बाप और बेटी में पहले सेक्स की हॉट कहानी

ही फ्रेंड्स, लास्ट स्टोरी में आपने पढ़ा की कैसे मुझे पापा का इरादा पता चला, की वो मेरे साथ सेक्स करना चाहते थे. उन्होने मुझपे एक्सट्रा ध्यान देना शुरू किया, और मुझे घूमने वग़ैरा ले जाने लगे.

पापा या मैं, हम दोनो में अंदर आग तो लगी ही थी. पर चिंगारी कौन लगाए ये दुविधा थी. हम इनडाइरेक्ट्ली अप्रोच कर रहे थे, पर डाइरेक्ट सिग्नल कोई दे नही रहा था. मैने सीमा से पूछा, तो उसने मुझे बताया की मुझे ही पहल करनी पड़ेगी.

तो उस नाइट जब हम डाइनिंग टेबल पे खाना खा रहे थे, तब मैने अपना पैर पापा को टच किया. पर उन्होने पैर हटा दिया. मैने 2 से 3 बार ट्राइ किया, पर उन्होने रेस्पॉन्स नही दिया.

दूसरे दिन पापा मेरे सामने नही बैठे, पर मेरे बगल में आ कर बैठ गये. मुझे लगा उनको कल की हरकत पसंद नही आई, या मों का दर्र होगा. इसलिए वो आज मेरे सामने नही बैठे.

खाना खाते वक़्त मैने अपनी जांघों पर कुछ महसूस किया. मैने पापा की और देखा, तो वो आराम से खाना खा रहे थे. पर उनका दूसरा हाथ मेरी थाइ पे था, और उसे सहला रहे थे. ये देख कर मेरे चेहरे पे स्माइल आ गयी.

अगले दिन, उन्होने तोड़ा आयेज बढ़ कर मेरी छूट को उपर से सहलाया. तो मैं रेस्पॉन्स में अपना हाथ उनके लंड के उपर रख कर उन्हे रगड़ने लगी. वो भी मज़े ले रहे थे. मों ने उन्हे पूछा की क्या कुछ प्राब्लम थी. तो उन्होने ना में सिर हिला कर मेरा हाथ हटा दिया.

अब आग आचे से सुलग रही थी, और हमे बस एक चीज़ की तलाश थी, मौका. क्यूंकी मों हर वक़्त पास में ही होती थी, तो वो नही मिल रहा था. पर नेक्स्ट वीक मों को अपनी फ्रेंड के यहा एक पार्टी में जाना था. तो उन्होने पापा को रेडी किया हुआ था साथ में चलने के लिए.

मों: बेटा तुम और भाई दोनो सही से रहना, हम जितना हो सके उतना जल्दी वापस आएँगे.

मे: मों, बारिश का मौसम है, और आपको तो पता ही है की मुझे बादलों की आवाज़ से कितना दर्र लगता है.

मों: तो तेरा भाई है तो सही.

मे: वो तो बस अपने मोबाइल में ही लगा रहता है पुर टाइम. और आपके जाने के बाद वो अपने फ्रेंड्स के साथ घूमने चला जाएगा. इससे अछा है आप भाई को साथ ले जाओ, और पापा को घर पे रहने दो. क्यूँ पापा, सही कहा ना मैने? (और मैने पापा की और देखा)

पापा: क्या, अर्रे हा. सही कहा. तुम छ्होतू को ले जाओ, वैसे भी मैं तुम्हारी लॅडीस पार्टी में मैं बोर हो जौंगा. फिर तुम्हे जल्दी घर वापस आने को बोलूँगा. अगर तुम छ्होतू को ले जाओगी, तो तुम जितनी देर चाहो अपनी फ्रेंड्स के साथ एंजाय कर सकती हो.

तो फिर ये डिसाइड हुआ, और वो दोनो निकल पड़े. घड़ी में तकरीबन शाम के 5:30 बाज रहे थे, और घर में हम दोनो अकेले थे, और हम दोनो के बीच में तूफान के पहले की शांति थी.

पापा ने उठ कर सबसे पहले गाते को आचे से लॉक किया, और वाहा सोफे पर मेरे बगल में आ कर बैठ गये. उन्होने अपने हाथो में मेरा हाथ रखा, और कहा-

पापा: उस दिन, तुम फोन पे थी ना?

मे (अंजान बनते हुए): कब पापा?

पापा: जिस दिन तुम अपनी फ्रेंड सीमा के घर पे रुकी थी. मैने अपनी आँखें झुका ली, और शरमाने लगी.

पापा: बेटा शरमाओ मत, इस आगे में ये सब होता है. मुझको भी हुआ था. तुम्हारी मों को भी हुआ था, इट’स नॅचुरल. पर हमे इसमे सावधानी कैसे रखनी चाहिए, ये इंपॉर्टेंट है. और मैं पापा होने के साथ-साथ तुम्हारा फ्रेंड भी हू. हू ना?

मे: जी पापा.

पापा: तो मेरा ये फ़र्ज़ है की मैं अपने दूसरे फ्रेंड की हेल्प करू, और उनको वो सब सीखौ जो उन्हे इस आगे में सीखना चाहिए. क्या तुम मुझसे सीखोगी वो सब?

मे: मैने नज़रे नीचे झुका कर ब्लश करने लगी थी.

पापा (मेरे कंधो को सहलाते हुए): ऐसे नही बेटा, मेरी आँखों में आँखें डाल कर कहो, की क्या तुम रेडी हो?

मे (अपनी नज़रे उठा कर पापा की आँखों में देखते हुए): एस पापा, मैं रेडी हू.

ये सुनते ही पापा ने मुझे अपनी और खींचा, और अपने होंठ मेरे होंठो पर जड़ दिए. उनका एक हाथ मेरे सिर के बालों में था, तो दूसरे से वो मेरे बूब्स मसल रहे थे. मैं भी उनको साथ देने लगी, और हम स्मूच करने लगे. माहौल पूरा गरम हो चुका था. हम दोनो ने अपने उपर के कपड़े निकाल दिए. पापा उपर से नंगे और मैं ब्रा में थी.

उन्होने ब्रा में ही मेरे बूब्स को दबोचना शुरू किया, और उन्हे मसालने लगे. मैं काफ़ी एग्ज़ाइटेड थी. उनका मेरी बॉडी को टच करना मुझे पागल कर रहा था. वो मेरी ब्रा को निकालने के लिए हुक पे हाथ लगाया, तो मैने रोक दिया.

पापा: क्या हुआ बेटा?

मे: पापा, यहा इस मैं हॉल में तोड़ा अनकंफर्टबल लग रहा है.

पापा: ठीक है फिर, अंदर बेडरूम में चलते है (और पापा ने मुझे गोद में उठा कर मेरे बेडरूम में ले आए).

मुझे बेड पे लिटा कर उन्होने मुझे फिरसे मसलना शुरू कर दिया. इस बार उन्होने मेरी ब्रा को मेरी छ्चाटी से अलग कर ही दिया. मेरे नंगे बूब्स को वो ऐसे देखने लगे, जैसे किसी प्यासे के आयेज तरबूज़ रखा हो. उन्होने मेरे बूब्स को अपने मूह में लेकर उन्हे चूसने लगे, और मैं उनके बालों को सहलाने लगी. कुछ देर बाद हमने अपने नीचे के कपड़े भी निकाल दिए, और हम दोनो अब सिर्फ़ अंडरवेर में ही थे.

सबसे पहले अपनी पंत निकाल कर उन्होने मेरा ट्राउज़र भी निकाल फेंका. फिर मेरी बॉडी को उपर से नीचे तक चूमने लगे. सच कहा था सीमा ने की मेच्यूर आदमी के साथ सेक्स करने का मज़ा ही कुछ और होता है. अगर पापा की जगह कोई नौजवान लड़का होता तो थोड़ी चुम्मा-छाती, थोड़ी देर बूब्स दबा कर सीधा छोड़ने की बात करता.

पर मुझे मॅन में ये खुशी थी की मैने अपनी छूट की सील पापा के लंड से तुड़वाने का फैंसला किया. क्यूंकी अगर मैं ऐसा नही करती तो ये वाला एक्सपीरियेन्स शायद मुझे नही मिल पाता. मैं मॅन से पहले ही अपनी छूट पापा को दे चुकी थी. अब बस उसमे उनका लंड का घुसना बाकी था. जिसका मैं बेसब्री से इंतेज़ार कर रही थी.

पापा ने मुझे फिरसे चूमना स्टार्ट किया. पर इस बार अपना हाथ मेरे बूब्स पे से हटा कर मेरी पनटी में डाला, और मेरी छूट को सहलाने लगा. पहली बार मेरी इस जवान छूट पर किसी मर्द का हाथ लग रहा था. वो किस करते-करते मेरी छूट के दाने को सहलाने लगे, और मेरी छूट में हल्की सी उंगलियों को डालने लगे. मेरे मूह से आ निकालने लगी. मैं जैसे आसमान में उड़ने लगी.

फिर पापा ने मेरे हाथ अपने लंड के उपर रख दिए. मैं उनका इशारा समझ गयी, और मैने बिना देरी किए अपना हाथ उनके अंडरवेर में डाल कर उनके लंड को दबोच लिया. वाउ, क्या मस्त फील हो रहा था. जिन लड़कियों ने फर्स्ट टाइम अपने पार्ट्नर का लंड अपने हाथो में या मूह में लिया हो, उनको पता ही होगा, ये फीलिंग.

मैने उनके लंड को मसालने लगी, और वो मेरी छूट को रगड़ने लगे. अब बस कुछ ही देर के बाद हम दोनो का मिलन होने वाला था. कुछ देर बाद पापा खड़े हुए, और मुझे नीचे बिता कर मेरे मूह के आयेज खड़े हो कर मुझे पूछा.

पापा: बेटा, अपने पापा का लंड मूह में लॉगी?

मे: जी पापा, ज़रूर लूँगी.

और मैने जैसे ही पापा के अंडरवेर को नीचे खिसकने के लिए पकड़ा, तभी घर की डोरबेल बाजी. डोरबेल सुन कर हम दोनो की फटत गयी की इस वक़्त कों आ गया हमारे खेल को खराब करने, जानिए अगले पार्ट में.

तो आयेज क्या होता है? क्या मैं पापा से चुड जाती हू, या नही? ये पढ़िए नेक्स्ट पार्ट में. अपने व्यूस/कॉमेंट्स हमारी एमाइल ईद लज़्यलीहास@गमाल.कॉम पे ज़रूर भेजिएगा.

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