जुहू बीच पर आंटी की मस्त चुदाई की कहानी

कैसे हो मेरे प्यासी रसभरी छूट वाली और लंड वाले दोस्तों? मैं हाज़िर हू आपकी सेवा में एक बार फिरसे नयी कहानी लेके.

मैं आपका योगु, आगे 24, अभी सिंगल हू, और मुंबई में जॉब कर रहा हू. आज की कहानी मेरे और एक आंटी के बीच की है. हम रोज़ एक ही बस से ऑफीस के लिए निकलते थे. आपको तो पता ही है मुंबई में ऑफीस टाइम में कितनी ट्रॅफिक होती है.

ऐसे ही हमारी जान-पहचान हो गयी. मैं उनको बोला की मैं इस वीकेंड को जुहू बीच देखने जेया रहा हू. तो वो भी बोली-

आंटी: मैं भी अकेली हू. घर वाले गाओं गये है. सो मैं भी चलती हू.

और हम शाम के 5 बजे जुहू बीच गये. वाहा का मौसम एक-दूं मस्त था, और हम नंगे पावं ही एक चटाई पे बैठ कर बातें करने लगे. आपको तो पता ही है बीच पे कपल बहुत आते है शाम को. और हमारे पास एक कपल किस्सिंग कर रहा था. लड़का बूब्स दबा-दबा के मसल रहा था.

उनकी सिसकियाँ हमारे कानो में गूँज रही थी, और आंटी मेरे पास सतत कर बैठी थी. हम दोनो एक-दूसरे को देखते रहे. अब हमने हग कर लिया, और पता नही चला कब हम एक-दूं से एक-दूसरे को स्मूच करने लगे.

उनके बड़े-बड़े बूब्स मैं सहलाते, उनके होंठो को चूस्टे, उनकी जीभ बाहर निकाल के चूस रहा था. वो भी मेरे होंठ चूस्टे हुए मेरे लंड को सहला रही थी.

मैं उनके ब्लाउस में हाथ डाल कर अब बूब्स दबाते पेट को सहलाने लगा. अब उनके बड़े-बड़े बूब्स को हल्के से बाहर निकाल के मूह में लेके चूसने लगा. मैने मेरा सर उनकी गोद में रखा था. वो भी अपने पल्लू से मुझे चुपके अपने बूब्स चुस्वा रही थी.

अब मैं वैसे ही एक-एक बूब को बारी-बारी से जितना हो सके मूह में लेकर चूसने लगा. वो भी सिसकियाँ लेते मेरे बालों को खींचती, और ज़्यादा बूब्स पर दबा के चुसवाने लगी. उनकी साँसे बहुत तेज़ हुई थी. और वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ लेते मेरे से बूब्स चुस्वा रही थी.

मैं भी उनकी जांघों पर सर रगड़ते, बूब्स को चूस्टे कभी उनके निपल्स को दांतो में पकड़ कर ज़ोर से बाहर खींचता. फिर हल्के-हल्के से लोवे बीते करते, चूस्टे हुए अब उनकी सारी में हाथ डाल कर गड्राई नंगी जांघों को सहलाने लगा.

मेरे गाल जब उनकी नंगी जांघों पर सतत गये, तो गर्माहट के एहसास और काम-वासना भरे बदन की प्यास मुझे महसूस होने लगी.

उनके बदन की गर्माहट और काम-वासना से तपते हुए बदन की महक से मुझे उनकी छूट चाटने का मॅन होने लगा. मैं उनकी गोरी-गोरी गड्राई भारी जांघों को चाट-ते, लोवे बीते करते, अब उनकी मस्त पनटी पर मेरे मूह से गरम साँसे फूँकने लगा.

अब मैं उनकी पनटी के उपर से ही उनकी छूट को मूह में भरने लगा. मैं उनके पेट पर और गहरी नाभि में उंगलियों से सहला भी रहा था. वो ज़ोर-ज़ोर से आहें भरते कसमसने लगी. मैने अब हल्के से पनटी निकालते हुए खुली नंगी फूली हुई छूट पर अपनी सांसो को फूँकना शुरू किया.

उन्होने अपनी गांद उठा कर मुझे पनटी खोलने में सहयता कर दी. अब मैं हल्के से उनकी छूट की कमसिन लकीर को जीभ नुकीली बना कर चाटने लगा. फिर हल्के-हल्के जीभ को उनकी छूट के सुराख में डाल कर जीभ फड़फड़ने लगा.

मानो जैसे कुत्ता या बिल्ली दूध पीते अपनी जीभ लपलपते है, वैसे उनकी छूट पर जीभ से लपलपते चाट रहा था, और चूस रहा था. जैसे ही मैं उनकी छूट को पूरा मूह में भर कर चूसने लगा, उन्होने मेरे सर को कस्स कर अपनी जांघों के बीच जकड़ते अपनी छूट पर दबाना शुरू किया.

आह अया ऑश उनकी सिसकारी के रूप में उनकी काम-वासना अब बाहर निकालने लगी. अब बीच-बीच में वो मेरे सर को पकड़ के अपने मूह में मूह डाल-डाल कर स्मूच कर रही थी. वो अब फिर मेरा सर छूट पर दबा के चूसने को मजबूर कर रही थी.

अब मैं भी उनकी छूट के दाने को यानी ग-स्पॉट को बाहर खींच-खींच कर चूस रहा था. वो पागलों की तरह मेरे बाल खींच के मेरा सर अपनी छूट पे दबाते अपनी गांद उठा-उठा कर छूट चुसवाने का मज़ा ले रही थी. अब वो मेरे लंड को सहलाते हिलाते मेरे सूपदे को देख कर सहलाने लगी.

वो अब नीचे झुक कर मेरे लंड को मूह में लेकर चूसने लगी. वैसे मेरा लंड 6.7″+ का है, और मेरे लंड का सूपड़ा एक-दूं मस्त चोकॉलती और बड़ा है. अगर किसी को देखना होगा तो मैल कर देना, मैं दिखा दूँगा. अब वो एक मस्त रफ़्तार से बड़े ही प्यार से लंड चूस रही थी.

कभी-कभी बाहर निकालती, और सिर्फ़ सूपदे को मूह में लेकर चूस्टी. कभी मेरी गोतिया सहलाती. मेरे बदन में एक अजीब सी सिरहन दौड़ जाती उसके ऐसा करते ही. शाम को बीच पर ठंडी हवा ने तो और माहौल मस्त बना दिया. हमारे बदन हवा के झोंको के साथ थरथरते काम-वासना में जैसे नहा रहे थे.

अब हम दोनो झट से कस्स कर गले लग कर स्मूच करने लगे. मैं उनकी पीठ को सहलाते, बूब्स दबाते, कभी पेट को सहलाते कुरेदने लगा. अब हमने चटाई पे लेट कर कस्स कर एक-दूसरे के बदन को बदन से घिसते रगड़ते स्मूच करना चालू किया. हम थोड़े झाड़ी के पास किसी को आसानी से नही दिखाई दे, ऐसी जगह पर थे.

अब उन्होने ब्लाउस खोला, और सारी को कमर तक ले लिया. स्मूच करते मैने वेनिला फ्लेवर का कॉंडम लगा के उनकी रस्स टपकाती छूट पर घिसना शुरू किया. अब मैं उनके फेस पर हर जगह किस की बौछार कर रहा था. बूब्स दबा रहा था, गांद सहला रहा था. मैं जांघों से जांघें सहलाते पैरों से पैर रग़ाद कर पूरा बदन जितना हो सके एक-दूसरे के बदन पर रग़ाद रहा था.

अब उसने मेरे लंड को छूट पर सेट करके आँखों से मुझे इशारा किया. मैने अपनी गांद को आयेज-पीछे करते धीरे-धीरे उनकी छूट की नाज़ुक पंखुड़ियों को फैलते पूरा लंड छूट में डाल दिया. उनकी छूट ने मेरे लंड को चारो तरफ से जकड़ते गर्मी से सेकना शुरू किया.

अब हम स्मूच करते-करते मिशनरी पोज़ में गांद उठा-उठा कर चुदाई का मज़ा लेने लगे. वो भी मेरे होंठ चूस्टे मेरे हर झटके का गांद उठा-उठा कर जवाब देते मेरा साथ दे रही थी.

अब मैं पागलों की तरह गांद उठा-उठा कर छोड़ रहा था. तो कभी बीच-बीच में पूरा लंड छूट में डाल कर मेरी गांद आयेज-पीछे उपर-नीचे इधर-उधर करता. ताकि मेरे लंड का एहसास उसकी पूरी छूट के हर एक जगह को करवा साकु. ऐसे करते ही वो मुझे और कस्स कर जाकड़ के स्मूच करने लगती.

अब हमारी स्मूच करते मिशनरी पोज़ चुदाई से हमारे बदन अपनी काम-वासना शांत करने में लगे थे. ठंडी हवा के झोके के साथ हमारे बदन पर मानो सुरसुरी दौड़ गयी, और हम दोनो ने काम-रस्स से नहाना शुरू किया.

हमारे बदन थरथरते सिहर उठे.

उसकी छूट ने गरम-गरम पानी से मेरे लंड को नहलाया. मैने भी इस काम-रस्स के झरने में मेरे लंड का काम-रस्स छ्चोढ़ दिया छूट में. हम वैसे ही थोड़ी देर लेट कर आसमान में तारों को देखते लेते रहे एक-दूसरे की बाहों में.

तो कैसी लगी हमारी चुदाई ज़रूर बताना. अभी मैं मुंबई में जॉब करता हू. बेल्गौम कोल्हापुर से रिलेटेड हू. अगर किसी लॅडीस, आंटी, भाभी, या गर्ल को सीक्रेट फ्रेंडशिप और एंजाय्मेंट करना होगा, तो मुझे ज़रूर मैल कीजिएगा. मेरी एमाइल ईद है [email protected]

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