भाभी की चुदाई के चक्कर में चचेरी बहन को पकड़ लिया-1

भाभी की चुदाई के चक्कर में चचेरी बहन को पकड़ लिया-1

(Bhabhi Ki Chudai Ke Chakkar Me Chacheri Bahan Ko Pakad Liya- Part 1)

Bhabhi Ki Chudai Ke Chakkar Me Chacheri Bahan Ko Pakad Liya- Part 1

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम महेश कुमार है, मैं सरकारी नौकरी करता हूँ। मैं आपको पहले भी बता चुका हूँ कि मेरी सभी कहानियाँ काल्पनिक हैं जिनका किसी से भी कोई सम्बन्ध नहीं है अगर होता भी है तो यह मात्र एक संयोग ही होगा।

मेरी पिछली कहानी में आपने मेरे और रेखा भाभी के सम्बन्धों के बारे में तो पढ़ा, अब उसके आगे का वाकिया लिख रहा हूँ उम्मीद है यह कहानी भी आपको पसन्द आयेगी।

मैं डेढ़ महीने से ज्यादा गाँव में रहा और रेखा भाभी के साथ काफी मजा किया। मेरी छुट्टियाँ समाप्त हो गई थी इसलिए मैं वापस अपने घर आ गया।
मैं घर आया तब तक मेरे भैया छुट्टियाँ समाप्त करके अपनी ड्यूटी पर जा चुके थे इसलिये अब मैं अपनी पायल भाभी के साथ उनके कमरे में सोने लगा और मेरे व भाभी के शारीरिक सम्बन्ध बनने फिर से चालू हो गये।

मुझे गाँव से आये हुए अभी दस दिन ही हुए थे कि एक दिन शाम को जब मैं क्रिकेट खेलकर घर आया तो देखा कि ड्राईंगरूम में रामेसर चाचाजी बैठे हुए थे। उनको देखकर मैं थोड़ा सा डर गया कि कहीं उनको मेरे और रेखा भाभी के बारे में पता तो नहीं चल गया और वो उसी की शिकायत करने के लिये यहाँ आये हों?

खैर मैं उनके चरण स्पर्श करके सीधा अन्दर चला गया और जब अन्दर गया तो देखा की सुमन (रामेसर चाचा जी की बेटी) भी आई हुई थी, बाद में मुझे पता चला कि सुमन को नौकरी के लिये कोई परीक्षा देनी है, उसी के लिये रामेसर चाचाजी सुमन को शहर लेकर आये हैं।

सुमन की परीक्षा अगले दिन थी इसलिये वो दोनों उस रात हमारे घर पर ही रहे। अगले दिन परीक्षा के बाद वो जाना चाहते थे मगर मेरे मम्मी पापा सुमन को हमारे घर कुछ दिन रुकने के लिये कहने लगे।

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वैसे तो सुमन की छुट्टियाँ ही चल रही थी मगर वो अपने कपड़े लेकर नहीं आई थी इसलिए वो मना करने लगी।
इसके लिये मेरी मम्मी ने उनहें पायल भाभी के कपड़े पहनने के लिये बताया और आखिरकार सुमन रुकने के लिये मान गई। सुमन को हमारे घर पर ही छोड़कर रामेसर चाचाजी वापस गाँव चले गये।

सुमन के रूकने से मेरे मम्मी पापा तो खुश थे मगर इसका खामियाजा मुझे भुगतना पड़ा क्योंकि सुमन मेरी भाभी के साथ उनके कमरे में सोने लगी और मुझे फिर से ड्राईंगरूम में बिस्तर लगाना पड़ा जिससे मेरे और मेरी भाभी के शारीरिक सम्बन्ध होने बन्द हो गये, हमारे सम्बन्ध बस चूमने चाटने और लिपटने तक ही सीमित होकर रह गये थे, और वो भी तभी होता जब भाभी रात को घर का मुख्य दरवाजा बन्द करने के लिये ड्राईंगरूम से होकर आती जाती थी।

हमारे घर का मुख्य दरवाजा मेरी भाभी ही खोलती और बन्द करती थी क्योंकि रात को भाभी ही घर के काम निपटा कर सबसे आखिर में सोती और सुबह जब दूधवाला आता तो भाभी ही दूध लेने के लिये सबसे पहले उठकर दरवाजा खोलती थी, इसके लिये उन्हें ड्राईंगरूम से होकर गुजरना पड़ता था।

मैं उन्हें कभी कभी वहीं पर पकड़ लेता था मगर अब तो भाभी उसके लिये भी मना करने लगी क्योंकि एक बार जब मैं भाभी को ड्राईंगरूम में पकड़ कर चूम रहा था तो अचानक से सुमन आ गई, उसने हमे देख लिया था। इसके बारे में सुमन ने किसी से कुछ कहा तो नहीं मगर उसको हमारे सम्बन्धों का शक हो गया था इसलिये वो अब हम दोनों पर नजर रखने लगी, मगर वो जाहिर ऐसा करती जैसे कि उसे कुछ पता ही नहीं हो।

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मुझे सुमन से चिढ़ सी होने लगी थी, मैं सोचता रहता कि आखिर यह कब हमारे घर से जायेगी और इसी तरह हफ्ता भर गुजर गया।

एक बार रात में बिजली नहीं थी क्योंकि शाम को काफी जोरो से आँधी और बारिश होने के कारण लगभग पूरे शहर की ही बिजली गुल थी। बिजली नहीं होने के कारण सभी ने जल्दी ही खाना खा लिया। मेरे मम्मी पापा तो खाना खाते ही सो गये और मेरी भाभी व सुमन घर के काम निपटाने लगी।

बिजली के बिना पूरे घर में अन्धेरा था, बस मोमबत्ती की रोशनी से ही काम चल रहा था, मैं मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई तो कर नहीं सकता था, इसलिये खाना खाने के बाद ऐसे ही ड्राईंगरूम में लेट रहा था और भाभी के बारे में ही सोच रहा था।

तभी ड्राईंगरूम के अन्दर कोई आया और बाहर की तरफ चला गया। ड्राईंगरूम में इतना अन्धेरा था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था बस दोनों तरफ के दरवाजे ही बाहर से आने वाली थोड़ी सी रोशनी की वजह से अन्धेरे में दिख रहे थे।

मैं समझ गया कि भाभी घर का मुख्य दरवाजा बन्द करने के लिये गई हैं, तभी मेरे शैतानी दिमाग में एक योजना आई, मैं सोचने लगा कि आज चारों तरफ अन्धेरा है और ड्राईंगरूम में तो कुछ भी दिखाई देना मुश्किल है इसलिये क्यों ना आज अन्धेरे का फायदा उठा लिया जाये।

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