बेहन और उसके दोस्त के साथ घापघाप

चुदाई कहानी के पिछले पार्ट में आपने पढ़ा होगा की मैं कैसे शिखा को वरुण के साथ छोड़ने की रिक्वेस्ट कर रहा था. अब आयेज-

तब तक वरुण आ गया और उसने दोनो टॅब्लेट्स मुझे दी.

वरुण: शिखा आज तो तू मर्री. आज भैया दो टॅब्लेट्स खा कर तेरी पूरी फाड़ देंगे.

मैने एक टॅबलेट उसे दी. वो कन्फ्यूज़ होके मेरी तरफ देखने लगा. मैने टॅबलेट खा कर उसे भी खाने का इशारा किया. उसने भी टॅबलेट खा ली कन्फ्यूषन में.

अब मैं बेड के कॉर्नर पर बैठ गया, और वरुण को नीचे बैठा कर उसके मूह में लंड दे दिया. वो तो यही चाहता था, तो खुशी-खुशी मेरा लंड चूसने लगा.

मैने शिखा को पास खींचा और उसके होंठो और बूब्स को पीना शुरू कर दिया. वो अभी-अभी झड़ी थी, तो थोड़ी सुस्त हो रही थी. तो मैने वरुण को बेड पर आने को बोला, और मैं लेट गया सीधा.

शिखा की छूट मैने अपने मूह पर रखवाई और चाटने लगा. नीचे वरुण मेरा लंड चूसने लगा. शिखा की छूट चुसाई की वजह से वो फिर से मूड में आ गयी, और उठ-उठ कर और इधर-उधर घुमा कर अपनी छूट मेरे मूह पर रगड़ने लगी.

वो अपने बूब्स दबाती, बालों को सहलाती, और कभी-कभी मेरा चेहरा पकड़ कर छूट में घुसा देती. अब वो पलट गयी, और वरुण के साथ मेरा लंड चूसने लगी. क्या बतौ यार, कितना मज़ा आ रहा था, जब दो तरफ से होंठ लंड को छ्छू रहे थे, और दोनो में झगड़ा सा हो रहा था कों चूसेगा लंड को.

मैं शिखा की छूट ज़ोर-ज़ोर से चूस-चूस कर चाट रहा था, काट रहा था, और उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था. वो भी दूं लगा कर मेरा लंड चूस रही थी. पर वरुण भी था, तो वो भी बीच-बीच में चूसने लग जाता था.

शिखा: चूसो, चूसो भैया, और ज़ोर से. फक, मैं झाड़ जौंगी जल्दी ही भैया, एम्म.

वो अपनी कमर उठा कर मेरे मूह पर छूट मारने लगी जैसे लंड पर उछलते है वैसे. फिर मैने उसकी कमर पकड़ी, और छूट को बिल्कुल अपने मूह से सता लिया, और छूट में जितना हो सका उतना मूह घुसा कर जैसे चाट पा रहा था चाट रहा था.

मतलब उसकी छूट की अंदर की सेन्सिटिव स्किन को, उसके दाने को, सब को बेरेहमी से काट-काट कर चूस रहा था. वो तड़प उठी और चिल्लाने लगी ज़ोर-ज़ोर से.

शिखा: आहह हरामी, काटो मत. उफफफ्फ़ कुत्ते भैया मत करो.

मैने उसकी एक नही सुनी, और चूसने में लगा रहा. फिर जब उसकी साँसे भारी होने लगी, और मुझे लगा की अब ये झड़ने के करीब थी, तो मैने चूसना बंद किया. फिर उठ कर बेड से उतरा.

शिखा एक-दूं गुस्से में मुझे देख रही थी. फिर मैने उसकी टाँगें पकड़ कर उसे खींचा, और एक साइड घुमा कर छूट में लंड दे मारा ज़ोर से. वो आयेज से एक-दूं उठ गयी.

शिखा: आ बहनचोड़ कही के एम्म मुम्मा.

मेरा भी लंड दोनो के चूसने से गीला था, और उसकी छूट भी गीली थी, तो बस फिर दाना-दान चुदाई शुरू कर दी मैने. लंड सरपट अंदर-बाहर होने लगा.

शिखा: आहह आअहह आाआऐययइ उफ़फ्फ़ कुत्ते, क्या छोड़ते हो भैया. एम्म मज़ा आ जाता है भैया. हर धक्के पर जान निकाल देते हो आज भी मेरी. मारो मम्मी, और ज़ोर से आहह मा.

वरुण हम दोनो देख रहा था लालच भारी निगाहों से. मैने उसे धीरे-धीरे अपना लंड हिलने को बोला ताकि उसका भी लंड शेप में आए, और गोली का असर आचे से हो उसके लंड पर भी. फिर उसका मूह शिखा की छूट पर रख दिया, और चूसने को बोला. तो वो जीभ से भर-भर के चूसने लगा उसकी छूट और मेरा लंड.

शिखा: हाए भैया, क्यूँ पागल करने पर तुले हो मुझे आअहह? चूस वरुण, और ज़ोर-ज़ोर से चूस मेरी छूट. उफ़फ्फ़ कुत्ते, दोनो मिल कर जान ले लोगे मेरी क्या?

शिखा ये बोलते-बोलते झड़ने लगी, तो मैने लंड बाहर निकाला, और वरुण का मूह उसकी छूट पर रख कर दबा दिया. फिर उसे उसका छूट रस्स पिलाया पूरा.

विवेक: कैसा लगा अपनी दोस्त की छूट को पी कर वरुण?

वरुण: भैया टेस्ट बहुत अजीब है इसकी छूट का. आपका लंड टेस्टी है. मुझे बहुत अछा लगा आपके लोड का स्वाद. इसकी तो नमकीन है, या फिर ये पहली बार पी है, तो शायद.

विवेक: हो सकता है, पर अब तो तुझे पिलाता रहूँगा इसकी छूट भी. चल अब इसकी छूट सॉफ कर आचे से.

वरुण तोड़ा इनकार जैसा चेहरा बना कर उसकी छूट को चाटने तो लगा. पर मॅन से नही कर रहा था. उधर शिखा भी तोड़ा अजीब सा मूह बना रही थी.

शिखा: भैया प्लीज़ यार. मैने बोला था ना आप करो ना प्लीज़.

विवेक: वरुण देख तेरी दोस्त को पसंद नही आ रहा तेरा तरीका. यार बेइज़्ज़ती करा रहा है तू मेरी.

मेरी बात सुन कर वरुण फिर तोड़ा आचे से चूसने लगा, और छूट खोल-खोल कर चाटने लगा चारों तरफ. शिखा भी कितना कंट्रोल करती. वो भी मदहोश हो ही गयी, और फिर वरुण का मूह दबाने लगी छूट पर.

शिखा: वाह कुत्ते, हरामी, सही चूस्टा है तू भी. सेयेल चूस कुत्ते चूस, मुझे भी मज़ा दे सेयेल. अपना हज़्बेंड दिया है तुझे मैने. तू भी मुझे कुछ मज़े तो दे ही सकता है.

5-7 मिनिट की चुसाई के बाद वरुण हटा, और फिर मेरी तरफ लालच भारी आँखों से देखने लगा.

वरुण: भैया मज़ा आ गया इसकी छूट पी कर. थॅंक्स आपने करने को कहा, तो पता चला की छूट का भी अपना मज़ा है. पर अब मुझे अपना लंड पीला और खिला दो भैया प्लीज़.

मेरा लंड भी तोड़ा ढीला पद गया था, तो मैने उसे चूसने दिया. तो अब वरुण बेड से नीचे घुटनो पर मेरा लंड चूस रहा था. मैं खड़ा था, और शिखा बेड पर पड़ी हाँफ रही थी.

विवेक: शिखा जल्दी रेडी हो जेया नेक्स्ट रौंद के लिए.

शिखा: अर्रे नही भैया, बस करो. अब आराम करो और मुझे भी करने दो. सुबह से बेचारी छूट को रुला रहे हो मेरी.

विवेक: तो तूने ही बुलाया था ना. चल जल्दी रेडी हो जेया, मेरा भी लंड रेडी है, और वरुण का भी. हम दोनो मिल कर तेरी बजाएँगे अब. क्यूँ वरुण, छोड़ेगा अपनी दोस्त की छूट?

शिखा: भैया क्यूँ यार?

वरुण: क्या?

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