बेटे ने मा के साथ सुहागरात मनाई

हाई दोस्तों मेरा नाम विकास हे और मैं बंगलौर में रहता हूँ. आज मैं आप को अपनी  के साथ पहले अनुभव की बात करने के लिए आया हूँ. हम दोनों ने खूब एन्जॉय किया था.

सब से पहले मैं अपनी माँ के बारे में बता दूँ. उसकी एज 40 साल हे और हम लोग एक ट्रेडिशनल फेमली से हैं. मेरा माँ के बूब्स का साइज़ 34D हे. मैं अभी 19 साल का हूँ और मेरे लंड का साइज़ 7 इंच हे. मेरी माँ से मेरी बात हो रही थी एक दिन. हम दोनों मेरी स्टडी के लिए बातें कर रहे थे. माँ ने कहा की अगर तूने अब की एग्जाम में अच्छे नम्बर ला के दिखाए तो मैं तुम्हारी डिमांड मान लुंगी.

और मुझे खुद को और मेरे पेरेंट्स को बड़ा आश्चर्य हुआ जब मेरे नम्बर्स सब की एक्स्पेक्टेशन से जयादा आये. रिजल्ट वाली रात ही मेरे मम्मी पापा दोनों कमरे में आये मेरे और पापा बोले: बेटा तुमने इस एग्जाम में अछे मार्क्स ला के अपनी लाइफ के एक पडाव को अच्छी तरह से पार कर लिया हे. मैं बहुत ही खुश हूँ इस से. बोलो क्या चाहिए तुम को? (सच कहूँ मैं माँ बेटी की चुदाई स्टोरी इतनी पढता था की मैं माँ को ही चोदना चाहता था.)

मैंने कहा, पापा अभी कुछ नहीं मैं आप को सोच के बताऊँ प्लीज़?

पापा: ठीक हे तुम दो दिन में सोच के बताओ, चाहो तो अपने दोस्तों के साथ डिसकस कर लो.

मैं: हां पापा थेंक यु!

सच कहूँ तो मैं अपना इरादा किसी और के साथ नहीं लेकिन मेरी माँ के साथ ही डिसकस करना चाहता था. अगले दिन पापा ऑफिस गए तो घर के अंदर मैं और मेरी माँ ही थे. तभी मैं माँ के कमरे में गया. वो मुझे देख के बोली, आओ बेटा, मुझे पता हे की तुमको कुछ चाहिए वो सोच लिया हे तुमने लेकिन तुमने अपने पापा को नहीं बोला. शायद कुछ पर्सनल हे इसलिए पापा को कहने में झिझक रहे थे तुम.

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मैंने कहा: मैं आप को बता तो दूंगा लेकिन आप प्रोमिस करो की आप गुस्सा नहीं करोगी जरा भी.

माँ बोली: बेटा तू कह के तो देख मैं तेरी हर विश पूरी करने के लिए रेडी ही हूँ!

ये सुन के मेरे इरादे और भी पुख्ता हो गए अपनी हॉट माँ को चोदने के लिए.

मैंने कहा: माँ प्लीज़ गुस्सा मत करना लेकिन मैं आप के साथ सोना चाहता हूँ एक रात के लिए. मैं आप के साथ सेक्स करना चाहता हु!

और फिर जैसे कोई भी माँ करती वैसे मेरी माँ एकदम से गुस्से हो गई. मेरे मुहं के ऊपर ताड़ ताड़ दो तमाचे उसने ताबड़तोड़ लगा दिए. उसने कहा तूम अपनी माँ के साथ इतनी घटिया बात कर रहे हो. ये कह के वो कमरे से निकल गई!

उस दिन माँ ने पूरा दिन मेरे साथ जरा भी बात नहीं की. पापा को बोलने के लिए अभी भी एक दिन और बचा था. मैं उसके पास जा के उस से मांफी मांगू उतनी भी हिम्मत नहीं थी. लेकिन फिर रात को मेरी माँ मेरे कमरे में आई. वो मेरे से बोली.

माँ: सोरी बेटा मोर्निंग में मैं तुम्हे थप्पड़ मार दिए.

,मैं: नहीं माँ वो नोर्मल बिहेवियर ही था. आप ने जो किया वो कोई भी माँ करती.

माँ: नहीं बेटा मैं कुछ ज्यादा ही गुस्सा कर गई थी तुम्हारे साथ. मुझे फिर याद आया की मैंने ही तुम को कहा था की अच्छे मार्क्स आये तो तुम जो मांगोगे वो मैं दूंगी. और अब मैंने तुम्हारे एक बात सोच रखी हे.

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मैं: और वो क्या हैं?

माँ: मैंने एक बार सिर्फ एक बार तुम्हारे साथ सोने का डिसाइड किया हैं.

ये सुन के तो मैं एकदम से एक्साइट हो गया. मैं जैसे आसमान को छू रहा था. और फिर हमने वो दिन भी फिक्स कर लिया. मेरे पापा ने दुसरे दिन पूछा तो मैंने कहा आप बिजनेश टूर पर जा के आओगे तब बोलूँगा. मैंने पापा को कहा अभी मैं थोडा कन्फ्यूज हूँ. पापा बोले ठीक हे. और फिर अगले दिन वो अपनी कुछ दिनों की बिजनेश ट्रिप पर भी चले गए.

और अब मेरी बारी थी. दोपहर में माँ मेरे कमरे में आई और बोली चलो बेटा तुम्हारे इरादों को हकीकत में बदल लेते हे.मैंने कहा मम्मी मेरा तो पहली बार ही हे इसलिए हम सुहागरात के जैसे ही करेंगे. माँ ने मेरे गाल पर हाथ मार के कहा तुम बड़े नोटी हो और वो मान गई.

मैं अपने कमरे को सजा रहा था माँ के साथ सुहागरात के लिए. बड़ी गुड फिलिंग हो रही थी मुझे. मैंने एक धोती और सफ़ेद शर्ट पहनी हुई थी. मम्मी ने तो अलमारी से अपनी सुहागरात वाली साडी ही निकाली. वो हाथ में दूध का ग्लास ले के कमरे में आई जैसा की हिंदी फिल्मो में दिखाते हे. उसके चहरे के ऊपर स्माइल थी. और उसके बदन के मरोड़ो को देख के मेरा मन नादिनदिन्न्ना हो रहा था. मम्मी ने मुझे दूध पिलाया और फिर हम दोनों एक दुसरे को किस करने लगे.

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