बहन को लोवे स्टोरी कर परदा फ़ाश करने की कहानी

हेलो दोस्तों, आज मैं अपनी लाइफ की पहली स्टोरी लिखने जेया रहा हू, और वो भी एक सॅकी कहानी के उपर. सच काहु तो मुझे कुछ भी आइडिया नही है की मैं लिख पौँगा या नही. क्यूंकी ये मेरी पहली कहानी है. लेकिन अपने से कोशिश और आप सब का प्यार मिला तो ज़रूर लिख सकते है.

अब मैं सबसे पहले अपनी फॅमिली के बारे में बता देता हू. मेरी फॅमिली में मेरे पापा जो की जॉब करते है, मम्मी जो की हाउसवाइफ है, और घर पे ही रहती है, मेरी 4 बहने है जिसमे से 3 बहनो की शादी हो चुकी है, 2 भाई और 1 भाभी है, और हमारी फॅमिली बिहार से आती है तो हमारा पूरा परिवार बिहार में ही रहता है.

4 बहनो में सबसे बड़ी बेहन पूनम जिनकी शादी हो चुकी है, और उनके 2 बच्चे भी है. 2न्ड वाली बेहन ऋतु उनकी भी शादी हो चुकी है. उनके शादी को 6 साल हुए है, बुत अभी तक उनके शरीर से कोई बच्चा नही है, और अभी काई जगह दिखाया जेया रहा है.

फिर मेरी 3र्ड दीदी सोनाली है. वो भी शादी-शुदा है, बुत जब ये घटना घाटी थी, तब वो कुवारि थी. और सबसे छ्होटी बेहन प्रीति, जो की अभी पढ़ाई कर रही है. मेरी एक भाभी भी है, सिमरन, 3 साल हुए उनकी शादी को.

अब आपका समय ना लेते हुए मैं सीधे स्टोरी पे आता हू.

ये कहानी मेरी 3र्ड नंबर की बेहन की है जिसकी अभी आगे 26 की है, और अभी उसकी शादी हो चुकी है. लेकिन ये कहानी उस समय की है जब सोनाली की शादी अभी नही हुई थी. और वो तब 21 साल की थी.

सोनाली की हाइट 5’2″ है, और देखने में भी बहुत सुंदर है. इतनी सुंदर, की गाओं के सारे लड़के लट्तू बने फिरते है. यहा तक की स्कूल में भी जब थी तो वाहा पे भी लड़के उनके पीछे पड़े रहते थे. बुत ये किसी को भाव तक नही देती थी.

सोनाली एक परिवारिक माहौल में पाली बढ़ी है. मेरे घर पे आज भी जीन्स पहनना अलो नही है. आप जानते ही हो गाओं की लड़कियों को जल्दी ये छ्होटे कपड़े या जीन्स नही पहनने देते.

मेरे घर की कुछ ही दूरी पे मेरे चाचा का घर है. उनके घर से बहुत ही अछा रिश्ता है, और आना-जाना लगा रहता है. मेरे घर के सभी लोग जाते है. कोई काम पड़ता है तो उनके घर के भी सभी लोग आते रहते है.

एक-दूं से परिवार जैसा है. चाचा का 1 लड़का है, उसका नामे है रोहन. रोहन भी दिखने में अछा है. उसकी हाइट 5’8″ है, और दिखने में भी काफ़ी हॅंडसम है. मेरी उससे काफ़ी अची दोस्ती है. हम भाइयों की तरह रहते है. लगता ही नही की जैसे वो मेरा भाई ना हो.

सोनाली अभी पढ़ाई कर रही थी, तो उनका कोचैंग आना-जाना होता रहता था. मेरे घर से 10 केयेम डोर सोनाली की कोचैंग थी, तो सोनाली बस का उसे करती थी कोचैंग आने-जाने के लिए.

बस में अक्सर भीड़ रहती थी. कभी-कभी तो खड़े होने की भी जगह नही रहती थी. फिर भी सोनाली कैसे भी करके 8 बजे वाली बस पकड़ लेती थी, चाहे कितनी भी भीड़ हो. क्यूंकी उसके बाद सीधे 10 बजे बस थी, और ऐसे में उनकी कोचैंग छूट जाती थी.

एक दिन मैं सोनाली के साथ ही जेया रहा था. मुझे भी टाउन जाना था. हम दोनो बस में चढ़ने के लिए ही धक्का-मुक्की करने लगे. फिर काफ़ी धक्का-मुक्की करने के बाद हुमको बस में चढ़ने की जगह मिल गयी, और हम खड़े हो कर के ही जेया रहे थे.

बस में काफ़ी भीड़ थी. मैं तो मुस्किल से खड़ा हुआ था. उसी भीड़ में सोनाली भी खड़ी थी. उनके चारों तरफ लड़के और मर्द ही थे, जो सोनाली के पुर शरीर से चिपके हुए थे. और इतनी भीड़ थी की मुझे कुछ दिख भी नही रहा था, क्यूंकी मेरे 6 लोग के बाद सोनाली खड़ी थी.

ये देख कर के मुझे भी अफ़सोस लग रहा था, की सोनाली कितनी मेहनत से जाती थी अपनी पढ़ाई करने. मुझे तो आज 1 दिन ही ऐसे जाना था. वो तो रोज़ ही जाती थी बस से. तो उनको कैसा लगता होगा. लेकिन हम कर भी क्या सकते थे. पैसा भी उतना नही था की अलग से स्कूटी दिलवा दे सोनाली को.

हमारी लाइफ बड़ी ही अची चल रही थी. दिन भी मज़े में कट्ट रहे थे, की एक ही दिन मेरा मेरी अपनी दीदी सोनाली को देखने का नज़रिया ही बदल गया.

पापा छुट्टी से घर आए हुए थे, और पूरी फॅमिली एक साथ थी. रात का समय था. हम सब एक साथ ही खाना खा रहे थे. मेरे बगल में ही सोनाली बैठी हुई थी.

खाना खाते समय ही सोनाली किचन से रोटी लाने गयी, और तभी मेरे पास में रखे हुए उसके मोबाइल पे एक मेसेज आया. हालाकी की वो व्हातसपप चला रही थी, तो ऐसे ही व्हातसपप खुला ही छ्चोढ़ के वो रोटी लेने चली गयी थी.

जब मेसेज आया और मैने देखा, तो लिखा हुआ था “आज बिके पे बैठ के कैसा लगा?” मैं तो बस इतना ही मेसेज पढ़ के शॉक्ड हो गया. वैसे वाहा पे हर कोई बैठा था, तो मेरी व्हातसपप ओपन करके पढ़ने की हिम्मत नही हुई, की पता नही क्या खुल जाए. इसलिए मैने सोनाली का मोबाइल टच भी नही किया. तब तक सोनाली रोटी लेकर के आ गयी थी, और हम सब खाने में लगे हुए थे.

उस रात मेरे मॅन में यही चल रहा था, की किसका मेसेज हो सकता था. सोनाली तो आज बस से गयी थी कोचैंग. लेकिन फिर मेसेज में बिके कहा से आ गयी. सोनाली किसकी बिके पे बैठी थी. और अगर किसी से लिफ्ट भी ली थी, तो सोनाली का नंबर उसको कैसे मिल गया. और सोनाली को मेसेज करके क्यूँ पूच रहा था की बिके पे कैसा लगा. मैं यही सोचता रहा, और फिर मैं सो गया.

अब मुझे बस सकचाई जाननी थी, और मैं सोचने लगा की कैसे पता किया जाए की सोनाली को किसने मेसेज किया था. सोनाली के मोबाइल का पासवर्ड भी मुझे पता नही था, और सोनाली अपना मोबाइल किसी को देती भी नही थी. हालाकी हम सब बेहन भाइयों में से कोई किसी का मोबाइल नही उसे करता था. क्यूंकी सब के पास अपना-अपना मोबाइल था.

वैसे मैने अपनी दूसरी बहनो या सोनाली के बारे में किसी के मूह से ऐसा कुछ भी ग़लत नही सुना था. इसलिए मैं ध्यान भी नही देता था ज़्यादा. लेकिन जब मैने मेसेज देखा तब मैं सोनाली के बारे में जानने के लिए कोशिश करने लगा.

रात होते ही सब ने खाना खाया और फिर हम अपने-अपने रूम में सोने चले गये. मैं मोविए देखने लगा, और तब 11 बाज चुके थे. मैने व्हातसपप चालू करके सोनाली का स्टेटस देखा तो वो ऑनलाइन दिख रही थी. मैं फिर से मोविए देखने लगा और मोविए 12:25 पर ख़तम हो गयी.

फिर मैने व्हातसपप चालू किया तो देखा की वो अभी भी ऑनलाइन ही थी. अब तो मुझे ये जानना था की इतनी रात को वो किसके साथ बातें करती थी, और मैं प्लॅनिंग करने लगा सोनाली के मोबाइल का पासवर्ड जानने के लिए.

मुझे कुछ सूझ नही रहा था, की कैसे सोनाली के मोबाइल का पासवर्ड पता किया जाए. फिर मुझे एक आइडिया आया. सोनाली अक्सर स्टडी रूम में बैठ करके मोबाइल चलती रहती थी. फिर मैने अपना मोबाइल रेकॉर्डिंग चालू करके स्टडी रूम में एक बुक के पीछे च्छूपा दिया, ताकि उसको पता ना चले, और हुआ भी ऐसा ही.

सोनाली आज भी स्टडी रूम में जेया करके मोबाइल चलाने लगी. लगभग एक घंटे के बाद सोनाली स्टडी रूम से बाहर निकली, तो मैं रूम में गया, और अपना मोबाइल लेकर के रेकॉर्डिंग देखने ल्गा. फिर मुझे रेकॉर्डिंग में वो दिखा, जिसका काई दिन से मुझे इंतेज़ार था.

सोनाली स्टडी रूम में आते ही, कुछ 2 मिनिट के बाद ही अपना मैं पासवर्ड खोली. अब मुझे सोनाली का मैं पासवर्ड मिल चुका था. फिर सोनाली डाइरेक्ट व्हातसपप पे गयी, और मुझे व्हातसपप का भी पासवर्ड मिल गया.

लेकिन किसी का मेसेज नही आया था, तो सोनाली ने बस स्टेटस देख कर के व्हातसपप बंद कर दिया. मेरे पास में सोनाली के मोबाइल का पासवर्ड मिल चुका था. बस अब ऐसे टाइम का इंतेज़ार था, जिस समय मुझे उसका मोबाइल उसे करने का मौका मिल जाए.

पुर दिन मैं कोशिश करता रहा. बुत सोनाली का मोबाइल हाथ नही आया. फिर अगले दिन मैं सुबा-सुबा ही उठ गया. रोज़ सोनाली सुबा में ही उठा जाती थी और सुबा-सुबा ही नहा लेती थी. मेरे उठने से पहले ही, क्यूंकी उसको 8 बजे से कोचैंग भी जाना होता था.

सुबा-सुबा उठते ही मुझे पता चला की सोनाली नहाने जेया चुकी थी मेरे उठने से पहले ही. मैं जल्दी से सोनाली के रूम में गया, और उसका मोबाइल लिया, और सीधे व्हातसपप पे गया. वाहा मुझे रोहन के नाम से सबसे उपर “ही गुड मॉर्निंग” वाला मेसेज दिखा.

मैने उसको खोला, लेकिन मेरे पास में मेसेज पढ़ने का समय नही था. सोनाली किसी भी समय नहा कर के बाहर निकल सकती थी. मैने जल्दी से अपनी एमाइल पे उसकी छत एक्सपोर्ट कर दी, और कुछ ही सेकेंड्स में सोनाली ने जो रोहन नाम के लड़के से बात की हुई थी, वो पूरी छत मेरी एमाइल पे आ गयी.

मैं फिरसे उसका मोबाइल बंद करके वापस वैसे ही रख के सोनाली के रूम से बाहर निकल गया.

अब ये कहानी ले चलते है उस छत में, जो सोनाली के मोबाइल से अपनी एमाइल पे फॉर्वर्ड की थी.

रोहन: तुम्हारा नंबर मुझे मेरी बेहन के मोबाइल से मिला है.

सोनाली: बोलो कोई काम था क्या रोहन?

और दोनो सोनाली और रोहन की ऐसे करके छत शुरू होती है. फिर दोनो कज़िन भाई-बेहन से एक आचे दोस्त बन गये. मैं उन दोनो की छत पढ़ते रहा कुछ दिन तक. ऐसे ही नॉर्मल छत होती रही एक भाई-बेहन की तरह. कुछ मंत्स ऐसे ही दोनो को बातें करते निकल गया.

रोहन: कल मेरा बर्तडे है, तुम कोचैंग जाती हो और उधर ही बर्तडे पार्टी है. तुम मेरे साथ आओगी क्या?

सोनाली: कों-कों आ रहा है?

रोहन: मेरे कुछ दोस्त ही है और एक तुम.

सोनाली: ठीक है, मैं आ जौंगी.

अब अगले पार्ट में पढ़िए की कैसे रोहन सोनाली को अपनी पार्टी में ले जाता है, और क्या-क्या होता है. ये कहानी आप देसीकाहानी वेबसाइट से पढ़ रहे हो. अगर कहानी अची लग रही है, तो आप मुझे अपनी फीडबॅक ज़रूर देना, और अगर कुछ ग़लती हुई हो तो भी. क्यूंकी मैं आज अपनी पहली कहानी लिख रहा हू, इसलिए थोड़ी बहुत ग़लती हो सकती है.

लेकिन आप लोगों का प्यार मुझे आयेज भी कहानी लिखने के लिए प्रोत्साहित करेगा. मेरी ए-मैल है सुसिँघ123452001@गमाल.कॉम आप अपनी फीडबॅक इसी एमाइल पे दे सकते हो.

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