानी सॉफ किया. फिर ज़रा सा मूह में लिया. लेकिन बस मेरा टोपा ही ले रही थी.
मुझसे रहा नही गया. जब वो मेरा टोपा ले रही थी, तो मैने उसका सर पकड़ के मेरा लंड उसके मूह में धकेल दिया. इससे उसकी आँखें फटत गयी और वो एक-दूं से लंड बाहर निकाल कर खाँसने लगी.
खाँसते हुए उसने मुझे गुस्से से कहा: क्या जान लेगा मेरी? मैं कर रही ना!
मैने कहा: जान तू उपर से कर रही है. मेरा पूरा लंड तेरे मूह में जाने के लिए तड़प रहा है. लेले इसे पूरा, फिर देख तुझे कितना मज़ा आता है.
उसने मेरी बात मानी और हल्के-हल्के से मेरा लंड अपने मूह में घुसने लगी. उसने मेरा लंड आधे से ज़्यादा उसके मूह में ले लिया था, और मुझे वो आनंद सुख मिल रहा था, जिसके लिए मैने इतनी तकलीफ़ उठाई थी. मैने उसके सर पर हाथ रखा और उससे कहा-
मैं: तू रुक जेया जान, मैं तेरे मूह में धक्का लगता हू.
वो रुकी और मैं उसके मूह में अपने लंड से धक्का देने लगा. वो स्लूरप्प्प.. गुपप..गुपप.. गुपप.. एयेए.. हह.. एम्म.. मूह से आवाज़ निकाल रही थी.
आयेज की कहानी अगले पार्ट में.