हॉट वैष्णवी की मस्त चुदाई की स्टोरी

दोस्तो मैं कॉलेज मे था तो एक लड़की के साथ मेरी दोस्ती हो गयी. हम दोनो का नेचर बहुत सेम था, हम एक दूसरे को बहुत अकचे से समझते थे इसलिए बहुत ही कम समय मे हम दोस्त से बेस्ट फ्रेंड बन गये.

बेस्टीए बनते ही हुमारे रीलेशन मे बहुत सारे चेंजस आए. जैसे पहले दोस्त हुआ करते थे तो सिर्फ़ नॉर्मल बातें करते थे और अब बेस्टीए बन गये तो छ्होटी से छ्होटी चीज़ को हम डिसकस कर रहे थे.

12त के बाद हम दोनो ने एक ही कॉलेज मे अड्मिशन लिया ताकि हुमारी दोस्ती कभी ना टूटे और हम ऐसे ही बेस्टीए बन के रहे.

अब आपको मेरी बेस्टीए के बारे मे बता देता हू.

मेरी बेस्टीए का नाम है वैष्णवी. दिखने मे बहुत गोरी और सुंदर है. हाइट 5.1 फ्ट., झील जैसी आँखें जिसमे कोई भी लड़का खो जाए, लंबे बाल जो उसपर बहुत अकचे लगते थे. वैष्णवी हर तरहा के कपड़े पहेनटी थी लीके कुरती, ड्रेस, जीन्स टॉप, वन पीस, एट्सेटरा. वो कोई भी कपड़े पहने उसमे बहुत खूबसूरत लगती थी.

वैष्णवी पर काई लड़के दीवाने थे और उन्होने उसे काई बार प्रपोज़ किया था लेकिन उसने किसी को आक्सेप्ट नही किया. हुमारी क्लास मे काई लड़के उसके दोस्त हुआ करते थे लेकिन उसने किसी को मेरे जितना इंपॉर्टेन्स नही दिया. मैं उसके लिए बहुत स्पेशल था.

हम दोनो बेस्ट फ्रेंड्स थे तो हुँने डिसाइड किया के साथ मे कॉलेज जाएँगे. तो मैं घर से बिके पे निकलता था और वैष्णवी को उसके घर से पिकप करके हम कॉलेज जाते थे.

सिर्फ़ कॉलेज ही नही बलके हम सब कुछ साथ मे ही करते थे. पढ़ाई करना, घूमने जाना, शॉपिंग करना, एक दूसरे के सीक्रेट्स शेर करना, एक दूसरे का मज़ाक उड़ाना, बर्तडेस पर गिफ्ट एक्सचेंज करना. ये सब बहुत अकचे से चल रहा था हम दोनो के बीच मे.

एक दिन हम दोनो कॉलेज मे थे. हुमारी क्लास मे ऑफ लेक्चर था. क्लास मे बहुत कम स्टूडेंट्स थे. हम दोनो एक ही बेंच पर बैठते थे. उस दिन मैं अपनी जगह बैठा हुआ था और कुछ कम नही था. वैष्णवी दूसरी साइड कुछ लड़कियों के साथ गप्पे मार रही थी.

तभी मेरे पिच्चे 2-3 बेंच छ्चोड़ के 2 लड़के बैठे थे और उन्होने वैष्णवी के बारे मे बात करना शुरू किया.

पहला लड़का: भाई वैष्णवी को देख जरा… कितनी खूबसूरत है यर्ररर

दूसरा लड़का: हन यर्र मेरा तो क्रश आ गया इसपर

पहला: यर्र कोई लड़की इतनी हॉट कैसे हो सकती है? हुमारी क्लास मे कोई लड़की नही है जो वैष्णवी को टक्कर दे सके

दूसरा: हन यर्र. जब से कॉलेज मे इसकी एंट्री हुई है तब से आधा कॉलेज इसका दीवाना बन चुका है.

अब तक तो मैं चुप था और उनकी बातें सुन रहा था. लेकिन इसके आयेज जो मैने सुना वो सुन के मुझे बहुत गुस्सा आया

पहला: लड़के छ्चोड़ टीचर्स तक इसपर लाइन मरते है. और मैने सुना है के शर्मा सिर ने तो इसे शादी के लिए प्रपोज़ भी किया था

ये सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गये. क्यू के ये सब कब हुआ और क्या हुआ मुझे बिल्कुल पता नही था. ये बात मुझे बाहर वेल लड़के से सुनने को मिली ये मुझे बहुत बुरा लगा. मेरी बेस्टीए ने मुझसे इतनी बड़ी बात कैसे च्छुपाई?

मैं चुपचाप वही पर बैठा रहा ताकि और भी कुछ होगा वो सुनने को मिले?

दूसरा: हन यर्र मैने भी सुना है. तुझे क्या लगता है क्या बोला होगा उसने?

पहला: बोलना क्या है दोस्त? शर्मा पर्मनेंट जॉब पर है और दिखने मे भी अक्चा है तो वैष्णवी क्यू माना करेगी? हन ही बोला होगा

दूसरा: नही यर्रर मुझे नही लगता

पहला: क्यू?

दूसरा: तूने देखा नही वो नील के साथ दिन भर घूमती है. और मुझे लगता है के उन दोनो का कुछ चल रहा है.

पहला: हन ये तो मुझे भी लगता है. वैसे नील ने बहुत हॉट लड़की को पटाया है. जरा देख ना उसे ध्यान से एक नाज़ुक सुंदर तितली है वैष्णवी. जो भी उसे पा लेगा वो बहुत किस्मत वाला होगा.

दूसरा: उसे कितने लड़को ने प्रपोज़ किया है लेकिन उसने किसी को भी आक्सेप्ट नही किया इसका मतलब वो नील के साथ ही रिलेशन्षिप मे है.

पहला: हन. जरा सोच जब नील उसे छोड़ता होगा तब उसे कितना मज़ा आता होगा ना?

उन दोनो की बातें सुन के अब मेरा गुस्सा अपने आप शांत हो गया था. पता नही क्यू लेकिन मुझे अक्चा लगने लगा था.

मैं बेंच पर बैठे हुए ही वैष्णवी को अब्ज़र्व कर रहा था.

छ्होटी सी क्यूट हाइट वाली लड़की थी वैष्णवी. जो हर वक़्त मज़ाक मस्ती करती थी. सब के साथ ऐसे बात करती के सामने वाला उसपर फ्लॅट हो जाए. दिखने मे बहुत ही खूबसूरत किसी पारी की तरहा. उसके चेहरे के एक्सप्रेशन्स बहुत सुंदर थे. कन मे छ्होटे से एअर रिंग्स, हाथ मे एक खूबसूरत सा ब्रेस्लेट पहेनटी थी, उसके जिस्म का हर एक हिस्सा उसे खूबसूरत बनता था.

बातें करते वक़्त आँखें बड़ी करके बात करना, बार बार अपनी छ्होटी सी जीभ से नाज़ुक से गुलाबी होंठों को गीला करना, कभी भी ऐसे कपड़े ना पहेनना जिसमे से उसका क्लीवेज या बॉडी का कोई और हिस्सा दिखे. मॅचिंग कपड़े पहेनना, हल्का सा मेकप और क्यूट शूस पहें के बाहर निकलना. उसकी इन सारी अड़ाह पर हर कोई फिदा था.

फिगर की बात करू तो बहुत ही सेक्सी फिगर है वैीशू का. मैं उसे प्यार से वैीशू बुलाता हू.

34-26-34 फिगर है उसकी और उसके कुवर्व्स बहुत सेक्सी दिखते है. एक बार मैं उसके घर पे स्टडी के लिए गया था तब उसने एक शॉर्ट टॉप पहना था जो उसके बूब्स को ही कवर कर रहा था. उसका गोरा चितता पेट मेरी आँखों के सामने नंगा था. उफ़फ्फ़ क्या खूबसूरत लग रही थी उसकी नेवेल, मान कर रहा था उसे बेड पे लिटा के अपनी जीभ से उसे खूब चातु. नीचे उसने लेगैंग्स पहनी थी और लेगैंग्स मे से उसके लेग्स और गांद का शेप बहुत सेक्सी लग रहा था.

मैं उस दिन उसे बहुत घूर रहा था, उसने ये नोटीस भी कर लिया था लेकिन कुछ कहा नही.

हम जब भी मस्ती करते है तब एकदम बिंदास होकर रहते है. कभी वो अचानक से मेरे कंधे पे हाथ रख के खड़ी हो जाती है तो कभी मैं उसकी पतली सी नाज़ुक कमर मे हाथ डाल के हम साथ मे चलते है. अफ बहुत खूबसूरत पल होता है जब हम ऐसे एक दूसरे के साथ रहते है.

मज़ाक मज़ाक मे तो मैने उसे काई बार अपनी गोद मे उठाया है. उसे कोई भी प्राब्लम होती है तो मुझसे ही शेर करती है और मैं उसे वहाँ से बाहर निकलता हू. हुमारी बॉनडिंग ही कुछ ऐसी है के हम दोनो मे झगड़ा कभी नही होता और हो भी गया तो दूसरे दिन हम फिर से नॉर्मल हो जाते है.

मैं उसके ख़यालो मे इतना खो गया था के मुझे याद ही नही के वैष्णवी कब मेरे सामने आकर मुझे आवाज़ देने लगी. जब उसने मेरे गाल खीच के उठाया तब मैं होश मे आया.

वैष्णवी: ओये…. कहा खो गया था?

नील: हन मैं… वो… वो….

वैीशू: अक्चा वो सब छ्चोड़ मुझे लाइब्ररी मे जाना है चल ना

नील: नही यर्र मुझे नही आना तू चली जेया

वैीशू: मैं देखती हू तू कैसे नही आएगा चल उठ जल्दी

मैं नही उठा तो उसने मुझे गुदगुदी करना शुरू किया और मैं हेस्ट हुए उठा और उसने मेरा हाथ पकड़ा और हम चल दिए. वैीशू मेरे आयेज थी और मैं उसके पिच्चे पिच्चे चल रहा था.

वो मुझसे कुछ कह रही थी लेकिन अचानक से मेरी नज़र उसकी गांद पर पड़ी जो उस वक़्त बहुत सेक्सी लग रही थी. वैष्णवी की चाल बहुत सेक्सी थी. जब वो चलती थी तो उसकी गांद बहुत मस्त उच्छलती थी. जब वो चलती थी तो सारे लड़के पिच्चे से उसकी गांद को देखते थे. बहुत मस्त नज़ारा था.

अचानक से हम रुक गये, मैने उपर देखा तो हम लाइब्ररी मे पहुँच भी गये थे. वैीशू वाहा कोई बुक ढूँढ रही थी लेकिन उसने अभी भी मेरा हाथ पकड़ा हुआ था.

वैीशू: चल अब जल्दी से मुझे हेल्प कर और वो बुक ढूँढ के दे

नील: हन लेकिन तू मेरा हाथ छ्चोड़ेगी तभी तो ढूँढ पौँगा ना

फिर उसने शरमाते हुए मेरा हाथ छ्चोड़ा और मैं बुक ढूँढने लगा. उसने 5 मीं मेरी तरफ बहुत ही मस्त अड़ाह से देखा. और अचानक से मुझे आवाज़ दी.

वैीशू: नील… तुम क्या ढूँढ रहे हो?

उसने अपने दोनो हाथ अपनी कमर पर रख के चेहरे पर घायल कर देने वाली अड़ाह के साथ पुचछा.

नील: अरे बाबा वही बुक जो तुम्हे चाहिए

वैीशू: अक्चा जी. तो मतलब साइन्स की बुक तुम कॉमर्स सेक्षन मे क्यू ढूँढ रहे हो?

मैने सेक्षन का नाम देखा तो वो कॉमर्स ही था.

नील: ऑश सॉरी ई थॉट तुम्हे कॉमर्स की कोई बुक चाहिए सो….

वैीशू: ह्म मुझे लगा ही था के तुम्हारा ध्यान नही होगा. पता नही आज कल कहाँ ध्यान रहता है तुम्हारा!

फिर उसने मुझे बुक का नाम बताया और हम दोनो साथ मे बुक ढूँढ रहे थे. थोड़ी देर बाद ह्यूम वो बुक मिल गयी. हम वहाँ से जाने ही वेल थे के कुछ अजीब सी आवाज़ सुनाई देने लगी.

वैीशू: वेट… ये कैसी आवाज़ है…??

मैने 2-3 बुक्स को हटाया तो हुँने वहाँ जो देखा उससे देख के वैीशू शर्मा के भाग गयी.

नेक्स्ट पार्ट मे पढ़िए वो कौनसी आवाज़ थी और हुँने लाइब्ररी मे क्या देखा, और वैष्णवी शर्मा कर क्यू भाग गयी!

आपको ये कहानी कैसी लगी मुझे जल्दी से मैल करके बताना. वैष्णवी का कॅरक्टर कैसा लगा और उसमे सबसे ज़्यादा क्या पसंद आया वो भी ज़रूर बताना.

जो भी लड़कियाँ और मॅरीड लॅडीस मुझसे बात करना चाहती हो वो मुझे मैल करे. आपकी प्राइवसी सेफ रखी जाएगी.

तो बे कंटिन्यूड…

यह कहानी भी पड़े  मम्मी की ठुकाई की दादा जी ने

error: Content is protected !!