गाँव के मुखिया का बेटा और शहरी छोरी

मेरी यह हिंदी एडल्ट स्टोरी विलेज़ सेक्स की कहानी है.
वो मार्च का महीना था, मैं अपनी रूम पार्टनर मिताली के साथ उसके गांव जाने की तैयारी कर रही थी। मैं और मिताली दोनों ही लास्ट ईयर मैं पढ़ रहे थे। और हमारी कॉलेज के लास्ट ईयर में हमें एक प्रोजेक्ट करनी थी जिसमे हमें गांव में जाकर पशुपालन, गांव के लोगों का रहन सहन के ऊपर स्टडी करनी थी। उस प्रोजेक्ट में मैं, सीमा और मिताली थे।

पर जाने से दो दिन पहले सीमा बीमार पड़ गयी इसलिए अब सिर्फ मैं मिताली के साथ उसके विलेज जा रही थी।

मैं नीतू, मेरी उम्र 19 साल है, मेरे पापा का पुणे में बहुत बड़ा बिज़नेस है। कॉलेज के लिए मैं मुम्बई में पढ़ती हूँ और होस्टल में रहती हूं। मेरी हाइट 5’4″ है, रंग गोरा है। भूरी आँखें, लंबे बाल, मेरा फिगर 34C 26 35 है। मैं कमर मैं छोटी सी चांदी की चें पहनती हूँ, पैरो में पायल और नाक में छोटी सी नथ पहनती हूँ।

जाने का दिन आया तब मिताली के साथ बस से उसके गांव चले गए। उस दिन मैंने सफेद रंग की कुर्ती और डार्क ब्लू जीन्स पहनी थी। कुर्ती के ऊपर के खुले बटन में से मेरे गले में पहनी चेन दिख रही थी और उसमें पहना हुआ पैंडेंट मेरे फेस के साथ और भी जच रहा था। मिताली भी मेरे ही हाइट की है पर मुझसे थोड़ी सांवली है। उसकी फिगर 32B 26 34 है।

हम मिताली के घर पहुंचे, उसके छोटे से घर में हम ठीक से एडजस्ट हो गए। ट्रिप के पांचों दिन मैं मिताली के घर में ही रहने वाली थी।

दोपहर के खाने के बाद, लगभग दो बजे मिताली बोली- चलो नीतू, हम विलेज में घूम कर आते हैं!
“ये तो मेरे मन की बात बोली तुमने, आज से ही प्रोजेक्ट स्टार्ट करते हैं!” मैं बहुत एक्साईटेड थी।

हम दोनों गांव में घूम रही थी। मैंने अभी भी वही ड्रेस पहनी थी।
खेतों में घूमते हुए मिताली ने मुझे बहुत सारी चीजें बताई, बहुत सारे लोगों से भी मिलाया जो हमें हमारा प्रोजेक्ट पूरा करने में मदद करेंगे। मैं अपनी डायरी में सब नोट कर रही थी।

दो दिन घंटे बाद मिताली बोली- चलो नीतू, हम गांव के मुखिया जी को मिल कर आते हैं!
मुखिया मतलब गांव की बहुत बड़ी हस्ती थी, मैं भी उनसे मिलने के लिए एक्साईटेड थी। पर मुझे ये देखकर आश्यर्य हो रहा था कि मिताली मेरे साथ मुम्बई में होस्टल में रहती है फिर भी गांव में सब उसको पहचानते हैं।

हम दोनों घर की तरफ जा ही रहे थे कि अचानक बिन मौसम बारिश होने लगी, हम दोनों के पास छतरी नहीं थी, हम भागती हुई मुखिया जी के घर पहुँची। तब तक हम सर से पाँव तक पूरा भीग चुकी थी.

उनका बहुत बड़ा घर था। घर के आंगन में उस का लड़का राघव 2-3 लोगों से बाते कर रहा था।
राघव गांव के मुखिया का बेटा तो था ही, वो खुद भी गांव की एक बड़ी हस्ती था। दो साल बाद विधायक के चुनाव लड़ने को इच्छुक राघव आकर्षक पर्सनेलिटी का लड़का था। उसकी उम्र 30 साल थी, उसका बदन कसरती था। मैं बिना पलक झपके उसको देखती ही रही। लाइफ में पहली बार में किसी लड़के की तरफ आकर्षित हुई थी।

वो बरामदे में कुर्सी पर बैठा था। उसने सिर्फ लुंगी पहनी हुई थी। उसके सीने पे पेट पे घने बालों का जंगल था। उसके गोरे चेहरे पर मूंछें जच रही थी।
मैं बस उसके कसे हुए शरीर को मोहित होकर देख रही थी।

तभी अचानक उसकी मर्दानी आवाज मेरे कानों में पड़ी, सामने खड़े लोगों को वो कुछ समझा रहा था।
अचानक उसकी आवाज सुनते ही मैं घबरा गई, उसी घबराहट में मैं दो कदम पीछे हो गयी।
उसी वक्त मेरे पैर बर्तन से टकरा गए।

बर्तन की आवाज से राघव की नजर हम दोनों पर पड़ी; उसकी भेदक नजर मुझ पे पड़ते ही मुझे यह एहसास हुआ कि बारिश की वजह से भीगी हुई कुर्ती में से मेरे 34″ के मम्मे और मेरी काली ब्रा दिखाई दे रहे हैं।
यह एहसास होते ही मैं मेरे हाथ फोल्ड करके खड़ी हो गई। फिर भी उनकी पारखी नजर ने मुझे ऊपर से नीचे तक स्कैन किया; हल्के से मुस्कुराते हुए उन्होंने अपनी नजर मिताली की तरफ घुमाई।
मिताली मुस्कुराती हुई बोली- नमस्ते राघव भैया!
“अरे… मिताली… नमस्ते नमस्ते। कब आयी तुम मुम्बई से?” वो मिताली को पूछने लगे।
“आज ही आई हूँ, दरअसल काम के लिए आई हूं, ये मेरी सहेली नीतू, हम होस्टल में साथ में रहते हैं। हमारा कॉलेज का प्रोजेक्ट करने हम गांव में आये है। गांव में घूम रहे थे तो मैंने बोला मुखिया जी से मिल कर आते हैं.”

राघव ने सामने खड़े लोगों को जाने के लिए बोला और हमसे बात करने लगा- अरे आप दोनों बाहर क्यों खड़ी हो, अंदर आओ ना, मुखिया जी काम से बाहर गए हैं। पर आप चिंता मत करो, मैं आपको सब कुछ दिखा दूंगा।
“और नीतू, कैसा लगा तुमको हमारा गांव?” पहली ही मुलाकात में राघव मुझसे बहुत ही प्यार से बातें करने लगा था, मुझे भी यह सब अच्छा लगने लगा था।
“बहुत ही अच्छा साहब… आज ही आयी हूँ ना… अभी पूरा गांव नहीं देखा!” मैंने जवाब दिया।

“अरे साहब नहीं, मुझे राघव ही बुलाओ, सारे गांव की लड़कियां मुझे राघव ही बुलाती है, क्यों मीतू… बराबर ना। और कितने दिन हो तुम यहाँ?” राघव ने पास में रखे केले हमको दिए- यह लो हमारे खेतों में से आये हैं, इतने लंबे और बड़े केले आपको शहर में नहीं मिलेंगे.”
शायद राघव भी मेरी तरफ आकर्षित हो रहा था, केले लेने के लिए हाथ खोलते ही उनकी नजर फिर से मेरे मम्मे पे जा अटकी।

तभी मैं बोली- पांच दिन के लिए रुकेंगे!
“चलो मैं आपको हमारी खेती, गाय और बैल दिखाता हूँ.” ऐसा बोल कर राघव कुर्सी से खड़ा हो गया। उसका वो मर्दाना बदन देख कर मुझे कुछ कुछ होने लगा था जो मैं भी समझ नहीं पा रही थी। उनकी हाइट लगभग 6 फ़ीट थी।

हम तीनों अब खेतों की तरफ जाने लगे।
बारिश लगभग थम गई थी।

राघव जी का बहुत बड़ा खेत था, बहुत दूर तक फैला था। वहाँ की जानकारी देकर वो हमें गाय के शेड की तरफ लेकर चले गए। एक तरफ एक नौकर गाय का दूध निकाल रहा था तो दूसरी तरफ गाय की ब्रीडिंग चल रही थी। एक बड़े से सांड को गाय के ऊपर चढ़ाने का काम कुछ लोग कर रहे थे। मैं दोनों कामों को बारीकी से देख रही थी।

राघव अब मेरे पीछे बिल्कुल सटकर खड़े हो गए।

एक नौकर ने सांड का लिंग हाथ में पकड़ कर गाय की योनि पर रख दिया। मेरे लिए यह सब बिल्कुल नया था। मैं आँखें फाड़ कर सब नजारा देख रही थीं तभी राघव जी ने अपने दोनों हाथ मेरे कंधे पर कखकर मेरी ब्रा के पट्टे से खेलते हुए मुझे पूछा- कभी किया है क्या तुमने?

मेरा उनकी तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं था, फिर भी मैंने ना में सिर हिलाया। मुझे समझ भी नहीं आ रहा था राघव किस बारे में पूछ रहे थे दूध निकलने के बारे में या फिर ब्रीडिंग के बारे में।

मेरी नजर अब भी उस नौकर पर और उस सांड पर टिकी हुई थी। इतना बड़ा लिंग गाय की योनि में कैसे जाएगा, यही सोच रही थी मैं।

तभी मुझे एहसास हुआ कि राघव जी ने अपना हाथ कंधे से नीचे बाँहों पर लेकर आ गए, उनके हाथों के मेरे जिस्म पे हुए टच से मुझे झटका सा लगा और मैंने ऊपर राघव जी की तरफ देखा। वो सीधे मेरी आंखों में देख रहे थे।
मुझे बहुत शर्म आने लगी थी, एक पराये मर्द के सामने में यह सब देख रही थी; शर्म से मेरे गाल अब लाल होने लगे थे।

राघव जी अब पीछे से थोड़ा और आगे हुए और लुंगी में खड़ा हुआ अपना लंड मेरे चूतड़ों पर दबाया।
पीछे से क्या चुभ रहा है, यह मुझे झट से समझ में आ गया। मैंने पहले कभी सेक्स नहीं किया था पर मिताली ने मुझे अपने मोबाइल पे बहुत सारी अंग्रेजी हिंदी ब्लू फिल्म दिखाई थी, और बहुत सारी जानकारी दी थी।

सामने घट रही घटनाओं से मैं भी थोड़ी गरम हो गयी थी इसलिए मैंने राघव जी के हरकतों को कोई रिप्लाई नहीं दिया।
मेरे रिप्लाई ना करने को मेरी सहमति समझकर राघव जी मेरे कान में बोले- कैसा लगा?
और अपना लंड मेरी गांड पे दबा दिया।

मुझे यह खयाल आया कि जीन्स की जगह मैंने सलवार क्यों नहीं पहनी, लेकिन जीन्स मैं भी में उनके लंड का कड़कपन महसूस कर सकती थी।
“पहले कभी देखा नहीं था मैंने…” मैंने शर्माते हुए बोल कर मिताली की तरफ देखा।
“ह्म्म्म अब शाम हो गयी है, अब तुम दोनों घर जाओ… मिताली, कल तुम नीतू को हमारे गांव के पास के जंगल में जो मंदिर है, वो दिखा के लाओ!” मेरे गांड पे हल्के से हाथ घुमाते हुए अपना लंड लुंगी में सेट करते हुए राघव जी बोले।

राघव जी ने जाने के लिए बोला पर मुझे यह समझ नहीं आ रहा था कि मैं नाराज क्यों नहीं हो रही थी। क्या मुझे यह सब अच्छा लगने लगा था? मुझसे 10-11 साल बड़े आदमी के प्रति मैं इतना आकर्षित क्यों हो रही थी, मुझे खुद ही समझ नहीं आ रहा था।

राघव जी के साथ सेक्स करने में कैसा फील होगा यह ख्याल मेरे मन में आया; मैंने शर्माते हुए यह खयाल मेरे मन से निकाल दिया। ‘कुछ भी सोचती हो नीतू…’ यह सोच कर उनसे दुबारा न मिलने की ठान ली।

फिर हम दोनों घर की तरफ निकल गयी।

घर जाते समय मिताली बार बार राघव जी के बारे में मुझे बता रही थी कि कैसे वो अपने पिताजी की तरह गांव का लाडला है, कैसे वो गांव मैं सबकी मदद करता है। कैसे सब पुलिस और पॉलिटिशियन उनकी रिस्पेक्ट करते हैं।
मैं भी बहुत ध्यान से सुन रही थी। सब सुनते हुए मुझे उनके प्रति फिर से आकर्षण पैदा होने लगा।

फिर मिताली ने बताया कैसे गांव की सभी लड़कियाँ राघव जी पे फिदा हैं।

घर पहुँचने तक रात हो गयी थी, तब तक खाना भी तैयार हो गया था।
खाना खाकर हम रूम में सोने को गई; रूम में एक ही बेड था; उस पे हम दोनों लेट गयी थी। मिताली मुझे उसके विलेज के एक दो सेक्स अफेयर्स के बारे में बता रही थी, कैसे उसने उन लड़कों के साथ चुदाई की।
फिर उसने राघव के बारे में बताना शुरू कर दिया, वो गांव का कैसेनोवा है। कैसे मिताली के विलेज की एक सहेली राघव के साथ सेक्स किया, कैसे राघव ने उसे थका देने तक खुश किया। यह सुन कर मेरे टाँगों के बीच गीलापन महसूस हो रहा था। फिर हम दोनों जैसे होस्टल में सोती थी, वैसे ही एक दूसरी की बांहों में सो गई।

मुझे सपनों में भी राघव जी दिखाई दे रहे थे कि एक ही मुलाकात में मैं उनके प्रति सम्मोहित हो गयी थी.

दूसरे दिन हम दोनों ही देर से उठे। आज हम राघव जी ने बताये हुए मंदिर जाने वाले थे। आज मैंने सलवार कमीज और ओढ़नी पहनी थी। मंदिर के रास्ते में ही मुखिया जी का घर था, पर पता नहीं क्यों मिताली ने वहाँ रुक कर राघव जी को जोर से आवाज दे कर बताया।
“राघव भैया, हम मंदिर जा रहे हैं.”
राघव जी ने बाहर आ कर हमें मंदिर के नियमों के बारे में बताया, फिर बेशर्मों की तरह मुझे पूछा- तुम्हें पीरियड्स तो नहीं हुए ना, या फिर 1-2 दिन में तो आने वाली नहीं है?
मुझे इस सवाल से धक्का सा लगा और मैंने मिताली की तरफ देखा, तो मिताली ने समझाते हुए बताया- अरे उस मंदिर में पीरियड्स में नहीं जा सकते, पीरियड्स को 2-3 दिन बाकी को या फिर 2-3 दिन हो गए हो तो भी नहीं जा सकते!

“नहीं मैं पीरियड्स में नहीं हूँ, 10-12 दिन हो गए हैं.” मैंने मिताली को बताया।
“तो वैसा बताओ न राघव जी को!” मिताली बोली।
“हो गए 10-12 दिन!” मैंने शर्माते हुए राघव जी को जवाब दिया।

उनके सवाल पे मुझे बहुत शर्म आ रही थी पर मुझे शर्माते हुए देखकर उनको हंसी आ रही थी।
फिर हम मंदिर की तरफ चल दिये।

थोड़ी देर बाद हम उस मंदिर के पास पहुँचे, वो एक छोटा सा मंदिर था, दोपहर की वजह से वहा कोई नहीं था, वह एक शांत जगह थी।
हमने मंदिर में हाथ जोड़े फिर थोड़ी देर वहां पर बैठ गए।

“नीतू, यहाँ पीछे एक तालाब है, ठंडे पानी का तालाब… गांव के सब लोग उसको पवित्र मानते हैं। भगवान की कृपा पाने के लिए सब लोग यहां पे स्नान करते हैं। चलो न हम भी यहाँ पर नहा लेती हैं। इससे हमारे सब पाप धुल जाएंगे और नेचुरल पानी से हमारी त्वचा भी निखर जाएगी.” अचानक मिताली ने मुझसे कहा।
मैं तो पहले से ही बहुत श्रद्धालु थी, और गर्मी भी बहुत थी तो मैं तैयार हो गयी।

मंदिर के थोड़े पीछे चले जाने के बाद पीछे एक स्विमिंग पूल जैसा छोटा तालाब बना हुआ दिखा। वहाँ पत्थरों के बीच से एक ठंडे पानी का झरना बह रहा था वो पानी बह कर उस तालाब में आता था।
तालाब शेड से पूरा ढका हुआ था और तालाब के बीच में एक पानी के ऊपर उभरी हुवी जगह थी जिस पे 4-5 लोगों के बैठने की जगह थी। हम उस शेड के अंदर आ गए और मिताली ने शेड का डोर बंद कर दिया।
अंदर 2-3 चेंजिंग रूम थीं।

चेंजिंग रूम देखने के बाद मुझे खयाल आया कि हम तो चेंजिंग के लिए कपड़े ही नहीं लाई थी।
“अरे मिताली हम तो कपड़े ही नहीं लाई हैं बदलने के लिए, अब हम कैसे स्नान करेंगी?”
“अरे मेरी गुड़िया यहाँ, पे बिना कपड़ों के ही नहाया जाता है। दोपहर में यहाँ पे कोई भी नहीं आता, सब लोग शाम को ही आते हैं। मैं भी ऐसे ही नहा रही हूं, बिना कपड़ों के ही!” ऐसा कह कर उसने अपनी कुर्ती उतार दी।

मुझे यह देख कर शॉक लगा, मिताली ने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी। फिर मिताली ने सलवार के इलास्टिक में उंगलियाँ डाल कर एक ही झटके में सलवार पैरों तक नीचे खिसका दी। मुझे फिर से एक बड़ा शॉक लगा, उसने अंदर पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी।
वो अब मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी।

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मिताली थोड़ी सांवली सी थी पर मैं उसके मुकाबले में गोरी चिट्टी थी। पर उसका फिगर मेरे जैसा या फिर मुझसे थोड़ा अधिक मादक था।
“अब मुझे देखती ही रहोगी या… आओगी पानी में कपड़े निकाल कर? चलो जल्दी…” वो हाथ हिलाते हुए मेरा ध्यान खींचने की कोशिश करने लगी.

मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए इधर उधर देखा, फिर दरवाजा बंद देख कर धीरे से मेरी कुर्ती के बटन खोलने चालू कर दिए। जैसे जैसे मेरा गोरा बदन नंगा हो रहा था वैसे वैसे मिताली की आंखों में चमक आ रही थी।
हम दोनों एक ही रूम में रहती थी, फिर भी एक दूसरे को कभी नंगी नहीं देखा था।

कुर्ती निकालने के बाद मैंने हाथ पीछे ले जाते हुए ब्रा का हुक निकाल दिया और ब्रा स्ट्रिप्स कंधों से अलग किया। अब मिताली का मुंह खुला का खुला ही रह गया। मेरी गोरी गोरी चुचियाँ मिताली के सामने नंगी हो गई, 34 इंच के परफेक्ट गोल मम्मे पे एक डेढ़ इंच के चॉकलेटी ऐरोला बहुत ही मादक दिख रहा था। उस पे मेरे आधा सेंटीमीटर निप्पल्स मेरे मम्मे की सुंदरता और भी बढ़ा रही थी।

मिताली मुझे जिस तरह से देख रही थी, उससे मुझे और भी शर्म आने लगी। मैंने अपने सलवार का नाड़ा खोला तो सलवार नीचे जमीन पर गिर गयी। मेरा गोरा सपाट पेट और गहरी नाभि और कमर पे चांदी की चेन की वजह से मैं किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।
मिताली तो मुझे आँखें फाड़ कर देख रही थी।

मुझे अब मिताली का ऐसे मुझे देखना अच्छा लगने लगा था।

फिर मैंने थोड़ी और हिम्मत करके इधर उधर देखते हुए अपनी पैंटी भी नीचे खिसका दी। अब शॉक लगने की बारी मिताली की थी। वो बिना पलकें झपकाए मुझे देख रही थी। मैंने मेरी चूत के बालों पे एक छोटा सा हार्ट शेप रखा था, बाकी के बाल निकाल कर उस हार्ट शेप में बाल ट्रिम किये हुए थे।

“क्या हुआ?” मैंने मिताली को चिढ़ाते हुए पूछा।
“नीतू… अगर मैं लड़का होती ना… तो अभी… इसी वक्त तुम्हें चोद चोद के रुला देती!” ऐसा बोल कर मिताली मेरे पास आ गयी और मेरे बदन पे हाथ फेरने लगी।

हालात कुछ ऐसे थे और फिर मिताली के स्पर्श की वजह से मैं गरम होने लगी। मिताली अब मेरे मम्मो को दबाने लगी तो मेरे मुंह से हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी।
मैं अब दूसरी ही दुनिया में पहुंच गयी थी, मुझे पता ही नहीं चला कि कब मिताली के हाथ मेरे चूत के होठों पर पहुंच गए और वो उनसे खेलने लगी।

अब तो मेरी चूत भी रस छोड़ने लगी थी। मिताली की उंगलियां अब मेरी चुत की दरार में घुसने लगी थी। मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुंच गयी थी, मैंने जिंदगी में कभी ऐसा सुख महसूस नहीं किया था। मिताली की उंगलियां अब धीरे धीरे मेरी चुत में अंदर बाहर हो रही थी।
“ऊफ… नीतू… तू कितनी टाइट है याररर…” उसने मुझे चिढ़ाते हुए बोला।
“तुम भी न मीतू…” मैंने शर्माते हुए उसका हाथ पकड़ लिया।

मिताली की उंगलियां अब मेरी चुत के अंदर तक मेरी झिल्ली तक पहुंच गयी।
“नीतू… तू अभी सीलपैक है?” उसने आश्यर्य से पूछा।
उसके सवाल पर मैंने शर्माते हुए हाँ बोला।

मेरी जांघें अब गीली हो गयी थी। जिस सवाल पे मुझे गुस्सा होना चाहिए था, उसी सवालों पर मैं शर्मा के लाल हो रही थी।
मिताली को अपने चुत से खेलने देने के लिए बिना हिले वही खड़ी थी।

मैंने अब मेरे लंबे घने बाल खुले छोड़ दिये।
मिताली ने मेरा एक मम्मा दबा दिया तो मैं फिर से सिसक उठी “आहहह… ”
“बस न मीतू… नहाना भी है… कोई आ गया तो…” मैं उसको रोकते हुए बोली।
“क्या होगा… चोद देंगे हमें। दो नंगी सुंदरियाँ ऐसे गर्म हालत में मिलेंगी तो कौन छोड़ेगा हमको?” कहते हुए मिताली ने नीचे पड़े हुए हमारे कपड़े उठाये और चेंजिंग रूम में रख दिये।

हम दोनों के पानी में उतरने के कुछ ही देर बाद हम को वहाँ किसी के आने की आहट सुनाई दी। मैं तो पूरा डर गई थी। लगा कि अभी दौड़कर चेंजिंग रूम में जाऊँ और अपने कपड़े पहन लूं!

पर तभी राघव हमारे सामने आकर खड़े हो गए।
“आप लोग यहाँ हो… अच्छा हुआ कुंडी नहीं लगाई। मेरा भी मन इस पानी में नहाने का कर रहा था। सोचा देखून कि आप दोनों क्या कर रही हो!” हमको पानी में देख कर राघव जी बोले।
राघव को सामने देख कर मैं अपने हाथों से अपनी नग्नता को ढकने की नाकाम कोशिश करने लगी।

मैं चेंजिंग रूम में जाने के लिए पानी से थोड़ी बाहर निकली ही थी कि राघव जी मेरे रास्ते में खड़े हुए- अरे रुको ना… साथ में ही नहाते हैं हम चारों!
राघव अपने बाजू में खड़े अपने दोस्त चंदू की तरफ देख कर बोला।
मैंने डर कर मिताली की तरफ देखा तो वो मजे से पानी में नहा रही थी।

“कुंडी नहीं लगाई थी ना, अब साथ में नहाने में क्या प्रॉब्लम है?” मेरे चेहरे पर डर को देखकर चंदू बोला।
“मिताली ने तुमको नहीं बताया था क्या, जब लड़कियों को यहाँ नहाने को आने के बाद किसी लड़कों के साथ नहाना या फिर कुछ और करना हो तो कुंडी नहीं लगाती हैं। इस पानी में जो भी सुख लो तो उसको जिंदगी भर उसकी कोई कमी नहीं पड़ती, ऐसा हम गांव वालों का मानना है!” मुझे कंफ्यूज हुआ देखकर राघव जी हँसते हुए बोले।

“मीतू… तुमने तुम्हारी सहेली को बताया नहीं है क्या?” बोलते हुए चंदू ने अपना कुर्ता और लुंगी उतार दी और पानी में भी उतर गया।

मेरा दिल अब बहुत जोर से धड़क रहा था, मैंने राघव जी की तरफ देखा तो उन्होंने भी अपना कुर्ता उतार दिया था- अरे नीतू, यहाँ पे बिना कपड़ों के ही नहाते हैं। बहुत पवित्र पानी है यहाँ का, सब जगह पर लगना चाहिए!” यह कह कर उन्होंने अपने शरीर का आखरी कपड़ा लुंगी भी उतार दी।

अब उस तालाब में हम चारों बिल्कुल नंगे थे। अब मैं राघव जी का लंड मेरे सामने ही देख रही थी। बाप रे… बिल्कुल साँप जैसा लग रहा था। मुझे पहले ही उस लंड ने छुआ था मगर जीन्स के ऊपर से… पर अब वो बिल्कुल मेरे सामने था, जिन्दगी के सबसे पहले लंड दर्शन से मैं हक्की बक्की रह गयी थी; मेरे मुंह से आवाज भी नहीं निकल रही थी। घने बालों में छुपा आधा खड़ा हुआ लंड 5-6 इंच का लग रहा था।
लंड इतना बड़ा होता है?! इसका मुझे आश्यर्य हुआ, मेरी सांसें अब तेज होने लगी थी।

“क्या हुआ… इतना क्यों शर्मा रही हो?” राघव मेरे सामने पानी में उतरते हुए बोले।
“देखो, हमने अंदर आते समय कुंडी लगा दी है… अब यहाँ कोई नहीं आएगा… तुम चिंता मत करो… और तुम शर्मा क्यों रही हो… मिताली को देखो बिल्कुल भी नहीं शर्मा रही है… देखो चंदू को कैसे साथ दे रही है!”

राघव जी की बात सुन कर मुझे मिताली की याद आयी; मिताली की तरफ देखा तो वो एक कोने में घुटनो के बाल बैठ कर चंदू का लंड मजे से चूस रही थी।
मैंने झट से शर्मा कर मुँह दूसरी तरफ घुमा दिया और राघव जी की तरफ पीठ कर के खड़ी हो गई।

में आपने पढ़ा कि मैं अपनी सहेली के साथ उसके गाँव गयी थी. वहां पर गाँव के मुखिया के बेटे राघव से मिलवाया मेरे सहेली ने!
मुझे सपनों में भी राघव जी दिखाई दे रहे थे कि एक ही मुलाकात में मैं उनके प्रति सम्मोहित हो गयी थी.

मैं और मेरी सहेली मन्दिर के तालाब में पूरी नंगी होकर नहा रही थी कि राघव जी अपने एक दोस्त के साथ आ गए.
वे दोनों भी पूरे नंगे होकर हमारे साथ नहाए आ गए.
अब आगे:
मिताली की तरफ देखा तो वो एक कोने में घुटनों के बाल बैठ कर चंदू का लंड मजे से चूस रही थी।
मैंने झट से शर्मा कर मुँह दूसरी तरफ घुमा दिया और राघव जी की तरफ पीठ कर के खड़ी हो गई।

“वो तो शर्म से लाल हो गयी है राघव… अब आप ही कुछ करो!” चंदू दूर से चिल्ला कर बोला।

उसकी यह बात सुन कर मैं अपने आप ही एक हाथ से मेरे मम्मे और एक हाथ से मेरी चुत छुपाने की कोशिश करने लगी; मेरे दिमाग ने काम करना छोड़ दिया था; मैं आप अपने शरीर पर राघव जी के स्पर्श का इंतजार कर रही थी।
पर वो थोड़ी देर तक मेरे पीछे की सुंदरता को निहारते रहे।

फिर अचानक मुझे मेरे नितम्बों पर उनके हाथों का स्पर्श महसूस हुआ। उनका टच होते ही मैंने अपनी आंखें जोर से बंद कर ली, मेरा शरीर अब कंपन कर रहा था, मुझे क्या हो रहा है कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।
उनकी एक उंगली मुझे मेरी गांड पे पास घुसती महसूस हुई, थोड़ी ही देर बाद उनकी उंगली मेरी नाजुक गांड के छेद को सहला रही थी।

मेरे शरीर ने प्रतिक्रया की और गान्ड के छेद को और टाइट कर दिया, तभी उनकी उंगली मुझे मेरी छेद के अंदर जाती महसूस हुई। मुझे हल्का सा दर्द हुआ और मैं दर्द से कराह उठी, मैंने अपनी चुत पर से हाथ हटाकर राघव जी का हाथ पकड़ लिया, पर उनकी ताकत मुझसे ज्यादा थी।

मुझे दर्द होता देख राघव जी ने अपनी उंगली मेरी गांड से निकाल ली लेकिन अपने दोनों हाथ आगे लाते हुए उन्होंने मेरे मम्मों पे कब्जा कर लिया। वो मेरे दोनों मम्मों को अपने दोनों हाथों से सहलाने लगे। जैसे ही उन्होंने मेरे दोनों निप्पल्स को अपनी उँगलियों में लेकर के दबाया, मैंने तालाब की दीवार को हाथों से पकड़ते हुए ऊपर देख कर “आहहहहह…” कर सिसकी भरी।

“कल जब गाय का दूध निकाल रहे थे तब तो चाव से देख रही थी?”
राघव बोले, वे अब मेरे दोनों मम्मे को मसल रहे थे। मैं भी अपने स्तनों पे पहली बार किसी मर्द के स्पर्श का आनन्द ले रही थी।
“अब कैसा लग रहा है… कल ऐसे ही दूध निकालते हुए देखा था ना?”
एक नाजुक कमसिन जवान लड़की के मुलायम मम्मे को दबाते हुए उनको भी बहुत मजा आ रहा था।

“तुम बहुत गर्म हो गयी हो!” ऐसे कहते हुए उन्होंने फिर से कामवासना से खड़े हुए मेरे निप्पल्स को उंगलियों से मसला। मैंने फिर से “आहहहह… मत करो” कर सिसकारी भरी; पानी के अंदर उनका पूरा खड़ा हुआ लंड मेरी गांड को टच कर रहा था।
मैं इस नए अनुभव का मजा लेते हुए आँखें मूंद कर खड़ी थी।

फिर राघव जी ने मुझे अपनी तरफ घुमाया, अब उनका लंड मेरे पेट को स्पर्श करने लगा, मैंने हल्के से आँखें खोली… मेरे सामने मुझसे बड़े उम्र का आदमी खड़ा था और उसके सामने मैं पूरी नंगी खड़ी थी।
मुझे पूरी नंगी देखने वाला वह पहला आदमी था। मैंने अपने मन में मजाक में सोची घटना अब सच्ची होती दिखाई दे रही थी।

मैं शर्माते हुए नीचे की तरफ देख रही थी। राघव जी ने हल्के से मेरे मुंह को ऊपर किया, मैंने भी बहुत प्यार से उनकी आंखों में देखा; उनकी आंखों में एक नशा सा दिखा।
मैंने शर्माते हुए फिर से अपनी आंखें नीची की; मेरे मुखड़े पर शर्म की लाली छा गयी थी।

“नीतू तुम्हारे जितनी सुन्दर लड़की मैंने आज तक नहीं देखी थी। सच बोलूं तो तुम कपड़ों में जितनी सुन्दर दिखती हो उससे कहि सुन्दर तुम बिना कपड़ों के दिखती हो। राघव जी अपना लंड मसलते हुए बोले।

“कल जब तुम्हें गीले कपड़ों में देखा था ना… तब से तुम्हें बिना कपड़ों के देखने की इच्छा हो रही थी। यह इच्छा इतनी जल्दी सच होगी यह मैंने नहीं सोचा था.” मेरे कड़क निप्पल्स फिर से अपने मुंह में दबाते हुए राघव जी बोले।
मुझ पे अब कामुकता भारी हो रही थी, मेरी सांसें अब ज़ोरों से चलने लगी थी।

एक तो उनके मुंह से हो रही मेरी सुंदरता की तारीफ़ मुझे भा रही थी तो दूसरी और मेरे मम्मे मसलने से मेरी वासना और भड़क रही थी।
चंदू ने अब तक मिताली को पानी से बाहर निकाल कर फर्श पर पेट के बल लिटा दिया था और अपना मूसल उसकी चूदासी चुत में पेल भी दिया था।

चंदू का बड़ा लंड लेते समय मिताली भी जोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी थी। चंदू का लंड भी राघव जी जितना बड़ा था। मिताली को देख कर ही पता चल रहा था कि वो इस खेल की पुरानी खिलाड़ी थी।
चंदू भी अपने दोनों हाथों से उनके बड़े बड़े मम्मे मसलते हुए उसकी चुत में दना दन धक्के दे रहा था।

मैं उनकी चुदाई देख ही रही थी कि राघव जी ने मेरा मुँह उनकी तरफ घुमाया, अपने हाथों से मेरे गालों पे आए हुए बाल साइड में करते हुए उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिये। मेरे पिंक नाजुक होंठ उनके मर्दाना होंठों का स्पर्श होते ही अपने आप खुल गए। मेरे खुले होंठों में राघव जी ने आसानी से अपनी जीभ घुसा दी और मेरे जीभ से खेलने लगे।

राघव जी इस खेल में बहुत अनुभवी लग रहे थे; सिर्फ चुम्बन लेकर ही उन्होंने मुझे पागल बना दिया था। उनका एक हाथ मेरी बायीं चूची को दबा रहा था तो दूसरा हाथ मेरी टाँगों के बीच में पहुंच गया था।

मेरी चुत के ऊपर के बालों से कुछ देर खेलने के बाद उन्होंने अपनी मोटी उंगली मेरी चुत की पंखुड़ी में घुसाई। मेरी टाइट चुत को उनकी उंगली हल्के हल्के से मसल रही थी तो मैं भी मजे से उनके मुंह में सिसकारी भरने लगी। मैंने अपना हाथ उनके हाथ पे रखा और उनकी उंगली को और अंदर घुसाने की कोशिश करने लगी। उनकी मोटी उंगलियों ने अब मेरी चुत की पंखुड़ियों को अलग किया और बीच की उंगली चुत में घुसाने लगे।

ऐसा करते ही मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर से हटा दिए और दर्द से चिल्ला उठी; पर वासना अब मेरे दर्द पर भारी हो रही थी; यह दर्द भी मुझे मीठा लगने लगा था; मेरी चुत का झरना अब जोर से बह रहा था।
मैंने उनकी उँगलियों को रास्ता देने के लिए अपनी टाँगों को थोड़ा चौड़ा किया; उनकी उंगली अब आसानी से मेरी चुत के छेद में घुस गई; मुझे थोड़ा दर्द हुआ पर मैं सह गयी।
दो इंच अंदर घुसने के बाद उनकी उंगली मेरी झिल्ली से टकरा गई। उनकी उंगली मेरी झिल्ली से टकराते ही मुझे मेरी चुत में एक तूफान बनता हुआ महसूस हुआ और देखते ही देखते उनकी उंगली मेरे सफेद रस से भीग गयी।

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राघव जी ने अपनी उंगली मेरी चुत से बाहर निकाली और अपने मुँह में डाल दी। फिर अपना मुंह मेरे कान के पास ले कर के पूछा- अभी तक सोई नहीं तुम किसी के साथ?
मैंने ना में सिर हिलाते हुए शर्माकर उनकी घने बालों वाले सीने में अपना मुंह छुपा लिया।

“इसमे शर्माने की क्या बात है… अच्छी बात है ना… आज तुमको एक गांव का मर्द जवान करेगा… यह मजा तुम जिंदगी में नहीं भूल पाओगी!” राघव जी ने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और तालाब के बीच में जो उभरी हुई जगह थी वहाँ तक ले गए।

मुझे पानी में खड़ी कर के वो खुद उस उभरी हुई जगह पर बैठ गए। उनका लंड अब नर्म पड़ गया था, फिर भी 4-5 इंच का दिख रहा था। लंड देखते ही मुझे समझ में आ गया कि राघव को मुझसे क्या चाहिए था।
राघव ने एक हाथ मेरे सिर पर रख कर मुझे नीचे झुकाया और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ कर मेरे होठों पर फेरने लगे। मैं अपना मुँह आजु बाजू घूमाने लगी पर उनकी ताकत के सामने मेरी एक भी न चली तो मैंने विरोध करना छोड़ दिया और मेरे कोमल होंठ खोल कर उनका लंड अपने मुँह में लिया।

मैंने कभी लंड नहीं चूसा था पर मैं उनको नाराज भी नहीं करना चाहती थी। मैं कुछ भी करके उनका लंड चूस रही थी पर उस क्रिया मैं मेरे दांत उनके लंड पर लग रहे थे। उनका लंड ठीक से चूसने के लिए उन्होंने मुझे ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया।
मैंने सब झट से सीख लिया और उनका लंड मजे से चूसने लगी।

मेरी जादुई चुसाई से उनका लंड फिर से अपने विशाल आकार में आने लगा; उनका लंड अब मेरे मुंह में नहीं समा रहा था; लंड का खारा स्वाद मुझे अच्छा लगने लगा था पर उनके लंड के आकार से मेरा मुँह दुखने लगा था।

मुझे तकलीफ होती देख कर उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल लिया और नीचे उतर गए।

अब उन्होंने मुझे उठा कर उभरी हुई जगह के कोने पर पीठ के बल लिटा दिया, मेरे पैर अभी भी पानी में ही थे।

अगले ही पल राघव जी ने मेरी टाँगें उठा ली और मेरे टाँगों के बीच में आ गए, उनके चौड़े शरीर से मेरी टांगें पूरी फैल गयी थी और मेरी चुत उभर कर सीधे उनके लंड के सामने आ गयी थी।
अब राघव जी थोड़ा और आगे हुए और उनका लंड मेरी झाँटों में घिसने लगा।

“नीतू… तुम अपने हाथों से मेरे लंड को अपनी चुत के मुख पे रखो!” राघव जी ने अपनी मर्दाना आवाज में बोला।
मैंने सम्मोहित हो कर उनका लंड अपने हाथों से मेरी चुत के दरवाजे पे रखा, पर मुझे बहुत टेंशन भी हो रही थी कि उनका मूसल जैसा लंड मेरी कमसिन चुत में घुसेगा कैसे।

अब तक घटी घटनाओं से मेरी चुत बह कर काफी गीली और चिपचिपी हो गयी थी पर फिर भी उनका लंड मेरी चुत से बहुत मोटा था।

इसी डर से मैंने अपने वासना पे कंट्रोल करते हुए एक कोशिश करने की सोची- राघव जी… प्लीज नहीं… मुझसे नहीं होगा… प्लीज मुझे जाने दो!
“अरे जानेमन क्यों झूठ बोल रही हो… मुझे मालूम है तुम्हें भी यही चाहिए… तुम्हारा शरीर भी यही मांग रहा है… देखो तुम्हारी कमर कैसे मेरा लंड लेने के लिए उछल रही है… क्यों अपने आप को फंसा रही हो… और डर क्यों रही हो? कुछ भी नहीं होगा… मैं आराम से करूँगा… तुम्हारी सहेली को देखो… उसको जब मैंने चोदा था तब वो तुमसे भी छोटी थी… लेकिन अब देखो एकदम आराम से लेती है मेरा लंड… जब भी छुट्टी पर आती है तो 10-15 बार उसको चोदता हूँ, और उतनी ही बार ये चंदू भी उसको चोदता है… तुम भी कर पाओगी!”

वासना और डर से सनी मेरी आंखों में देख कर राघव जी बोले और मेरी टाँगें पकड़ कर अपनी कमर पर लपेट ली और मेरी कमर को पकड़ लिया।
“नीतू तुम रिलैक्स करो… कमर और चुत को ढीला छोड़ दो… मैं बिल्कुल आराम से करूँगा.” मेरी झाँटों में उंगलियाँ घुमाते हुए उन्होंने मुझे बोला।

मैंने भी उनकी बात पे भरोसा करते हुए जैसा वो बोलते रहे, वैसा किया।

मेरी चुत के होंठ ढीले होते ही राघव जी ने अपने लंड का दबाव बढ़ाया और एक ही झटके में उनके लंड का टोपा मेरी चुत फैलाते हुए अन्दर घुस गया।

मेरी तो जैसे जान हो निकल गयी… लेकिन तभी उन्होंने अपने हाथ मेरी कमर से हटाते हुए मेरी चुचियों पे रखा और उनको सहलाने लगे; अब थोड़ा नीचे झुकते हुए मुझे किस करने लगे।
किसिंग और चुचियों को सहलाने से मुझे थोड़ा आराम मिला, मेरी चुत की जलन भी अब कम हो रही थी।

मैंने अब मेरे पैरों की पकड़ उनकी कमर पर ढीली कर दी और चुत को भी ढीला छोड़ दिया। अब उन्होंने धीरे धीरे धक्के देना शुरू कर दिया। उनका बड़ा लंड मेरी चुत की दीवारों पर घिसने लगा था। मैं उनका लंड आधा आधा सेंटिमीटर अंदर घुसता हुआ महसूस कर रही थी; मेरी चुत उनके लंड को टाइट पकड़े हुए थी; उनका लंड अब मेरी झिल्ली तक पहुंच गया था।

“नीतू… अब थोड़ा दुखेगा… थोड़ा सहन करो मेरी रानी!” कह कर वो फिर से मुझ पे झुके, मेरी एक चूची को अपने मुंह में लेकर चूसने लगे तो दूसरी को हाथों से सहलाने लगे।

उन्होंने अब अपनी कमर को पीछे लिया और जोर का धक्का दिया।
‘क्या हो रहा है!’ यह समझ में आने के पहले ही मेरी पतली झिल्ली फट चुकी थी; मेरे मुँह से एक तेज चीख निकली जो घने जंगल में खो गई।

राघव जी ने अपना लंड वैसे ही रखा और वापस मेरे एक चूची को चूसने लगे और दूसरी को सहलाने लगे।

मेरी चुचियों पे हो रही मीठी चढ़ाई ने मुझे मेरी चुत की जलन को भुलाने मदद की, मेरा दर्द कम होने लगा और उसकी जगह वासना ने ले ली। मैंने अपनी उँगलियों को उनके सिर के बालों में घूमाते हुए प्यार से उनकी तरफ देखा।
राघव जी भी प्यार से मेरी आंखों में देखते हुए खड़े हो गए, उनका लंड अब भी मेरी चुत में धंसा हुआ था।

मेरी कमर पर मजबूत पकड़ बनाते हुए उन्होंने अपना लंड धीरे धीरे से बाहर निकाला; उनका पूरा लंड मेरे कौमार्य के खून से सना था। खून से भीगे लंड को देख कर वो और भी खुश हुए, एक अनछुई जवान लड़की आज उनको चोदने को मिली थी।

उन्होंने फिर से अपना आधा लंड मेरी चुत में घुसाया और धीरे धीरे धक्के लगाने चालू कर दिए। उनका हर धक्का और उनकी कमर हिलाने से मेरी चुत पे टकराता हुआ तालाब का ठंडा पानी दोनों ही मेरी चुत की आग को ठंडा कर रहे थे।

धीरे धीरे उनका लंड मेरी चुत में और अंदर घुस रहा था। उनके विशाल लंड से मेरी चुत पूरी फ़ैल रही थी, खिंच रही थी, उनका लंड मेरी चुत में एकदम टाइट बैठा था।
वो अपना पूरा लंड बाहर खींच कर अंदर घुसा देते थे; उनके हर झटके मुझे मेरे चरम पर पहुँचा रहे थे। उनका लंड मेरी चुत के रस से चमक रहा था।

अचानक से मुझे मेरी चुत के अंदर एक तूफान बनता हुआ महसूस हुआ; मैंने जोर से उनको अपनी तरफ खींचा और उनको ज़ोरों से पकड़ कर झड़ने लगी।
राघव जी को भी पता चला कि क्या हो रहा है, उन्होंने भी धक्के देने चालू ही रखे।

मैं मेरी लाइफ का पहला पूरा ऑर्गेज़म एन्जॉय कर रही थी जो मुझे मेरी पहली चुदाई के दौरान मिला था, वो भी मुझसे 10-12 साल बड़े एक ताकतवर जवान से।
मुझे मेरे आर्गेज्म से बाहर निकलने में लगभग एक से दो मिनट लगे। मेरी चुत के रस से उनका पूरा लंड चिपचिपा हो गया था।

उन्होंने मुझे वापस तैयार होने में थोड़ा समय दिया, फिर उठ कर मेरी टाँगों के बीच फिर से पोजीशन ले ली; मैं अभी भी आँखें बंद कर के ओर्गास्म एन्जॉय कर रही थी। उनका लंड अभी भी मेरी चुत में था पर पूरा नहीं घुसा था।

चंदू और मिताली भी अपना पहला राउंड खत्म करके कोने से हम दोनों की कामक्रीड़ा देख रहे थे।

राघव जी अपना लंड बाहर निकलने लगे, उनका लंड मेरी चुत के मुँह तक बाहर निकला तो मैंने नाराजगी से उनकी तरफ देखा।
उनको मेरी आँखों की भाषा समझ में आ गयी और बोले- नीतू रानी… बस हो गई यह नाजुक चुदाई… अब तुम्हें असली मर्दानी चुदाई का मजा दिलाता हूँ!

मैं कुछ पूछ पाती… तब तक उन्होंने मेरी कमर को पकड़ते हुए जोर का धक्का दिया।
“ऊईईई… माँआआआ…”
उन का छह सात इंच का लंड मेरी चुत के गहराई में घुस गया था। राघव जी अब नीचे जुकते हुए मेरे दर्द से तड़पते हुए जिस्म पर हिचकोले खाते मेरे चुचों को बारी बारी मुख में लेकर के चूसने लगे और सहलाने लगे।

दर्द की एक तेज लहर मेरे दिमाग तक पहुँच गयी थी, दर्द की वजह से मैं लगभग बेहोश हो गई थी पर राघव जी की जादुई चुदाई फिर से मुझे रोमांचित कर रही थी। मैं अब उनके सर में मेरी उंगलियाँ घुमाते हुए उनका सर मेरी चुचियों पर दबा रही थी और नीचे से कमर हिला रही थी।

राघव जी का लंड मेरे अंदर तक बिल्कुल मेरी बच्चेदानी में जाकर अटक गया था। शायद यह अहसास उनके लिए भी नया था, उनके चेहरे पर फैली हुई मुस्कान सब बयाँ कर रही थी।

फिर से उन्होंने अपना लंड पूरा बाहर खींच लिया और ज़ोर से पेल दिया पर इस बार मैं भी तैयार थी अपने होंठ दांतों तले दबाते हुए उनका धक्का सहन कर गयी। उनका लंड फिर से मेरी बच्चेदानी में जाकर अटक गया।
मैंने अपने पेट की नसों को थोड़ा हल्का छोड़ा इससे मेरी बच्चेदानी थोड़ी ढीली पड़ गई; राघव जी ने फिर से अपना लंड खींच कर बाहर निकाल लिया।

उनके लंड के आकार को धक्कों का अंदाजा लेते हुए मैंने अपने शरीर को ढीला छोड़ा और एन्जॉय करने लगी। राघव जी ने अब स्पीड पकड़ कर मुझे चोदना चालू किया; उनके हर धक्कों पे मेरा पूरा बदन उछल रहा था, उस ठंडे पानी में ठप ठप आवाज करते हुए उनके लंड को मैं भी कमर हिलाते हुए साथ देने लगी थी।

राघव जी ने भी एक हाथ से मेरी कमर को पकड़ा हुआ था तो दूसरे हाथ से मेरी कमर के चांदी की चैन से खेल रहे थे।

हमारा खेल लगभग दस पंद्रह मिनट से चल रहा था। उनका भी बांध फटने वाला था, उन्होंने अपने धक्के और तेज कर दिए; मैं भी उतनी ही स्पीड में कमर हिला कर उनका साथ देने लगी। मेरी चुत ने उनके लंड के आकार को अपना लिया था।

उन्होंने अब मेरे हिचकोले खाते हुए चुचों को दोनों हाथों से दबोच लिया और तेज धक्के देने लगे।

“आह… नीतू… मेरी रानी, ले मेरा लंड… और ले… बड़ी मस्त है तेरी चुत… पहली बार में ही पूरा अंदर ले लिया है तूने… आह… देख कैसा मेरा लंड अंदर खींच रही है… मैं आ रहा हूँ जान… ले मेरा लंड…”
उनका लंड अब मेरी बच्चेदानी भी फाड़ने लगा था।

उनकी बातें सुनने ही मैं शर्म से चूर हो गई मैंने फिर से उनको अपने आगोश में भर लिया। मेरी चुत का बांध फिर से छूट गया, मेरी चुत फिर से झरने की तरह बहने लगी। मेरे पानी का स्पर्श होते ही राघव जी का भी बांध छूट गया। गर्म वीर्य की तेज धार उनके लंड से मेरी चुत में पड़ने लगी, उनके लंड की धार मेरी बच्चेदानी को भिगोने लगी।
हम दोनों एक दूसरे को बांहों में जकड़ने लगे।

उनका लंड अब मेरी चुत में सिकुड़ने लगा; हम दोनों का कामरस मेरी चुत से बह कर पानी में मिलने लगा।

अभी तक न अनुभव किया हुआ सुख मुझे मेरी बदन से बाहर बहता मैं महसूस कर रही थी। अचानक मुझे मेरी जिस्म में खालीपन महसूस हुआ। मैंने आँखें खोल कर देखा तो राघव जी मेरे जिस्म पर से उठ गए थे और उन्होंने अपना लंड बाहर खींच लिया।
वो अब वो मुझे निहारने लगे।

मेरी गोरी काया को कुछ देर निहारने के बाद उन्होंने नीचे झुककर मेरी चुत को किस किया तो एक तेज लहर पूरे बदन से गुजरी। मेरे हाथ अपने आप ही उनके सिर के बालों में पहुंच गए। एक मर्दाना चुदाई के बाद सूजी हुई चुत को उनके नर्म होंठों से राहत मिल रही थी।

मेरे हाथों के दबाव से उनके होंठ मेरी चुत के अंदर घुस गए। राघव जी ने भी अपनी जीभ से मेरी चुत को नीचे से ऊपर तक चाटा।

यह सब मेरे लिए बिल्कुल नया अनुभव था। मैंने थोड़ी देर पहले राघव को मुखमैथुन का सुख दिया था… पर वही सुख मुझे भी मिलेगा इसकी कल्पना भी नहीं की थी।
राघव जी मेरी चुत को अंदर से चाट रहे थे। उन्होंने हाथों से मेरे पैरों को और चौड़ा कर दिया और पैरों के बीच में आ गए। उन्होंने उंगलियों से मेरी चुत को फैलाते हुए उन्होंने मेरे दाने को होंठों से पकड़ कर चूसने लगे।

उनकी चुसाई से मेरी चुत ने फिर से पानी छोड़ दिया। जिंदगी में कभी भी ना खेले इस खेल में मैं चार बार झड़ गयी थी।

राघव जी ने मेरा सारा रस चाट लिया और वहां से उठकर पानी के बाहर चले गए।

अभी तक हुई चुदाई की लहरों पे सवार होकर मैं आँखें बंद करके सारा सुख पूरे शरीर में समाते हुए वही लेटी रही; प्रथम चोदन का सुख और मीठा दर्द दोनों अनुभव ले रही थी। उसी में मेरी कब आंख लग गई मुझे पता भी नहीं चला।



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