बारिश में हुई दोस्त के साथ चुदाई

ये है दीप्तानु. म्यूचुयल फ्रेंड्स के थ्रू हमारी जान-पहचान हुई. अक्सर हम क्रिकेट फील्ड में मिलते है, क्यूंकी हम दोनो को ही क्रिकेट खेलना पसंद है. दोस्ती और गहरी हो गयी, जब क्रिकेट में भी हम दोनो का चाय्स एक ही था. हम दोनो को ही रोहित शर्मा और विराट कोहली पसंद थे. एक दिन वो टाइम से पहले ही फील्ड में खेलने आ गया था. जब वो आया तो फील्ड में कोई नही था. उसने मुझे कॉल लगाया और पूछा की मैं कब अवँगा फील्ड में. तब मैने बोला की मैं 10 मिनिट में ही आ रहा हू.

मेरा घर फील्ड के सामने ही था. मगर देखते ही देखते काले बादल मंडराने लगे, और बारिश भी होनी शुरू हो गयी. मैं बस अफ़सोस ही कर रहा था की अर्रे यार फिर से बारिश! ये खेलने के समय ही बारिश क्यूँ आती है? तभी दीप्तानु का कॉल आता है और वो बोलता है-

दीप्तानु: अर्रे भैया, मैं तो बारिश में भीग रहा हू. आस-पास कोई शेल्टर भी नही है. क्या बारिश के रुकने तक मैं आपके घर आ जौ?

तो मैने जवाब में बोला: हा-हा क्यूँ नही, आ जाओ. मैं घर में अकेला ही हू.

2 मिनिट में दीप्तानु घर की डोरबेल बजता है. मैं डोर खोलता हू, और देखता हू की दीप्तानु बिल्कुल भीग चुका था. वो त-शर्ट और शॉर्ट्स में आया था, मगर बारिश में सब भीग गया. मैं उसको कपड़े चेंज कर लेने को बोला. उसने अपना त-शर्ट खोल दिया और फन के नीचे सूखने के लिए रख दिया.

फिर मैने उसे अपना टवल दिया. वो उसे पहन के अपना शॉर्ट्स भी सूखने को दे दिया. दीप्तानु साइज़ में मोटा था, मीडियम हाइट का. और में स्किनी था. इसलिए मेरे कपड़े उसपे फिट ही नही होंगे. खैर हम बैठ के बेड पे बात कर रहे थे. मगर ना जाने क्यूँ दीप्तानु का नंगा बदन टवल पे लिपटा हुआ देखते ही में तुर्न ओं हो गया.

बातों-बातों में मेरी नज़र बार-बार उसके बूब्स पे जेया रही थी. उसकी छाती में एक बाल भी नही था. मॅन कर रहा था उसकी छाती पे ही लिपट जौ. बाहर बहुत तेज़ बारिश हो रही थी, मगर इधर दीप्तानु का खाली बदन और बड़े बूब्स देख के मेरे अंदर आग जल रही थी. अब मैं रेस्टलेस हो रहा था.

तभी दीप्तानु बोला: क्या हुआ भैया? कुछ तकलीफ़ है आपको?

मैं जवाब दिया: नही-नही, बस यू ही.

फिर दीप्तानु बोला: अर्रे भैया, बहुत गर्मी लग रही है आपको?

मैने बोला: नही, क्यूँ?

दीप्तानु बोला: पर आपकी पंत देख के लग तो नही रहा आपको गर्मी नही लग रही.

फिर मेरा ध्यान मेरी पंत की तरफ गया. तारक के मारे लंड पूरा खड़ा हो गया था, और मेरे को पता ही नही चला. मेरे को काफ़ी ऑक्वर्ड लगा, और फिर मैने बोला-

मैं: अर्रे नही, बस ऐसे ही.

दीप्तानु बोलता है: ह्म, काफ़ी बड़ा है आपका.

मेरे को तब तक काफ़ी शरम आने लगी थी, और मैं बोला: क्या बोल रहा है यार, बस कर.

फिर मैने उसकी टाँग खींचते हुए बोला: मत देख इधर तर्की.

फिर मज़ाक-मज़ाक में उसके बूब्स को पिंच कर दिया. वो दर्द के मारे चीख उठा, और बोला-

दीप्तानु: आउच, तर्की मैं नही आप हो. देखो कैसे तारक के मारे लंड खड़ा हो गया और मेरा बूब्स दबाने लगे.

फिर मैने भी मज़ाक में बोला: चल ठीक है, दूसरा वाला भी दबा देता हू.

दीप्तानु बोलता है: अछा ऐसी बात!

फिर हम लोग हाथापाई करने लग गये. कभी मैं उसके उपर चढ़ के बूब्स दबाने की कोशिश करता, फिर वो खुद को बचाने की कोशिश करता. ऐसा करते-करते एक टाइम आया जब वो टवल खुल गया, और दीप्तानु मेरे बेड में पूरा नंगा लेता था, और मैं उसके उपर. उसको नंगा देख के मुझे जो चरमसुख मिला, मानो मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो गयी.

जब तक वो कुछ रिक्ट करता, तब बाहर ज़ोर से बिजली कदकी, और उसने मुझे कस्स के पकड़ लिया. मैं उसके नंगे बदन से पूरा चिपक गया था. मुझे समझ ही नही आ रहा था की क्या मैं सपना देख रहा था. अभी थोड़ी देर पहले ही मैं मॅनिफेस्ट कर रहा था की काश इसकी छ्चाटी से लिपट पौ, और अभी सच में उसके सीने से मैं लिपटा हुआ था.

थोड़ी देर बाद मैने बोला: दीप्तानु, तू नंगा है और मैं तेरे से चिपका हुआ हू. तुझे ऑक्वर्ड नही लग रहा?

जवाब देते हुए दीप्तानु ने कहा: क्या फराक पढ़ता है? बाहर इतना रोमॅंटिक वेदर चल रहा है, की आपके साथ ऐसे छिपकने में मज़ा ही आ रहा है.

फिर मैने पूछा: अरे योउ गे दीप्तानु?

दीप्तानु बोला: नही गे नही हू. मगर बाइसेक्षुयल ज़रूर हू.

मैं शॉक हो गया और पूछा: रियली?

उसने बोला: अगर बाइसेक्षुयल नही होता तो ऐसे नंगा होके आपके साथ नही छिपकता. आप पे मेरी नज़र और भी पहले से ही थी. याद है लास्ट मंत को हम बारिश में खेल रहे थे. हम सब भीग गये थे, तब आपका कपड़ा गीला होने की वजह से आपकी बॉडी के साथ पूरा चिपका हुआ था. अफ क्या नज़ारा था. तब से लेके अब तक एक ही सपना देख रहा हू. आपके साथ सेक्स करने का.

मैं तो ये सब सुनते ही शॉक हो गया की सच में उसको भी मेरे साथ करना था. ये मिराकल पहले कभी नही हुआ. तभी दीप्तानु कस्स के पकड़ लिया, और मुझे नीचे करके वो मेरे उपर आ गया. फिर मेरे होंठो को चूमने लगा. मैं भी उसके अप्पर लिप्स को लॉक करके चूमने लगा. उसकी हल्की-हल्की मूचे मेरे होंठो को चुभ रही थी. मगर क्या फराक पढ़ता है, हम दोनो ही तारक में डूबे हुए थे.

फिर उसने मेरी त-शर्ट उतरी, और मेरे सीने पे हाथ फेरने लगा. मुझे ताभ भी ये सब सपना ही लग रहा था. फिर उसने मेरा पंत भी उतार दिया. अब हम दोनो ही नंगे थे एक-दूसरे के सामने. फिर उसने मेरी आँखों में आँखें डाली और मुझे खींच के पास ले गया और मेरी नेक को किस करने लगा.

ऑम्ग, मेरा ऑर्गॅज़म तब सातवे आसमान में था. थोड़ी देर बाद वो खड़ा हुआ और मेरे को गोदी में उठा के मुझे किस करने लगा. कुछ देर किस करने के बाद उसने मेरे को नीचे उतरा. फिर मैं घुटने के बाल बैठ गया और उसका लंड हाथो में लेके उसके साथ खेलने लगा. फिर उसका 5 इंच का लंड मैने मूह में ले लिया और चूसने लगा.

दीप्तानु को मज़ा आने लगा और वो आ आ ह्म्‍म्म्म यॅ जैसी आवाज़ करने लगा. उसने जोश-जोश में मेरे गले तक अपने लंड को धकेल दिया. मेरे को खाँसी आ गया था. फिर उसने मेरे को बेड पे धकेला, और मेरे बगल में बैठ के मेरे लंड के साथ हाथ से कुछ देर खेला. फिर मूह में ले लिया.

अया, क्या चरम सुख का पल था वो. कुछ देर तक चूसने के बाद उसने अपनी एक उंगली मेरी गांद में डाल दी. मेरी तो चीख निकल गयी थी.

दीप्तानु बोला: अर्रे ये तो बस उंगली है, इसमे चीख निकल गयी? अभी तो लंड डालना बाकी है.

फिर मेरी गांद में कुछ देर तक फिंगरिंग किया. उसके बाद नीचे झुक के मेरी गांद को चाटने लगा. ओहू, क्या मोमेंट था भाई. मेरे को तो मानो ग-स्पॉट मिल गया. फिर धीरे-धीरे उसने मेरी दोनो टाँगों को अपने कंधे पे रखा, और अपना लंड मेरी गांद में ज़ोर से धकेल दिया.

मेरी तो चीखें निकल गयी. अबकी बार उसने मेरी गांद के च्छेद में तेल से मालिश की. फिर मेरी आँखों में आँखें डाल कर प्यार से मुस्कुराते-मुस्कुराते उसका लंड मेरी गांद में डाल दिया. उसका गरमा-गरम लंड मैं अपने अंदर फील कर रहा था. फिर वो आयेज-पीछे करना शुरू कर दिया. मुझे बहुत मज़ा आने लगा.

बारिश की वजह से मौसम तोड़ा ठंडा था. मगर दीप्तानु के गरम लंड को फील करने की वजह से ठंडा लग ही नही रहा था. काफ़ी देर तक इसी पोज़िशन में मेरे को छोड़ा. छोड़ते-छोड़ते मेरे को किस भी कर रहा था. मेरे निपल्स भी काट रहा था. फिर लंड को अंदर रख कर ही उसने मुझे गोदी में उठा लिया, और खड़े-खड़े मुझे गोदी में उठा के छोड़ा.

फिर वो नीचे उतरा और सोफा में बैठ गया. मैं उसकी तरफ फेस करके उसके लंड पे बैठा, और फिर वो बहुत ज़ोर-ज़ोर से मुझे छोड़ने लगा. मैं लिटरली उसके लंड पे बैठ के नाच रहा था. काफ़ी देर तक छोड़ने के बाद अब वो तक चुका था.

फिर उसने मुझे खड़ा करवाया, और खुद घुटनो में बैठ कर मेरा लंड चूसने लगा. उसके मूह में लेते ही मेरा बैठा हुआ लंड झट से खड़ा हो गया. वो जीभ से भी मेरे लंड को अची तरह से छाता. थोड़ी देर चूसने के बाद दीप्तानु वॉल की तरफ मूह करके डॉगी स्टाइल में बैठ गया. फिर मैं उसकी गांद जीभ से चाटने लगा.

मुझे मज़ा नही आ रहा था. फिर मैं किचन से हनी लेके आया और उसकी गांद के च्छेद में डाल दिया. फिर मैं मज़े से दीप्तानु की गांद चाटने लगा. उसको भी मज़ा आने लगा, और आँखें बंद करके गांद चटाई का मज़ा लेने लगा. फिर जब दीप्तानु का गांद खुल गया, मैं अपने लंड को उसके गांद में डाल दिया.

उसका मोटा नरम गांद में मेरे स्ट्रॉंग लंड को अंदर घुसने में अलग ही मज़ा आ रहा था. फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से उसको छोड़ने लगा. उसे भी मज़ा आने लगा. मेरे थाइ उसकी गांद से टकराने के बाद ताली की आवाज़ आने लगी. वो आवाज़ सुनते ही मुझे और मज़ा आने लगा, और जोश में और ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगा.

हर एक स्ट्रोक पे वो आ आ आ करने लगा. फिर मैने दीप्तानु को बेड पे लिटाया, और उसकी दोनो टाँगो को फैला कर अब मिशनरी पोज़िशन में छोड़ने लगा. इस बार ज़्यादा मज़ा आने लगा, क्यूंकी इस बार छोड़ते टाइम दीप्तानु का क्यूट गोल-मटोल चेहरा देखने को मिल रहा था. और उसके बूब्स और पेट को भी हर एक स्ट्रोक पे उछलते हुए देखने में मज़ा आ रहा था.

नो डाउट इसलिए मुझे चब्बी बाय्स बहुत पसंद है. थोड़ी देर छोड़ने के बाद मुझसे और रहा नही गया. फिर मैने उसकी गांद के अंदर ही पानी निकाल दिया. हम दोनो ने एक साथ राहत की साँस ली और मैं उसके बगल में लेट गया. फिर वो मेरे उपर आ कर मेरे चेहरे पे मूठ मारने लगा.

वो बोला: इस चिकने फेस पे अपना माल गिरने का अलग ही मज़ा आएगा.

थोड़ी देर हिलने के बाद उसके लंड से एक ज़ोर के झटके से मूठ मेरे चेहरे पे आ गिरा. मेरा चेहरा भी अब दीप्तानु के माल के गर्मी को महसूस कर लिया था. फिर वो मेरे उपर आके लेट गया. मैने भी उसको कस्स के पकड़ लिया, और उसके बड़े और नरम-नरम गांद पर हाथ फेरने लगा. तब तक बारिश भी रुक गया था.

हम उठे और साथ में शवर लिया. फिर उसने अपने वही गीले कपड़े पहन लिए और जाते जाते बोला: आज मज़ा आ गया यार आपके साथ करके.

मैने जवाब में कहा: हा मुझे भी.

फिर दीप्तानु बोला: तो क्या ये आयेज भी कंटिन्यू होगा या बस यही तक था?

मैने कहा: इतना मज़ा आया की मैं डबरा करना चाहूँगा जब मौका मिले.

दीप्तानु बोला: ज़रूर.

फिर उसने स्माइल की और मेरे लिप्स को किस किया. उसके बाद मुझे बाइ बोला और घर वापस चला गया. उसके बाद से मानो मेरा और दीप्तानु का बॉन्ड और ज़्यादा स्ट्रॉंग हो गया. जिन के थ्रू हमारी दोस्ती हुई थी, उनसे भी ज़्यादा क्लोज़ हम हो गये थे.

उस दिन के बाद भी जब-जब मौका मिला, तब-तब हमने सेक्स किया. कभी मेरे घर तो कभी उसके घर. सही में वो 1स्ट्रीट दे वाला सेक्स दीप्तानु के साथ आज भी मिराकल ही लगता है.

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