ये कैसी ट्यूशन है सर !!!

मैं एक हायर सेकण्डरी स्कुल में इंग्लिश पढाता हूँ. मेरी उम्र चालीस साल है. अपनी हेल्थ का पूरा ध्यान रखता हूँ इसलिए मैं अभी भी तीस – बत्तीस साल से बड़ा नहीं दिखाई देता. मेरी पत्नी भी नौकरी करती है. वो एक फैक्ट्री में मेनेजर है और सवेरे बहुत जल्दी चली जाती है. मैं अपनी स्कुल की छात्राओं में विशेष रूप से काफी लोकप्रिय हूँ.. लगभग हर छात्रा दिन भर मुझसे कुछ ना कुछ पूछने के बहाने स्टाफ रूम में या कहीं भी मिलने आती रहती हैं. मैं भी उन्हें हर तरह से मदद करता हूँ और इसी बहाने उन्हें काफी करीब से देख भी लेता हूँ. कुछ लडकीयाँ तो बहुत ही खुबसूरत हैं. कुछ लडकीयों का शारीरिक विकास बहुत अच्छा हुआ है. ऐसी लगभग पांच छः लड़कियाँ है. ऐसी ही एक लडकी है – साधना. साधना को देखकर कोई नहीं कह सकता कि वो बारहवीं में हैं. वो सत्रह साल की होने के बावजूद बीस बाईस साल की लगती है. उसके सीने का विकास किसी विवाहिता स्त्री से कम नहीं हुआ है. मैं अक्सर उसके उभारों को बहुत ललचाई नजरों से देखता हूँ. जब भी वो मुझसे मिलने आती है मैं यह कोशिश करता हूँ की स्कूल की युनिफोर्म की सफ़ेद कुर्ती का कोई बट्टन खुला हो और मुझे कुछ देखने को मिल जाय. साधना भी कई बार यह कोशिश करती कि किसी तरह वो मेरे नजदीक खड़ी रहे और मुझे वो छू ले. मैं भी यही कोशिश करता रहता हूँ.
हाफ ईअरली परीक्षाएं नज़दीक थी. लडकीयाँ लगातार कुछ ना कुछ पूछने के लिए आने लगी थी. कुछ लड्केयाँ घर पर भी आने लगी. एक दिन साधना सवेरे मेरे घर आई. मैं घर के बाहर बगीचे में एक कुर्सी पर बैठा था. मैंने टी शर्ट और हाफ पैंट पहन रखा था. साधना ने ढीला कुरता और जींस पहन राखी थी. साधना आकर मेरे सामने बैठ गई. मैं उसे समझाने लगा. साधना के कुरते के सरे बटन खुले थे. मैंने ध्यान से देखा. उसने कुरते के अन्दर कुछ नहीं पहन रखा था और उसकी उभरे हुए स्तन इधर उधर हिल रहे थे. कभी कभी वो कुछ ऐसी स्थिति में आ जाते कि मुझे साफ़ दिखाई दे जाते. मैं पूरा आनंद ले रहा था. साधना को भी इस बात का अहसास हो गया. वो थोडा और झुक गई. अब उसके कुरते का खुला हुआ हिस्सा पूरी तरह मेरे सामने था. मैं उसके उभार देखकर हैरान रह गया. मैंने मन ही मन सोचा इसकी कप साइज़ जरुर सी प्लस होगी. जब भी वो हिलते मेरा दिल अजीब तरह की तरंगों से भर जाता. जब साधना रवाना हुई तो उसने एक शरारत भरी नजर मुझ पर डाली और बोली ” सर, जितना अच्छा आपको लगा उतना ही अच्छा मुझे भी लगा. मैं कल फिर आऊंगी.” मैं मन ही मन कल के लिए योजना बनाने लगा.
अगले दिन साधना सवेरे आ गई. मेरी पत्नी जा चुकी थी. साधना ने स्लीव लेस टी शर्ट पहन राखी थी जिसका गला बहुत नीचे तक खुला था. उसके उभार आज बहुत ही साफ़ दिखाई दे रहे थे. नीचे उसने घुटनों तक का जींस पहन रखी थी. उसकी गठीली टांगें भी गजब ढा रही थी. हम दोनों कमरे में अकेले ही थे. उसने कुछ सवाल पूछे मैंने उसे समझा दिया. साधना अपनी नोट बुक में कुछ लिखने लगी. जैसे ही वो झुकी उसके उभार और भी खुलकर दिखने लगे. मैं भी उसे देखने लगा और वो भी नजरें चुरा चुराकर मेरी तरफ देखने लगी. अचानक हम दोनों की नजरें मिल गई. हम दोनों एक बार तो झेंपे लेकिन अगले ही पल साधना फिर मुझे टकटकी नजरों से देखने लगी. मैंने उसे कहा ” तुम ऐसे कपडे क्यूँ पहनकर आई?” साधना बोली ” मुझे अच्छा लगता है और आपको भी तो अच्छा लगता है ना!” इतना कहकर वो मुस्कुराने लगी. वो अपनी जगह से उठी और मेरे करीब आकर खड़ी हो गई. उसने मेरी तरफ देखा और बोली ” सर; ” मैंने उसे जैसे ही दूर रहने का इशारा किया उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने स्तनों पर रख दिया और जोर से दबा दिया. मुझे तो अच्छा लगा ही लेकिन उसके मुंह से एक आह निकल गई. मुझसे अब रहा नहीं गया और मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया. साधना ने भी मुझे कसकर पकड़ लिया. अब मैंने उसके दोनों गालों को अपने हाथों से पकड़ा और उसके गालों को चूम लिया. उसके मुंह से एक और आह निकल गई. उसने मेरी टी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए. मैंने तुरंत अपनी टी शर्ट उतारी और उसके टी शर्ट को भी खोल दिया. मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और अपने बेडरूम में ले आया. मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके स्तनों को धड़कता देखने लगा. वे मुझे पागल कर रहे थे. तभी साधना ने मेरी हाफ पैंट को खींच कर खोल दिया और इसके बाद उसने अपनी जींस भी खोल दी. मैंने जब उसकी जांघें और नंगी टांगें देखि तो मेरे होश उड़ गए. उसने अपने दोनों हाथ मेरी तरफ फैला दिए. मैं तुरंत उस पर लेट गया. अब हमारा दोनों का नग्न जिस्म आपस में मिल गया था और साँसें तेज तेज चलने लगी. मैं साधना को गालों और गले के नीचे चूमने लगा. साधना भी मुझे उसी तरह चूमने लगी. मैंने जैसा सोचा था साधना उससे कहीं ज्यादा गरम निकली.

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