भाभी की बच्चे की लालसा

हेलो दोस्तो, कैसे हो आप सब! मेरा नाम रोहित है और मेरी उमर 22 साल है. मैं दिखने मे ठीक ठाक हूँ पर मेरी पर्सनालिटी काफ़ी अच्छी है. जिसे मैं ही नही बल्कि सारी दुनिया कहती है. मेरी पर्सनालिटी के चलते मेरा लंड भी काफ़ी अच्छा है. वो कम से कम 9 इंच लंबा है और 3 इंच मोटा है जिसे देखते ही लड़किया पागल हो जाती थी.

अब लंड इतना बड़ा हो तो कौन पागल नही होगा. इसे देखते ही हर कोई लड़की इसे अपनी चूत मे लेना चाहेगी. और ये सब जान कर मुझे भी काफ़ी खुशी मिलती है की मेरे लंड की कितनी लड़किया दीवानी है. पर हर किसी के साथ फिज़िकल रीलेशन बनाना भी अपने आप मे काफ़ी बड़ा रिस्क है.

दोस्तो मैने अपने बारे मे थोड़ा कुछ बता ही दिया है पर अब मैं अपनी कहानी पर आपको ले चलता हूँ. ये मेरी पहली कहानी है तो आपको पड़ने मे काफ़ी मज़ा भी आएगा और अगर कोई ग़लती हो जाए या कोई बात अच्छी ना लगी हो तो मुझे माफ़ कर देना.

चलिए मैं अब आपको कहानी पर ले चलता हूँ.

ये कहानी आज से 3 महीने पहले की है. इस कहानी मे मेरी एक बहोत ही प्यारी भाभी है जिनका नाम सुप्रिया है और वो दिखने मे काफ़ी सुंदर है. उनका फिगर बहोत ही मस्त है जिसे देखते ही मैं उन पर पहली नज़र मे ही लट्टू हो गया था. सुप्रिया भाभी का फिगर 34-32-36 है जिसे देखते ही लंड पागल हो जाता है.

वैसे तो मैं अपनी सुप्रिया भाभी पर पहले दिन से ही लट्टू हो रखा हूँ. जब से वो शादी करके घर पर आई थी. मेरा मन तो तभी से उन्हे अपना बनाने को करता था पर उस समये भाभी के साथ मेरी बनती तो थी पर वो थोड़ी गुस्से वाली थी इसलिए कही ना कही चुप ही रह जाता था.

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वैसे भी मैं अपनी भाभी का सगा दामाद नही हूँ इसलिए मैं अब अपनी स्टडी के बीच मे उनके घर गया. वाहा पर पहोच कर मुझे सारे देख कर काफ़ी खुश हुए. मेरी चाची और चाचा ने तो मुझे गले से ही लगा लिया.

उधर भइया भी मुझे देख कर काफ़ी खुश थे पर हैरानी की बात तो ये थी की भाभी ने जैसे ही मुझे देखा तो उनकी नज़र मे मुझे कुछ बदलाव सा नज़र आया.

मैं पूरी फैमिली के साथ बैठ कर बाते करने लग गया और ऐसे ही हम थोड़ी देर बाद शॉपिंग करने के लिए चले गये. भइया और मैने खूब मस्ती भी करी और खूब फोटोस भी ली. क्योकि यही सब फोटोस ही तो अच्छे टाइम की याद दिलाती है.

फिर हम घर आ गये और ऐसे ही खुशी खुशी 2 दिन निकल गये. तभी एक दिन अचानक मेरी दीदी का फोन आया जहा वो अपने ससुराल के साथ रहती है. उनकी बाते सुन कर मेरी चाची, चाचा और भइया एकदम से वाहा के लिए तैयार होने लग गये और मुझे भाभी के पास अकेला छोड़ कर चले गये.

उन्होने मुझे भाभी के पास इसलिए छोड़ा था ताकि मैं भाभी के साथ रह कर उनका ख्याल रख पाऊ. अब मैं भी अपनी भाभी के पास रुक गया. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं और भाभी अब एक दूसरे के साथ बैठ कर टीवी देखने लग गये. हम दोनो घर पर अकेले ही थे तो कुछ समझ मे भी नही आ रहा था की आख़िर करे तो क्या करे. फिर भाभी मेरे और अपने लिए चाय बना कर ले आई और साथ मे कुछ स्नॅक्स भी बना लाई.

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वैसे मैं आपको बता दू की मेरी भाभी खाना बहोत ही ज़्यादा अच्छा बनाती है. अब हम एक साथ बैठ कर चाय पीने लग गये. बातो बातो मे भाभी ने मुझसे मेरी स्टडी लाइफ के बारे मे पूछा तो मैने भी बता दिया की अच्छी चल रही है.

ऐसे ही अब दिन मे हमने एक साथ लंच किया और रात मे एक साथ डिनर किया. फिर जब सोने की बारी आई तो भाभी से मैने कहा की आप अंदर रूम मे सो जाओ मैं बाहर सो जाऊंगा.

तब मुझे भाभी ने जो कहा वो मुझे कुछ अजीब सा लगा. क्योकि भाभी का बात करने का ढंग भी बिल्कुल अलग था. उन्होने मुझसे कहा की क्यो ना हम एक ही कमरे मे सो जाए.

फिर मैं उनकी बात भी मान ली और कहा की ठीक है भाभी पर आप उप्पर सो जाना और मैं नीचे सो जाऊंगा. तभी भाभी बोली की धत तेरी की जब इतना बड़ा बेड है तो तुम नीचे क्यो सोओगे. मैं भी उनकी बात का मान रखते हुए बेड के एक किनारे पर सो गया.

भाभी ने आज नाइटी डाल रखी थी जिसमे वो बहोत ही ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी. हम करीब 11 बजे तक लेट गये और मैं तो सो भी गया.

फिर 2 बजे करीब मुझे कुछ एहेसास हुआ की मेरे लंड पर किसी का हाथ है. मैने जब हल्की सी आँख खोली तो देखा की भाभी मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी.

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