दीदी की काली चूत का मजा

हैल्लो दोस्तों, में आज आप सभी के पढ़ने वालों की सेवा में अपने जीवन की एक सच्ची घटना को लिखकर भेज रहा हूँ। प्लीज मेरी किसी भी गलती के लिए मुझे माफ़ जरुर करें। दोस्तों में अब अपनी आज की कहानी को सुनाना शुरू करता हूँ जो मेरी एक सच्ची कहानी है। दोस्तों हमारे घर में मेरे चाचा चाची और चाचा की लड़की मतलब कि मेरी बहन सोनम रहती है और मेरी मम्मी पिताजी मेरे नाना के गाँव में रहते है, क्योंकि मेरी मम्मी के कोई भाई नहीं है, इसलिए वहां का सारा कारोबार शुरू से ही मेरे पिताजी सम्भालते है। अब में अपने बारे में बताता हूँ, दोस्तों मेरा नाम अभय है और मुझे घर में सभी लोग अभि कहते है। मेरी सोनम दीदी अब मेरे पास नहीं है, लेकिन वो व्यहवार की बहुत अच्छी दिखने में ब्राज़ील की लड़की की तरह काली है, लेकिन उसका बदन एकदम भरा हुआ गदराया है। वो मुझसे उम्र में एक साल बड़ी है में उसको दीदी कहकर पुकारता हूँ। वो बी.ए. की पढ़ाई कर रही है और में 12th में हूँ। दोस्तों हम सभी एक साथ रहकर बहुत खुश रहते थे, दीदी और में तो साथ में पढ़ाई करते थे। दोस्तों मैंने कभी भी अपनी दीदी को अपनी गंदी नज़र से नहीं देखा था, लेकिन वो कभी कभी अपने काले बदन के लिए मुझसे कहती थी तू कितना गोरा है, लेकिन मुझे देख में कितनी काली हूँ।

फिर में उनको कहता कि दीदी रंग से कुछ फरक नहीं पड़ता आपकी चमड़ी कितनी मुलायम है? आप वो भी तो देखिए और मेरी कितनी सख्त है। दोस्तों यह ऐसा कहकर में दीदी के हाथों के ऊपर अपना हाथ फेर देता और वो भी मेरी बात को सुनकर हंसने लगती। फिर ऐसे ही वो दिन चले जा रहे थे, तब हमारी दीवाली की छुट्टियाँ थी इसलिए हम दोनों घर पर ही थे और दीदी मुझे थोड़ी उदास नजर आ रही थी। फिर मुझे यह लगा कि दीदी शायद परेशान है, इसलिए मैंने उनसे पूछा कि दीदी क्या बात है आजकल आप बहुत ही उदास रहती है? तब उन्होंने कहा कि कुछ नहीं और फिर वो इधर उधर की बातें करने लगी। दोस्तों रात को हम दोनों एक ही कमरे में सोते थे और उस रात को हम दोनों मस्ती करके सो गये, करीब एक घंटे के बाद मुझे लगा कि दीदी रो रही है। अब में सरककर दीदी के पास गया और मैंने उठकर उनसे पूछा क्यों क्या हुआ दीदी बताओ ना आप रो क्यों रही हो? दीदी बोली कि कुछ नहीं तू सो जा। फिर उसी समय मैंने उनको कहा कि अगर आपने मुझे नहीं बताया तो में चाची को बता दूंगा कि तुम रो रही हो। अब दीदी ने मुझसे कहा कि प्लीज अभि तुम ऐसा मत करो।

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अब मैंने उनसे पूछा बताओ आप क्यों रो रही हो? तब दीदी ने कहा कि में काली कलूटी दिखती हूँ इसलिए कोई भी मेरी तरफ देखता ही नहीं। फिर उसी समय मैंने झट से कह दिया कि रोज में देखता हूँ ना। अब दीदी ने कहा कि तेरे देखने से क्या होगा? और वो थोड़ा मुस्कुराई और में भी मुस्कुरा गया और तभी दीदी ने मेरे माथे पर चूम लिया और उन्होंने मुझसे कहा कि चल अब तू जल्दी से सो जा मेरे राजा नहीं और वो मुझसे लिपटकर सो गई। फिर में भी वैसे ही ना जाने कब गहरी नींद में सो गया, सुबह उठकर में नहाने चला गया और नहाते समय अचानक से मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया और उसी समय मुझे अपनी दीदी की वो बात याद आ गई, तेरे देखने से क्या होगा? दोस्तों आज तक में सिर्फ़ बाहर की पराई लड़कियों के बूब्स की तरफ़ देखता था, लेकिन आज मुझे अपनी दीदी के बूब्स नज़र आने लगे थे। दोस्तों ना जाने वो क्या एहसास था? और तभी मेरे मन में आया कि इस लंड के लिए दीदी के मन में आग लगी है कि कोई उसको भी चोदे और मेरे मन में यह गंदे गंदे विचार आने लगे कि क्यों ना में ही दीदी की इस इच्छा को पूरी कर दूँ और में यह बात सोचकर उनके नाम की मुठ मारने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद में ठंडा होकर फ्रेश होकर नाश्ता करने चला आया और उस दिन मैंने अपने मन में सोच ही लिया था कि अपनी दीदी को तैयार करके मुझे उनकी चुदाई जरुर करनी है। फिर नाश्ते की टेबल पर मैंने चाची को आवाज़ दी वो उस समय रसोई में थी। चाची ने आवाज सुनकर कहा हाँ क्या हुआ है बेटा? में अभी आ रही हूँ। अब दीदी जो मेरे पास वाली कुर्सी पर बैठी थी और एकदम चकित होकर उन्होंने मेरी तरफ देखा और हाथ जोड़कर प्लीज कहा। तभी चाची रोटी लेकर टेबल पर आ गयी और उन्होंने पूछा क्या हुआ बता? अब मैंने कुछ कहने के लिए अपने होंठो को हिलाया, तभी दीदी ने ज़ोर से मेरे पैर पर लात मारी। फिर मैंने झट से बोला कि रात को दीदी सोते समय बहुत लाते मारती है। अब यह बात सुनकर दीदी का चेहरा ख़ुशी से खिल गया और चाची ने कहा कि इसको बचपन से ही यह आदत है यह पूरे बिस्तर पर घूमने लगती है और वो हँसने लगी और में भी हँसने लगा। अब दीदी ने उठकर मेरा गला दबोच लिया और कहा अभि के बच्चे लाते तो तू मारता है। तभी चाची ने उनको कहा कि पहले इसको नाश्ता तो करने दे उसके बाद आराम से इसका गला दबाना और अब वैसे भी तुम्हारी मस्ती के लिए छुट्टियाँ है और वो इतना कहकर वापस रसोई में चली गई।

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