यार से कुँवारी चूत चुडवाई

ही फ्रेंड्स, मैं अशहिमा अपनी पहली चुदाई की कहानी का नेक्स्ट पार्ट लेके आई हू. उमीद है आपने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा. अगर आप में से किसी ने पिछला पार्ट नही पढ़ा है, तो उसको ज़रूर पढ़ ले.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की हमारे बिल्डिंग के बुड्ढे गुआर्द की जगह एक जवान लड़का आ गया. लेकिन बाद में पता चला की वो बुद्धा उसका नाना था. मैं उस लड़के की तरफ अट्रॅक्ट होने लगी. फिर हम दोनो मिले, और प्यार का इज़हार हो गया. अब आयेज-

प्यार के इज़हार के बाद मेरी रोज़ कारण से बातें होने लगी. पहले-पहले हम सिर्फ़ अची-अची बातें करते थे, लेकिन धीरे-धीरे हम दोनो में सेक्स को लेके बातें होने लगी. उसके साथ सेक्स छत करके मेरी छूट गीली हो जाती थी.

धीरे-धीरे वो मुझसे छूट लंड वाली सीधी बात करने लगा. मैं भी वैसे ही रिप्लाइ दे देती. अब मेरी छूट और उसके लंड में खुजली मची हुई थी. अब वो गुआर्द की ड्यूटी से भी हॅट चुका था, और उसके नाना ड्यूटी पर वापस आ चुके थे. ह्यूम बस मिलने का एक मौका चाहिए था.

फिर एक शाम पापा और मम्मी दोनो को पापा के एक फ्रेंड की आनिवर्सयरी पार्टी पर जाना था. मैने कारण को पहले से बता रखा था, और उसको 9 बजे का टाइम दिया था मेरे घर आने का. वो भी मान गया था.

अब मैं मम्मी-पापा के जाने का इंतेज़ार कर रही थी. फिर वो दोनो तैयार हुए, और निकल गये. उन्होने मुझे भी साथ जाने को बोला था, लेकिन मैने कॉलेज असाइनमेंट का बहाना बना दिया था.

उनके जाने के बाद मैं जल्दी से बातरूम में गयी, और नहाने लगी. मैं रग़ाद-रग़ाद कर साबुन से नहाई. अपनी छूट शेव की मैने, और उसको बिल्कुल चिकना कर दिया. उसके बाद मैं कमरे में आई, और मैने लाल रंग की टॉप और ब्लॅक जीन्स पहन ली.

मेरी टॉप थोड़ी टाइट थी, और बूब्स की मस्त क्लीवेज बन रही थी. मैने अछा सा पर्फ्यूम लगाया और कारण का इंतेज़ार करने लगी. ठीक 9 बजे मेरे घर की डोरबेल बाजी. मेरी धड़कन बढ़ गयी, और बदन में कुलबुलाहट सी होने लगी.

फिर मैं उठी, और मैने दरवाज़ा खोला. कारण मेरे सामने खड़ा था. उसको देखते ही मैं होश सा खो बैठी. उसने ब्लॅक शर्ट और ब्लॅक ट्राउज़र पहना हुआ था. वो ब्लॅक ड्रेस में बहुत स्मार्ट और सेक्सी लग रहा था. उसके हाथ में एक बॉटल थी, जिस पर रिब्बन बँधा हुआ था. वो एक बियर की बॉटल थी.

फिर मैने उसको अंदर बुलाया, और उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया. हमारा 15 सेकेंड का हग हुआ जिसमे मेरे बूब्स उसकी चेस्ट में डाबब गये. इससे मैं तुर्न-ओं हो गयी. ई आम शुवर उसको भी मेरे बूब्स महसूस करके मज़ा आया होगा.

फिर हम अलग हुए, और मैं उसको हॉल में ले गयी. हम दोनो आज एक-दूसरे के सामने थे, लेकिन बात करने में झीजक रहे थे. फिर कारण बोला-

कारण: अची लग रही हो.

मैं: थॅंक्स. तुम भी आचे लग रहे हो.

कारण: थॅंक्स. मैं पास आके बैठ जौ तुम्हारे?

मैं: हा-हा (मैने सीट से तोड़ा हिलते हुए कहा).

फिर वो उठा और मेरे पास आके बैठ गया. मेरी धड़कन बढ़ गयी. फिर वो बोला-

कारण: फोन पर तो बहुत कुछ बोलती हो. आज कुछ करना नही क्या?

मैं: मैने कब माना किया. मैने सोचा तुम्हे नही करना होगा कुछ.

कारण: इधर देखना ज़रा.

फिर मैने जैसे ही उसकी तरफ देखा, उसने मेरे फेस पर हाथ रखा, और अपने होंठ मेरे होंठो से चिपका दिए. बस यहाँ काम शुरू हो गया.

वो पागलों की तरह मेरे होंठ चूसने लगा. मैं भी उसका साथ देने लगी. हम दोनो एक-दूसरे के होंठ मूह में खींच-खींच कर चूस रहे थे, जैसे बरसों के प्यासे हो.

किस्सिंग के दौरान उसने अपने हाथ टॉप के उपर से मेरे बूब्स पर रखे, और उनको दबाने लगा. इससे मैं और गरम होने लगी. मैं भी उसका सर सहलाने लगी.

कुछ देर की किस्सिंग के बाद वो मेरी गर्दन चूमने-चाटने लगा. उसने मेरी टॉप उतार दी, और अब मैं उपर से सिर्फ़ ब्रा में थी. फिर उसने मेरी ब्रा नीचे करके मेरे बूब्स नंगे किए, और चूसने लगा. मैं मदहोशी में आ आ की आवाज़े कर रही थी.

फिर मैं भी उसकी शर्ट के बटन खोलने लगी. मेरे बूब्स चूसने के बाद वो खड़ा हुआ, और अपने कपड़े उतार कर अंडरवेर में आ गया. मैं भी खड़ी हुई, और उसकी तरफ देखते हुए अपने रूम में जाने लगी.

वो मेरे पीछे आए लगा. उसका लंड उसके अंडरवेर में खड़ा हुआ नज़र आ रहा था. मैने रूम में आके जीन्स उतार दी और अब मैं सिर्फ़ पनटी में बेड पर लेट गयी.

वो मेरे पैरों के पास आया, और उनको चूमने लगा. चूमते-चूमते वो उपर आने लगा. मेरा जिस्म झटके मार रहा था. फिर उसने मेरी पनटी नीचे की, और मेरी छूट को देख कर खुश हो गया.

उसने फिर मेरी तरफ देखा, और देखते-देखते छूट को मूह लगा लिया. मेरे मूह से सिसकी निकली. वो मेरी छूट चाटने लगा. छूट चटाई का पहला एहसास स्वर्ग जैसा था. वो मेरी छूट में जीभ डाल-डाल कर चूस रहा था.

अब मेरे से उत्तेजना बर्दाश्त नही हो रही थी, तो मैने उसको छोड़ने के लिए कहा. फिर वो उठा, और अंडरवेर निकाल दिया. नीचे से उसका लंबा मोटा लंड बाहर आ गया. उसका लंड काफ़ी बड़ा था. लगभग 7 इंच का तो था ही.

फिर उसने मेरी छूट पर लंड सेट किया, और ज़ोर का धक्का मारा. मेरी चीख निकली, और मैं दर्द से तड़पने लगी. उसका टोपा मेरी छूट में फ़ासस चुका था, और खून निकालने लगा था. मैने उसको रुकने को कहा, लेकिन वो नही रुका.

उसने मेरे होंठ अपने होंठो से बंद किए, और धक्के मारता गया. मुझे बहुत दर्द हो रहा था, और उसका लंड और अंदर जेया रहा था. एक टाइम पर लंड पूरा अंदर चला गया. तब वो रुक गया. फिर वो मेरे होंठ चूसने लगा और बूब्स दबाने और चूसने लगा.

कुछ देर में जब दर्द कम हुआ, तो उसने धक्के मारने शुरू किए. अब मुझे बहुत मज़ा आने लगा. धीरे-धीरे उसने स्पीड बधाई, और मेरी ज़ोरदार चुदाई करने लगा.

लगभग 15 मिनिट हमारी चुदाई हुई. उसके बाद उसने अपना स्पर्म मेरी छूट में ही छ्चोढ़ दिया. मुझे चरमसुख मिल चुका था, और मेरी छूट फटत चुकी थी. मैं कारण के साथ लेती थी, और हमारी शादी के सपने देख रही थी.

कुछ देर बाद वो उठा, और कपड़े पहन कर चला गया. फिर मैं सो गयी. उसके बाद उसने मेरा कभी फोन नही उठाया, और मुझे ब्लॉक कर दिया. मुझे समझ नही आया की ऐसा उसने क्यूँ किया.

मेरी छूट की प्यास ने बाद में मुझे चुड़क्कड़ बना दिया. अगर और स्टोरीस पढ़ना चाहते है मेरी, तो गुलाटी.गुलाटी555@गमाल.कॉम पर मैल करे.

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