आंटी की चुत पिंक वियाग्रा खिला कर चोद दी

रात को मैं आंटी के घर जल्दी चला गया.. उस वक्त आंटी खाना खा रही थीं। खाना खा कर जब हाथ धोने के लिए वे बाथरूम में गईं.. तो मैंने तुरन्त वियाग्रा का पाउडर आंटी के पानी में डाल दिया और वो पानी आंटी ने पी लिया। थोड़ी देर बाद वो सोने चली गईं और उन्होंने अपना दरवाजा बन्द कर लिया।

पांच मिनट बाद मैंने दरवाजा ठोक कर उन्हें आवाज दी और कहा- मेरे कमरे का पंखा बिगड़ गया है।

आंटी ने उस रूम में जाकर देखा तो पंखा नहीं चल रहा था.. इसलिए थोड़ा सोचने के बाद आंटी ने कहा- चलो कोई बात नहीं.. मेरे रूम का बेड बड़ा है.. उधर दो जन आराम से सो सकते हैं.. तुम मेरे साथ ही आ जाओ।

फिर मैं आंटी के पीछे-पीछे उनके कमरे में आ गया। उस दिन वो साड़ी पहन कर ही बेड पर आ गईं। आंटी के उस रूम में टीवी लगा था और वो हॉलीवुड की कोई मूवी देख रही थीं। ये मूवी मैंने पहले से देखी हुई थी.. इसलिए मुझे पता था कि मूवी में कब सेक्सी सीन आने वाले हैं।

थोड़ी देर में वियाग्रा भी अपना असर कर रही थी और आंटी अपनी जाँघों को खुजाते हुए अपनी चुत को मसलने लगीं।

मूवी में सेक्सी सीन थोड़ी देर में ही आने वाला था.. इसलिए मैं बाथरूम का बहाना करके बेड से उठ गया और थोड़ा दरवाजा खुला रख कर कमरे से बाहर से ही आंटी को देखने लगा।

मेरे कमरे में ना होने के कारण, आंटी अपने हाथ को चुत पर रख कर जोर-जोर से मसलने लगीं। मैं समझ गया कि इस वक्त आंटी को किसी का भी लंड मिलेगा, तो वो खुशी से चुदवा लेंगी, पर मैंने सोचा का लाईट के उजाले में आंटी को चुदवाने में शरमाने न लगें.. इसलिए मैंने लाईट की मेन स्विच बन्द कर दिया और रूम में जाकर आंटी से कहा- शायद पूरे मोहल्ले की लाईट चली गई है।

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फिर मैं बिस्तर पर लेट कर सोने का नाटक करने लगा। कमरे में अंधेरा होने के कारण आंटी बिना टेन्शन के अपनी चुत मसलने लगीं।

थोड़ी देर बाद मैं हिम्मत करके आंटी के नजदीक गया और अपने एक हाथ को आंटी की चुत पर रख कर चुत सहलाने लगा और धीरे से कहा- मेरी जान मैं कुछ मदद करूँ!

आंटी पहले से ही बहुत गरम हो चुकी थीं.. इस वजह से आंटी ने अपने हाथ से मेरे हाथ को अपनी गर्म चुत पर रख कर कहने लगीं- इसकी आग बुझा दो मेरे राजा।

इन हालात में मेरा लंड भी अपनी आंटी की चुत में जाने के लिए बेकरार हो रहा था।

फिर मैंने आंटी के होंठों को चूमना चालू कर दिया। आंटी भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं और हम दोनों एक-दूसरे को पागल प्रेमी के जैसे किस करने लगे।

थोड़ी देर बाद मैं आंटी के मम्मों पर हाथ रख कर दबाने लगा और आंटी चुदास में सीत्कारने लगीं ‘आआहह.. उईई.. आह..’
आंटी के मम्मे रुई जैसे मुलायम थे।

उनके इन रसीले मम्मों को हाथों में पकड़ कर प्यार करना मेरा सपना था.. जो आज रात पूरा हो रहा था।

मैंने आंटी का ब्लाउज निकाला.. तो आंटी की सफ़ेद रंग की ब्रा दिखाई दी। आंटी के आधे मम्मे ब्रा में से बाहर निकले हुए थे। आंटी के दूध जैसे सफ़ेद मम्मे देख कर मैं उन पर टूट पड़ा.. उन्हें जोर-जोर से दबाने लगा और काटने लगा।

आंटी को बहुत मज़ा आ रहा था और मीठा दर्द भी हो रहा था.. इसलिए वो सिसयाने लगीं- आआहह.. उईई.. आह..

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फिर मैंने आंटी की ब्रा निकाल कर उनके मम्मों को खुली हवा में उछलने के लिए खुला कर दिया और प्यार से उनका एक निप्पल चूसने लगा।

कुछ ही पलों में चुदास बढ़ गई और मैंने आंटी को पूरी नंगी कर दिया। अब मैंने उनको बिस्तर पर चित्त लेटा दिया और उनकी चुत पर हाथ फेरने लगा।

आंटी की पूरी चुत गीली हो चुकी थी। फिर मैंने अपने मुँह को चुत पर लगा कर अपनी जीभ से चाटने लगा।

वियाग्रा की मस्ती से अपनी चूत पर मेरी जीभ की छुअन पाते ही आंटी जोर-जोर से बोलने लगीं- फक मी.. फक मी बेबी.. आआहह.. उईई.. आह..

थोड़ी देर में आंटी अपनी चुत से पानी छोड़ने लगीं और मेरा पूरा मुँह पानी से भर गया।

फिर मैंने अपने लंड को आंटी के मुँह के सामने रख कर कहा- मेरी जान इसे भी प्यार करो ना!
इतना सुनना था कि आंटी ने जल्दी से मेरे लंड को अपने मुँह में डाल कर लॉलीपॉप के जैसे चाटने लगीं। कुछ ही देर बाद आंटी मेरा पूरा लंड अपने मुँह में गले तक ले रही थीं।

थोड़ी देर बाद मेरे लंड ने अपना सारा पानी आंटी के मुँह में ही छोड़ दिया और आंटी सारा पानी पी गईं।
फिर आंटी ने कहा- राजा, अब मत तड़पाओ और मेरी चुदाई चालू करो।

मैंने आंटी के दोनों पैरों को फैला कर अपने लंड को आंटी की चूत के छेद पर टिकाया और धीरे-धीरे लंड पेल कर उनकी चूत की चुदाई चालू कर दी।

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