अपनी और बेगानी मा की पलंग-तोड़ चुदाई की स्टोरी

हेलो दोस्तों, कैसे हो सभी? लास्ट पार्ट में आपने पढ़ा कैसे मैने मम्मी को 2 बार छोड़ा, और हम सो गये अपनी चुदाई ख़तम करके.

नेक्स्ट दे मॉर्निंग मम्मी पहले उठ गयी थी, और फ्रेश होके, घर की सॉफ-सफाई करके, रेडी होके ब्रेकफास्ट रेडी किया. फिर मुझे उठाया, और मैने भी फटाफट उठ के फ्रेश होके ब्रेकफास्ट किया.

हम लोग ब्रेकफास्ट कर रहे थे. तभी फ़ैज़न का कॉल आया, की वो और उसकी मम्मी उसके मामा के घर से निकल गये थे, और हमारे घर आ रहे थे. ये सुन के मम्मी ने फटाफट चेंज किया, क्यूंकी मम्मी अभी भी शॉर्ट/हाफ पंत में थी.

दिन के 12 बजे तक वो सब भी आ गये. वो लोग फ्रेश होके बैठे, और फिर हम लोग बाहर लंच का प्लान बनाते है.

फ़ैज़न बोलता है: कही रेस्टोरेंट में चलते है खाने के लिए.

सब लोग अग्री करते है. फिर हम सब जाते है, और काफ़ी हेवी लंच करके आ जाते है. घर आके फ़ैज़न और मैं बात कर रहे होते है. मैने उसको बताया, की मैने मम्मी को छोड़ा कैसे-कैसे.

फिर फ़ैज़न बोलता है: मुझे भी अपनी अम्मी को छोड़ना है.

मैं बोला: आज रात को मैं अपनी मम्मी को सुला देता हू, और तेरी अम्मी को मिल कर छोड़ते है फिर.

फ़ैज़न अग्री करता है. ऐसे ही बाकचोड़ी करते हुए रात हो जाती है. मेरे पापा वैसे कुछ दिन के लिए आउट ऑफ सिटी थे, और हमारे पास रूम खाली था. तो मम्मी ने उनको एक रूम में सोने को बोल दिया, और हम लोग एक रूम में आ गये.

मेरी नज़रे आंटी से मिल रही थी. उनकी नज़रे बोल रही थी, जल्दी आना छोड़ने के लिए. जब सब रूम में गये, आंटी किचन से पानी लेके जेया रही थी. मैने उनको पकड़ लिया और बोला एक घंटे में बाहर आ जाना, और एक किस करके और बूब्स दबा के जाने दिया.

फिर मैं और मम्मी रूम पे आ गये. मम्मी निघट्य में थी. मैने रूम को जल्दी लॉक किया, और खुद नंगा हुआ, और मम्मी को लंड दिखा दिया. मम्मी भी रेडी थी, और लपक के मेरा लंड पकड़ के चूसने लगी.

मैने ज़्यादा देर नही करते हुए उनकी निघट्य खोल के फेंक दी, और हम दोनो रज़ाई में आ गये. मम्मी ने मुझे किस किया, और मेरे उपर चढ़ गयी, और छूट में उंगली करते हुए मेरा लंड अपनी छूट में डाल दिया, और लंड पे उछालने लगी. 10 मिनिट तक मम्मी लंड लेती रही. मैं भी उनके बूब्स को चूस्टा रहा.

फिर मैने वैसे ही छोड़ने की पोज़िशन को उल्टा किया, और मम्मी को नीचे करके छोड़ने लगा. मैं मम्मी के पैरों को उठा के, अपने शोल्डर पे रख के छोड़ने लगा. मम्मी की छूट भी मस्त थी, और मैने उसको करीब 5 मिनिट तक छोड़ा.

फिर उनको उठा लिया, और सोफे में ले गया. मम्मी को फिरसे उपर बिताया, और मम्मी उछाल-उछाल के छुड़वाने लगी. और मैं भी उनको जल्दी-जल्दी छोड़ने लगा, ताकि ये कार्यक्रम ख़तम करके फ़ैज़न की अम्मी को छोड़ू.

फिर मैने मम्मी को सोफे पे कुटिया बनाया, और लंड पीछे डाल के छोड़ने लगा. साइड में मिरर में देखे के छोड़ने में मज़ा आ रहा था.

मम्मी बोली: मुझे शरम आ रही है. मुझे ऐसे देखे के मत छोड़.

मैं बोला: क्यूँ क्या हुआ? अपनी नीड पूरी कर रहा हू. एंजाय करो मम्मी.

फिर मैं मम्मी को बाल खींच के छोड़ने लगा.

मम्मी चिल्लाने लगी: अया आहा बाल छ्चोढ़ दे बेटा, दर्द हो रहा है.

मैने फिर उनके बूब्स पकड़ के चोदा, और मम्मी को पूछा: निकाल डू अंदर?

मम्मी बोली: हा निकाल दे. मैं भी तक गयी हू. और नही होता.

मैने मम्मी की छूट में माल निकाल दिया, और मम्मी वही सोफे पे ढेर हो गयी.

क्यूंकी मम्मी सुबा से वर्क करके टाइयर्ड हो गयी थी. मैने उनको गोद में उठाया, और बेड में सुला दिया. फिर हम लोग किस करने लगे. मैं उनके बूब्स पीने लगा, और किस करने लगा. फिर मम्मी सो गयी.

मैं बाहर निकला और दूसरे रूम में गया. फ़ैज़न की मम्मी को उठाया. वो सो गयी थी. मैने धीरे-धीरे उनके बूब्स दबाए, और उनकी आँख खुली. फिर मैं उनको लेके हॉल में आ गया. आंटी भी निघट्य में थी. मैने उनकी निघट्य को शोल्डर से नीचे किया, और बूब्स दबाने लगा.

आंटी की सिसकारियाँ निकालने लगी, और वो गरम होने लगी, और उनका हाथ मेरे लंड पे जाने लगा, जो की पहले से खड़ा था. आंटी ने मेरे लंड को पकड़ के निक्कर से बाहर निकाला, और मसालने लगी. मैने उनके बूब्स चूज़. काफ़ी देर तक चूसने के बाद उनके सर को लंड की तरफ दबाया, और लंड उनके मूह में दे दिया.

आंटी मस्त ब्लोवजोब देने लगी. आंटी ने काफ़ी देर तक मेरा लंड चूसा, और मस्त तरीके से खड़ा कर दिया. मैं भी आंटी की हलाक तक लंड डालने लगा. आंटी बीच में रुक जाती थी, और मैं उनके मूह को छोड़ने लगा. 10 मिनिट्स बाद उनके मूह में मैने माल भर दिया.

आंटी ने वो माल गतक लिया, और लंड चूसने लगी किसी प्रोफेशनल की तरह. मैने उनको उठाया अपनी गोद में, और लंड सेट करके सोफे पे बैठ गया. आंटी ने लंड चूस के मस्त कर दिया, और फटत से लंड उनकी छूट में चला गया. तभी पीछे से फ़ैज़न भी ये नज़ारा देख रहा था, और लंड मसल रहा था.

मैने उसको रुकने का इशारा किया, ताकि मैं आंटी को गरम कर डू. फिर उसको बूलौऊ, और फिर हम मिल कर आंटी को छोड़े. मैं आंटी को ज़ोर के झटके देने लगा नीचे से. आंटी भी मस्त गांद पटक-पटक कर छुड़वा रही थी. तभी फ़ैज़न से रहा नही गया, और वो झट से सोफे में आके बैठ गया.

आंटी उसको देखते ही दर्र गयी, क्यूंकी वो खुद मेरे लंड पे बैठी थी, और छुड़वा रही थी. वो भी टोटली नंगी.

फ़ैज़न: क्या मस्त छुड़वा रही हो अम्मी.

आंटी: नही बेटा, ऐसा नही जैसा तू सोच रहा है. मुझे माफ़ कर दे. मैं बहक गयी थी. जब तू आशु की मम्मी की छोड़ रहा था, तब आशु ने मुझे भी गरम करके छोड़ दिया.

फ़ैज़न: ज़्यादा बनो मत. मुझे पता है तुमको भी लंड की ज़रूरत है.

आंटी: बेटा मुझे माफ़ कर दे. मैं ऐसा नही करूँगी. तेरे अब्बू को मत बताना मैं तेरे हाथ जोड़ती हू. वरना तेरा बाप मुझे घर से निकाल देगा.

फिर वो मेरे लंड से उतार के सोफे पे बैठ के फ़ैज़न के हाथ जोड़ने लगी.

फ़ैज़न बोला: एक शर्त पे, मुझे भी तुमको छोड़ना है.

और वो उनके बूब्स दबाने लगा

आंटी: ये क्या बोल रहा है तू?

और आंटी अपने आप को ढकने लगी.

फ़ैज़न: हाअ यही बोल रहा हू जो तुम सुन रही हो.

मैं बोला: आंटी मान जाओ प्लीज़. वरना शायद फ़ैज़ी उसके अब्बू को ना बता दे.

आंटी सोचने लगी. तभी फ़ैज़न ने अपना ट्रॅक पंत निकाल दिया, और नंगा हो गया. और आंटी के बूब्स दबाने लगता है. मैं भी आंटी को उठा के खड़ा करता हू, और हम दोनो मिल कर आंटी के बूब्स चूस्टे है, और दबाना शुरू कर देते है.

मैं आंटी के पीछे खड़ा हो जाता हू और उनकी नेक और पीठ को चूस्टा हू. फ़ैज़न उनके पास आके उनको किस करता है, और उनके बूब्स को दबाने लगता है.

फिर मैने उनको बोला: चलो रूम में चलते है.

फिर हम रूम में आ गये. आंटी को हमने बेड पे बिताया, और उनके सामने खड़े होके लंड उनके हाथ में पकड़ा दिया. वो समझ गयी उनको लंड चूसना था. आंटी लंड को हिलने लगी, और मूह में पहले लंड अपने बेटे का लिया. क्यूंकी आंटी मेरा लंड चूस चुकी थी.

फ़ैज़न खुश हो गया, क्यूंकी उसकी मा उसका लंड चूस रही थी. वो भी जोश में आ गया, और ज़ोर-ज़ोर से लंड उनके मूह में डालने लगा. उसने 5 मिनिट्स तक लंड चुस्वाया. फिर हम दोनो लेट गये, और आंटी को बीच में लिटा के उनके बूब्स चूसने लगे. बूब्स चूस्टे हुए फ़ैज़न उनकी छूट तक गया, और उनकी छूट में उंगली करने लगा.

आंटी मोन कर रही थी. मैं उनके बूब्स दबाने लगा था, और बूब्स चूस्टे हुए किस कर रहा था. फ़ैज़न ने फिर उनको कुटिया बना दिया. उसने उनकी टांगे फैला दी, और लंड सेट किया उनकी छूट में. फिर धीरे-धीरे धक्के में छूट में लंड उतार दिया.

आंटी की आ निकल गयी. मैं उनके मूह के पास गया, और लंड उनके मूह में दिया. उपर मैं उनका मूह छोड़ रहा था, और फ़ैज़न उनकी छूट छोड़ रहा था. 10 मिनिट हमने आंटी को छोड़ा.

फिर आंटी बोली: बस, मैं तक गयी.

फ़ैज़न बोला: कोई बात नही अम्मी.

फिर हम बेड से उतरे, और उसकी मा को उठा लिया गोद में हम दोनो ने मिल कर. फ़ैज़न ने उठाते ही छूट में लंड डाल दिया, और मुझे इशारा किया गांद में लंड डालने का. मैं भी पीछे से उनकी गांद चौड़ी करके उनकी गांद में लंड डालने लगा.

फ़ैज़न की अम्मी तड़प उठी, जैसे ही मेरा लंड उनकी गांद में घुसा. मैने धीरे-धीरे उनकी गांद को छोड़ना शुरू किया. और सामने से फ़ैज़न उनकी छूट मार रहा था. बहुत ही मज़ा आ रहा था. मैं पीछे आंटी की गांद मारते हुए उनको प्यार कर रहा था, और फ़ैज़न उनकी छूट छोड़ने में लगा हुआ था.

हम लोग बड़े मज़े से उनकी छूट और गांद छोड़ रहे थे.

लगभग 10 मिनिट तक छोड़ कर फ़ैज़न ने आंटी की छूट में माल निकाल दिया. फिर हमने उनको गोद से उतरा. मैं अभी झाड़ा नही था. मैने उनको सोफे में कुटिया बनाया, और उनकी छूट पीछे से छोड़नी शुरू की.

5 मिनिट तक उनको छोड़ा. फिर मैने अपना लंड निकाल के उनकी गांद में डाल दिया, और गांद टाइट होने की वजह से अब ज़्यादा मज़ा आने लगा.

आंटी: अया आहह बेटे छोड़ दो अपनी आंटी की गांद. इस गांद के लिए पूरी गली पागल है, और तुम ये गांद मार रहे हो. ज़ोर से छोड़ो आ आह बेटे अयाया छोड़ो. मेरा निकलने वाला है.

मैं: आंटी कहा निकालु?

आंटी: तुम्हारी मर्ज़ी.

मैं कुछ शॉट्स आंटी को और छोड़ा. फिर उनको घुटनो में बिता दिया, और लंड उनके मूह में दिया. आंटी समझ गयी माल मूह में निकालने वाला था मैं. आंटी ने बड़े मस्त तरीके से लंड चूसा, और मैने एक झटका मारा और उनके गले तक लंड चला गया. फिर मैं उनके मूह मैं झाड़ गया.

आंटी का मूह पूरा मेरे माल से भर गया, और आंटी धीरे-धीरे सारा माल गतक गयी. रात काफ़ी हो गयी थी. आंटी फ्रेश होके आई. मैं और फ़ैज़न भी बैठे थे.

आयेज की स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में.

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