भाभी की सेक्सी बहन ने मेरा लंड लिया

मैंने कहा, क्या हुआ?

वो बोली: मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूँ!

मैं: हा बोलो ना!

किंजल ने मेरे हाथो को जोर से दबाते हुए बोला, मैं तुम्हारे साथ रहकर कुछ अलग फिल करने लगी हूँ!

ये कहते ही उसने मेरे हाथ पर किस दी और मैं तो ख़ुशी के मार जैसे पागल हो गया. और मुझे शायद उसकी तरफ से सिग्नल मिल गया था की हम कुछ कर सकते हे!

फिर मैंने उसके होंठो को अपन करीब किया और चूसने लग गया. उधर किंजल भी मेरे रसीले होंठो का सवाद ले रही थी और बड़े मजे से हम दोनों करीब पांच मिनिट तक एक दुसरे को किस करते रहे.

उतने में हमारा ऑर्डर भी आ गया और हमने दोसा ऑर्डर किया था वो हम खाने लगे. बहोत ही मस्त लग रहा था. और फिर हमने खा कर कोफ़ी पी और फिर वहां से घर आ गए. घर पर भी हमें जब भी मौका मिलता था हम एक दुसरे के होंठो को चूस लेते थे और एक दुसरे के जिस्म को छू भी लेते थे जिस से हमारे अंदर गर्मी आ जाती थी. पर हमें अभी तक ऐसा नहीं मिल रहा था!

पर कहते हे न की ऊपर वाले के पास देर हे लेकिन अंधेर नहीं हे. हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ क्यूंकि की भैया के किसी ऑफिसर की पार्टी में भैया और भाभी को जाना था. भैया तो थे नहीं इसलिए भाभी अकेली ही चली गई पार्टी में. उन्होंने मुझे कहा लेकिन मैंने कहा की मेरा आमन्त्रण नहीं हे फिर मैं नहीं आ सकता हूँ और किंजल ने भी वही कहा अपनी बहन को.

भाभी के जाने के बाद तो मैं और मेरी ये नयी माल किंजल ही घर पर थे. मैं भाभी के जाने के बाद किचन में किंजल के पास चला गया जो हम दोनों के लिए खाना बना रही थी. मैंने उसे पीछे से ही पकड़ लिया और उसकी गर्दन के ऊपर किस करते हुए चाटने लगा.

किंजल: अरे बाबा खाना तो बना लेने तो फिर आज भूखे सोना हे!

मैं खड़े लंड को ले के बहार गया और टीवी देखने लगा. करीब आधे घंटे के बाद किंजल खाना ले आई और हम दोनों ने एक साथ बैठ कर खाना खाया और फिर अपने कमरे में आकर लेट गया और किंजल बर्तन धो कर मेरे लिए दूध ले के आई और मेरे पास खड़ी हो के अपने हाथ से मुझे दूध पिलाने लगी.

किंजल मेरी आँखों में देख रही थी और मैंने उसके होंठो को अपने होंठो में भर लिए और चूसने लगा. फिर हम डॉन ने अपने कपडे उतारे और मैं तो उसके चिकने बदन को उसके बूब्स को देखता ही रह गया.

अब किंजल ने एकदम से मेरे लंड को हाथो में ले लिया और वो उसे चूसने लगी. मेरा तो कब खुद पर से कंट्रोल चला गया वो भी पता नहीं चला. किंजल कस कस के मेरे लंड को मजे से चूस रही थी. फिर मैंने किंजल को बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत के पास आ कर उसकी चूत को पहले तो मैं निहारने लगा और फिर मैंने एक पप्पी दे दी उसके ऊपर. किंजल सिहर उठी और उसने आह निकाली. और फिर मैंने किंजल की चूत को खोल के चाटना चालू कर दिया. अब किंजल ने मुझे ऊपर किया और मैं उसके होंठो को चूस के फिर उसके बूब्स को मुहं में भर के चूसने लगा. किंजल की चूत पर लंड लग रहा था जिसको किंजल ने पकड़ के चूत पर सेट किया और मुझे धक्का लगाने को कहा. मैंने उसकी बात मान ली और धप्प से थोडा लंड अन्दर हो गया और उस समय किंजल के चहरे के ऊपर दर्द नजर आने लगा.

मैं: दर्द हो रहा हे क्या?

किंजल: इतना दर्द तो होता ही हे, मैं सहन कर लुंगी तुम लंड डालो अंदर.

मैंने किंजल के कंधे के ऊपर किस दे दी और उसकी चूत में एक और धक्का लगा दिया अपने लंड का और पूरा लंड उसके अन्दर कर दिया. किंजल ने जरा भी चीख नहीं निकाली लेकिन उसकी आँखों में पानी भर आया था और वो बार बार अपने होंठो को दांतों के तले दबा के दर्द का इजहार बिना कुछ बोले ही कर रही थी.

मैंने लंड को बहार निकाल लिया क्यूंकि मुझसे किंजल का दर्द देखा नहीं जा रहा था पर किंजल तो बहार ही नहीं निकालने दिया और बोली, पागल दर्द तो होगा ना तुम करते रहो.

मैं उसकी सेक्सी टाईट चूत को चोदता रहा और कुछ देर बाद उसें भी अपनी कमर को हिलाना चालू कर दिया जिससे मैं समझ गया की किंजल को भी मजा आ रहा था. सच ही कहते हे लोग की दुनिया की सारी ख़ुशी एक तरफ और चुदाई की ख़ुशी एक तरफ!

हम दोनों करीब 10 मिनिट तक चोदते रहे एक दुसरे को. फिर एकदम से किंजल का शरीर अकड सा गया और उसकी चूत में से पानी निकलने लगा. और वो ढीली भी पड़ गई थ. पर मेरी तो अभी हिम्मत थी की मैं उसे कुछ देर और चोदुं! इसलिए मैं उसकी चूत को अपने लोडे से ठोकता ही रहा.

किंजल बोली, जतिन मैं घोड़ी बन जाऊं?

मैंने कहा, हां वो ठीक रहेगा.

किंजल अपने चूतड़ उठा के मेरे लिए घोड़ी बन गई. मैंने पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डाला और उसको चोदने लगा. वो भी अपनी गांड को पीछे मार रही थी मेरे लंड के ऊपर ऊपर और उसके मुहं से अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह याआअ आह्ह्ह्ह अह्ह्ह उईईइ अह्ह्ह्ह निकल रहा था. मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी गांड को सहलाया और उसने भी मुझे देख के आँख मारी.

मेरे हाथ उसके बूब्स और निपल्स को छूने लगे थे. तभी मेरे बदन में भी झटका लगा. खून के साथ वीर्य दौड़ने लगा जैसे नसों के अन्दर. और मैंने अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह कर के लंड को चूत से बहार निकाल के उसका पानी किंजल की गांड और उसकी कमर के उपर ही छोड़ दिया. मैं निढाल हो के उसके ऊपर ही गीर गया. और हम दोनों एक दुसरे को हाथो से सहला रहे थे.

भाभी के आने से पहले हमने एक बार फिर से चुदाई की. और अब की तो नियन ने मेरी गोदी में चढ़ के मेरे लंड को लिया और खूब मरवाई अपनी.

किंजल के एक्साम्स ख़तम हुए फिर भी वो हंसिका भाभी को कह के कुछ दिन यहाँ रुक गई. मैं उसे होटल में ले जाता था घुमाने के बहाने से और चोद लेता था. फिर वो चली गई!

अक्सर वो अपनी बहन को मिलने आ जाया करती थी. या यूँ कहे की मेरा लंड लेने ही आती थी वो यहाँ पर. फिर भैया की बदली हो गई और किंजल से मेल मिलाप फंक्शनस में ही होता था. दो साल पहले उसकी शादी हो गई. लेकिन आज भी उसको याद करता हूँ तो बीवी के घर में होने के बावजूद भी उसके नाम की मुठ मारनी पड़ती हे मुझे.

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