गुस्से में की बहन की चुदाई

तो जैसा की आपने पिछली सेक्स स्टोरी में पढ़ा होगा, मैं शिखा की छूट छोड़ कर उसकी छूट में ही झाड़ गया. फिर शिखा को अपने उपर लिटा लिया लंड उसकी छूट में ही डाले रहा.

हम दोनो वैसे भी बहुत थके हुए थे. फिर ये एक रौंद वाइल्ड चुदाई का, थकान और बढ़ गयी थी, तो पता नही चला कब सो गये.

सुबह जब आँख खुली तो पाया शिखा वैसे ही मेरे उपर सो रही थी, बच्चे की तरह मुझे हग किए हुए. मैने भी उसे हग किया, और आँखें बंद करके लेता रहा. दिमाग़ में वहीं पुरानी बातें घूमने लगी, की कैसे मैने इसे छोड़ा, और अब वरुण से भी चुडवाया. शिखा की बातें, उसकी आहें, कराहें याद आते ही लंड ने हरकत शुरू कर दी.

अब क्यूंकी लंड का एंड अभी भी शिखा की छूट में था, तो जैसे-जैसे लंड खड़ा हुआ, शिखा की छूट में घुसने की कोशिश करने लगा. तो मैने लंड पकड़ कर तोड़ा उसकी छूट में अंदर किया. फिर वो अपने आप जाने लगा.

मैं शिखा की नंगी पीठ सहला रहा था, और इस उलझन में था की इसे सोने डू या छोड़ डू.

शिखा: छोड़ दो भैया.

विवेक: क्या?

शिखा ने अपना मूह मेरे सीने से उठाया और आँखें मिचमिचाते हुए मेरी तरफ देखने लगी.

शिखा: आप यही सोच रहे हो ना की छोड़ू या रहने डू, इसकी नींद ना टूट जाए. तो वही बोला के जब छोड़ने ही आए हो इतनी डोर, तो छोड़ लो ना भैया.

मुझे पता नही क्यूँ बहुत खुशी हुई ये सुन कर. फिर मैने लंड पकड़ कर, कमर उठा कर एक झटके में लंड उतार दिया उसकी छूट में.

शिखा: एम्म मा, रूको भैया, सूखी पड़ी है ये तो.

फिर शिखा ने अपनी कमर घुमणि शुरू की, और हल्के-हल्के से आयेज-पीछे होने लगी, और लंड धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगी.

शिखा: भैया एक बात बोलू, मानोगे?

विवेक: बोल ना क्या हुआ?

शिखा: वो कल चुदाई के जोश-जोश में आपको मुम्मा की चुदाई का चॅलेंज दिया था ना. प्लीज़ आप वो भूल जाओ भैया.

विवेक: अर्रे नही-नही, क्यूँ भूल जौ?

शिखा (गुस्से में मेरा मूह पकड़ कर): क्यूँ नही भूल सकते? यार भैया वो बस चुदाई के नशे में कुछ भी बोल दिया मैने. मुझे नही अछा लगेगा ना आप मेरी मों की छूट मारो. प्लीज़ भैया समझो ना, वो मेरी मा है यार. मैं कैसे बर्दाश्त करूँगी उनको कोई छोड़े, और वो भी आप जो मेरा हज़्बेंड है. नही, आप ऐसा कुछ नही करोगे भैया. प्रॉमिस मे नाउ, वरना मुझे भूल जाओ, मेरी छूट को भूल जाओ.

मैने उसे कस्स कर हग किया, और कमर उठा कर नीचे से ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगा. उसने भी मुझे हग कर लिया, और चुदाई के धक्के सहने लगी.

विवेक (कराहते हुए): देख ऐसा है शिखा. तू चॅलेंज नही भी देती तो भी मैने बहुत पहले सोच लिया था की सिद्धि को तो छोड़ूँगा. तो उसमे कोई समझौता नही होगा. सिद्धि को मुझसे चूड़ना ही पड़ेगा.

शिखा फ़ौरन उठने का ट्राइ करने लगी, और छूट से लंड निकालने लगी. मेरे सीने पर मारने लगी. पर मैने उसे जाकड़ रखा था.

शिखा: छ्चोढो भैया, निकालो अपना लंड मेरी छूट से, और निकलो मेरे रूम से. जाओ मुम्मा के पास और उन्हे ही छोड़ना अब से. मेरी आपकी कटती, छ्चोढो ना आअहह भैया निकालो, नही, एम्म नही चूड़ना मुझसे आपसे. मेरी बात नही सुनते आप. बस अपनी करते हो.

शिखा: मेरा सोचो भैया, कितना बुरा फील होगा मुझे की आप मुझे भी छोड़ रहे हो, और मेरी मा को भी. आहह आअहह उुउऊः भैया, मुझे ये सोच कर ही रोना आ रहा है की मेरी मा आपके सामने नंगी आपसे चूड़ेगी. पापा को चीट करेगी. आप उसे रंडी, कुटिया, च्चिनाल और ना जाने क्या-क्या बोलॉगे और बनाओगे.

विवेक: तेरे बाप को चीट करेगी? आबे तुझे कुछ पता भी है बेवकूफ़ लड़की?

फिर मैने उसको उसके बाप और उसकी सेक्रेटरी के अफेर की खबर सुनाई. इससे उसके होश उडद गये. तब तक मैने उसकी छूट से लंड निकाल कर उसकी गांद में डाल दिया, और पेलने लगा था.

शिखा: कुछ भी हो भैया, मैने कह दिया ना, आप मुम्मा को भूल जाओ.

विवेक: नही ये नही हो सकता शिखा. चूड़ना तो पड़ेगा सिद्धि को मुझसे.

शिखा मेरे लंड से उतार कर बेड पर बैठ गयी, और मुझे गुस्से में देखने लगी. मैने बहुत मनाया, पर वो नही मानी.

विवेक: यार शिखा, तू ये तो पूच मैं उसे छोड़ने की इतनी ज़िद क्यूँ कर रहा हू?

शिखा: क्यूंकी कुत्ता है तू सेयेल, हवसी है. तुझे बस छोड़ना है सब को. तेरा बस चले तो अपनी मा भी छोड़ दे कुत्ते. रोहिणी को तो पेल ही दिया. अब मेरी मा को छोड़ेगा. तो छोड़ ले, पर फिर मेरी तरफ देखना भी मत.

विवेक: मैं अभी एक थप्पड़ रख दूँगा तेरे ज़्यादा बोलेगी तो. मेरी बात तो सुन यार शिखा. देख मुझे कोई और टेरीका नही दिख रहा शिखा तुझे हमेशा के लिए अपना बनाने का. ऐसे तो तेरे पेरेंट्स मानेंगे नही तेरी-मेरी शादी के लिए. तो सिद्धि बहुत ईज़ी टारगेट है मेरे लिए, बहुत टाइम से अकेली, प्यासी, तन्हा.

मैं उसे छोड़ कर उसकी छूट की प्यास बुझा दूँगा, और फिर बदले में तुझे माँग लूँगा. तब मेरे लंड के लालच में वो तेरी-मेरी शादी भी करवा देगी.

शिखा गौर से सुनती रही, और फिर मेरी गोद में आ कर बैठी, और मुझे हग कर लिया.

शिखा: सॉरी भैया, मुझे नही पता था की आप ये सोच कर ये सब करने को बोल रहे हो.

विवेक: हा, क्यूंकी तुझे हमेशा से यही लगता है ना की मैं बस तुझे अपनी हवस के लिए उसे कर रहा हू. तुझे लगता है मैं तुझसे प्यार ही नही करता. बस तुझे छोड़ने के लिए आता हू तेरे पास.

शिखा: सस्शह, सॉरी बोला ना भैया, अब क्या रुला कर ही मानोगे? पर भैया यार मुम्मा की चुदाई, कोई और आइडिया सोचते है ना प्लीज़. ये नही करो, क्यूँ ना भाग जाए हम?

विवेक: सोचा था ये भी. पर सोच फिर तेरे पीछे तेरा जल्लाद बाप तेरी मुम्मा की क्या हालत करेगा? क्या-क्या सुनाएगा उसे, और पता नही कितना टॉर्चर और झेलना पद जाएगा उसे.

शिखा: हा, सो तो है. मैं मुम्मा से बात करू क्या उस भोंसड़ी वाले से डाइवोर्स लेने के लिए?

विवेक: वो नही मानेगी. वो बहुत प्यार करती है उससे मुझे ऐसा लगता है. वरना इनडिपेंडेंट औरत क्यूँ इतना सब झेलती?

तभी वरुण आ गया. हमने उसे एक चाबी दे दी थी, जिससे वो कभी भी आ-जेया सकता है फ्लॅट पर. वो हमे नंगा देख कर स्माइल करने लगा.

वरुण: क्या बात है भाई? रौंद हो चुका या होने वाला है?

विवेक: अर्रे यार बीच में ही रोक दिया साली ने.

शिखा ने मेरे सीने पर मारा और फिर हग कर लिया.

वरुण: क्या हुआ, कुछ सीरीयस डिस्कशन?

शिखा: भैया को मुझसे शादी करनी है.

वरुण: वाउ यार, ये तो गुड न्यूज़ है यार. कोंग्रथस साली कुट्टी, कोंग्रथस भैया.

शिखा: पर मेरी मुम्मा को छोड़ कर.

वरुण: श, ग्रेट भैया.

फिर हमने उसे सारा किस्सा बताया, और उससे सजेशन्स माँगे. तो उसके भी समझ नही आया कुछ भी. फिर कुछ टाइम ऐसे ही चुप बैठे रहे. उसके बाद शिखा बोली-

शिखा: भैया एक आइडिया डू, पर तोड़ा अजीब है.

हम दोनो सुनने के लिए उसके मूह को देखने लगे गौर से.

शिखा: क्यूँ ना मैं और वरुण शादी कर ले?

वरुण: क्या! चूतिया गयी है क्या साली?

शिखा: देख तू है गे, तुझे छूट पसंद नही है. तेरी-मेरी शादी हो गयी तो तुझे मुझमे और मुझे तुझमे कोई इंटेरेस्ट नही होगा. तू अपना चुड़वते रहना, जिससे भी चाहे. मैं अपने भैया से चुड़वति रहूंगी. और मेरी-तेरी शादी के लिए मेरे घर वेल भी मान जाएँगे. और तेरे घर वालो को तो मैं ऑलरेडी पसंद हू. इससे भैया मुम्मा को भी भूल जाएँगे, और उनकी छूट भी बच जाएगी इस जानवर से. और मुझे भी सुकून मिल जाएगा.

वरुण: नही-नही, क्या फालतू आइडिया है. भैया क्या बोल रही है ये?

विवेक: हा, मुझे भी पसंद नही आया ये आइडिया.

शिखा: हा, आपको क्यूँ ही पसंद आएगा. एक छूट जो निकल रही है हाथो से.

विवेक: चुप हो जेया, ये आइडिया इसलिए नही पसंद क्यूंकी मुझे तुझे अपने साथ रखना है, और इससे शादी करके तो तू इसके घर रहेगी ना. तो तुझे छोड़ने के लिए फिर कभी इसके घर अओ, कभी होटेल जौ, ये सब नही करना है मुझे. मुझसे शादी करेगी, मेरे साथ रहेगी, तो जब चाहूँगा नंगा करके जैसे चाहूँगा छोड़ूँगा. तुझे जीतने चाहूँगा बच्चे निकालूँगा तेरी छूट से. समझ आई? बड़ी इससे शादी कर लू उससे शादी कर लू, बहनचोड़! सिर्फ़ मुझसे होगी शादी और किसी से नही.

शिखा और वरुण ने मेरा गुस्सा भाँप लिया तो दोनो चुप-छाप मुझे देख रहे थे. फिर वरुण ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे सहलाने लगा. वरुण फिर बेड के नीचे बैठा और मेरा लंड मूह में लेकर चूसने लगा.

वरुण: काम डाउन भैया, प्लीज़ काम डाउन. गुस्सा मत हो ना प्लीज़.

और फिर उसने लंड चूस-चूस कर आचे से गीला किया और मस्त कड़क कर दिया.

वरुण: भैया आप शिखा की लेंगे या मेरी?

मैं पहले से गुस्से में था, और ये बहनचोड़ बाकचोड़ी कर-कर के और गुस्सा दिला रहे थे. मैने वरुण का मूह पकड़ा और बेड के कॉर्नर पर रखा. उसके मूह में लंड पेला और ज़ोर-ज़ोर से धक्के पेलने लगा. लंड पूरा गले तक जाने लगा.

वरुण को दिक्कत हो रही थी, ढंग से साँस भी नही आ रही थी. वो अपने हाथो से कमर से मुझे पकड़ कर स्पीड कम करने की कोशिश कर रहा था.

पर मैं गुस्से में बिल्कुल एंड तक अपना लंड उसके गले में पेल रहा था. फिर वरुण ने अपना हाथ शिखा की तरफ किया, उसे बुलाया बचाने को. पर शिखा खुद दररी हुई थी, तो वो नही आई.

फिर मैने उसे उठा कर घुमाया, और एक झटके में सारे कपड़े निकाल फे के. उसके बाद उसको झुका कर उसकी गांद में लंड दे मारा.

वरुण: आआी मम्मी! भैया उफफफ्फ़! फक, शीत शीत शीत!

वरुण की सूखी गांद में गीला लंड पेलता ही गया मैं दाना-दान. उसकी चीख जैसे सुनाई ही नही दे रही थी मुझे.

बस ताबड़तोड़ पेले जेया रहा था उसको, और उसकी गांद को पूरी तरह फाड़ने में लगा था. अपने हाथो से उसकी गांद खोल कर बहुत डीप-डीप शॉट्स पेल रहा था, और गांद को खींच कर खोल रहा था, तो उससे भी उसे दर्द हो रहा था.

वरुण: भैया प्लीज़, रहम करो. गांद जल रही है यार! शिखा का गुस्सा मुझ पर क्यूँ निकाल रहे हो भैया? आअहह आआहह नही भैया.

उसकी हालत बिल्कुल रोने जैसी हो गयी. वो शिखा के आयेज हाथ जोड़ने लगा.

वरुण: शिखा प्लीज़ अब तू ही कुछ कर.

शिखा मेरे पास आई और मेरे चेहरे को पकड़ कर मुझे किस करने लगी. मैने मूह झटक लिया तो उसने दोबारा से पकड़ कर किस किया. मैने फिरसे झटक लिया और इस बार उसे आँख दिखाई, तो वो रुक गयी. पर वरुण का दर्द देख एक बार उसने हिम्मत की और हाथ आयेज बढ़ाए. तो मैने उसके हाथ पकड़े और उसे खींच कर वरुण के उपर ही लिटा दिया. फिर उसकी गंद में लंड पेल दिया.

अब वरुण बेड पे था. शिखा उसकी पीठ पर, और मैं शिखा की पीठ पर. क्यूंकी गांद बिल्कुल सूखी थी, तो शिखा की भी चीख निकल गयी. पर वो चीखने के बाद फ़ौरन शांत हो गयी. उसे पता था की अब कोई फ़ायदा नही था फरियाद का.

मैने उसके कंधे पकड़े और खूब ज़ोर लगा-लगा कर लंड पूरा अंदर तक पेलने लगा. शिखा झटपटा रही थी, पर मूह से कोई आवाज़ नही निकल रही थी. उसने अपने हाथ पीछे करके अपनी गांद को खोलना शुरू कर दिया, जिससे गांद में जलन कम हो, और उसे तकलीफ़ भी कम हो.

करीब 5 मिनिट उसकी गांद छोड़ी. फिर लंड निकाल कर छूट में पेल दिया, और उसे भी ज़ोर-ज़ोर से छोड़ा. शिखा वरुण के कंधे को बीते कर ली, तो वरुण चिल्लाया. वो भी अपनी गांद पकड़ कर पड़ा था चुप-छाप.

शिखा की छूट गीली हो गयी तो उसे पलट कर वरुण के उपर ही पीठ के बाल लिटाया, और उसके पैर फैला कर हवा में कर दिए. फिर कमर पकड़ कर चुदाई दोबारा शुरू कर दी, और मैं बिल्कुल रहम नही कर रहा था उस पर.

शिखा भी अपने होंठ भींच कर हर धक्का से रही थी. उसका चेहरा देख कोई भी बता सकता था की कुछ दर्दनाक से कर आई थी.

ये आँखों में हल्का-हल्का पानी आ गया था उसकी. छूट कम से कम 10 मिनिट छोड़ी होगी. फिर मुझे लगा अब मेरा निकालने वाला था, तो मैने शिखा को नीचे बिताया और मूह में लंड डाला. फिर खूब अंदर तक लंबे-लंबे झटके मार-मार मूह छोड़ना शुरू किया.

शिखा कोई रोक-टोक किए बिना मूह छुड़वा रही थी. फिर जब उससे बर्दाश्त नही हुआ तो मेरी कमर में लिपट गयी, और खुद ही मूह आयेज-पीछे करने लगी, जिससे मैं धक्के पेलना बंद कर डू. फिर उसने खुद का मूह चुडवाया और मेरा माल निकाला अपने मूह में, और पी गयी गत-गत.

मैं वहाँ से सीधा वॉशरूम गया और नाहया. फिर बाहर आया, कपड़े पहने, और अंदर रूम में गया. वहाँ से बाग लाया, और जाने लगा.

वरुण: भैया बात तो सुनो. प्लीज़ ऐसे गुस्से में मत जाओ यार.

शिखा ने उसे रोक लिया: जाने दे वरुण वो नही रुकेंगे. अभी गुस्से में किसी की नही सुनेंगे.

मेरी और सुलाघ गयी की बहनचोड़ इसने एक बार भी रुकने को नही कहा. मैं सीधा बस स्टॅंड गया, और बस पकड़ कर वापस आ गया अपने फ्लॅट पर. फिर मुझे शिखा और वरुण कॉल भी करते रहे, लेकिन मैने नही उठाई कॉल दोनो की ही.

शिखा ने दूसरे दिन रोहिणी को कॉल किया, और मेरे फ्लॅट पर भेजा की मेरी बात करा दो भैया से, वो मेरा फोन नही उठा रहे है. मैने तब भी बात नही की उससे, और रोहिणी को भी वापस से उसके फ्लॅट पर भेज दिया. मैने बोल दिया की दोबारा उसकी कॉल को लेकर मेरे पास ना आए.

error: Content is protected !!