गे सेक्स स्टोरी अब आयेज-
मैं बेडरूम में जेया कर टवल से बदन सॉफ करने लगा, और गीली चड्डी निकाल कर दूसरी चड्डी पहन ली. फिर गीली चड्डी को मशीन में डालने के लिए पीछे हुआ तो देखा अकबर मामू वाइट लूँगी में खड़े थे. उनका गीला लोड्ा लूँगी से चिपका हुआ था. बदन के बालों का पानी लूँगी को और गीला कर रहा. मैं मामू को देख कर तोड़ा गबरा कर टवल लपेटने लगा.
मामू: ओह सॉरी सलीम, मुझे नही पता था की तुम नंगे हो.
मैं गीली चड्डी को वॉशरूम ले जाते हुए: कोई नही, आपने तो बचपन में कितनी बार मुझे नंगा देखा ही हुआ है वैसे भी.
मामू को मेरी ये बात सुन कर, उनके चेहरे पर बहुत नटखट मुस्कुराहट आ गयी. वॉशरूम में शोहेब मामू भी लूँगी पहन कर बाहर आ रहे थे. मैं भी जल्दी से मशीन बंद करके सीधा रूम में आ गया.
अकबर मामू मेरे रूम के सोफे पर बैठ कर टीवी देखने लगे. मामू ने एक पिल्लो अपने लोड के पास रखा हुआ था. मैं मामू के सामने खड़ा हो गया, जिससे वो टीवी ना देख सके. उनके हाथ से रिमोट लेकर डोर रख दिया. मैने पंगे लेते हुए उनका वो पिल्लो खींच लिया.
पिल्लो हटने से मामू का लोड्ा और छ्चाटी के बाल लूँगी के अंदर जेया कर एक काला गुच्छा बना रहे थे. गीले बदन के कारण ये तोड़ा-तोड़ा लूँगी से सॉफ दिखने लगा था.
मैं: क्या मामू, टीवी देख रहे हो. कोई बातें करो ना.
तभी शोहेब मामू भी मामू के पास ही आ कर बैठ गये.
अकबर मामू: अछा चल बैठ तो जेया.
मैं मामू से पंगे लेने के लिए उनकी गोद में बैठ गया, और मेरे दोनो पैरों को शोहेब मामू ने अपनी जाँघ पर सीधा रख दिया. अब मेरी गांद अकबर मामू के लोड पर थी, और पैर शोहेब मामू के लोड पर.
अकबर मामू मुझे कस्स कर पकड़ते हुए मेरे गाल और सर पर किस करते हुए बोले: ये हुई ना बात!
शोहेब मामू मेरे नंगे पैरों से जाँघ तक हाथ फेरते हुए बातें करने लगे. मामू की बात सुनते हुए मैं मामू की बालो वाली छाती पर सर लगा कर गरम-गरम साँस उनके निपल्स पर छ्चोढ़ रहा था, और बीच-बीच में उनकी छ्चाटी और पेट के बालों पर हाथ भी फेरने लगा.
शोहेब मामू: क्या हुआ सलीम, बालों में क्या ढूँढ रहा है?
मैं: कुछ नही, लेकिन अकबर मामू आपको इतने बालों में गर्मी नही लगती क्या?
अकबर मामू आपनी बालों से बरी छ्चाटी पर मेरा हाथ पकड़ कर फेरते हुए बोले: मर्द का बदन है.
मैं: बहुत मस्त बॉडी है आप दोनो की.
शोहेब मामू मेरी जाँघ पर हाथ फेरते हुए मेरी चड्डी के अंदर से मेरी गांद पर हाथ ले जाते हुए बोले: भाईजान इसका तो सारा बदन ही चिकना है. इसे क्या पता मर्दों के बालों का.
दोनो मामू हासणे लगे. मैं नाराज़ होने का नाटक करके उठ कर जाने लगा. तभी अकबर मामू ने पीछे से खींच कर सोफे पर गिरा दिया, जिससे मेरा सर जेया कर अकबर मामू की दोनो टाँगों के बीच गिरा.
शोहेब मामू मेरी दोनो टाँगें फैला कर, मेरे उपर आ कर, मेरे गाल पर किस करते हुए बोले: अछा बच्चू, गुस्सा भी. अब देख.
मामू किस करने के बाद मेरे पेट पर मूह से गुदगुदी करने लगे. मैं हेस्ट-हेस्ट अपने हाथो पर चलने लगा. उपर होने की कोशिश में अकबर मामू ने मुझे अपनी फैली हुई टाँगों के बीच ही बिता लिया.
ये सब करते हुए शोहेब मामू नॉर्मल हो कर टाँगें फैला कर बैठ गये. इसमे से उनकी नंगी जांघें सॉफ दिख रही थी. शोहेब मामू तेज़-तेज़ साँसे लेते हुए, अपना लोड्ा मसालते हुए, एक हाथ मेरी जाँघ पर रखते हुए, हाथ से जाँघ को सहला रहे थे.
तभी अकबर मामू ने मेरी गांद के नीचे हाथ डाल कर, गांद को दोनो हाथ से पकड़ कर उँचा किया. फिर एक हाथ से कुछ नीच ठीक किया और मुझे फिर बैठते हुए कान में बोले: सलीम, ग़लती से मेरी लूँगी खुल गयी है, और तेरे चुतताड के नीचे मेरे वो है, उतना मत.
ये शब्द मेरे कान में किसी जन्नत से कम नही लग रहे थे.
शोहेब मामू ( मेरी जाँघ मसलते हुए): भाई जान, सलीम का बदन ग़ज़ब का कोमल है. छ्छूते ही ऐसा लगता है साली लौंडिया चू ली हो. उपर से इसके चुचे भी मोटे है.
शोहेब मामू ने मज़ाक-मज़ाक में मेरे निपल्स को पकड़ कर चुटकी काट ली.
मैं: आआ मामू…
अकबर मामू दोनो हाथ को आयेज करते हुए मेरे चुचो को मसलते हुए बोले: क्यूँ मज़े ले रहा है?
मेरे निपल्स के पास चुटकी काटने से लाल हो गया था.
अकबर मामू: सही में बहुत कोमल है. कितना जल्दी लाल हो गया.
तभी अकबर मामू दोनो हाथो से प्यार-प्यार से चुचो को मसलते हुए बोले: बस थोड़ी देर में नॉर्मल हो जाएगा.
तभी शोहेब मामू मेरे पास आए और ज़ोर से जाँघ पर हाथ मार कर दबा दिया.
वो बोले: देखो भाईजान. सलीम की कितनी मोटी जाँघ है. क्या मस्त भरा हुआ बदन है लोंडे का.
अकबर मामू ने मेरी दोनो जांघें फैला कर मुझे तोड़ा उपर खींचा. फिर मेरी लाल हुई जाँघ को मसालते हुए हाथ धीरे-धीरे नीचे मेरी बॉल्स तक ला रहे थे. ये सब से मेरा बदन और गरम हो रहा था. तभी मुझे मेरी गांद के नीचे कुछ मोटा सा चुभता हुआ महसूस हुआ.
मामू का बदन धीरे-धीरे बहुत गरम होता जेया रहा था. मामू भी धीरे-धीरे मुझे कस्स कर पकड़ते हुए मेरी गर्दन के पास गरम-गरम साँस छ्चोढ़ रहे थे. शोहेब मामू अपनी दोनो टाँगें फैला कर मेरे और करीब आ गये. इस पोज़िशन में शोहेब मामू की लूँगी से उनके आँड बाहर लटक रहे थे.
शोहेब मामू अकबर मामू का हाथ मेरे चुचो से डोर करते हुए मेरे निपल्स के पास आए और फूँक मारते हुए निपल्स को मूह में ले लिया. मामू की अचानक से इस हरकत से मेरे बदन में एक करेंट सा दौड़ गया. मैने तभी शोहेब मामू के कंधे पर हाथ रखते हुए उनके कंधे को दबा दिया. एक हाथ से अकबर मामू का हाथ पकड़ लिया, जो मेरी जाँघ पर था. तभी मेरे हाथ पर कुछ गरम-गरम गीला सा लगा.
मैं: एयाया मामू, रूको, करेंट लग रहा है.
शोहेब मामू ने पूरा चुचा चूमने का नाम करके मूह में भर लिया था. जैसे ही मैने पीछे होने के लिए बोला, मामू ने “पूछ” की आवाज़ करते हुए चुचा एक झटके से बाहर निकाल दिया.
फिर वो बोले: फूँक और चूमने से आराम मिलेगा.
मामू ने मेरा चुचा पूरा गीला कर दिया था. मैने अपने हाथ से मूह पोंचा तो मेरे लिप्स पर कुछ गीला लगा जो मैने चाट लिया (थोड़ी देर पहले ही कुछ गीला लगा था मेरे हाथ पर).
मैं: ह्म ये मीठा-मीठा क्या था?
मैने नीचे ध्यान दिया तो मेरी दोनो जांघों के बीच से अकबर मामू का लोड्ा सीधा खड़ा हुआ था. उसका सूपड़ा एक-दूं गुलाबी था, जिसमे से कुछ गीला-गीला मेरे हाथ पर लग गया था. मैने अपना हाथ से मामू के सूपदे को छ्छूते हुए बोला-
मैं (नाटक करते हुए): इतना मोटा क्या है ये?
शोहेब मामू: छ्होटे भाईजान है सलीम. तेरी गरम गांद से जाग गये है.
अकबर मामू मुझे कस्स के पकड़ते हुए बोले: सलीम बेटा, सेयेल का खुद लूँगी में खड़ा है, और मुझे बोल रहा है.
मैं तुरंत मामू की गोद से उतार कर खड़ा हो गया. अकबर मामू ने शोहेब मामू की लूँगी को खींच कर निकाल दिया. दोनो के लोड बिल्कुल एक जैसे थे, बस शोहेब मामू ने बाल सॉफ कर रखे थे, और अकबर मामू तो पुर बालों से ढके हुए थे.
मैं: मामू इतना मोटा लोड्ा भी होता है क्या?
मैने नीचे बैठ कर अकबर मामू का लोड्ा हाथ में लेकर उनकी मोटी-मोटी बॉल्स को देख कर दोनो हाथ से पकड़ कर बोला: वाउ मामू, कितना मस्त है. वो मीठा पानी इसमे से आया था क्या?
शोहेब मामू: जीभ से चाट ले, भाईजान तेरे लिए और निकाल लेंगे.
अकबर मामू: क्या बोले जेया रहा है?
शोहेब मामू: भाईजान, हम तीनो तो हमेशा दोस्त की तरह ही रहे है. क्या इतना भी नही करोगे सलीम के लिए?
शोहेब मामू मेरे सर पर हाथ रख कर अकबर मामू का लोड्ा मेरे मूह में देने लगे.
वो बोले: सलीम आराम से चूसना. तभी मज़ा आएगा रस्स पीने का.
आख़िरकार वो दिन आ ही गया जब मेरे प्यारे मामू का विशाल लोड्ा मेरे मूह में था. मैने पहले तोड़ा सा सूपड़ा मूह में लिया. फिर धीरे-धीरे पूरा गले के नीचे उतार लिया.
मामू का लोड्ा बहुत मोटा था. 1 मिनिट में ही मेरा गाल दर्द करने लगा. पहले शोहेब मामू मेरा सर पकड़ कर आयेज-पीछे कर रहे थे. अब मैं उनका हाथ सर से हटा कर खुद मामू की दोनो जांघों पर हाथ रखते हुए चूसने लगा.
अकबर मामू: आआआ सलीम क्या मस्त चूस्टा है. पूरा बदन ही गरम कर दिया.
2 मिनिट ऐसे ही चूसने के बाद शोहेब मामू ने मुझे अकबर मामू के लोड से डोर किया. डोर करते ही मेरे मूह से मामू का प्रेकुं लार के साथ मेरे मूह से नीचे तपाक रहा था. अकबर मामू का लोड्ा पूरा गीला हो गया था.
शोहेब मामू मुझे खींच कर, अपना लोड्ा मेरे मूह में देकर तेज़-तेज़ मूह में झटके देने लगे. पुर रूम में “पूछ-पूछ” की आवाज़ आ रही थी. मेरे गले तक में लोड्ा घुसा कर मामू ने बिल्कुल मुझे दोनो जांघों के बीच घुसा लिया. मेरा तो दूं ही घुटने लग रहा था.
मेरी आँखों से भी आँसू आने लगे थे. मैने खुद को पीछे किया, और अकबर मामू मेरे लिप्स पर किस करने लगे. मूह के अंदर जीभ डाल कर पुर मज़े से 2 मिनिट तक चूमते ही रहे.
शोहेब मामू: कैसा लगा सलीम?
मैं: खुदा कसम मज़ा आ गया. और करो ना मामू.
अकबर मामू ने मुझे खड़ा किया, और मेरी चड्डी उतारते हुए मेरे निपल्स को चूमते हुए मेरा लंड हिलने लगे. मेरा 4 इंच लंबा लंड मामू के हाथ लगने से और ज़्यादा सख़्त हो गया.
शोहेब मामू घुटने के बाल बैठ कर मेरे मोटे-मोटे चुतताड को मसलते हुए बोले: क्या मस्त गांद है तेरी. सलीम एक बार गांद मरवा ले, क्या मज़ा आएगा. तू भी क्या याद रखेगा. क्यूँ भाई जान?
अकबर मामू: सलीम जैसा बोले.
मैं पहले ही बहुत कामुक हो चुका था.
मैं: कर लो मामू, रूको मत, बहुत अछा लग रहा है.
ये सुनते ही अकबर मामू ने मुझे गोद में उठा कर सीधा बिस्तर पर डॉगी बना दिया. तभी शोहेब मामू कॉंडम और आयिल की बॉटल लेकर आ गये.
अकबर मामू मेरी गांद फैला कर, मेरे च्छेद पर आयिल लगा कर मसालने लगे. अकबर मामू कॉंडम लंड पर पहन कर मेरी गांद में डालने की कोशिश करने लगे. शोहेब मामू अकबर मामू के साथ खड़े हो कर मेरी गांद में लोड्ा जाते हुए देख रहे थे.
अकबर मामू ज़ोर लगा कर सूपड़ा मेरे च्छेद पर डालने की कोशिश करने लगे. मुझे इतना दर्द हुआ की मामू थोड़ी देर रुक गये और फिर से करने लगे. लेकिन मेरा च्छेद इतना टाइट था की अंदर जेया ही नही रहा था.
शोहेब मामू: भाईजान, सलीम की काली जैसी गांद में अपना इतना मोटा मूसल डालोगे तो कैसे होगा? मैं करता हू.
इसके बाद दोनो मामू ने कैसे मेरी गांद मारी और मुझे क्या-क्या सर्प्राइज़ दिया, वो सब नेक्स्ट पार्ट में.