बचपन के दोस्त के साथ गे रोमॅन्स की कहानी

हेलो दोस्तों, मेरा नाम मीटंश है, पर सभी मुझे प्यार से मोनू कहते है. ये मेरी पहली कहानी है. उम्मीद करता हू की ये आपको पसंद आएगी. डिरत्यतौगतस543@गमाल.कॉम पर अपनी फीडबॅक देना. समय बर्बाद ना करते हुए चलिए शुरू करते है.

सुंदरपुर गाओं के एक बड़े से घर के पीछे ही एक तबेला बना हुआ था, जहाँ पीछे के हिस्से में कुछ भैंस और गाए बँधी हुई थी. वहीं अगले हिस्से में एक छ्होटी सी खिड़की लगी हुई थी. और उसी खिड़की पे इस समय एक जवान लड़का यानी की मैं, जो काफ़ी गोरा और खूबसूरत हू, खड़ा हुआ था. मैं चारो तरफ देख रहा था, और साथ ही में तोड़ा दर्रा हुआ भी था.

पर तभी मेरी सोच को तोड़ते हुए 2 हाथ मेरी बगल से निकल के आयेज आते है, और मेरे हल्के उभरे हुए निपल्स को जाकड़ लेते है. अपने जिस्म पे उन मज़बूत हाथो की च्छुउअं से मैं पूरी तरह मचल पड़ता हू “आआहह… माआआआ”.

पर इससे पहले की मैं और कुछ बोल पाता, उन हाथो का मलिक अपने हाथो की जाकड़ मज़बूत कर देता है, और मेरे मासूम निपल्स को ज़ोर से मसल देता है. इससे मैं एक बार फिर से तड़प पड़ता हू “आआआआअहह… खालिद”.

मेरे जैसे खूबसूरत लड़के को कोई यू मसलेगा तो हल्का दर्द तो होगा ही. पर यू निपल्स का मर्दन होने के कारण मुझे मज़ा भी बहुत आने लगा था. वहीं मेरे पीछे चिपका वो दूसरा लड़का पूरी मेहनत से अपना काम कर रहा था.

निपल्स के ऐसे प्यार से मसले जाने की वजह से मैं अपने अंदर गर्मी को सॉफ-सॉफ महसूस कर पा रहा था. इसलिए खुद ही अपनी गांद को हल्का सा पीछे कर लेता हू, और उस पीछे वाले मर्दाना जिस्म से खुद को चिपका देता हू.

इससे मुझे अपनी गांद में कोई मोटी चीज़ चुभती हुई महसूस होती है, और मेरी सिसकारी फुट पड़ती है “आआआअहह”. पीछे वाला लड़का मेरे निपल्स से अपनी जाकड़ थोड़ी कम करता है, तो मैं किसी लड़की जैसे शरमाते हुए उसकी तरफ घूम जाता हू. फिर उस मर्दाना लड़के को देख के धीरे से शर्मा जाता हू. मेरी ऐसी लड़कियों वाली अदा देख के वो पूरी तरह पागल हो जाता है.

“बहनचोड़ तू क्या मस्त माल है. मदारचोड़ क्या चीज़ बनाई है तेरे बाप ने.” वहीं मैं उसकी बात पे किसी दुल्हन की तरह शर्मा पड़ता हू. और किसी पत्नी जैसे शिकायत करते हुए कहता हू-

मैं: क्या भाई, अचानक से यू इतने ज़ोर से दबोच लिया. देखो मेरे निपल्स लाल हो गये है.

मैं अपनी खूबसूरती और अपने लाल पद चुके निपल्स को दिखाते हुए ऐसे शरमाते हुए ये बोल रहा था, मानो एक पत्नी अपने पति से शिकायत कर रही हो. वहीं दूसरा लड़का जो मेरी ही उमर का था, पर मुझसे ज़्यादा जवान और देखने में एक असली मर्द था, और उसके अंदर मेरे जैसी नज़ाकत नही थी, बल्कि उसे देख के ही पता चल रहा था की असली मर्द कैसे होते है.

मेरे खूबसूरत निपल्स को मसालने वाला ये लड़का हल्के गेहुआ रंग का, मज़बूत काड्द-काठी, और लंबे चौड़े जिस्म वाला था. बिल्कुल गाओं के मेहनती किसान जैसा.

वो बिना कुछ भी बोले, बस मुस्कुरा के मेरी आँखों में देखते हुए, अपना चेहरा आयेज करके, मेरे एक निपल को अपने मूह में भर के चूस लेता है “स्ल्ल्ल्लर्र्र्र्र्रप्प्प्प.”

इस हरकत से खूबसूरत जिस्म वाला मैं ऐसे तड़प पड़ता हू, मानो किसी ने मेरे योवां को लूटने की शुरुआत कर दी हो “आहह खालिद…”

अब तो आप समझ ही गये होंगे मेरे योवां का रस्स-पॅयन करने वाले दूसरे लड़के का नाम ‘खालिद’ है, जो की और कोई नही मेरे बचपन का दोस्त है. पर मेरी इस कामुक आहह ने शायद मेरे दोस्त खालिद को बता दिया था की अब इस खेल में मेरी पूर्ण सहमति थी.

तभी मेरा दोस्त खालिद मेरे निपल को चूस्टे हुए कहता है: अपने खूबसूरत दोस्त के निपल चूसने का स्वाद ही अलग होता है. मेरी जान ‘मोनू’.

अब आप भी समझ गये होंगे की जिसका योवां लूटने वाला है यानी मैं ‘मोनू’ हू. और मेरा योवां रस्स लूटने वाले का नाम खालिद है. यानी मेरे बचपन का सबसे अछा दोस्त.

खालिद अपना मज़दूर जैसा एक हाथ मेरी गोरी कमर पे रखते हुए, धीरे से अपना हाथ पीछे की तरफ सरकते हुए, जल्दी ही मेरी मासूम गांद को अपनी मुट्ठी में भर के ज़ोर से दबोच लेता है.

मैं: आआआअहह खालिद ढेरे, उफफफफफफ्फ़.

मैं किसी लौंडिया जैसे तड़प पड़ता हू.

खालिद मुस्कुराते हुए कहता है: हाए मेरी रॅंड मोनू, क्या जवानी है तेरी. बिल्कुल किसी कक़ची काली लड़की जैसी. आज तो तुझे छोड़ के तेरी सील खोल दूँगा. बोल खुलवाएगा ना अपनी गांद की सील मुझसे?

अब भला मैं अपने दोस्त को क्या जवाब देता? पर उसकी ये बात सुन कर मानो मैं अंदर तक तड़प पड़ता हू, और आअहह भरते हुए कहता हू-

मैं: तुझसे अपनी गांद मरवाने के लिए ही तो मैं देल्ही से गाओं वापस आया हू.

खालिद अपने हाथ को मेरी गोरी गांद पे चलते हुए धीरे से उसपे मारता है “चटाआक्कककक”.

मैं: आआआअहह.. धीरे भाई.

खालिद हेस्ट हुए: सेयेल अभी से चिल्लाने लगा. अभी तो गांद फाटनी बाकी है तेरी.

यहाँ से आयेज बढ़ने से पहले ये जानना ज़रूरी है की बात यहाँ तक पहुँची कैसे? और ऐसा किया हुआ की मैं आज अपने दोस्त से अपनी गांद मरवाने को तैयार हो गया?

इसलिए ये जानने के लिए हमे 1 महीने पीछे चलना होगा. मैं पिछले 4 सालों से अपने गाओं से डोर देल्ही में अपने बड़े मामा-मामी के पास रह रहा था. और इन 4 सालों में एक बार भी गाओं नही जाना हुआ.

वैसे अभी कुछ दीनो पहले ही मेरे 12त के एग्ज़ॅम पुर हुए थे, और अब जल्दी ही मैं वापस अपने गाओं जाने वाला था. क्यूंकी वहाँ पिता जी को मेरी ज़रूरत थी.

और इस बात को लेके मैं बहुत ज़्यादा खुश था. मेरे मामा की यहीं देल्ही में कपड़ों की एक बड़ी दुकान है. मैं खाली समय में उनकी दुकान पे रहता हू, जिससे उनकी कुछ मदद हो सके.

बाकी दीनो की तरह उस दिन भी मैं दुकान पे बैठा हुआ था. मामा खाना खाने के लिए घर गये हुए थे, और दुकान पे उस समय सिर्फ़ मैं और दुकान की सॉफ सफाई करने वाला ‘छ्होतू’ ही थे. तभी मेरे फोन पे किसी का मेसेज आता है “कैसा है भाई?”

नंबर नया था इसलिए मैं उसे पहचान नही पाता, पर जवाब देता हू-

मैं: बढ़िया, पर आप कों?

दूसरी तरफ से हासणे वाली एमोजी आता है, और साथ में जवाब-

वो: सेयेल मैं खालिद हू. देल्ही जाके अपने बचपन के दोस्त को भूल गया?

मुझे यकीन ही नही होता, क्यूंकी जब से मैं यहाँ आया था, आज जाके कहीं खालिद से बात हो पा रही थी. खालिद मेरे बचपन के कुछ सबसे आचे दोस्तों में से एक था. पर फिर देल्ही आने के बाद उससे बात-चीत बंद ही हो गयी थी.

मैं तुरंत जवाब देता हू: कैसा है भाई? तुझसे बात करने की कितनी कोशिश की, पर तेरे पास तो फोन ही नही था.

खालिद का जवाब भी तुरंत ही आता है: हा भाई ये तो था, पर अब ये नंबर सवे कर ले. मैने आज ही नया फोन लिया है, और सबसे पहले तुझे ही मेसेज कर रहा हू.

मैं ये जान के बहुत खुश होता हू और आयेज पूछता हू: वैसे सेयेल मेरा नंबर कहाँ से मिला?

खालिद: अर्रे आज ही चाची से मिला था खेत पे. उनसे ही लिया.

खालिद मेरी मा ‘मालती’ की बात कर रहा था.

मैं: और बता मा कैसी है?

खालिद तपाक से लिखता है: बिल्कुल मस्त है भाई.

मुझे तोड़ा अजीब लगता है, पर फिर सोचता हू गाओं की भाषा ही ऐसी होती है. उसके बाद हम और कुछ बातें करते है, और ऐसे ही अब लगभग रोज़ ही हमारी बातें होने लगती है. हम ज़्यादातर Wहत्साप्प पे ही बातें करते थे.

ऐसे ही एक दिन रात को जब मैं बिस्तर पे लेता हुआ था, तभी खालिद का मेसेज आता है: और बता बिज़ी तो नही है?

मैं: मैं कहाँ बिज़ी होने लगा?

खालिद: क्यूँ, देल्ही में कोई गर्लफ्रेंड नही पताई?

मैं: कहाँ यार, लड़कियों से बात करने की हिम्मत ही नही होती.

खालिद हासणे वाली काई सारी एमोजीस भेजता है, और फिर कहता है: चल अपना एक फोटो भेज. मैं भी तो देखु मेरा भाई इतने सालों बाद कैसा दिखने लगा है.

मैने उसे उसी पोज़िशन यानी बिस्तर पे लेते-लेते एक सेल्फिे क्लिक करके भेज दी, और उसके जवाब का इंतेज़ार करने लगा. थोड़ी देर बाद खालिद का जवाब आता है-

खालिद: सेयेल ये किस लौंडिया की फोटो है? वैसे साली किया गरम माल है.

मुझे समझ नही आया की वो मज़ाक कर रहा था या सच में उसे मेरी फोटो ऐसी लगी?

मैं: सेयेल क्या बोल रहा है? मेरी फोटो है.

कुछ पलों तक उसका कोई जवाब नही आया.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा.

error: Content is protected !!