आयशा खान से सच्चा प्यार और चुदाई 2

आयशा खान से सच्चा प्यार और चुदाई जब आयशा नदी में कूदी तो आयशा का स्कूल ड्रेस ऊपर की तरफ उठा और आयशा की चिकनी चिकनी जांघे दिखी ,आयशा नदी में अठखेलिया करने लगी और बोली ”आपको तैरना नहीं आता है इस लिए आप डरते हो सर” तो मैंने बोला ”आता है तैरना पर कोई देख नहीं ले हम दोनों को इस लिए डरता हु” तो आयशा बोली ”सर आप को लड़की होना था,अल्ला मिया ने आपको लड़का बनाकर गलती किया ” इतना कहकर आयशा हसने लगी, तो मैं भी अपनी लुंगी-बनियान उतार कर नदी कूद गया और आयशा के साथ नहाने लगा आयशा के सर्ट की दो बटन को खोल दिया और चुचियो को सहलाने लगा , मैं पहली बार किसी लड़की की चूची को हाथ लगाया था क्या टाइट चुचिया थी आयशा की पानी में ही चुचियो को चूसने भी लगा, तो आयशा सर्मा गई और बोली ”रहने दो सर कोई आ नहीं जाए”तब मुझे आयशा की बात सही लगी और मैंने आयशा को बोला ” आशा तुम बाहर निकल जाओ पानी से नहीं तो पानी सुख जाएगा तुम्हारे वदन की गर्मी से ” तो आयशा हसने लगी और कुछ नहीं बोली हम दोनों करीब 15 मिनट नदी में खूब नहाये आपस में लिपट लिपट कर मेरा लण्ड फनफना उठा आयशा की चूत का रसपान करने के लिए, मैंने आयशा से कहा ”चलो उधर चलते है ” [जंगल की तरफ इसारा किया] तो आयशा बोली ”नहीं कोई आ जाएगा देख लेगा ” तो मैं मन मसोस कर रह गया और फिर आयशा को बोला ”चलो फिर बाहर निकलो” और हम दोनों पानी से बाहर आ गए , आयशा की स्कूल ड्रेस की सर्ट में से आयशा की चुचिया दिख रही थी मैंने आयशा को बोला ” आशा बटन लगा लो” तो आशा ने सर्ट की बटन लगा लिया | आयशा का गीला वदन साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था मैंने आयशा को बोला ‘आशा दुपट्टा रख लो मैं पागल हो रहा हु तुम्हे देखकर ” तो आयशा अपनी चुचिओ को दुपट्टे से ढक लिया और कुछ देर बाद दोनों नदी से अलग अलग रास्ते से घर चले आये किसी ने देखा भी नहीं |

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आयशा और लड़कियों को पढ़ाते पढ़ाते समय कब निकल गए पता ही नहीं चला मार्च का महीना आ गया [मैं 10 दिन से गाँव से अपडाउन करता था इस लिए आयशा की जानकारी नहीं मिली] एक दिन आयशा स्कूल नही आई तो उसकी एक फ्रेंड से पूछा तो पता चला की उसके अब्बु और अम्मी कही बाहर गई हुई है ओ दिन भर दूकान पर बैठती है मैं 5 बजे स्कूल से छूटा और आयशा के दूकान गया तो दूकान बंद मिली तो मैं दूकान के बगल में लगे छोटे सटर [जिससे घर के अंदर आते जाते है ] को खटखटाया तो कुछ देर में आयशा निकली एक कम्बल ओढ़े हुए , आयशा को देखते ही मैं समझ गया ये बीमार है तब मैं गली में घुसा और फिर भी मैंने उससे पूछ लिया ” क्या हुआ आशा” तो बोली ”बुखार आ रहा है ” तब मैंने पूछा की ”अब्बु कहा है” तो जबाब मिला ” बनारस गए है ” तब मैंने पूछा ”क्यों ” तो बोली ”मौसी का निकाह है ” फिर मैंने पूछा ”किस डाक्टर को दिखाया ” तो आयशा बोली ” किसी को नहीं दिखाया ” फिर मैंने पूछा कितने दिन से बुखार आ रही है ” तो बोली ”दो दिन हुए ” तब मैंने आयशा का वदन टटोला तो देखा की अभी भी खूब जोर की बुखार है

तब मैंने आयशा को बोला ” चलो मैं डाक्टर को दिखा दू ” तो पहले तो आयशा ने ना नुकुर किया पर मैंने आयशा का हाथ पकड़ा और बुलट में बिठाया और डाक्टर के पास ले गया और आयशा को दिखाया दवाई लाकर आयशा को वापस घर ले आया और आयशा को बिस्तर पर लिटा दिया और आयशा का सिर दबाने लगा तो आयशा ने हाथ पकड़ लिया और बोली ”इतनी सेवा मत करो सर ” तो मैंने कहा की ” दुःख में साथ नहीं दुगा तो कब दुगा ” और बहुत से बाते किया पर आयशा का घर बदबू मार रहा था बकरियो की गंध दिमाग खराब कर रही थी मुझे ऐसा लगे आयशा के घर से बहार निकल जाउ पर आयशा को इस हालत में छोड़ नहीं सकता था , कुछ देर में आयशा बोली ” आप जाइए सर,नहीं तो मुहल्ले वाले क्या सोचेगे आपकी इज्जत पर धब्बा लगेगा ” तो मैंने बोला ” सोचने दो तुम्हारी जान से बढ़कर मेरी इज्जत नहीं है ” पर आयशा बार बार यही कहे जा रही थी इस लिए मैं आयशा के घर से उठकर चला आया अपन कमरे पर साम को 7 बजे आयशा के पास फिर से गया तो देखा की उसकी बुखार अभी भी कम नहीं हुई तब एक टेबलेट और दिया जो दूध के साथ देनी थी पर आयशा के घर दूध नहीं था तो बाजार से दूध लाया और चूल्हे में गर्म किया और आयशा को जबरजस्ती दूध पिलाया और साम की दवाई खिलाया डाक्टर ने खाना खाने के लिए मना किया था

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