फिर मैने लोड्ा बाहर निकाल लिया. रेखा ज़मीन पर बैठी हुई थी और ज़ोर से साँसे लेने लगी. उसका मूह पसीने से भीगा हुआ था. बाल बिखरे हुए थे और बूब्स साँस के साथ उछाल रहे थे. अब आयेज से-
रेखा बोली: ऑश मा मार दिया रे आज. क्या करते हो जी, ऐसे कों करता है? आपने मेरी जान निकाल दी है.
मैं: मुझसे प्यार करती है तो इतना सहना पड़ेगा ना.
रेखा: प्यार करती हू तभी से रही हू. लेकिन प्लीज़ तोड़ा तो रहम किया करो. आप नही करते मुझसे प्यार?
मैं: प्यार करता हू इसलिए सारा प्यार दिखा रहा हू. अभी रात भर प्यार दिखना है.
रेखा: आपका ये प्यार मेरी जान निकाल देगा. उहह देखो मेरे होंठ फॅट गये है.
मैं: चल मेरी रंडी. बेड पर आ जेया तेरी चुदाई करता हू.
रेखा: कॉंडम तो लगा लो वरना आप मुझे पक्का आज प्रेग्नेंट कर दोगे.
मैं: आज तो तुझे मैं ऐसे ही छोड़ूँगा. चल जल्दी से आ.
मैने उसे उठाया और बेड पर घोड़ी बनने को कहा. वो भी बिना बोले बेड के किनारे घोड़ी बन गयी. उसकी 34″ की गांद बड़ी ग़ज़ब लग रही थी. मैं उसकी गांद मसल रहा था. वो बस उम्म्म कर रही थी.
मैने उसकी गांद को तोड़ा चौड़ा किया, जिससे गांद का च्छेद दिखाई दिया. गांद का च्छेद बहुत छ्होटा था. मैने अपनी ज़ुबान च्छेद पर रख दी और गांद को चाटने लगा. रेखा को भी मज़ा आने लगा था.
मैं गांद के च्छेद पर गोल-गोल ज़ुबान घुमा रहा था. बहुत ही टेस्टी स्वाद था. रेखा के मूह से उहह ष्ह उफ़फ्फ़ निकल रहा था. फिर मैने च्छेद में एक उंगली घुसा दी, जिससे वो सिसक गयी थी.
रेखा: उहह सीईइ. धीरे करो.
मैं: क्यूँ, मज़ा नही आ रहा तुझे?
रेखा: बहुत उहह आ रहा है.
मैं मौसी की मस्त सील गांद को पागलों की तरह ज़ुबान घुमा कर और उंगली डाल-डाल कर चाट रहा था. साथ में गांद पर छानते भी मारने लगा. मुझे छानते मारते हुए गांद मारने और चूसने में मज़ा आता है.
रेखा: ह मा उहह मारो मत ना. ह उफ़फ्फ़ एम्म्म.
मैं अब ज़ुबान छूट पर घूमने लगा. रेखा की छूट गरम लावा निकाल रही थी. वो भी पूरी गरम हो चुकी थी. उसकी छूट अब लंड माँग रही थी. मैं चाहता था वो खुद लंड लेने को तडपे.
मैं छूट के लटके छिलके को चूसने और खेलने लगा. साथ में गांद में उंगली डाल रहा था. रेखा घोड़ी बनी अपनी कमर हिलने लगी थी. उसे भी अब चुदाई चाहिए थी. उसकी छूट रस्स बहाने लगी थी. 10 मिनिट तक मैं छूट और गांद के साथ खेलता रहा. फिर वो गरम सेक्सी आवाज़ में बोली-
रेखा: उम्म्म सुनो ना. प्लीज़ अब छोड़ो ना मुझे. कब से तड़प रही हू. आप घर पर तो लंड अब तक डाल चुके होते. प्लीज़ उहह इस छूट की आग मिटा दो ना. मुझसे नही रहा जाता. छोड़ो ना छोड़ो ऑश.
मैं: साली रंडी तुझे अभी और तड़पना पड़ेगा. मुझे बहुत तडपया है ऐसे चुदाई के लिए.
रेखा: उम्म्म्म बाबा मत करो ना. प्लीज़ डाल दो ना और जाम के छोड़ो मुझे. मैं अंदर से जल रही हू.
मैने फिर अपना कड़क लंड उसकी छूट पर रखा, और छूट के च्छेद पर रग़ाद रहा था. लंड की कड़क गर्मी से वो और तड़पने लगी थी.
रेखा: उहह ह बेबी, प्लीज़ डाल दो इसे अंदर.
मैं: बिना रहम करे चूड़ना पड़ेगा. बोल डाल डू और फाड़ डू रंडी तेरे छूट?
रेखा: अर्रे बाबा उहह, कर लो ना. मैने कहा माना किया है?
मुझसे भी अब रहा नही जेया रहा था. रेखा की गीली और गरम छूट में लोड्ा जाना चाह रहा था. मैने अब उसकी कमर पकड़ी और एक ज़ोर का धक्का दिया. रेखा घोड़ी बनी हुई थी और मैं बेड के नीचे खड़ा होके लंड पेलने लगा. एक बार में ही छूट में लंड पूरा घुस गया.
लंड के अंदर जाते ही गरम छूट ने कस्स कर पकड़ लिया, और साथ में उसकी ज़ोरदार चीख निकल गयी.
रेखा मौसी: ह मा ह मॅर गयी. ऑश ष्ह दर्द हो रहा है.
मैने बिना सुने जोश में आके फिर लंड बाहर निकाला. फिर छूट पर ज़ुबान से चाट कर उसके रस्स को सॉफ किया. फिर लंड छूट पर रख कर ज़ोरदार धक्का मारा. लंड फिर से छूट चीरता हुआ अंदर चला गया. एक बार फिर उसकी चीख निकल गयी.
रेखा: ह ना ना ह उहह ष्ह मार डाला. धीरे करो ऑश.
मैं: साली रंडी. आज तुझे ऐसे ही जाम के छोड़ूँगा. तेरी छूट का भोंसड़ा बना दूँगा.
रेखा की आँख से आँसू निकालने लगे थे. लेकिन गरम छूट में लंड लेने का एक सुकून भी था. मैने कहा-
मैं: अगर तुझे दर्द हो रहा है तो लंड बाहर निकाल डू?
रेखा: मैने ऐसा कब कहा. प्लीज़ छोड़ो ना, होने दो दर्द. आप छोड़ते रहो, मुझसे भी नही रहा जाता. करो ना छोड़ो ना.
मैने अब जोश में लंड फिर से बाहर निकाला और एक झटके में छूट में घुसा दिया. रेखा की टाइट छूट को चीरता हुआ मेरा कड़क लंड अंदर तक गया. रेखा का बदन और टाँगें काँप गयी थी. उसका बदन बुखार की तरह काँप रहा था.
मैने बिना रहम किए 10 से 15 धक्के ऐसे ही दिए.
फिर लंड पूरा बाअहर लेके वापस से अंदर तक घुसा दिया. रेखा की चीख पुर रूम में गूँज रही थी. साथ में हर झटके पर उसकी पैर की पायल भी बाज रही थी. उसका चेहरा आँसू से भरा और दर्द से तड़प रहा था.
रेखा (चीखते हुए): अहह ना ह मार दिया. ऑश नही धीरे उहह मा मा बस-बस ऑश.
मैं: रंडी साली ले मेरा लंड. आज तेरे सारी जवानी निकाल दूँगा.
मैं बिना देर किए अब जोश में आके और तेज़ धक्के देने लगा. उसकी हालत खराब थी. वो रोते हुए अपना मूह तकिये में दबाने लगी. लेकिन उसकी सिसकियाँ मुझे सुनाई दे रही थी.
मैं गांद पर छानते मारते हुए मौसी की छूट का भोंसड़ा बना रहा था. रेखा की छूट मेरे लंड से खुलने लगी. 15 मिनिट बाद उसे भी मज़ा आने लगा. छूट ने लंड को सेट कर लिया था. वो अब मज़े लेते हुए चुड रही थी. छूट से उसका काम-रस्स बह रहा था.
लंड और छूट की पच पच पच और फॅट फॅट फॅट की आवाज़ आ रही थी. रेखा की छूट में लंड अंदर तक दे रहा था. उसकी गरम सिसकियाँ निकल रही थी.
रेखा: ह क्या छोड़ते हो. ऑश याअ एस छोड़ो मुझे. बहुत मस्त छोड़ते हो आप. मेरी जान निकाल दी अपने.
रेखा: ह मा उहह उफफफ्फ़. छूट में जलन हो रही है. मुझे आपके लंड से जो दर्द और सुकून मिला उसे नही भूल सकती हू.
मैं: मेरी रानी, मुझे भी तेरी छूट मारने में मज़ा आ रहा है. बहुत कड़क और सेक्सी बदन है तेरा. ज़िंदगी भर तेरी चुदाई करता राहु.
रेखा: ष्ह उफफफफ्फ़ एस्स. करते रहो, रूको मत, मेरी छूट झड़ने को है.
5 मिनिट चूड़ने के बाद मौसी ने छूट का रस्स बहा दिया. वो ह उहह करते हुए झाड़ गयी. अभी मेरा होना बाकी था.
मैने कहा: रंडी अभी मेरा बाकी है. चल अब सीधी लेट जेया.
रेखा: ह्म्म्म्म मुझे पता है. आप अभी और छोड़ने वाले है. आपका लंड है या घोड़े का. तका दिया है मुझे, प्लीज़ तोड़ा रेस्ट दे दो.
मैने उसे पानी पिलाया, फिर बेड पर सीधा कमर के बाल किया. फिर उसकी टाँगें मोड़ कर बूब्स में दबा दी. उसकी छूट मेरी चुदाई से सूज गयी थी. छूट की चाँदी बाहर लटक गयी थी.
मैने अब उसे बेड पर लिटा कर टाँगें उसके बूब्स पे दबा दी. फिर एक झटके में लंड छूट में घुसा दिया, जिससे उसकी चीख निकल गयी.
रेखा: ह मा मॅर गयी.
मैने लंड बाहर निकाला और फिर झटके में लंड अंदर तक घुसा दिया. रेखा का बदन हर झटके में हिल जाता था. मैं उसकी गरम और दर्द भारी चुदाई कर रहा था. उसके आँख से आँसू और बदन से पसीना निकल रहा था.
लंड छूट में जाते ही फॅट फॅट फॅट करके छोड़ने लगा था. रेखा की हालत खराब कर दी थी. उसका बदन हर धक्के पर काँप जाता था.
रेखा: बहुत दर्द कर रही है छूट. प्लीज़ ह ना उहह मा धीरे ह मान जाओ ऑश.
मैं: बेहन की लोदी चुप कर वरना गला दबा के मार दूँगा तुझे. समझ आज तेरी ऐसे ही चुदाई करूँगा.
रेखा: ह उफफफ्फ़ कर लो बाबा उहह ऑश मा.
मेरी हर धक्के को वो से रही थी. छूट से गरम रस बह रहा था. बूब्स पर छानते मारते हुए मौसी को छोड़ रहा था. मैं कड़क लंड से छोड़ते हुए बोला-
मैं: ह मेरी रंडी. क्या मस्त गरम टाइट छूट है. साली तेरी जवानी मेरी लंड को और कड़क बना रही है.
मौसी: आपने मेरी छूट को तका दिया है. बहुत जलन कर रही है. ऐसे तो कभी आपके मौसा ने भी नही छोड़ा था. दर्द के साथ आप मुझे आनंद भी दे रहे हो. एस हाअ ह अब रुकना मत बाबू. मेरी छूट झाड़ रही है.
मैने अब बूब्स पर छानते मारते हुए उसकी डुमदार झटको से चुदाई करने लगा. रेखा हर धक्के को मज़े के साथ से रही थी. उसे पता था मैं ऐसे ही छोड़ने वाला था. मुझे कुछ बोलने का कोई फ़ायदा नही था. 15 मिनिट तक उसे ऐसे ही छूट में दबा के छोड़ा.
उसके बाद मेरा लंड भी झड़ने वाला था. रेखा तो झाड़ चुकी थी और तक कर बस मेरे धक्के से रही थी. चेहरे पर बाल बिखर चुके थे, और आँखों से आँसू निकल रहे थे. उसके फेस पर चुदाई का सुकून भी था. मैने कहा-
कहानी का अगले भाग में पड़ना कैसे मैने मौसी की गरम गांद मारी. मुझे आप अपना मैल करके ज़रूर फीडबॅक दे.
थॅंक्स ड्के.