बहन के साथ सुहागरात

मैं और मेरी बहन साथ-साथ रहते थे। मेरे पापा और मम्मी दोनों मर चुके थे, जब मैं 10 साल का था, और बहन लगभग 5 साल या उससे बड़ी उम्र की थी। 6 साल तक मैं पड़ोस अंकल के घर बड़ा हुआ। बड़ा होकर मैं कुछ काम करने लगा। काम करते-करते गर्मियों में फल और जूस बेचने लगा।

धंधा अच्छा चल निकला। रोज का कम से कम 2500/- रु या उससे ज्यादा होने लगा। ठेले और मशीन का कोई खर्च था नहीं, तो टोटल पैसे मेरे थे। मैंने अलग घर लिया और बहन के साथ रहने लगा। मैंने एक मोबाईल खरीदा और साल भर जाते जाते मैं मोबाईल में पार्न फिल्म पार्न कहानी देखने लगा। ऐसे दो साल कट गये।

कहानियों में मैंने भाई बहन को पटा कर चोदता था की कहानी पढ़ कर मेरा दिमाग भी खराब होने लगा। अब बहन को खेल-खेल में उसकी चूची पकड़ता, दबाने लगा, क्योंकि बहन जवान थी मस्त 18 साल की थी। उसकी चूची भी मस्त बड़ी बड़ी थी हृष्ट-पुष्ट जवान लड़की जैसी। नाक-नक्श सुन्दर, हाथ-पैर पुष्ट सुन्दर‌ थे, और देखने से बड़ी सुन्दर माल दिखती थी।

मैं चूची पकड़ता और दबाता था। गोद में बिठाता था। मगर चोदता नहीं था। बहन गर्म हो जाती होगी मुझे नहीं मालूम।

ऐसे करते-करते एक दिन बहन बोली: भैया, आप मुझे गोद में बिठाते हैं और अपना वीर्य अपने लंड से निकाल लेते हैं। मगर मेरा क्या? मेरी चूत का पानी गिरता रहता है।

बहन और मैं अकेले रहते थे। एक ही कमरे में लिपट कर सोते थे, तो आपस में बोल चाल में क्लीयर और फ्रैंक थें।

मैं बोला: देख नीरू।

मेरी बहन का नाम निर्मला है। प्यार से मैं उसे नीरू बोलता हूं।

मैं बोला: देख नीरू, तूं मेरी बहन है। मैं तुझे चोद नहीं सकता।

बहन बोली: कहानी में भाई बहन चोदा-चोदी करते हैं।

मैं बोला: चोदने का मन मेरा भी करता है, मगर मैं डरता हूं।

उसके बाद बहन मुझे बहुत बार उकसाती रही, मगर मैंने नहीं चोदा। बहन बाहर भी किसी से नहीं चुदवायी। ऐसे दिन कटते रहे, और मेरी शादी एक सुन्दर खूबसूरत लड़की से हो गयी। वह लड़की पास में ही रहने वाले एक सेठ के यहां काम करती थी। गरीब लड़की थी। उसके साथ उसके मां-बाप और एक भाई था। भाई आवारा लोफर था। कई-कई दिन बोलिए महीनों तक घर नहीं आता था।

मां-बाप का खर्चा मां और बेटी चलाती थी। बाप बीमार‌ ही रहा करता था। जब मेरी शादी हुई, तब सुहागरात के लिए घर सजाया, और घर में पकवान बनाये। रात 9 बजे मैं बीवी के कमरे में गया। एक ही कमरा था तो मैं और मेरी बीवी कमरे में थे। बहन कमरे से बाहर बिस्तर लगायी थी।

मैंने बीवी को बहुत प्यार किया, चुम्बन लिया, उसका बदन सहलाया, लिपटा-लिपटी की, सब किया। पहले बीवी की चूची दबाते-दबाते उसे नंगा कर दिया। बीवी ठंडी चुप-चाप सहनशील थी। जब बीवी की चूत सहलाने लगा, चाटने लगा तब बीवी बोली-

बीवी: देखिए जी, आज मत चोदिए। प्लीज नहीं कीजिए, चूत में हालत खराब है।

मैंने पूछा: क्या हुआ?

बीवी चुप थी।

मैंने बार-बार दोबारा बीवी से प्यार से पूछा: बोलो ना क्या हुआ?

बीवी बोली: आज सेठ जी दस बार मेरी बुर चोदे है, तो हालत खराब है।

मैं बोला: आज हम दोनों की सुहागरात है। आज तो चोदना ही पड़ेगा।

और मैं उसकी चूची दबाने लगा।

वह बोली: नहीं जी प्लीज़, मेरी हालत खराब है।

मैंने बीवी का हाथ अपने लंड पर रखा। मेरी बीवी मेरा लंड दबाने और सरकाने लगी।

मैं बोला: मेरा लंड खड़ा है, आज तो यह घुसेगा।

बीवी बोली: नहीं जी, मान जाईये, उपर-उपर से करके छोड़ दीजिए। मैं आपका लंड हाथ से हिला के गिरा देती हूं।

मैं बोला: नहीं आज चूत चाहिए।

तब बीवी बोली: अपनी बहन को कर लीजिए। बहन की चूत में गिरा लीजिए।

मैं सकपका गया और अचम्भित रहा।

मैं बोला: बहन को आज तक नहीं चोदा है। बहन भी किसी से नहीं चुदवाती है।

बहुत डिस्कशन बीवी के साथ हुआ बहन और भाई पर मगर वह बोली: आप अपनी बहन को भेज दीजिए, मैं मना लूंगी।

डेढ़ घंटा बीवी और मेरी बहन डिस्कस की। क्या बात हुई, मुझे आज तक नहीं मालूम। डेढ़ घंटे बाद बीवी आवाज़ दी। मैं कमरे में गया तो बहन को बिना कपड़ों में पाया। बहन नंगी थी, बीवी भी नंगी थी। बहन की कुंवारी चूत देख कर मेरा लंड टनटना गया। मैंने बीवी के पास बैठी बहन को साईड से दबोच लिया।

बहन को पूछा: मेरा लंड लेगी?

बहन मुझे देख कर मुस्कुरायी। मैं बहन की चूची दबाने लगा। चुम्बन लिया बहन को और बीवी को।

बीवी बोली: चोदिए बहन को, वो आपका लंड लेगी।

चूची छूते-छूते बहन की चूत छूने लगा। मेरा लंड फनफना रहा था, और भड़का हुआ था। बिना चूत फाड़े आज मानने वाला नहीं था। बीवी की चूत तो बहुत बार सेठ के लंड से फटी थी। मगर मेरी प्यारी बहना कमसिन कली नाजुक कली थी। उसकी चूत फटी नहीं थी।

मैं बहन को बोला: चोदूंगा तो बुर फटेगी, खून निकलेगा।

बहन बोली: नहीं निकलेगा। खीरा बैंगन घुसा चुकी हूं, खून नहीं निकलेगा।

मैं समझ गया मेरी बहन चुदवाने के लिए तैयार थी। मैं उसकी चूत सहलाते-सहलाते चाटने लगा। बहन ईईईई आह आह आह ईईईई उफ्फ करने लगी। बुर से पानी की धार निकलने लगी। मेरा होंठ मुख सब चूत रस से गीला हो गया। मैंने लंड बहन की चूत पर रखा, दबाया तो लंड फिसल गया। फिर मैंने उठ कर लंड लगाया और धक्का लगाया। पर मेरा लंड फिसल गया। तीन चार बार किया लंड गया नहीं।

तब बहन खुद मेरा लंड पकड़ कर चूत से लगायी। फिर मैंने धक्का मारा, और मेरा लंड बहन की चूत में घुस गया। बहन उफ्फ उह उह उह उह आह आह करने लगी। मैं धीरे-धीरे अपना लंड घुसाता गया। बहन उफ्फ उफ्फ करती रही। आधा से ज्यादा लंड अन्दर था। मैं धक्का मार रहा था, और चुम्बन ले रहा था।

मेरी बीवी बहन की चूची पी रही थी, गाल ओंठ सहला रही थी। मैं धकाधक पेल रहा था। बहन ने आंखें बंद कर ली, और ऊई ऊई ओह मां आह आह कर रही थी। मेरा लंड पूरा 8 इंच से ज्यादा लगभग 9 इंच घचाघच घचाघच फचाफच मार रहा था।

बहन चित्त सीधी लेटी थी, और मैं बहन पर लंड लेकर उसकी चूत में भकाभक भकाभक पेल रहा था। आधा घंटा पेला। चूत ने चार बार पानी छोड़ा। मगर मेरा लंड एक बार पिचकारी मारी तो बहन की चूत भर गयी। मैंने कुछ देर और पेला फिर बहन पर लेट गया। जब उठा तो बहन उठी।

मेरी बीवी पूछी: नीरू कैसा लगा भाई का लंड?

मेरी बहन मुस्कुरायी।

बीवी बोली: अरे जो भी लंड हो, लंड तो लंड ही होता है। मैं सात लंड ले चुकी हूं, मगर सेठ जी का लंड से ही मन भर जाता है।

बहन बोली: भैया, एक बार फिर से।

और वो मेरा लंड पकड़ ली। मैंने पूरी रात बहन को चार बार चोदा। दूसरी रात भी दो बार चोदा। रोज रात बहन को चोदता एक बार और बीवी को चोदता एक बार। फिर बहन गर्भवती हो गयी। टैबलेट जानता नहीं था, और डाक्टर के पास ले जा नहीं सकता था। आखिर बहन को मेरा बच्चा पैदा हुआ। मेरी बीवी अपना बच्चा बता कर मेरी जान बचायी।

बोलिए कहानी कैसी लगी? यह सच्ची घटना मेरे जीवन की आप जवाब देंगे। मेरा इ-मेल पर जवाब भेजे।

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