बेटे ने सुनी माँ के सम्बन्धो की दास्तान

फिर थोड़ी देर तक हम दोनों नंगे लेते रहे. फिर माँ ब्लाउज पेटीकोट पहन के खाना बनाने चली गयी. क्युकी खाना खाने का टाइम होने वाला था और मोनू भी घर आने वाला था स्कूल से.

मैं कमरे में लेते-लेते भो लगा के देख रहा था और अपने लुंड को फिर हिला रहा था. मुझे बचपन से लुंड हिलना और बीएड पर उलटे लेट के लुंड रगड़ के पानी निकलना बहुत पसंद था.

मैंने शायद ही कभी हाथ से हिला के पानी निकला हो. तो मैं उस टाइम भी उल्टा लेट गया और लुंड को रगड़ने लगा. तभी माँ ने मुझे आँगन से ही देख लिया. फिर वो बोली-

माँ: कितनी बार मन किया है की लुंड को मत रगड़ा कर. तभी तेरा टेढ़ा हो गया है.

फिर मैंने कहा: मम्मी मुझे बहुत मज़ा आता है ये करने में.

ये सुन कर माँ हस्ते हुए किचन में चली गयी. थोड़ी देर बाद मोनू भी घर आ गया और हम खाना खा के लेट गए. फिर शाम को पापा की कॉल आयी. मम्मी ने फ़ोन उठाया.

पापा: हां मंजू कैसी हो?

मम्मी: ठीक हु अभी खाना खा के लेते है.

पापा: और अंकु मोनू क्या कर रहे है?

मम्मी: सो रहे है. अंकु टीवी देख रहा है.

पापा: और बंसरी नहीं आया आज?

मम्मी: नहीं आज अभी कोई नहीं आया. कामवाली को भी कही जाना था तो वो भी नहीं आयी. और कल्लू भी नहीं आया. तुम बताओ तुम कब आओगे?

पापा: अरे मेरी ट्रेनिंग ख़तम होते ही आता हु.

माँ: हां जल्दी आओ. कामवाली तुम्हे बहुत याद कर रही है. वो बोलती है “भैया को बुलाओ. बहुत दिनों से भैया के लुंड का रस नहीं पिया”.

पापा: ाचा? तो उसने तुम्हे सब कुछ बता रखा है की कैसे उसको छोड़ता हु?

माँ: हां और क्या. उसने तो ये भी बताया है की “भले मैं भैया का पानी न पीयू पर भैया मेरी छूट का पानी हमेशा चाट जाते है”.

पापा: अरे हां पर अब लुंड काम ही देर तक टिक पता है. तुम बताओ कैसी चुदाई चल रही है?

माँ: हां अभी सुबह से अंकु ही छोड़ रहा था.

पापा: मज़ा तो अत है न उसका लुंड लेने में?

माँ: हां आता तो है पर इसने मुठ मार-मार के टेढ़ा कर लिया है. और इसका लुंड मोटा तो है पर ५ इंच तक ही खड़ा होता है.

पापा: अरे अभी वो १८ साल का ही तो है. अभी १-२ साल में जवानी बढ़ जाएगी तो और मज़ा आएगा.

माँ: हां पर कल्लू तो १९ साल का है. उसकी आगे के हिसाब से उसका लुंड काफी ाचा ख़ासा बड़ा और लम्बा है. ऊपर से वो इतना खुद कला है की उसका लुंड तो उससे भी बहुत कला है.

पापा: और मोनू कैसा है?

माँ: मोनू भी सीख रहा है. दूध खूब पीटा है मेरे और कामवाली के. और अभी तो उसका भी छोटा है तो सही से उसकी लुल्ली छूट में जाती नहीं है.

पापा: कोई बात नहीं. उसका भी थोड़ा और बड़ा होने दो. फिर खूब छोड़ना उससे भी.

माँ: अचे एक बात बताओ तुम्हे पता था की अंकल(नाना के दोस्त) मुझे छोड़ा करते थे?

पापा: नहीं. पर जब उसका इतना आना-जाना बढ़ गया था इसलिए मुझे शक हुआ. मैंने उससे कई बार अकेले में पूछना भी चाहा पर वो इतना हरामी निकला की उसने अपने मुँह से कभी बताया नहीं.

माँ: सच तुमने उनसे पुछा था?

पापा: है मंजू पुछा था. क्युकी वो एक बड़ा हरामी आदमी है. वो हर लड़की और औरत को ऐसे ही बेहला फुसला के छोड़ता था. वो तुम्हे गिफ्ट ला-ला कर देता था. तो क्या समझ नहीं आता था. पर जब मैंने तुमसे कई बार पुछा तो तुम गुस्सा जाती थी और बाते बनती थी.

पापा: फिर मुझे लगा की हो सकता है मैं ही गलत हु. लेकिन फिर एक बार की बात है. एक बार मैं यहाँ घर के सामने से किसी ऑफिस के काम से निकल रहा था. फिर मैं तम्बाकू लेने के लिए रुका था. तब मैंने अपने घर में उसकी बुलेट देखि थी और मैं समझ गया था की कुछ गड़बड़ थी.

पापा: मैंने सीधे उस टाइम पीसीओ (नोट:उस टाइम फ़ोन नहीं हुआ करते थे. पर उन नाना के पास मोबाइल था) गया और उसको फ़ोन लगाया. उसने कहा की वो तो काम से दुसरे शहर में था. ये सुन कर मैं समझ गया की कुछ तो गड़बड़ ज़रूर थी.

पापा: फिर मैंने उसको एक दिन बाहर जा कर खूब धमकाया. मैंने उसको मेरी बीवी से दूर रहने के लिए बोलै. मैंने उसको कहा की वो यहाँ ना आया करे.

पर फिर भी उसने तुमसे चुदाई वाली बात नहीं बताई मुझे.

पापा: शायद उसी टाइम से तुमको भी यही लगने लगा था की मुझे सब पता था. और उसका भी आना काम हो गया था. लेकिन मैं जान-बूझ कर तुमसे पूछता था की अब वो तुम्हारे अंकल घर नहीं आते. तो तुम मन कर देती थी.

पापा: वो मुझे कई बार शादी में भी मिला. पर मैं बस उसको नमस्ते करता था. लेकिन जब तुम माईके गयी थी तब हमारी कामवाली ने तुम्हारे और बंसरी के बारे में बताया.

पापा: तभी तुमने अपने सारे राज़ खोले मेरे सामने. पर मैं तुम पे विश्वास करता था की तुम ऐसा नहीं कर सकती. इसलिए तुम्हारी परवाह की वजह से मैंने उसका आना बंद करवा दिया था.

ये सब फ़ोन पे सुन के माँ रोने लगी.

पापा: अरे रो क्यों रही हो अब? जो होना था वो हो गया चुप हो जाओ.

माँ: नहीं रो नहीं रही हु मैं. तुम्हे कुछ और भी बताना चाहती हु जो मैंने तुमसे छुपाया है.

पापा: और क्या छुपाया है इसके अलावा?

मैं वही लेता हुआ था. और माँ की बात सुन के मैं खुद हैरान हो गया. मुझे लगा ऐसा क्या रह गया था जो मुझे भी नहीं पता था. फिर मैं माँ की तरफ देखने लगा.

माँ पापा से: अंकल ने मुझे सब बताते थे की तुमने उनसे बात की मेरे साथ चुदाई की. वो ये भी बताते थे की तुम दोनों कब और कहा मिल जाते थे आमने सामने और तुम दोनों मुझे लेके खूब लड़ते भी थे.

पापा: ाचा वो तुम्हे सब बताता था?

माँ: हां और ३-४ बार वो मुझे अपने साथ अपने दोस्त के यहाँ भी लेके गए थे. वो मुझे वह छुड़वाने लेके गए थे. अंकल के ड्राइवर अजय से
भी २-३ बार चूड़ी हु और फिर एक बार आखरी बार अंकल यहाँ घर भी आये थे मुझे छोड़ने.

माँ: और वो मेरी और अंकल की आखरी मुलाकात थी. अंकु को पहले से सब पता था. मैंने उसको तुमसे कुछ भी बताने को मन किया हुआ था. पर हां अंकु को भी अंकल के दोस्त के साथ और अजय ड्राइवर के साथ मेरी चुदाई का भी नहीं पता. जो की मैं आज तुम दोनों को बता रही हु.

मैं वही पे ये सब सुन रहा था. मैं ही मैं में मैंने सोचा की मेरी माँ तो सच में बहुत बड़ी रंडी निकली जो घर के बाहर जा कर भी चुदवाती थी.

फर पापा कुछ देर रुक के बोले: अरे मंजू ये सब तुमने क्या किया?

माँ: मैंने जान के नहीं किया. उस टाइम मुझे कुछ समझ नहीं अत था जब मैं अंकल के साथ होती थी.

पापा: कुछ समझ नहीं आता था मतलब? तुम खुल के सब बताओ.

माँ: तुम पहले घर आ जाओ ट्रेनिंग से. फिर सब बताउंगी और अब फ़ोन रखो. बहुत बात हो गयी है. अभी रूम में आये होंगे तो कुछ खा लो.

पापा: नहीं तुम आराम से बात करो. सब कुछ बताओ मुझे.

अब माँ की कहानी माँ की ज़ुबानी से जो वो पापा को फ़ोन पे बता रही थी. और मैं वही लेता हुआ सुन रहा था. आपको इनमे से कुछ बाते पहले से ही पता होंगी पर ये बाते पूरी सुनिए मेरी माँ की ज़ुबानी.

माँ: अंकल आते तो पहले से थे हमारे यहाँ पर. जब हम लोगो के यहाँ बटवारा हो गया था. सब लोगो का हिस्सा अलग हो गया था. हम सिरते हो गए थे. हमारी शादी को भी ८ साल हो गए थे.

जब अंकल ज़्यादा आने लगे और हमारे यहाँ ही ज़्यादा आने लगे. तुमसे भी उनकी अछि बनती थी. दारु शराब मीट चिकन साथ में खाते थे. अब वो दरोगा तो थे ही और ३ साल थे रिटायरमेंट को.

मुझे उनसे बात करना बहुत ाचा लगता था. वो जब भी आते कुछ न कुछ लेके आते थे खाने को. उन्होंने मुझे रिंग भी दी. हम साथ में ड्राइंग रूम में बैठ के गाने सुनते थे.

मैं उनके लिए खाना बनती थी. टीवी पे भी मूवीज देखते थे. तब मेरे मैं में ऐसा कुछ नहीं था. फिर एक बार वो मेरे लिए नेट वाला हाफ स्लीव का सूट लाये थे. मैंने जब वो सूट पहना और बाहर आयी तो वो देख के हैरान हो गए.

बहुत तारीफ करि मेरी उन्होंने. फिर मैं जब एक बार किचन में खाना बना रही थी तब वो मेरे पीछे आके खड़े हो गए और मुझे पीछे से पकड़ लिया. तब मैं घबरा गयी थी. मैंने कहा-

मैं: अंकल क्या कर रहे हो?

वो बोले: कुछ नहीं बस ऐसे ही मैं कर गया.

फिर उन्होंने वही पर मुझे अपनी पॉकेट से एक डायमंड का नेकलेस निकाल के दिया. मैं तो चौंक गयी की अंकल इतना महंगा नेकलेस लेके आये थे. फिर मैं बोली-

मैं: मैं नहीं ले सकती.

अंकल बोले: ले लो मंजू ये सब तुम्हारे लिए लाया हु. तुम इस ब्लू सूट में इतनी अछि लग रही हो. अगर ये नेकलेस भी पहन लोगी तो तुम और भी खूबसूरत लगोगी.

अंकल: ये नेकलेस इतना महंगा है शायद ही तुम्हारे पति ने तुम्हे इतना महंगा लाके दिया हो कभी.

मैं: हां बोल तो सच रहे हो आप. इतना महंगा तो कभी नहीं लाये अंकु के पापा.

फिर अंकल ने बिना देरी किये वो नेकलेस मुझे मेरे गले में पहना दिया और वो भी खुद. उसके बाद उन्होंने मेरे गाल पे एक पप्पी भी दे दी.

जैसे ही अंकल के होंठ मेरे गाल पे लगे मेरी तो रूह ही कांप गयी. मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे क्युकी वो पप्पी धीरे से नहीं बड़ी तेज़ ली थी.

पर मैं कुछ बोली नहीं. क्युकी मैंने भी सोचा चलो इतने से क्या होता है. पर मैंने अंकल से वादा किया था की उस नेकलेस के बारे में वो किसी को नहीं बताएँगे.

बस मैंने तुम्हे उस टाइम सूट के बारे में बताया था. अगर तुम्हे याद हो तो.

फिर वो अक्सर तुम्हारे ऑफिस जाने के बाद आ आया करते थे. तब तक हमारी कामवाली भी चली जाती थी और अंकु भी स्कूल में होता था. तब वो आया करते थे.

एक बार की बात है. अंकल नाईट undefined करके घर गए थे. पर वह आंटी से कुछ कहा सुनी हो गयी. तो वो तो दोपहर में ११-१२ के बीच यहाँ कार से अजय ड्राइवर के साथ आये थे.

उन्होंने खूब शराब पी हुई थी और न-जाने किसको-किसको गाली दे रहे थे. वो आंटी को भी गालिया दे रहे थे. मैंने सबसे पहले उन्हें बैठने को बोलै और खाना बना के लायी.

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