हेलो फ्रेंड्स, मैं प्रीथनका गुप्ता आज काफ़ी वक़्त बाद अपनी नयी सेक्स स्टोरी लेके आ गयी हू. मुझे भूल तो नही गये ना? जिन लोगों ने मेरी पहले की कहानियाँ नही पढ़ी, वो उनको ज़रूर पढ़े. चलिए अब मैं अपनी आज की कहानी शुरू करती हू.
सबसे पहले मैं अपने बारे में बता देती हू. मैं 23 साल की हू, और मेरा फिगर 34-29-36 है. रंग मेरा गोरा है, और जो भी लड़का या मर्द मुझे एक बार देख ले, वो मेरा दीवाना हो जाता है. लेकिन मैं इतनी आसानी से किसी के हाथ नही आती. मैं पुंजब के लुधियाना से हू. इस कहानी में मैं आपको बताती हू, की कैसे मुझे पापा ने चेकिंग के बहाने छोड़ा.
बात कुछ महीनो पहले की है. मम्मी-पापा, और मेरा भाई किसी फंक्षन में गये हुए थे. मुझे ऑफीस से एक इंपॉर्टेंट प्रॉजेक्ट मिला था, जिस पर अभी बहुत काम बाकी था. इसलिए मेरे पास टाइम नही था, तो मैने फंक्षन पर जाने से माना कर दिया.
घर वालो के जाने के बाद मैने काम शुरू कर दिया, और 3 घंटे लगी रही. उसके बाद टाइम देखा तो 11 बाज रहे थे, और मुझे नींद आने लग गयी थी. लेकिन काम पूरा होने में अभी भी 2-3 घंटे लगने वाले थे. इसलिए मैने सोचा नहा कर फ्रेश हो जाती हू.
फिर मैं बातरूम में जेया कर नहा कर आई, और उसके बाद रेड शॉर्ट्स और वाइट त-शर्ट पहन ली. अब मैं फिर से काम में लग गयी. शुरू-शुरू में तो मैं फ्रेश फील कर रही थी, लेकिन एक घंटे बाद नींद फिर से आने लगी.
फिर मैने सोचा की क्यूँ ना सिगरेट पीते-पीते काम करू. दोस्तों मुझे सिगरेट पीते हुए कभी नींद नही आती. लेकिन मेरे घर पे इस बात का नही पता था की मैं कभी-कभी सिगरेट पीटी हू.
फिर मैने अपनी च्छुपाई हुई सिगरेट की पॅकेट में से एक सिगरेट निकली, और उसको जलाया. अब मैं काश लगते हुए काम करने लगी. मेरी कॉन्सेंट्रेशन भी बढ़ गयी थी. काम करते-करते मुझे पता ही नही चला की कब पापा घर के अंदर एंटर हुए, और कब मेरे रूम में मेरे पीछे आके खड़े हो गये.
दरअसल पापा अपना पर्स घर पर भूल गये थे, इसलिए वो मम्मी और भाई को फंक्षन पर छ्चोढ़ कर वापस आए थे. उनके पास घर की चाबी रहती है, इसलिए वो मुझे सोई हुई समझ कर चुप-छाप अंदर आए थे, ताकि मई डिस्टर्ब ना हू. लेकिन यहाँ तो उनको कुछ और ही देखने को मिल रहा था.
फिर उन्होने मुझे आवाज़ लगाई: प्रीथनका!
उनकी आवाज़ सुन कर मेरी गांद फटत गयी. मैं पीछे मूडी, और उनको देखा. मेरे मूह में सिगरेट थी, जो मूह से गिर गयी. फिर मैं बोली-
मैं: पापा आप यहाँ कैसे? आप तो गये थे फंक्षन पर.
पापा: मेरा पर्स रह गया घर पर वो लेने आया था. लेकिन ये सिगरेट कब से पी रही हो तुम?
मैं: वो पापा कॉन्सेंट्रेशन नही बन रहा था तो फ्रेंड ने कहा की इससे बन जाएगा.
पापा: ये क्या बकवास है! फिर तो सारे ही पीना शुरू कर दे. सच बताओ कब से पी रही हो.
मैं: पापा आज ही एक लेके आई हू फ्रेंड से. एक ही थी.
पापा: झूठ मत बोलो.
मैने सिगरेट का पॅकेट अपनी शॉर्ट्स की अंदर वाली जेब में रखा था, जो बाहर से नही दिख रहा था. मुझे लगा यहाँ तक पापा कभी नही पहुँचेंगे. लेकिन वो बोले-
पापा: इधर आओ मुझे चेकिंग करनी है.
ये सुन कर मैं घबरा गयी की कहीं उनके हाथ लग गया पॅकेट तो? बुत मुझे ये भी था, की इतनी अंदर तक नही जाएँगे. फिर पापा चेर पर बैठ गये, और मैं उनके पास जाके खड़ी हो गयी. उन्होने मेरे घुटनो पर हाथ रखे, और दबाते हुए चेकिंग करने लगे.
पहले उन्होने मेरे घुटनो पर हाथ फेरा. फिर उपर की तरफ आने लगे. उन्होने मेरी जांघों पर हाथ फेरा और उनको दबाया. ना-जाने क्यूँ, लेकिन इससे मुझे अजीब सी फीलिंग आने लगी. उसके बाद पापा मेरी गांद पर अपने हाथ लेके आए, और मेरे छूटाओं को दबाने लगे. इससे मैं गरम होने लगी.
मेरी छूट ने चुदाई का स्वाद ले रखा था. और बहुत वक़्त हो चुका था चुड़े हुए, तो एक मर्द के स्पर्श से मुझे वैसी वाली फीलिंग आने लगी.
छूतदों पर हाथ फेरते हुए पापा आयेज हाथ लेके आए, और जांघों पर फेरने लगे. वहीं पर सिगरेट का पॅकेट था. जैसे ही उनको पॅकेट महसूस हुआ वो बोले-
पापा: निकाल इसको.
मैं: पापा कुछ नही है. कपड़ा है वो.
पापा: ड्रामा मत कर.
मैं: नही पापा, कुछ नही है.
पापा: रुक मैं अपने आप निकाल देता हू.
ये बोल कर पापा ने मेरी शॉर्ट्स के अंदर अपना हाथ डालने लगे. मैने शॉर्ट्स को कमर से कस्स कर पकड़ लिया, ताकि उनका हाथ अंदर ना जाए. लेकिन पापा भी पूरी कोशिश करने लगे हाथ अंदर डालने की.
जैसे-तैसे पापा का हाथ शॉर्ट्स के अंदर चला गया. मैने सोचा पीछे हो जाती हू, तो मैने पीछे की तरफ ज़ोर लगाया. पापा ने शॉर्ट्स खींचा, और वो नीचे उतार गया. अब शॉर्ट्स मेरी गांद के नीचे आ चुका था, और मेरी वाइट पनटी आराम से दिख रही थी. तभी पापा बोले-
पापा: मेरा हाथ पॅकेट तक पहुँच चुका है. अब तू पकड़ी गयी है. ज़ोर लगाने का कोई फ़ायदा नही है. ज़िद छ्चोढ़ दे.
अब मुझे भी लगा की मैं पकड़ी तो जेया ही चुकी थी, तो ज़ोर लगा कर भी कोई फ़ायदा नही था. इसलिए मैं उनके पास होके सीधी खड़ी हो गयी. मेरी शॉर्ट्स टाइट थी, तो पापा ने शॉर्ट्स थोड़ी और नीचे की, और अंदर वाली पॉकेट में हाथ डाल कर सिगरेट का पॅकेट बाहर निकाल लिया. फिर पापा बोले-
पापा: तू तो कह रही थी की तेरे पास एक ही सिगरेट है. तो फिर ये कोई बाहर से आके डाल गया तेरी जेब में.
पापा ने पॅकेट हाथ में पकड़ा था. तभी उनको पॅकेट की एक साइड पर कुछ गीला-गीला महसूस हुआ. उन्होने उंगली फेर कर देखा, और उनको कुछ चिपचिपा सा लगा. फिर उन्होने मेरी शॉर्ट्स की तरफ देखा और बोले-
पापा: ये गीला क्यूँ है?
मैने बोला: पता नही पापा.
और ये बोलते हुए मैने नीचे देखा. मैने देखा की मेरी पनटी छूट वाली जगह से गीली हुई पड़ी थी, क्यूंकी पापा के छ्छूने से मैं उत्तेजित हो गयी थी. ये देख कर मैने पापा की तरफ देखा, की कहीं उनकी नज़र वहाँ ना पद जाए.