बाप और बेटी की फ्रेंड की चुदाई की कहानी

ही दोस्तों, मेरा नाम अविनाश है. मैं अपनी कहानी का अगला पार्ट लेके आया हू. उमीद करता हू की आपने पिछला पार्ट पढ़ा होगा, और वो आपको पसंद भी आया होगा.

पिछले पार्ट में आप सब ने पढ़ा था, की कैसे मैने अपनी बेटी शाईना को किसी लड़के के साथ देखा, और मेरी उसके लिए नीयत बुरी हो गयी. अब मैं उसको छोड़ना चाहता था, और उसके लिए मैने उसकी फ्रेंड दीपिका की हेल्प लेने की सोची.

फिर मैं दीपिका को कॉलेज के बाहर मिला, और उसको लगा मैं उसको छोड़ना चाहता था. इसलिए उसने मुझसे 5000 माँगे. और मैने भी उसको पैसे दे दिए.

फिर जैसे ही मैं उससे शाईना की बात करने लगा, तो उसने मेरे होंठो पर अपनी फिंगर रख दी. अब आयेज चलते है.

दीपिका ने मेरे लिप्स पर फिंगर रखी, तो मैं चुप हो गया. फिर वो नीचे झुकी, और उसने मेरी पंत की ज़िप खोलनी शुरू कर दी. मैं फिरसे बोलने लगा तो उसने मुझे “श” बोल दिया.

फिर उसने मेरा लंड बाहर निकाला, और उस पर किस किया. उसके किस करते ही मैं समझ गया की उसने मुझसे चूड़ने के पैसे लिए थे. मैने सोचा की बेटी को बाद में छोड़ लेंगे, पहले इस लड़की की छूट की प्यास बुझा दी जाए.

फिर दीपिका ने मेरा लंड अपने मूह में ले लिया, और उसको चूसने लग गयी. बड़ा मज़ा आता है, जब एक कॉलेज की लड़की आपका लंड चूस्टी है. मुझे भी स्वर्ग ही नज़र आ रहा था. मेरे सामने उसकी बॅक थी, और उसकी गांद थी, जो उभरी हुई थी.

मैने उसकी गांद पर अपना हाथ रखा, और उसको दबाने लग गया. दीपिका बड़े आचे से मेरा लंड चूस रही थी, जैसे कोई प्रोफेशनल हो. फिर मैने उसके सर पर अपना हाथ रखा, और कमर हिला कर अपने लंड से उसके मूह में धक्के मारने लगा.

गल्प-गल्प की आवाज़ आने लगी, और उसके मूह से थूक निकल कर मेरे लंड पर बह रही थी. उसके मूह की गर्माहट मेरे लंड को और भी सख़्त कर रही थी. फिर मैने उसके टॉप को पीछे से पकड़ा, और उसको उठा कर उसकी पीठ पर किस करने लगा.

उसके बाद मैने उसका टॉप उतार दिया. अब वो मेरे सामने ब्रा और जीन्स में थी. मैने उसको अपनी तरफ खींचा, और अपनी गोद में बिता लिया. फिर मैं उसके होंठ चूसने लगा. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. मैं अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबा रहा था. वो मस्त हुई जेया रही थी.

फिर मैं अपना मूह उसके बूब्स पर ले गया. मैने एक-एक करके उसके मस्त बूब्स को चूसना शुरू कर दिया. बड़ा मज़ा आ रहा था. जवान लड़की एक सख़्त बूब्स चूसने का तो मज़ा ही कुछ और है. मैं रोमॅन्स करने में इतना बिज़ी हो गया था, की मैं भूल ही गया था की मैं एक पब्लिक प्लेस पर था.

फिर मैने उसको वापस उसकी सीट पर भेजा, और उसको अपने ऑफीस ले गया. मेरे कॅबिन में एक रेस्ट रूम भी है, जहा पर एक सिंगल बेड भी है. जैसे ही मैं अपने कॅबिन में उसको लेके गया, वो मेरे ऑफीस टेबल पर जाके बैठ गयी, और उसने अपनी टॉप आंड ब्रा उतार दी.

मैने भी अपने कपड़े उतार दिए, और मैं अब सिर्फ़ अंडरवेर में था. फिर मैं उसको दोबारा किस करने लगा, और उसके बूब्स चूसने लगा. मैने अपने टेबल पर से समान हटाया, और उसको वही लिया लिया. फिर मैने उसकी जीन्स उतारी, और अब वो मेरे सामने पनटी में थी.

उसकी सेक्सी जांघें देख कर मैं पागल हो गया, और उसकी जांघों को चाटने लगा. मैने उसके पैरों से लेके उसकी जांघों तक की जगह को चाट-चाट कर अपनी थूक से गीला कर दिया. फिर मैने उसकी पनटी को कमर से पकड़ा, और उसको नीचे उतार दिया.

अब उस रंडी की क्लीन-शेव्ड छूट मेरे सामने थी. उसकी छूट को देखते ही मेरे मूह में पानी आ गया. मैने अपना मूह उसकी छूट पर लगा लिया, और उस पर किस करने लग गया. वो कामुक सिसकारियाँ लेने लग गयी. फिर मैं धीरे-धीरे उसकी छूट पर जीभ फेरने लगा.

उसने अपना हाथ मेरे सर पर रख लिया, और अपनी छूट में दबाने लग गयी. फिर मैने ज़ोर-ज़ोर से उसकी छूट को चूसना शुरू कर दिया. मैं जीभ उसकी छूट के अंदर-बाहर करने लगा. वो मदहोश हो रही थी, और आ आ श की आवाज़े निकाल रही थी.

मैं उसकी छूट को अपने दांतो से काटने और रगड़न लगा. इससे उसको दर्द भी होता, और मज़ा भी आता. अब वक़्त आ गया था उसकी जवान छूट को छोड़ने का. मैने अपना अंडरवेर उतार दिया, और लंड हाथ में लेके मसालने लग गया.

उसने लंड की तरफ देखते हुए बोला: अंकल आपका लंड काफ़ी बड़ा और मोटा है. इसको ज़रा आराम से डालना. इतना बड़ा लेने से दर्द होता है.

फिर मैं लंड को उसकी छूट पर रग़ाद कर उसको तड़पाने लगा. वो आहह आ करने लगी, और मुझे लंड अंदर डालने को बोलने लग गयी. लेकिन मैं उसको तड़पता रहा. मैं बार-बार लंड उसकी छूट के मूह पर तोड़ा दबाता, और फिर उसको नीचे ले जाता.

लेकिन इस बार जैसे ही मैने लंड को उसकी छूट के मूह पर दबाया, उसने नीचे से गांद उठा कर लंड अंदर ले लिया. साथ ही उसने अपनी टांगे मेरी कमर पर लपेट ली, ताकि मैं लंड निकाल ना पौ. फिर वो बोली-

दीपिका: छोड़ो अंकल मुझे.

मैने भी ज़ोर से धक्का मारा, जिससे उसकी चीख निकल गयी, और पूरा लंड उसकी छूट में समा गया. उसको दर्द होने लगा, लेकिन मज़ा भी आ रहा था.

फिर मैं जानवरो की तरह ज़ोर के धक्के मारने लगा. पूरा टेबल हिल रहा था. लेकिन हम दोनो को बहुत मज़ा आ रहा था. अगले 20 मिनिट मैं उसी पोज़िशन में उसको छोड़ता रहा. इस बीच उसकी छूट एक बार पानी छ्चोढ़ चुकी थी. अब मेरा होने वाला था, तो मैने उसको बाते. वो बोली-

दीपिका: अंदर ही डाल दीजिए अंकल. मेरा भी होने वाला है. और मैं इसका मज़ा खराब नही करना चाहती.

फिर 20-30 धक्के मैने और मारे, और अपना सारा पानी उसकी कमसिन छूट में निकाल दिया.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. अभी शाईना की चुदाई बाकी है, तो कहानी को फॉलो करते रहिए. अपनी फीडबॅक आप कॉमेंट करके दे सकते है, की आपको कहानी कैसी लगी.

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