नादान बेटे के साथ अपनी कामुकता शांत की

bete ke sath kamukta shant ki”तुम ऐसा कुच्छ नही करोगे सिद्धू” आशा फोन पर चिल्लाई

“मैं ऐसा ही करूँगा मोम” दूसरी तरफ से सिद्धू की बेचैन आवाज़ आई “अगर मैं आपके साथ नही जी सकता तो फिर जीने का कोई मतलब ही नही बनता”

“तुम मेरे साथ ही तो जी रहे हो मेरे बच्चे” आशा का जैसे रोना छूट पड़ा “मैं माँ हूँ तेरी, हमेशा तेरे साथ हूँ, ज़िंदगी भर”

“नही मोम” सिद्धू ज़िद पर अड़ा हुआ था “आप जानती हैं मैं क्या कह रहा हूँ. माँ बेटे का रिश्ता तो हमने उसी रात ख़तम कर दिया था जब पहली बार मैं और आप एक मर्द और औरत की तरह साथ थे”

“चुप हो जा सिद्धू. प्लीज़ …. मैं हाथ जोड़ती हूँ तेरे” आशा ने पानी से भरी आँखें बंद करते हुए कहा

“नही माँ. अब चुप नही हो सकता मैं. 1 महीने से घुट घुट कर जी रहा हूँ पर अब और नही. अब नही जी पाऊँगा मैं”

और तब पहली बार आशा को एहसास हुआ के वो लड़का कितना सीरीयस था. वो एमोशनल होकर यूँ ही बकवास नही कर रहा था. उसकी आवाज़ में शामिल संजीदगी पहली बार आशा पर ज़ाहिर हुई.

“नही सिद्धू. तुझे मेरी कसम है. कुच्छ उल्टा सीधा मत करना” आशा ने कहा

“बहुत देर हो चुकी माँ. बहुत देर हो चुकी”

“कोई देर नही हुई सिद्धू. मेरी बात सुन ….” आशा ने समझाने की कोशिश की

“आप मेरी बात सुनो माँ” सिद्धू ने बात बीच में ही काट दी “क्या चाहती हो आप? मैं तो दोनो तरफ से पिस रहा हूँ ना. अगर मैं सब भूल कर फिर आपके साथ माँ बेटे का रिश्ता बना लूँ तो सारी ज़िंदगी अपने आप से आँख नही मिला पाऊँगा के मैने अपनी माँ के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाया था. दूसरी तरफ से मैं अगर ये सोचूँ के मैं कितना चाहता हूँ आपको, कितना तरसता हूँ आपके लिए, एक बेटे की तरह नही पर एक मर्द की तरह तो भी नुकसान मेरा ही है क्यूंकी आपका कहना है के हम एक नही हो सकते”

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“तूँ अच्छी तरह जानता है के हम क्यूँ एक नही हो सकते. समझाया था मैने तुझे उस दिन” आशा लगभग चिल्लाति हुई बोली

“क्या सिर्फ़ वही एक वजह है?” सिद्धू ने पुछा

“तू मेरा बेटा है और मैं तेरी माँ. इससे बड़ी वजह और क्या हो सकती है?” आशा इस बार चिल्ला ही पड़ी “पाप है ये. घोर पाप”

“तो ठीक है माँ. फिर एक पाप और कर लेने दो मुझे. इस तरह से ज़िंदा नही रह सकता मैं. बस अब बर्दाश्त नही होता”

“सिद्धू सुन. कुच्छ उल्टा सीधा नही करना. मेरी कसम है तुझे. अपने साथ तूने कुच्छ भी किया तो …..” इससे पहले के आशा बात पूरी करती, सिद्धू फोन काट चुका था.

आशा ने फ़ौरन दोबारा फोन मिलाया, सिद्धार्थ का सेल पर वो स्विच्ड ऑफ था.

उसने फ़ौरन अपने घर का लॅंडलाइन नंबर मिलाया, पर बिज़ी टोन आती रही. यानी किसी ने रिसीवर को उठाकर एक तरफ रखा हुआ था.

वो बेचैन हो उठी. समझ नही आया के क्या करे.

एक बार को उसने किसी और को फोन करने की सोची पर फिर ये ख्याल आते ही रुक गयी के क्या कहेगी? के उसका बेटा स्यूयिसाइड कर रहा है, जाके रोको उसको? क्यूँ करना चाहता है स्यूयिसाइड?

झल्लाकर वो जल्दी से उठी और अपना बेग उठाकर होटेल रूम से बाहर निकली. सामान पॅक करने का टाइम था नही इसलिए रूम से चेक आउट नही किया. लॉबी मे आकर उसने अपनी गाड़ी निकाली और तेज़ी से अपने घर की तरफ भगा दी.

“हे भगवान !!!! प्लीज़ सिद्धू. कुच्छ करना मत बेटा” दिल ही दिल में वो सोचती जा रही थी.

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वो उस रात एक किटी पार्टी में थी जब पहली बार उसका और उसके बेटे सिद्धार्थ का रिश्ता बदल गया था.

हर महीने वो और उसकी कुच्छ दोस्त मिलकर एक किटी पार्टी रखते थे जहाँ पर सिर्फ़ औरतें होती है, और वो सब आशा की अच्छी दोस्त थी.

पार्टी के दौरान शराब बहुत ही आम बात थी. पार्टी में मौजूद सारी औरतें पीती थी और उसके बाद पॉर्न मूवीस और गंदी बातों का का सिलसिला चलता. जब वहाँ मौजूद औरतें अपना मुँह खोलती, तो शरम
के सारे पर्दे हटाकर बात करती.

अपने ग्रूप में एक आशा को छ्चोड़कर सब औरतों के बाय्फरेंड्स थे, ज़्यादातर जवान लड़के और वहाँ सब अपने एक्सपीरियेन्सस शेर करती. कौन किस पोज़ में किससे चुदी, कब चुदी, कितनी देर चुदी, कैसे चुदी, सब खुलकर बताया जाता. पार्टी में चॅलेंज था के कौन सी औरत एक साथ कितने मर्दों को झेल सकती है और उसका रेकॉर्ड फिलहाल मिसेज़. कुलकर्णी के नाम था जिन्होने एक साथ एक ही बिस्तर पर चार मर्दों से चुदवाया था. प्रूफ के तौर पर उन्होने अपनी खुद की बनाई हुई एक फिल्म लाकर दिखाई थी जिसमें वो अपने बेडरूम में चार चार के साथ अकेली भिड़ी पड़ी थी.

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