एक बार सेक्स के दौरान वनिता आंटी मेरा लंड चूस रही थी. जब मैने उनके मूह से लंड निकाला, तो मैने देखा उन्होने मेरे लंड पर खरॉच दिया था. और इस बार थोड़ी ज़्यादा ही चाँदी च्चिल गयी थी. मुझे उन पर इतना गुस्सा आ गया की मैने उनको थप्पड़ मार दिया.
मैं: साली रंडी, ठीक से लोड्ा मूह में लिया कर. (उसको मेरा च्चिला हुआ लंड दिखा कर) देख कितना खरॉच दिया है.
वनिता आंटी (मुस्कुराते हुए): ह्म.. ये मेरा लंड है, तो मेरा जैसे मॅन करे, उसको वैसे चूसूंगई.
मैं (उनके बालों से खींच कर दीवार से चिपका दिया, और उनके मूह को पकड़ कर दबोच दिया): साली कुटिया, तुम ना मेरी रंडी हो, ठीक है? और रंडी अपने मलिक से ज़ुबान नही लड़ती.
मैं अब उनके नंगे बूब्स ज़ोर-ज़ोर से मसालने लगा और उनके निपल चूस रहा था. उनका दर्द से भरा चेहरा देख कर मुझे अब सुकून मिल रहा था. साथ में उनका गला दबा कर किस कर रहा था. मैने उनके गले और र्लोबस सब जगह अपनी जीभ घुमणि शुरू कर दी. वनिता आंटी मेरा टॉर्चर एंजाय कर रही थी. उनको बहुत मज़ा आ रहा था, जब मैं उनका गला बदाता, थप्पड़ मारता, उनको ब्लोवजोब के टाइम चोक करता.
मैं (उनको लिप्स किस करते हुए हल्के हाथ थप्पड़ मार कर): क्यूँ तुम्हे अब थप्पड़ खाना अछा लगता है? (वो अपने सर और आँखों से मुझे इशारा करके बता रही थी की उनको मज़ा आ रहा था. साथ में उनके उपर मस्ती चढ़ि हुई थी).
मैं (एक और थप्पड़ मार कर): और थप्पड़ खाने है? (वो इशारे से हा कह रही थी) ज़ोर का थप्पड़ खाना है? (वो फिर हा में इशारा कर रही थी).
मैं: ज़ोर का थप्पड़ लगेगा तो से नही पाएगी.
वनिता आंटी (मेरी आँखों में देखते हुए): मुझे आपके साथ हर एक चीज़ में मज़ा आता है.
मैं: तो ज़ोर से थप्पड़ चाहिए?
वनिता आंटी ने इशारे से मुझे हा कहा. अब सिचुयेशन ऐसी थी की मैने उनको दीवार की तरफ दबोचा हुआ था. मैं आपको बता देता हू की मैने अब तक वनिता आंटी को जीतने थप्पड़ मारे थे, वो सब हल्के हाथ से लगाए थे. लेकिन इस बार मेरा हाथ कुछ ज़्यादा भारी पद गया. मेरा थप्पड़ लगते ही वो पूरी की पूरी हिल गयी. उनका एक्सप्रेशन ये बयान कर रहा था की उन्होने ये एक्सपेक्ट नही किया था, की ज़ोर का थप्पड़ ऐसा होता है.
मैं (बहुत प्यार से): और थप्पड़ चाहिए क्या?
वो इस बार इतना दर्र गयी थी की मुझे इशारे से माना कर रही थी. मैने फिर अपना हाथ उपर किया तो वो दर्र के मारे काँपने लगी. मुझे ये सब चीज़ में इतना मज़ा आ रहा था, पर मैने फिर उनको थप्पड़ नही मारा.
मैने उसके बाद उनकी बहुत रफ्ली गांद मारी. उस दिन मैं जानवर बन गया था. मेरी लाइफ में कभी इतना बुरा बर्ताव मैने किसी के साथ नही किया था, जितना मैने उस दिन वनिता आंटी के साथ किया. उनको जितनी गंदी गालियाँ दी थी, की वो खुद उस दिन अफ़सोस की होगी की कहाँ फ़ासस गयी.
मैं: साली रंडी शादी-शुदा हो कर भी बाहर चुड़वति है. तुझे नये-नये लंड पसंद है. तू बहुत बड़ी च्चिनाल है.
मैने उस दिन उनको नज़ाने क्या कुछ बोल दिया था. उनकी चुदाई करने के बाद मैं अपने ऑफीस चला गया. मुझे फिर रीयलाइज़ हुआ की मैने उनके साथ ग़लत किया था. तो मैने उनको मेसेज करके मेरे बिहेवियर के लिए सॉरी कहा. वनिता आंटी ने मुझे अपनी फोटो भेजी.
मैने देखा तो उनकी आँख लाल हो गयी थी. चेहरा एक तरफ से सूज गया था, जिस तरफ के गाल पर मैने थप्पड़ मारा था. और वहाँ ग्रीन निशान बन गया था. मैने उनको तुरंत कॉल किया.
मैं: सॉरी यार, आज पता नही क्या हो गया था. और तेरे साथ ऐसा कर दिया.
वनिता आंटी: आप क्यूँ सॉरी बोल रहे हो. आपने मुझे पूछा था ज़ोर से मारु, और मैने हा कहा, तब तुमने लगाया. एक बात काहु?
मैं: हा बोल ना.
मैं आपको बताना भूल गया था. अब मैं उनसे तू-तू करता हू और वो मुझे आप कह कर ही बुलाती थी. जब से मैने उनको मेरी रंडी बनाया था.
वनिता आंटी: बेबी मिरर में चेहरा देखती हू तब आपकी याद आ रही है. ई लोवे योउ जानू.
मैं: ह्म.. ठीक है.
वनिता आंटी: आप मुझसे प्यार करते हो ना?
मैं (गुस्से में): तू ना दिमाग़ का भोंसड़ा मत कर अभी. तू मेरी रखैल है, तो अपनी औकात मत भूल. आज के बाद लोवे की बात की तो तेरी मा छोड़ दूँगा.
मैने उस दिन कॉल पर उनको और बहुत सारी गालियाँ सुनाई. मैने उस दिन उनको इतना हर्ट किया की उसकी कोई सीमा नही होती. उसके बाद उनसे 3-4 दिन बात नही की. सच काहु तो मम्मी अंकित के सामने तरुण के लिए गिड़गिदा रही थी. और वो मम्मी को अपने इशारे पर नाचा रहा था. उसका जब मॅन करता तब मम्मी उससे चूड़ने जाती थी. उनकी छत पढ़ कर ही मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था. इस सब का गुस्सा वनिता आंटी पर निकल रहा था.
मेरे और वनिता आंटी के बीच कुछ बॉनडिंग हो गयी थी. इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी हम एक-दूसरे के बिना रह नही पाते थे. मैं जब भी उनको मेसेज या कॉल करता, वो मेरे से बात करती. वो मुझे जैसा मॅन करे वैसे छोड़ने देती थी. लेकिन उनका नेचर ऐसा था की आख़िर में मुझे उन पर गुस्सा आ जाता और मेरी गालियाँ सुनती.
एक दिन मैं ऑफीस से मम्मी का मोबाइल मॉनिटर कर रहा था, तब मुझे एक नया झटका मिला. मम्मी और अंकित में कुछ बात हुई जो मैं आपसे शेर करता हू.
अंकित: भावना मेरी जान क्या कर रही हो?
मम्मी: क्या करूँगी? तुम तो तरुण से मेरी बात नही करवा रहे. लास्ट टाइम मिलने आओ ऐसा बोल-बोल कर इतने दिन निकाल दिए.
अंकित: बेबी मैने कुछ सोचा है तुम्हारे लिए. जिससे तुम्हे मज़ा अभी आएगा, और तरुण से तुम्हारी सेट्टिंग हो जाएगी.
मम्मी: सॅकी?
अंकित: हा. लेकिन उसके लिए तुम्हे मैं जैसा काहु वैसा करना पड़ेगा.
मम्मी: देख अंकित, अब तुम गोल-गोल बात करके फिर से मुझे मिलने आने को बोलॉगे. मुझे लग रहा है तुम मेरा फ़ायदा उठा रहे हो. अब मैं तुमसे मिलने नही आने वाली.
अंकित: ठीक है, तुम्हे नही आना तो कोई बात नही. मैं तरुण से बात कर लेता हू की भावना रेडी नही है.
मम्मी: क्या कहा? तरुण से तुम्हारी क्या बात हुई?
अंकित: तुम्हे अब मेरे उपर भरोसा नही है तो क्या काहु?
मम्मी: प्लीज़ बताओ ना डियर, ऐसा क्यूँ करते हो?
अंकित: ठीक है, बताता हू, पर एक शर्त पर. मेरे कान कुछ सुनने को तरस रहे है.
मम्मी: और मैने नही कहा तो क्या कर लेगा?
अंकित: तुम्हे पता है मैं क्या कुछ कर सकता हू.
मम्मी: कमीने तू सुधरेगा नही. ठीक है सुन आचे से, मैं तेरी रंडी हू. तेरा मॅन करे तब तुमसे छुड़वाने आ जौंगी. तुम्हारे आयेज कुटिया बन कर खड़ी रहूंगी. अब खुश ना?
अंकित: हा मेरी रंडी, बहुत खुश.
मुझे उस टाइम इतना गुस्सा आ रहा था की क्या काहु आप सब को. मैं मेरी मम्मी को रानी बना कर रख रहा था, और वो किसी और लड़के की रंडी बनी हुई थी.
अंकित: अब मेरी बात ध्यान से सुन.
वो मम्मी को तरुण और उसके बीच हुई बात को बताता है. वो सुन कर मेरे होश उडद गये थे. मैं बहुत डिप्रेशन में था, तब मुझे वनिता आंटी का कॉल आया. मैने अपना सारा गुस्सा उन पर उतार दिया. मैने उनको उस दिन इतना सब कुछ कह दिया, की उस दिन हमारी दोस्ती ख़तम हो गयी. मैं इतना डिप्रेशन में था की मैने अपना मोबाइल बंद कर लिया.
साला मैं सोच-सोच कर परेशन हो गया था, की आख़िरकार मेरी ग़लती क्या थी, जो मम्मी मेरे साथ ऐसा कर रही थी. मैं आज तक समझ नही पाया था की ये अंकित साला कौन था, जो मम्मी पर इतना हक जमा बैठा था. और ये तरुण भी क्या चीज़ था, जिसके लिए मम्मी अंकित की रंडी बनी हुई थी. मुझे अंकित की बात से ये लग रहा था की उसके पास कुछ चीज़ ऐसी थी, जिसके लिए वो मम्मी को बार-बार अपने पास बुलाया करता था.
नेक्स्ट दे मम्मी पापा से झूठ बोल कर घर से निकल गयी. उन्होने पापा से कहा की उनकी एक फ्रेंड के घर पर पूजा रखी थी, तो वो वहाँ जेया रही थी. पर बीचारे पापा को नही पता था की उनकी बीवी कहीं अपना मूह काला करवाने गयी थी. मम्मी ने उस दिन स्काइ ब्लू कॉटन की सारी और लाइट ग्रीन ब्लाउस पहना था.
मम्मी बेहद खूबसूरत माल लग रही थी. मेरा तो वो घर से जेया रही थी, तब देख कर ही लंड खड़ा हो गया था. मुझे ऑलरेडी पता था की मम्मी छुड़वाने जाने वाली थी, तो मैं उनका डिस्टेन्स से, उनको पता ना चले ऐसे पीछा कर रहा था.
मैने देखा की एक कार आ कर मम्मी के पास रुक गयी, और मम्मी उसमे बैठ कर चली गयी. कार के सारे ग्लास इतने ब्लॅक थे, की उसमे और कौन बैठा था, वो दिख नही रहा था. मैं अपने बिके से मम्मी जिस कार में थी उसका पीछा कर रहा था. हाइवे का रास्ता आते ही वो कार इतनी तेज़ हो गयी, की मैं चाह कर भी उसको फॉलो नही कर पाया.
लेकिन मैं मम्मी की लोकेशन से उनको फॉलो करने लगा. तोड़ा जंगल टाइप एरिया आया, तो मेरा नेटवर्क आचे से काम नही कर रहा था. पर मैने नोटीस किया की वो वहीं एरिया था जहाँ मम्मी और वनिता आंटी लास्ट टाइम आए थे. मुझे एक फार्महाउस के कॉंपाउंड में वो कार दिखी जिसमे मम्मी आई थी.
मैने उससे तोड़ा डोर सड़क के किनारे मेरा बिके ऐसे रखा की किसी को पता ना चले. मैने देखा की आस-पास का एरिया सुनसान था. और वहाँ से कुछ 1 केयेम की दूरी पर एक छ्होटा सा गाओं था. मैने आस-पास देखा की कहीं सीक्ट्व कॅमरा तो नही है. मुझे ऐसा कुछ नही दिखा तब मैं दबे पावं उस कॉंपाउंड में चला गया. मुझे अंदर से बातें करने की आवाज़ आ रही थी, और वो लोग हस्सी मज़ाक कर रहे थे ऐसा लग रहा था.
मैं एक खिड़की से अंदर देखने की कोशिश कर रहा था, पर मुझे कुछ दिखाई नही दिया. फिर मैं ऐसे फार्म के चक्कर लगा रहा था, तब मुझे लगा किसी ने मुझे देख लिया था. मैं दर्र के मारे घास के ढेर के पीछे च्छूप गया. मैं इतना दर्र गया था की मेरे पसीने छ्छूट रहे थे. क्यूंकी अंजान जगह पर मैं था, और मुझे दर्र उस बात का था की अंजान जगह पर मम्मी भी थी.
कुछ 5 मिनिट के बाद कोई मेरे सामने खड़ा हो गया. वो कौन था, और उसने मेरे साथ क्या किया, आपको नेक्स्ट पार्ट में बतौँगा.
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