दोस्तों मेरा नाम रजनी है. ये मेरी चुदाई की कहानी है. मैं 45 साल की एक विधवा औरत हू. मेरी हाइट 5’6″ है, और शरीर भरा हुआ है. रंग मेरा हल्का सावला है. मेरी फॅमिली में सिर्फ़ मैं और मेरा बेटा ही है. मेरा बेटा 22 साल का है, और कॉलेज में फाइनल एअर का स्टूडेंट है. आज मैं आपको अपनी इस कहानी में बतौँगी की कैसे मैं अपने बेटे से चुड गयी. तो चलिए कहानी को शुरू करती हू.
मैं और मेरे पति बहुत खुश थे अपनी शादी में. हमारी लोवे मॅरेज हुई थी. लेकिन मेरे पति के घर वालो को हमारी शादी से दिक्कत थी, तो उन्होने हमे घर से निकाल दिया. उसके बाद हमने अपना अलग संसार बसाया, जिसमे मैं, मेरे पति, और हमारा बेटा तनीश था.
वक़्त ऐसे ही बीट-ता गया, और 5 साल पहले मेरे पति की हार्ट-अटॅक से मौत हो गयी. ज़िंदगी ख़तम सी लगने लगी, और दुख के बादल छा गये. लेकिन जीना तो था ही. बेटे का भी तो सोचना था. उस वक़्त मेरा बेटा अभी 11त क्लास में था.
ज़िंदगी चलती रही, और धीरे-धीरे उनके जाने का दुख कम हो गया. 2 साल बाद मेरा बेटा कॉलेज में हो गया. कॉलेज में जाते ही तनीश ने जिम जाय्न कर लिया. उसने अची ख़ासी बॉडी बना ली. हाइट तो उसकी पहले से ही अची थी (5’11”).
मेरे बेटे को जवानी चढ़ने लगी थी. और ये मुझे उसकी अंडरवेर ढोते हुए पता चल रहा था. लगभग हर रोज़ ही उसकी अंडरवेर में वीर्या लगा होता था. मुझे तो ये दर्र था की कहीं वो मुत्ताल बन कर अपनी हेल्त ना खराब कर ले. लेकिन मैं उससे इस बारे में बात कैसे करती?
अभी ये सोच दिमाग़ में चल ही रही थी, की एक दिन कुछ नया हुआ. सुबा का वक़्त था, और मैं बातरूम में नहा रही थी. तभी मेरी नज़र दरवाज़े के नीचे गयी, जहाँ किसी की परछाई नज़र आ रही थी. अब घर में मेरे अलावा सिर्फ़ मेरा बेटा ही था, तो पता चल गया की वही मुझे देख रहा था.
मैने कोई रिक्षन नही दिया, और नॉर्मल रही. जब मैने नहा कर दरवाज़ा खोला, तो वो बाहर नही था. लेकिन नीचे ज़मीन पर उसका वीर्या गिरा पड़ा था. मैं समझ गयी की वो मुझे देख कर मूठ मार रहा था. मुझे बहुत गुस्सा आया, और मैने उससे उसी वक़्त बात करने का फैंसला किया.
फिर मैं सीधे उसके रूम की तरफ चली गयी. जब मैं वहाँ पहुँची, तो दरवाज़ा खुला था. मैं अंदर जाने लगी, लेकिन तभी मेरे पैर रुक गये. मेरा बेटा सामने बेड पर पंत उतार कर लेता हुआ था, और मेरा नाम लेके मूठ मार रहा था. उसका लंड कम से कम 8 इंच लंबा था. इतना बड़ा लंड देख के मैं हैरान हो गयी, क्यूंकी उसके पापा का 6 इंच का था.
मुझे पता नही क्या हुआ, की मैं दरवाज़े के बाहर च्छूप कर उसको देखने लगी. जैसे-जैसे वो अपने लंड को उपर-नीचे कर रहा था, मेरी छूट में एक करेंट सा दौड़ रहा था. मैं जानती थी की वो मेरा बेटा था, लेकिन शायद मेरे अंदर की औरत, जिसको इतने वक़्त से लंड नही मिला था, एक मा पर हावी हो गयी थी.
मेरा हाथ अपने आप ही मेरी छूट पर चला गया, और मैं कपड़ों के उपर से छूट सहलाने लगी. छूट सहलाते हुए मैने मॅन में फैंसला किया की ये लंड इस छूट में जाएगा ही.
उसी दिन से मेरा अपने बेटे को सिड्यूस करना शुरू हो गया. मैने घर पर दुपट्टा लेना बंद कर दिया, जिससे मेरी क्लीवेज उसको दिखे. मैं कमीज़ के साथ सलवार की जगह लेगैंग्स पहनने लगी ताकि मेरे चूतड़ वो देख सके.
और हुआ भी वैसा ही. मेरा बेटा मेरी क्लीवेज, और मेरी गांद को बड़ी ही प्यास भारी नज़रों से देखता था. लेकिन चुदाई कैसे होती वो सोचना था. मैं चाहती थी की वो पहल करे. लेकिन जब उसने नही की, तो मुझे ही पहल करनी पड़ी. अब बस मुझे मौके का इंतेज़ार था.
मैं उसके मूठ मारने पर नज़र रखने लगी. जिस रात वो मूठ मार रहा था, मैं सीधे उसके कमरे में पहुँच गयी. वो बिस्तर पर नंगा लेता था, और उसका बड़ा सा लंड उसके हाथ में था.
मुझे देख कर वो अपने आप को ढकने लगा. मैं उसके पास गयी, और बेड पर बैठ गयी. मैने उसके लंड से चादर हटाई, और उसको हाथ में ले लिया. मेरा बेटा मुझे देख रहा था की मैं क्या कर रही थी. फिर मैने उसको कहा-
मैं: ये मैं तुम्हारे और अपने दोनो के लिए कर रही हू.
बस इतना बोल कर मैं झुकी, और उसके लंड को अपने मूह में ले लिया. अब मैं अपने बेटे का लंड चूसने लग गयी, और वो आ आ करने लगा. लंड चूस्टे हुए जब मैने उसकी तरफ देखा, तो उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी.
फिर उसने आँखें खोली, और मेरे सर पर हाथ रख कर नीचे से मेरे मूह में धक्के लगाने लगा. शायद वो समझ चुका था की आयेज उसको क्या करना था. कुछ देर तक लंड चूसने के बाद मैने उसके लंड को मूह से बाहर निकाला.
मेरे बेटे ने उसी वक़्त मुझे बिस्तर पर लिटा लिया, और मेरे उपर आके मेरे होंठ चूसने लगा. होंठ चूस्टे हुए उसने एक-एक करके मेरे कपड़े उतारने शुरू किए. मेरे जिस्म को नंगा करते हुए वो जिस्म के हर एक पार्ट को चूमता गया.
उसने मेरी गर्दन, क्लीवेज, पेट, जांघों को चूमा-छाता, और बूब्स और छूट को आचे से चूसा. अब हम मा-बेटा मिलन के लिए पूरी तरह तैयार थे. फिर उसने मेरी टाँगें खोली, और अपना लंड मेरी छूट पर सेट किया. बेटे ने मेरी छूट में ऐसा धक्का मारा, की उसका लंड मेरी छूट चीरता हुआ पूरा अंदर घुस गया. मेरे मूह से एक ज़ोर की चीख निकली.
उस दर्द के सुखद एहसास ने मुझे मेरी सुहग्रात की याद दिला दी. फिर बेटे ने 2-3 धक्के मारे, और पूरा लंड छूट में डाल कर रुक गया. वो मेरे करीब आया, और होंठ चूस्टे हुए बोला-
तनीश: मा आपकी छूट बहुत गरम और टाइट है.
मैं मुस्कुराइ, और उसने धक्के मार कर मुझे छोड़ना शुरू कर दिया. हम दोनो को चरमसुख मिलने लगा. उसके बाद उसने मुझे डॉगी पोज़िशन, कॉवगिरल, और अलग-अलग पोज़िशन्स में मज़ा ले-ले कर छोड़ा. जवान लंड लेके मेरी चूत भी जवान हो गयी.
उस दिन से हम दोनो खुश है, और जब दिल चाहे चुदाई का मज़ा लेते है.