भाभी की लाइफ की बेस्ट चुदाई

मेरा और सुधा भाभी का सेक्स शुरू हो चुका था. फिर हमने एक-दूसरे को चूसा, और मैने भाभी को नंगी करके तडपया. भाभी झाड़ गयी थी. अब आयेज-

फिर सुधा घूम गयी, और मुझे अपने पास खींच के एक लंबी सी किस करी.

वो बोली: मैने ज़िंदगी में आज तक ऐसा सेक्स कभी भी नही करा. चाची सास सच कह रही थी की तेरे साथ चुदाई का अलग ही मज़ा है.

मैने कहा: भाभी अभी चुदाई तो बाकी है. अभी तो आपको आसमान की सैर करौंगा. बंद कमरे में तारे दिखौँगा. आप बस देखते जाओ.

फिर मैं बेड पे बैठ गया, और सुधा की दोनो टाँगों को खींच कर मेरे अगाल-बगल में रख दी. अब सुधा की छूट बिल्कुल मेरे लंड के पास उससे टच होने लगी. फिर मैने मेरे हाथ आयेज बढ़ाए, और उसके 34″ के बूब्स को एक-एक हाथ में पकड़ के दबाने लगा.

मैं उसके निपल्स को दो उंगलियों के बीच दबाने लगा, जिससे वो फिर धीरे-धीरे गरम होने लगी. उसे इतनी ठंडी में भी तोड़ा-तोड़ा पसीना आने लगा. कुछ देर बूब्स दबाने के बाद मैं खड़ा हुआ, और उसे बेड के किनारे खींच कर मैं ज़मीन पर बैठ गया. फिर उसकी पूरी क्लीन शेव्ड छूट पे हाथ घूमने लगा, जो पहले से ही पानी छ्चोढ़ चुकी थी.

सुधा बेड के किनारे अपनी टाँगें मोड़ कर लेती हुई थी, और मैं नीचे बैठ कर उसकी जांघों को चाटने लगा. जांघों को चाटने के बाद उसकी छूट के पास मूह ले जेया कर अपने दोनो हाथो से उसकी छूट को तोड़ा फैलाया, तो सुधा के मूह से निकला-

सुधा: सस्शह आअहह मौलिक ऐसा मत करो. अब मुझसे रहा नही जेया रहा आअहह.

अब उसकी फैली हुई छूट के बिल्कुल पास मूह ले जेया कर मैने उसकी छूट पे तोड़ा थूका. मेरी थूक उसकी छूट पर पड़ते ही वो तोड़ा उछाल गयी. जैसे ही उसने छूट उपर की, मैने तुरंत अपना मूह सुधा की छूट में घुसा दिया, और पूरी जीभ बाहर निकाल कर चाटने लगा.

इससे सुधा पूरी मदहोश होने लगी, और मेरे बालों को पकड़ के अपनी छूट में दबाने लगी. साथ-साथ नीचे से छूट भी उछाल रही थी. थोड़ी देर ऐसे ही छूट चाटने के बाद मैने मूह हटाया, और खड़ा हुआ. अब सुधा पूरी हाँफ रही थी, और मुझे देख-देख कर मुस्कुरा रही थी.

वो बोली: अब चाटना बंद करो प्लीज़, और जल्दी से मुझे छोड़ो. तुम्हारा मोटा लंड और उसे भी बड़ा ये टोपा मेरी छूट में घुसाओ प्लीज़.

लेकिन मेरी छूट चाटने की तमन्ना अभी पूरी नही हुई थी. मेरी आदत है की जब तक मैं छूट चाटने से संतुष्ट नही होता, मैं छूट चाट-ते ही रहता हू. फिर चाहे 2 मिनिट लगे या 20 मिनिट, मुझे फराक नही पड़ता.

मैं बोला: रुक तो जेया भोंसड़ी वाली. आज तुझे ऐसा छोड़ूँगा की मरते दूं तक मेरी चुदाई याद रखेगी, और अपनी सहेलियों को मेरी चुदाई का किस्सा सुनती रहेगी.

फिर मैने मेरा मूह खोला, और पूरी ज़ुबान बाहर निकली. उसके बाद सुधा की गांद के च्छेद के आजू-बाजू घूमने लगा. अब सुधा पूरी की पूरी पागला गयी, और सिसकारियाँ भरने लगी-

सुधा: आह ऊओ एम्म्म. मौलिक.

अब लॅडीस चुड़वते हुए मेरा नामे लेती है, तो मैं बहुत खुश हो जाता हू. फिर गांद के च्छेद में ज़ुबान लगा के उपर की और गया छूट तक. उसके बाद छूट से ज़ुबान हटा कर फिर गांद के च्छेद पे लगाई. फिर छूट तक गया. ऐसा बार-बार करने पर सुधा फिर चिल्लाने लगी, और मेरे बाल पकड़ के उछाल-उछाल के झाड़ गयी. वो हाँफने लगी.

अब उसने मेरे बाल पकड़ के मुझे अपनी और खींचा, और ज़ोर-ज़ोर से किस करने लगी. वो मेरा लंड दबाने लगी. कुछ देर किस करने के बाद सुधा ने मुझे गले लगाया, और मेरा लंड सहलाने लगी.

अब सुधा बोली: आज तक कभी तेरे भाई का लंड मैने मूह में नही लिया. लेकिन तूने मुझे इतना खुश करा, की अब तेरा लंड मुझे चूसना ही पड़ेगा. मैं जानती हू तुम मर्दों को लंड चुसवाना अछा लगता है.

मैं बोला: कोई बात नही. मेरी आदत ही है की पहले मैं औरत को खुश करता हू. फिर अगर औरत मेरा लंड चूज़ तो ठीक, ना चूज़ तो भी ठीक. लेकिन मैं छूट ज़रूर चूस्टा हू.

तो सुधा बोली: अभी तक कितनी औरतों को अपने नीचे सुलाया है?

मैं बोला: लिस्ट लंबी है. अभी आप खाली मज़ा लो.

अब सुधा उल्टी लाते गयी, और मैं बेड के पास खड़ा हो गया. सुधा ने पहले मेरा लंड पकड़ा, और लंड के पास मूह ले जेया कर सूंघने लगी.

फिर वो बोली: काफ़ी मादक खुश्बू आ रही है तेरे लोड से आहह…

फिर एक-दो बार मेरा लंड चूम के सीधा अपने मूह में ले लिया. अभी तो सिर्फ़ टोपा ही अंदर गया था, तो वो अंदर से ही जीभ घूमने लगी. इससे मुझे काफ़ी अछा लगा. अब सुधा धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करने लगी.

थोड़ी ही देर में आचे से लंड चूसने लगी, और मैं तोड़ा नीचे झुक कर उसकी गोल-गोल गांद को दोनो हाथो से दबाने लगा, और थप्पड़ मारने लगा. मुझे भी ऐसा करने में काफ़ी मज़ा आने लगा. 4-5 मिनिट लंड चूसने के बाद सुधा ने लंड बाहर निकाला और खड़ी हो गयी बेड पे घुटनो के बाल.

फिर मेरे गले में अपनी बाहें लपेट ली, और मुझे किस करने लगी. हम दोनो ने काफ़ी देर तक एक-दूसरे को ऐसे छाता, और मैने उसकी गांद को आचे से दबाया. फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर बिस्तर पे फेंक दिया, और वो बोली-

सुधा: अब मैं तेरे लंड की सवारी करूँगी.

मैं नीचे लेता और सुधा मेरे उपर आके, मेरा लंड पकड़ के, अपनी छूट पे सेट करके, धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी. फिर साथ में आअहह सस्शह आअहह ऊओ मौलिक. मौलिक तेरा टोपा बहुत बड़ा है आअहह ऊऊहह ऐसा बोलने लगी.

अब धीरे-धीरे करके वो पूरा लंड अंदर ले ली. उसकी छूट इतनी गरम थी की मेरा लोड्‍ा भी पूरा गरम हो गया. अंदर जाते ही अब वो नीचे झुकी, और मेरे होंठो पर हमला बोल दिया. फिर उपर-नीचे होने लगी. मैं भी नीचे से लंड उपर-नीचे करने लगा, जिससे हमारी जांघें एक-दूसरे से टकराने लगी और फूच फूच की आवाज़े आने लगी.

मैं उसकी पीठ को सहला रहा था, और थोड़े-थोड़े नाख़ून गाड़ा रहा था. इससे वो और उत्तेजित होने लगी, और मेरे होंठ काटने लगी, ज़ोर-ज़ोर से छुड़वाने लगी. फिर उसने मेरे होंठ अलग किए, और बोली-

सुधा: मेरी गांद दब्ाओ ज़ोर-ज़ोर से मौलिक. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है आअहह.

मैं भी मेरे दोनो हाथ उसकी गांद को पकड़ के फैलने लगा, और दबाने लगा. कुछ 7-8 मिनिट ऐसे ही छोड़ने के बाद वो रुक गयी, और हाँफने लगी.

मैने पूछा: क्या हुआ?

तब वो लंबी-लंबी साँसे लेते हुए बोली: मैं तक गयी. अब तुम मुझे छोड़ो घोड़ी बना के. चाची सास बोल रही थी पीछे से बहुत मस्त छोड़ता है तू.

अब सुधा बेड के किनारे आई, और घोड़ी बन गयी. वाउ यार, क्या मस्त गांद दिख रही थी उसकी. देख कर ही लग रहा था की सीधा गांद में घुसा डू. लेकिन मैने साबरा रखा. फिर लंड पे तोड़ा थूक लगा के, पीछे से भाभी की छूट पे रख के, एक झटके में घुसा दिया.

तो भाभी बोल पड़ी: आहह भोंसड़ी के, आहह मौलिक आअहह.

अब मैं ज़ोर-ज़ोर से उसे पीछे से छोड़ने लगा खड़े-खड़े, और मेरी आदत के अनुसार मेरे नाख़ून उसके रूई जैसे कुल्हों पे और पूरी पीठ पे घूमने लगा. इससे वो और उत्तेजित हो जाती और पीछे हॅट-हॅट के मेरे झटकों का साथ देती. कभी मैं अपने दोनो हाथ नीचे ले जेया कर उसके बड़े-बड़े झूलते हुए बूब्स को पकड़ के दबाता, तो कभी वो नीचे से हाथ घुसा के मेरे गोट्तों को दबाती और सहलाती.

हम दोनो को ऐसे चुदाई करते हुए कुछ और 8-9 मिनिट हो गये थे. अब वो झड़ने वाली थी, तो वो रुक गयी, और लंड बाहर निकाल लिया. फिर सीधा लेट गयी.

सुधा: अब सही तरीके से अपने इंडियन स्टाइल में ताबड़तोड़ मुझे छोड़, और मेरा पानी निकाल दे.

वो अपनी दोनो टाँगें फैला के पीठ के बाल लेट गयी, और मुझे उसके उपर चढ़ा के किस करने लगी. फिर एक हाथ से लंड पकड़ के अपनी छूट में घुसा दिया. अब मैने मेन्डक की पोज़िशन बनाई अपनी दोनो टाँगें मोड़ कर, और उसकी पीठ के नीचे हाथ डाल कर उनके कंधो को कस्स के पकड़ लिया.

फिर सुधा बोली: अब ज़ोर-ज़ोर से मेरी छूट मार. तेरे तगड़े लोड ने जन्नत की सैर करवा दी है आज. इतना मज़ा कभी नही आया.

अब मैने अपनी रफ़्तार फुल स्पीड में चालू करी, और ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगा. उसके बूब्स मेरी छ्चाटी में दबे हुए थे, और छूट पे लंड घपा-घाप ज़ोर-ज़ोर से छोड़े जेया रहा था. मैं उसकी गर्दन को चाट रहा था, जिससे वो चिल्लाने लगी और आहह मौलिक आहहह मौलिक ऐसे ही आहह स्शशहस्शह आअहह ऐसे ही करने लगी.

कुछ ही पल में उसने मुझे जाकड़ लिया, और अपनी छूट में से पानी का फव्वारा छ्चोढ़ दिया. उसने मुझे इतना ज़ोर से जाकड़ के रखा था, और छूट से लंड को दबा के रखा था, जिससे मेरा पानी भी निकालने को हो गया. मेरे झटकों से वो समझ गयी की मेरा निकालने वाला था, तो सुधा बोल पड़ी-

सुधा: रूको मत, चालू ही रखो, और अंदर ही निकाल दो. बहुत मज़ा आया.

अब मैने रफ़्तार और तेज़ कर दी, और कुछ ही पल में लगातार झटकों की बारिश के साथ-साथ मेरे लोड ने गरम-गरम वीर्या की बारिश सुधा की छूट में ही कर दी. फिर दोनो हाँफने लगे. कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे, और एक-दूसरे को चाटने लगे चूमने लगे.

10 मिनिट तक ऐसे ही पड़े रहे, और दोनो की आँख लग गयी. तभी मेरे बच्चे का फोन आया तो मेरी आँख खुली, और सुधा भी उठ गयी. मेरा बच्चा पूच रहा था की पापा कहाँ चले गये, और कब तक आओगे?

मैं बोला: घर पे आया था कुछ काम से, आधे घंटे बाद अवँगा.

इतना बोल के मैने फोन रख दिया. अब सुधा बोली: आधा घंटा क्यूँ बोला? हम तो 5 मिनिट में पार्टी प्लॉट पहुँच जाएँगे.

तब मैं मुस्कुराया और वो समझ गयी और बोली: अर्रे यार मौलिक, अब लगता है तू मेरी गांद मारने वाला है.

मैने हा में सिर हिलाया, और फिर उसको लंड चुस्वाया, और 20 मिनिट अलग-अलग स्टाइल में उसकी गांद मारी. उस दिन सुधा पूरी की पूरी संतुष्ट हो कर मेरे घर से निकली और बोली-

सुधा: अगर फिर कभी मुलाकात हुई, या तू मेरे गाओं आया, तो ज़रूर तुज़से चुड़ूँगी, और मेरी फ्रेंड्स को भी तुझसे चड़वौनगी.

फिर पार्टी प्लॉट पहुँच कर हम अलग अलग हो गये. दोस्तों कैसी लगी मेरी आप बीती, अपने कीमती कॉमेंट ज़रूर करे.

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