बेहन की चुदाई कहानी अब आयेज-
हम दोनो ने 30-40 मिनिट रेस्ट किया. फिर मैने रोहिणी भाभी को बोला मेरा लोड्ा चूसने को, तो शिखा उठ कर उनसे पहले लोड्ा पकड़ ली.
शिखा: नही आंटी, अभी नही, अभी सिर्फ़ मेरा है ये. अभी सिर्फ़ मैं पियूंगी इसको.
शिखा और रोहिणी दोनो हासणे लगे.
रोहिणी: ठीक है बेटू, तुम ही चूसो भैया का लंड. पर सनडे जब तुम चली जाओगी, उसके बाद तो मेरा ही होगा ना. जब चाहूँगी चूसूंगई, जब चाहूँगी छुड़वा लिया करूँगी. तब कैसे रोकॉगी?
शिखा तोड़ा साद सा मूह बना कर बैठ गयी और लंड को धीरे-धीरे उपर-नीचे करने लगी.
विवेक: अर्रे क्यूँ उदास होती है मेरी कुटिया? एग्ज़ॅम के बाद जब मॅन हुआ करे तब या तो तू आ जाना, या मैं आ जया करूँगा. चल अब लोड्ा चूस और तैयार कर.
शिखा एक-दूं बच्चे की तरह ताली बजाने लगी. फिर वो बेड से नीचे उतरी और मैं कॉर्नर पर गया. उसने फिर घुटनो के बाल आ कर लंड चूसना शुरू किया. रोहिणी भाभी भी मेरे बगल में आ कर बैठ गयी और शिखा को चूस्टे देखने लगी.
शिखा फुल जोश में और मज़े में लंड चूस रही थी. अभी लंड ढीला पड़ा था तो पूरा मूह में लेकर जीभ से नाचा रही थी.
फिर धीरे-धीरे शेप में आया तो गले तक लेने लगी. उसके मूह से गवक-गवक की आवाज़े आ रही थी. पर वो मस्ती में चूज़ जेया रही थी, जैसे सच मच प्यासी थी. उसके मूह से निकलते थूक और लार से लंड बढ़िया से चिकना किया उसने.
शिखा: भैया लंड तैयार है अब आपका.
मैने शिखा को बेड के कॉर्नर पर कुटिया बनाया और उसके मूह से थूक लेकर उसकी छूट पर लगाया. फिर पीछे से एक झटके में लंड उतार दिया छूट में. फिर मैं भी बेड के कॉर्नर पर चढ़ गया और धक्का-पेल चुदाई शुरू कर दी शिखा की. मैं उसकी कमर पकड़ कर खूब ज़ोर-ज़ोर के धक्के पेल रहा था छूट में, और शिखा के बूब्स और उसका हार झूल रहे थे. उसके कंगन उसकी पायल बाज रही थी ज़ोर-ज़ोर से.
विवेक: भाभी आप प्लीज़ शिखा की रेकॉर्डिंग करो ना आयेज से. मुझे देखना है साली कैसे मज़े ले रही है चुदाई के.
रोहिणी भाभी ने अपने मोबाइल में शिखा की रेकॉर्डिंग चालू की, और उसके चेहरे के हाव-भाव, उसके झूलते बूब्स सब रेकॉर्ड किए जो मैने बाद में देखे.
शिखा: एस भैया, पेलो एमेम मुझे. आ कितना तदपि हू इस दर्द के लिए अफ मुम्मा रे, छोड़ो भैया. हाए मेरी छूट गयी भैया!
शिखा की छूट ने पानी छ्चोढ़ दिया. फिर मैने शिखा की गंद में लंड डाला और उसके उपर झुक कर एक हाथ से उसकी छूट को पकड़ लिया. फिर एक हाथ से उसके बूब्स दबा-दबा कर गंद पिलाई शुरू की.
रोहिणी: शिखा की चुदाई देख कर मुझे मिर्ज़ापुर वाले मुन्ना भैया की याद आ गयी.
विवेक: तो फिर भाभी शिखा की चुदाई भी दीवार से सता कर करे. 100 शॉट्स दीवार से पुर करे, क्या बोलती है शिखा?
शिखा: मेरे दूल्हे राजा आपको जैसे भोगनी हो मेरी छूट भोग लो. अब मैं कभी कोई रोक-टोक नही करूँगी. बस अब से कभी नाराज़ हो कर मेरी छूट को यू प्यासा मत छ्चोढना.
शिखा को गोद में उठाया और दीवार से लगाया. फिर छूट में लंड पेला और पचा-पच चुदाई शुरू. रोहिणी भाभी रेकॉर्डिंग कर रही थी और शिखा खूब चिल्ला-चिल्ला कर चुदाई एंजाय कर रही थी. रोहिणी भाभी साथ ही साथ धक्के भी गिन रही थी.
शिखा: आआ हम्म मम्मी मम्मी मम्मी एम्म भैया धीरे रे!
एक बार शुरू किया तो 56 धक्के पेले शिखा को गोदी में उठाए हुए.
शिखा: भैया, भैया बहुत दुख रही है छूट यार प्लीज़ तोड़ा रुक जाओ ना आहह मा. आंटी बोलो ना आप. हाए रे मम्मी.
फिर तोड़ा रुक कर उसे नीचे उतरा, उसके बूब्स चूज़, किस किया. 5-7 मिनिट का रेस्ट लिया, जिससे मुझे भी तोड़ा रिलॅक्स हुआ और शिखा को भी. बहुत भारी हो गयी है साली. फिर उसे वापस गोद में उठाया और फिर से छोड़ना शुरू किया.
विवेक: इस बार पुर 100 करके ही छ्चोढुगा शिखा मेरी रॅंड तुझे.
शिखा: मा छोड़ दी भैया छूट की पूरी. पर हाए ये मज़ा एम्म, छोड़ो आप जितना चाहो छोड़ लो भैया.
इस बार उसे छोड़ते ही गया और 108वे धक्के पर रुका जेया कर. क्यूंकी शिखा की छूट ने दूं तोड़ दिया और झाड़ गयी.
शिखा (हाफ्ते हुए): बस हो गया भैया. हो गये 100. अब जान बक्ष दो मेरी अब और नही भैया एम्म्म मम्मी रूको. भैया नही प्लीज़, अब और नही ले सकती मेरी छूट भैया आहह आहह कमीने आहह एमेम.
मैने दोबारा से छोड़ना शुरू किया, पर अब शिखा सच-मच तक गयी थी और वो अपना पूरा वेट मेरे उपर ही किए थी. तो बहुत मुश्किल हो रही थी धक्के पेलने में. फिर उसे नीचे उतरा और वो बैठ गयी, पर स्माइल कर रही थी.
शिखा: उफ़फ्फ़ भैया, तका दिया यार पूरा. अब जान नही बची मेरे में. आपको और नही झेल पौँगी. आंटी अब आप ही ले जाओ इस जानवर को और चूड़ो इससे. मेरे तो बस में नही अब. हाए मेरी छूट देखो कैसे लाल पद गयी है लंड खा-खा कर.
मैने रोहिणी भाभी को पकड़ा और दीवार से सताया और उनका गला दबा कर उनके होंठ पीने लगा ज़ोर-ज़ोर से चूस-चूस कर. फिर उनके बूब्स पर मारने लगा और शिखा को बोला रेकॉर्डिंग करने को. तो वो वहीं नीचे बैठ कर ही रेकॉर्ड करने लगी.
विवेक: भाभी यार कब डोगी आप दूध? मेरी भूख बढ़ रही है यार, निकालो ना अपना दूड्दू भाभी.
रोहिणी: आ जाएगा विवेक अगले महीने शायद. तब खूब पी लेना आहह, अब मारो मत लगती है बुब्बु पर मेरे आहह. बच्चे सुन भी लिया करो यार.
मैने भाभी की एक टाँग पकड़ी और उसे अपनी कमर पर रखा. फिर लंड उनकी छूट में पेल दिया. गीली तो थी ही साली की, तो लंड बिना किसी दिक्कत के घुस गया. भाभी पीछे दीवार पकड़ने की कोशिश करते हुए चुदाई का मज़ा लेने लगी.
रोहिणी: आहाा एम्म्म फक विवेक उफ़फ्फ़ रे बच्चे एम्म छोड़ो, छोड़ो एम्म एसस्स. एससस्स फक, आज पहली बार किसी तीसरे के सामने नंगी हुई हू, और लंड खा रही हू मैं. आअहह विवेक बहुत अजीब सी फीलिंग हो रही है शिखा के सामने तुमसे चूड़ने में आहह.
विवेक: पर आप तो बिल्कुल बेशार्मो की तरह चुदाई के लिए तैयार हो गयी भाभी. इस कुटिया ने बहुत नखरे किए साली रंडी मदारचोड़.
रोहिणी: अभी बच्ची उम्म्म है वो यार, और मैं तो जब तुम्हारा बच्चा लेकर घूम रही हू छूट में, तो फिर आयेज किसी भी बात की क्या शरम? तुम बस छोड़ो और दिल खोल कर छोड़ो मुझे एम्म एसस्स और तेज़ करो.
शिखा फिर खड़े हो कर रेकॉर्ड करने लगी और कभी-कभी अपने उपर भी कॅमरा करती.
शिखा: आंटी कैसा लग रहा है भैया का लंड खा कर?
रोहिणी: हाए मत पूच बेटू, कितना कमीना है तेरे भैया का लंड. एम्म मदारचोड़ और तेज़. तुझे तो पता ही होगा सारा मज़ा सिलसिला तो तेरी छूट से ही शुरू हुआ था बेटू. एम्म फक फक एस, मेरी छूट आने को है विवेक छोड़ो, और ज़ोर से पेलो ना. हाए मा, बेटू मैं गयी रे बच्चे.
मैने भाभी को वहीं खड़े-खड़े 15 मिनिट तक छोड़ा और भाभी की छूट से पानी निकाला. मुझे पता नही क्यूँ आज भाभी की छूट पहले से ज़्यादा टाइट और छ्होटी लग रही थी, और उनके बूब्स भी पहले से ज़्यादा नोकदार लग रहे थे. शायद प्रेग्नेन्सी के कारण या शायद मुझे बस यू ही फील हो रहा था.
फिर भाभी को वहीं फर्श पर लिटाया उनका सिर शिखा की गोद में रखा. फिर कमर के नीचे एक तकिया लगाया और फिर चुदाई शुरू की. चुदाई के टाइम शिखा भाभी के बूब्स से खेल रही थी, और कभी-कभी भाभी के होंठो को भी चूम लेती थी.
रोहिणी: विवेक लगता है शिखा की छूट फिर से गरम हो गयी है, लंड माँग रही है दोबारा से.
शिखा: सच बतौ आंटी वैसे तो हो गया मेरा, इस जानवर ने कमर का कचूमर बना दिया है. हवसी कहीं का. पर जिस मज़े से आप चुड रही हो, उसे देख कर दोबारा पिलवनी है मुझे भी.
रोहिणी: ये तो बात है, विवेक में स्टॅमिना बहुत है. बिना गोली के भी आधे घंटे तक छूट मारता है साला. और क्या मारता है बेरहम कहीं का.
भाभी की छूट की डुमदार चुदाई करते हुए 20 मिनिट हुए होंगे, और मेरा लंड अकड़ने लगा.
विवेक: भाभी मेरा माल आने वाला है. आहह क्या छूट है साली तेरी भाभी.
शिखा: तुझे हर किसी की ही छूट अची लगती है कुत्ते. चल अब जल्दी माल निकाल और मेरी प्यास बुझा माल पीला कर.
10-12 धक्के पेल कर मैं खड़ा हो कर शिखा के पास गया. फिर उसने लंड चूस कर मेरा माल निकाला और सारे का सारा पी गयी. मैने शिखा को बोला की भाभी की छूट चाट कर सॉफ करे तो वो झट से मान गयी इस बार. फिर वहीं लेट कर वो भाभी की छूट चाटने लगी और मैं उसकी चाटने लगा.
ऐसे करते हुए शिखा ने भाभी का पानी निकाला और मैने शिखा का.
शिखा: भैया सिर्फ़ चूसने से शांत करोगे क्या? एक और रौंद हो जाए प्लीज़.
विवेक: ओक मेरी जान, भाभी ज़रा एक गोली तो देना.
शिखा: नही-नही भैया, फिर रहने ही दो आप तो. नही करना एक और रौंद.
हम तीनो हासणे लगे. बहुत तक गये थे हम सभी, सो वहीं फर्श पर मुझे बीच में लिटा कर हम तीनो ही लेते रहे. रोहिणी ने शिखा को च्छेदते हुए मुझे बताया की कैसे रोते-रोते वो भाभी के पास आई और उन्हे शुरू से अब तक का सारा क़िस्सा सुनाया. कैसे मैने शिखा की चुदाई की, फिर उसको अपने लंड की आदत लगाई, फिर उसके बर्तडे पर उसे जोसेफ का लंड गिफ्ट किया, और फिर वरुण की चुदाई की, और आख़िर में सिद्धि की छूट चुदाई की बात.
फिर हम तीनो ने नाहया और खाना बनाया और खा कर सो गये. शिखा सनडे रात की बस से वापस गयी थी. तब तक वो रोहिणी के फ्लॅट पर ही थी, क्यूंकी सिद्धि को बता कर नही आई थी.
नेक्स्ट दे सुबह किचन में होते शोर से मेरी आँख खुली तो देखा मैं और शिखा नंगे सो रहे थे.
फिर जब किचन की तरफ गया तो रोहिणी पनटी पहने हुए किचन में बर्तन सॉफ कर रही थी. मैने पीछे से हग किया और बूब्स पकड़ कर किस किया होंठो पर.
विवेक: कब उठी और मुझे क्यूँ नही जगाया?
रोहिणी: बस अभी 5 मिनिट पहले ही. तुमने कल बहुत मेहनत की थी, इसलिए सोने दिया और फिर मुझे पता था तुम्हे जगाना मतलब छ्होटे उस्ताद को जगाना. और मुझे आज तोड़ा जल्दी जाना है, तो छ्होटे उस्ताद को जगाने का रिस्क नही ले सकती थी.
फिर भाभी और मैने जल्दी-जल्दी सारी किचन सॉफ की. भाभी को परेशन भी किया खूब जिससे वो गरम हो गयी थी. भाभी नहा कर नंगी निकल आई और टायर होने लगी.
रोहिणी: मैं कोशिश करूँगी जल्दी आने की. पर अगर नही आ पाई तो शिखा को ज़्यादा परेशन मत करना. समझे बदमाश? वरना पता चले की गोली खा कर पुर दिन बस उस पर चढ़े ही रहो.
विवेक: शिखा को परेशन ना करू, इसके लिए किसी को तो परेशानी उतनी पड़ेगी ना भाभी.
रोहिणी: नो-नो, प्लीज़ विवेक आयेज मत आओ. मैं सच में आज जल्दी में हू. ई प्रॉमिस जल्दी लौट अवँगी, पर अभी नही प्लीज़.
और फिर हम दोनो बेड के इर्द-गिर्द भागने लगे. मैने भाभी को पकड़ कर बेड पर गिरा दिया.
विवेक: अब बोलो कहाँ जाओगी बच कर?
रोहिणी: प्लीज़ विवेक जाने दो यार. आज सच में बहुत काम है पार्लर में. अभी मत छोड़ो ना प्लीज़.
मैने उनकी गर्दन को चूसना शुरू किया और बूब्स दबाने लगा. पर भाभी के बहुत बोलने पर उन्हे छ्चोढ़ दिया और वो रेडी हो कर चली गयी. फिर मैने भी अपना लॅपटॉप लेकर लोजीन किया और 2 घंटे ऑफीस का काम किया. तब तक शिखा सो ही रही थी.
फिर मैने छाई बनाई और उसे उठाया जेया कर तो हमने साथ में छाई पी. देन दोनो ने साथ में नाहया. नहाते वक़्त हम दोनो ही बड़े रोमॅंटिक मूड में हो गये और एक-दूसरे को किस किया डीप आंड स्लो. एक-दूसरे की बॉडी को चूसा आचे से. फिर नहा कर बाहर आए और खाना ऑर्डर किया.
हम दोनो सोफे पर बैठे थे तो हमने वहीं किस करना शुरू किया और धीरे-धीरे दोनो गरम होने लगे.
शिखा: भैया रूको, अभी नही. रूको भी, सुनो तो यार, खाना आ जाने के बाद छोड़ लेना भैया. पर यहाँ नही छोड़ो.
विवेक: फिर कहाँ चूड़ना है?
शिखा: अपने ससुराल में.
विवेक:आब तुझे मेरे गाओं जाना है!
शिखा: उफ़फ्फ़ बुद्धू, गाओं नही, आपके फ्लॅट पर भैया. वैसे एग्ज़ॅम के बाद गाओं भी चल सकते है, मुझे कोई प्राब्लम नही.
फिर हम वैसे ही किस करते हुए एक-दूसरे की बॉडी से खेलते रहे और खाना लेने के बाद मेरे फ्लॅट की तरफ चल दिए.