बुड्ढे ने चुदाई के लिए तैयार किया

तो सेक्स स्टोरी शुरू करते है. मेरा नाम विधया है. मेरी उमर 22 साल है. मैं कॉलेज की स्टूडेंट हू. अपने बारे में बतौ तो मैं एक छ्होटी हाइट की गोरी लड़की हू, और मेरा फिगर 32-28-32 है. मेरा कॉलेज घर से डोर है, तो मैं रोज़ ऑटो से जाती हू. पर एक दिन कुछ ऐसा हुआ, जिसकी मुझे उमीद नही थी. तो कहानी शुरू करते है.

मैं सुबा कॉलेज के लिए निकल रही थी. मैने रोज़ की तरह कुर्ता और पयज़ामा पहना था. मैने एक ऑटो रोका, और उसमे बैठ गयी. ऑटो में मेरे बगल में एक और लड़की थी, जो मेरे लेफ्ट में बैठी थी, और सामने 2 लड़के बैठे थे, और बगल में एक अधेड़ उमर का मोटा आदमी था.

वो आदमी 50 या 55 का होगा. तो मैं बैठ गयी और ऑटो आयेज बढ़ा. फिर कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ की कुछ था मेरी जाँघ पे. मैने देखा तो वो बुद्धा आदमी मेरी जाँघ पे हाथ रखा था. पहले मुझे लगा ग़लती से हुआ था, तो मैने हटा दिया. पर उसने दोबारा रख लिया. ऐसा काई बार हुआ.

मैने सोआचा सामने जाके बैठ जौ, पर सामने के लड़के मुझे घूरे जेया रहे थे. तो मुझे वहीं बैठे रहना सही लगा. फिर मैं शांति से बैठ गयी, पर तभी उसने हड्द कर दी, और अपना हाथ मेरी छूट पे ला दिया. मैं अचानक से काँप गयी, और उसे देखने लगी. वो हस्स रहा था, पर मुझे समझ नही आ रहा था क्या करू.

मैने फिर उसे हटाया और गुस्से से उसे देखा. पर वो कहा मानने वाला था. अब उसने अपना हाथ मेरी छूट पे दोबारा रख दिया, और अंदर ले जाने की ट्राइ करने लगा. मैं रोक रही थी, पर धीरे-धीरे अपना कंट्रोल खुद पे से खो रही थी. वो मेरे पयज़ामे का नाडा खोला, और हाथ से पनटी को टच करने लगा.

मैं रोक रही थी, और वो उतना ही आयेज बढ़ रहा था. मैने उसके हाथ पे नोचा. उसने वापस खींचा हाथ, और अपनी उंगलियाँ जिससे मेरी पनटी को च्छुआ था उनको दिखा के चाटने लगा. ये देख के मुझे मदहोशी चढ़ने लगी थी. मेरे निपल टाइट हो रहे थे.

अब वो हाथ पीछे करके पीछे से प्यज़ामे में डालने लगा, और गांद तक ले जाने लगा. मैं हाथ पीछे भी नही ले जेया सकती थी, क्यूंकी सब देख लेते. वो दबाए जेया रहा था मेरी गांद को. मेरी आँखें उपर हो रही थी, पर मैं कंट्रोल कर रही थी. उसका लंड पंत में पूरा खड़ा हो गया था.

फिर ऑटो वाले ने एक कट मारा, जिसकी वजह से मैं तोड़ा सा उसकी तरफ टेढ़ी हुई, तो मेरी गांद उठ गयी. उसने मौके का फ़ायदा उठाया, और मेरी गांद को एक-दूं नीचे तक चू लिया. अब गुस्से से मैने उससे देखा, और हाथ हटा दिया, इस बार बिना कुछ देखे.

फिर जब उसकी तरफ देखा, तो वो उस हाथ को सूंघ रहा था. ये सब चलता रहा. कभी वो पीठ छ्छूता, कभी कमर, और कभी जाँघ. अब वो जैसे ही मेरे कुर्ते के उपर से मेरी बूब्स छ्छूने ही वाला था, तभी ऑटो रुकी, और वो दोनो लड़के और वो लड़की सब उतार गये. मेरा कॉलेज आने में अभी टाइम था.

ऑटो फिर चली. बारिश का मौसम था, इसलिए ऑटो के दोनो तरफ पर्दे लगे थे, और सामने भी लगा था, जिससे ऑटो वाला हमे देख नही पा रहा था. मैं अब उससे डोर होके बैठ गयी, पर वो अचानक से पास आया और इस बार बूब्स चूसने लगा. मैने सोचा अब बहुत हो गया था, तो मैने बोला-

मैं: क्या बदतमीज़ी कर रहे हो आप तब से! अपनी बेटी के उमर की लड़की के साथ ये सब कर रहे हो, ची!

बुद्धा: देखो चिल्लओ नही, आराम से बोलो. तुम बहुत मस्त दिख रही हो तो कंट्रोल नही हुआ.

मैं: तो क्या ऐसे टच करोगे मुझे तुम?

बुद्धा: तो ब्फ नही छ्छूता क्या तुझे? और तू उसका ये नही लेती?

इतना कह के उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया. ये देख के मैं बिल्कुल चुप हो गयी. उसका बहुत बड़ा था, पर ऐसे बाहर निकाला देख के समझ नही आया क्या करू. वो फिर से मेरे बूब्स दबाने लगा. मैं होश में आई.

मैं: ये क्या कर रहे हो? इसे अंदर करो.

बुद्धा: कर दूँगा, बस एक बार बताओ कैसा है मेरा?

मैं: नही बताना.

उसने मेरा हाथ पकड़ के उपर रख दिया. फिर बोला-

बुद्धा: अब बताओ कैसा है?

मैं: ची!

इतना कह के उसने मेरे होंठ चूस लिए, और 10 मिनिट तक चूस्टे ही रहा. वो भी मेरे उपर आ कर मेरी छूट पे अपना लंड रग़ाद रहा था. मेरे हाथो को पकड़ के रखा था वो. उसकी छ्चाटी से मेरे बूब्स टच हो रहे थे. इसकी वजह से मैं सब भूल गयी, और अपने हाथ उसके गंजे सिर पे ले आई.

मैने उसको पास खीच लिया, और चूमने लगी. उस बुड्ढे ने किस तोड़ी और परदा उठा के ऑटो वाले से कहा-

बुद्धा: पूरी ऑटो बुक है (और एक पाते पे ले जाने को कहा, जो आधे घंटे डोर था. और उसे 500 रुपय दिए).

ऑटो वाला भी ऑटो चलाने लगा.

मैं: इतनी डोर से वापस कैसे अवँगी?

बुद्धा: मैं छ्चोढ़ दूँगा. वहाँ मेरा घर है. अभी वो छ्चोढो, और बस यहाँ ध्यान दो.

इतना कह के उसने मेरा दुपट्टा हटा दिया, और में बस शर्मा रही थी.

बूढ़ा: शर्मा क्या रही है साली, आजा लंड चूस.

पहले मैने माना किया, पर उसने मुझे फिर से चूमा और मैं उसकी दीवानी बन गयी. मैं उसके लंड को चूसने लगी, और वो मदहोश हो गया.

बूढ़ा: आह क्या मस्त चूस रही है. और चूस साली च्चिनाल. आहह मस्त चूस्टी है.

10 मिनिट चूसने के बाद मैने बाहर निकाला, और वो बैठ गया. मैं तुरंत उसके उपर गयी.

मैं: अब छोड़ दो ना मुझे.

बुद्धा: साली अभी तो थोड़ी देर पहले तुझे पसंद नही आ रहा था. अब कैसे मान गयी?

मैं: सेयेल बुड्ढे, चिंगारी लगाएगा तो आग फैलेगी ही. अब आजा, मैं पैर फैला रही हू.

बुद्धा मेरा पिजामा निकाला. वो कुर्ता निकालना चाहता था, पर मैने माना किया की अभी यहाँ सब ना निकाले. वो मान गया.

बुद्धा: मेरा नाम अनिल है, और तेरा?

मैं: आ विधया.

बुद्धा: तेरी छूट पे तो बाल भी है. मुझे बाल पसंद है.

मैं शर्मा गयी और उठ के उसका सर पकड़ी. फिर छूट पे लगा दी. बस फिर क्या, वो बुद्धा भेड़िया टूट पड़ा. मुझे क्या चूसा उसने, आज भी मज़ा आता है सोच के उफफफ्फ़.

मैं: आहह बुड्ढे, क्या चूस रहा है. लेले मेरी छूट, मेरी जवानी सब लेले. आज मैं तेरी.

अब बुद्धा उठा और बोला: तैयार हो जेया.

पर तभी उसने देखा हम पहुचने वाले थे. तो वो रुका, हमने कपड़े पहने, पर मेरा मॅन नही भरा था. मैं उसकी गोद में बैठी थी, और कहा-

मैं: अभी मैं अधूरी हू, प्लीज़ कर लो.

बुद्धा: नही अभी घर आने वाला है.

मैं: तो क्या करे?

बुद्धा (मेरे बूब्स दबाते हुए): साली च्चिनाल, अब कॉलेज तो टाइम से पहुँच नही पाएगी.

मैं: तो?

बुद्धा: छुट्टी कितने बजे होती है कॉलेज की?

मैं: 4 बजे.

बुद्धा: अभी 11 बजे है, तो मेरे फ्लॅट पे चल. 4 बजे तक तुझे पूरा मज़ा दूँगा. मैं खुश होके उसे चूमने लगी. फिर हम उतार गये, और उसके फ्लॅट में चले गये.

इसके आयेज अगले पार्ट में दोस्तों. प्लीज़ बताइए आपको कैसी लगी स्टोरी? जैसे ही आप लोग बताओगे, मैं नया पार्ट उपलोआड कर दूँगी.

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