गाँव की लड़की के साथ खेत में ढिंक्का चिका

हाय दोस्तों मेरा नाम है बंटी और मैं कानपूर का रहने वाला हूँ | मेरी उम्र 25 साल है | मेरा कद 5 फीट 7 इंच है और रंग गोरा है और मैंने बहुत लोगों से सुना है कि मैं दिखने में बहुत अच्छा हूँ | मैंने कई बार लड़कियों से खुद के बारे में तारीफें सुनी हैं और बहुत सी लड़कियों ने मुझे प्रोपोस भी किया है और मैंने कई लड़कियों को पटाया भी है | अब मैं लड़कियों के बारे में बहुत कुछ जानने लगा हूँ और लड़कियों के इशारे बहुत अच्छे से समझता हूँ | मैं बहुत से लड़कों के लव गुरु भी हूँ और मैंने उनको लड़कियां पटवा के भी दी है | ये तो हो गयी मेरी बात अब मैं आपको लोगों को अपनी कहानी बताता हूँ जिसमें मैंने गाँव में चुदाई की थी |

मेरे पापा तो कानपूर के ही रहने वाले हैं लेकिन मेरी मम्मी गाँव की हैं और एक बार मेरे मामा की शादी में मुझे गाँव जाना पड़ा | मेरा जाने का बिलकुल भी मन नहीं था फिर भी मम्मी मुझे ज़बरदस्ती ले गयी | मैं गाँव पहुंचा और नानी के घर चला गया | मेरे नाना गाँव के सरपंच हैं और उनका घर बहुत बड़ा है और पुरे गाँव में बहुत इज्ज़त है | नाना के घर में मुझे कोई कमी नहीं थी लेकिन एक दिक्कत वहां लाइट बार बार चली जाती थी | एक बार रात को लाइट गोल हो गई तो मैं बाहर घुमने निकल पड़ा | घूमते घूमते मैं थोडा आगे निकल गया और आगे एक चाय समोसे की दूकान थी | वहां पर एक मोटे से अंकल बैठे थे उन्होंने मुझे आवाज़ लगाई और मुझे पास बुला के पूछा तुम कौन हो ? तो मैंने अपने बारे में बताया तो उन्होंने ने कहा अच्छा सरपंच जी के नाती हो आओ बैठो बेटा |

तभी अन्दर से लड़की आई वो दिखने में बहुत क्यूट सी लग रही थी उसने मेरी तरफ देखा और एक टक देखती रही | फिर उसके अंकल ने आवाज़ लगाई और कहा ये मेरी बेटी है सरोज तो मैंने उसको देखा और कहा हाय तो उसने अपना सिर झुकाया और अन्दर चली गयी | अंकल ने मुझे चाय दी और मैं बैठकर चाय पीने लगा और मैंने ये नोटिस किया कि वो लड़की मुझे अन्दर से छुपकर मुझे देख रही थी | मैं समझ गया ये फासी मेरे से और मैंने चाय पी और पैसे देने लगा तो उन्होंने पैसे नहीं लिया | अब मैं उससे बात करने का मौका ढूंढ रहा था तो अगले दिन घर में दावत थी और उसे भी आना था | तो मैंने सारा प्लान बना लिया और जैसे ही वो आई मैंने उसको देखा और उनसे शर्म से नज़रें झुका ली और जाने लगी |

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तो मैं उसके पास गया और कहा अच्छी लग रही हो सरोज वो शर्माती रही और मैंने कहा अच्छा मैं बाहर हूँ आओ तुमसे बात करनी है | मैं बाहर चला गया और दरवाज़े पे नज़र लगाए खड़ा रहा कि कब वो आएगी | वो लगभग 5 मिनिट बाद बाहर आई और यहाँ वहां देखने लगी तो मैंने आवाज़ लगाई और उसको अपने पास बुलाया और उससे बात करने लगा और उसकी तारीफ भी | वो बहुत शर्मा रही थी लेकिन खुश भी थी | लेकिन ये गाँव यहाँ पर अगर कोई हमें ऐसे देख लेता तो आफत आ जाती इसलिए मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की और उससे थोड़ी बहुत करके चला गया |

वहन पर मुझे एक हफ्ते तक ही रुकना था और मुझे जो भी करना था इन्ही सात दिनों में करना था | तो मुझे बहुत जल्दी मची थी इसलिए मैं रोज़ उसकी दूकान के सामने घूमता रहता था और जब उसके पापा चले जाते और वो आके दूकान पर बैठती थी तो मैं पहुँच जाता और उससे बातें करता और खाता भी जाता लेकिन वो मुझसे पैसे नहीं लेती थी | मेरे जाने के बस तीन दिन बचे थे और उस दिन मैं उसकी दूकान गया और उससे कहा सरोज मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और वो शर्माके अन्दर चली गयी | फिर मैं अगले दिन पहुंचा और वो बहुत देर तक बाहर ही नहीं आई तो मैं उसकी दूकान पर गया और बैठके अंकल से बातें करने लगा और बातों बातों में मैंने पूछा आपकी बेटी नहीं दिख रही तो उन्होंने कहा बेटा वो खेत गयी है |

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फिर मैंने उनसे कहा मैंने कभी किसी को खेती करते हुए नहीं देखा | तो उन्होंने कहा अरे बेटा इसमें कौन सी बड़ी बात है और उन्होंने मुझे खेत का रास्ता बताया और मैं लापक्के खेत पहुँच गया | वो खेत में सब्जी तोड़ रही थी और कसम से दोस्तों वो बहुत सैक्सी लग रही थी मन कर रहा था वहीँ चोद दूँ लेकिन आसपास और भी लोग थे | फिर उसने मुझे देखा और मेरे पास आकर कहा यहाँ कर रहे हो ? कोई देख लेगा | तो मैंने कहा तुम्हारा जवाब नहीं मिला | तो उसने अपनी आँखें झुका ली और मैंने कहा अब मिल गया | फिर मैंने उससे कहा यहाँ कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ हम बैठके आराम से बात कर सकें और कोई देख भी ना पाए | वो मुझे खेत के बीच में एक जगह पर लेकर गयी और वहां आसपास पेड़ ही पेड़ थे इसलिए कोई भी हमें नहीं देख सकता था | फिर हम दोनों ने आराम से बहुत बातें की और घर निकल गए |

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