स्टूडेंट की माँ रजनी भाभी को चोदा

दोस्तों मेरा नाम जोहन हे और मैं 21 साल का हूँ. फरीदाबाद में रहता हूँ. और आज ये मेरी पहली सेक्स कहानी ही आप लोगों को लिख के भेज रहा हूँ. इस कहानी में आप पढेंगे की कैसे मैंने अपनी वर्जिनिटी को लूज किया था अपने एक स्टूडेंट की माँ की चूत में लंड को डाल के.

मैं अपने MBA की पढाई कर रहा हूँ. और साथ में अपना खर्चा खुद उठाने के लिए बच्चो को पार्ट टाइम होम ट्यूशन भी करवाता हूँ. एक दिन मुझे एक लेडी का कॉल आया जो अपने बेटे के लिए ट्यूशन वाले को ढूंढ रही थी. उसका आवाज एकदम मधुर और पतला था. उसके आवाज से ही मोहित हो चूका था. उसका नाम रजनी था. हमने बात की और टाइमिंग वगेरह तय कर लिया.

जो टाइम हमने तय किया था उस वक्त पर मैं उसके घर जा पहुंचा. और उसके घंटी को बजाई. जब उसने दरवाजे को खोला तो उसके सेक्सी बदन और उभरे हुए यौवन को देख के मेरा मुहं खुला के खुला ही रह गया. उसने मुझे ग्रिट किया और फिर अपने बेटे को बुला के कहा की ये तेरे नए सर हे.

कुछ दिनो के बाद उसने मुझे कहा की मेरा बेटा बड़ा ही शरारती हे उसके साथ आप को थोडा स्ट्रिक्ट रहना पड़ेगा.

जब मैं रोज ट्यूशन के लिए जाता था तो रजनी वही पर होती थी. और वो मुझे धीरी धीरी स्माइल देती थी. उसके देख के मेरे बदन के अन्दर का राक्षश उसकी चूत मांगने लगा था. बहुत दिनों से किसी को नंगा भी नहीं देखा था. और अभी तक मैं पूरा वर्जिन था. मैं चाहता था मेरे लंड का अकेलापन रजनी की चूत से ही दूर हो.

लेकिन 3 महीने हो गए ट्यूशन में लेकिन मुझे अभी तक कोई मौका नहीं मिला था. एक दिन मैंने बाथरूम कर के जब पाँव धो रहा था तो मैंने बाथरूम में रजनी की ब्रा और पेंटी को लटके हुए देखा. उसे देख के मेरा मन एकदम से उसे सूंघने को हो गया. मैंने पेंटी को हाथ में ले के उसे सुंघा तो उसके अन्दर से अमोनीक स्मेल आ रही थी. मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं वही पर खड़े हुए अपने लंड को बहार निकाल के हिलाने लगा. मैंने अपने लंड के पानी को रजनी की पेंटी में ही छोड़ दिया और फिर बहार आ के रजनी के बेटे को पढ़ाने लगा.

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दुसरे दिन मैं जब रजनी के घर गया तो मेरी और उसकी बात हुई.

रजनी: हल्लो सर कैसे हो आप? (उसने स्माइल के साथ कहा)

मुझे थोडा डर लग रहा था की कही उसने मेरी कलवाली हरकत पकड ली ना हो.

मैं: जी मैं ठीक हूँ भाभी आप कैसी हो?

रजनी: जी मैं भी एकदम ठीक हूँ, और मेरे बेटे की पढाई कैसे जा रही हे.

मैं: सब सही ही जा रहा हे. थोडा परेशान करता हे लेकिन कोई दिक्कत नहीं आएगी, पढ़ाई में तो अच्छा ही हे.

रजनी: जी ठीक हे.

तो उसकी और मेरी ऐसी ही बातें हो रही थी तो मैंने भाभी को उसके हसबंड के बारे में पूछा.

रजनी: इसके पापा तो चाइना में रहते हे. 2 महीने में एक विक के लिए ही आते हे.

मैं: तो फिर भाभी जी आप सब कुछ मेनेज कैसे लार लेती हो?

रजनी: करना पड़ता हे जी, वैसे कोई आप्शन भी तो नहीं हे.

मैं: हां ये तो हे, लेकिन फिर भी आप के लिए मुश्किल तो होता होगा. (ये सुन के वो थोड़ी सेड सी हुई.)

रजनी: हां मुश्किल तो होती हे सर लेकिन करना पड़ता हे लाइफ हे.

फिर उसने टोपिक बदल दिया और मुझे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछने लगी.

रजनी: सर आप से बात कर के अच्छा लगा, और आप की कोई गर्लफ्रेंड हे या नहीं कोलेज में?

,मैंने थोडा रुक के उसको कहा: जी मेरी गर्लफ्रेंड थी लेकिन उसके साथ मेरा कुछ समय पहले ही ब्रेकअप हो गया हे.

रजनी: अच्छा, क्यूँ भला ब्रेकअप हो गया आप के जैसे लड़के के साथ?

मैं: जी मुझे मच्योर लोग पसंद हे और वो मच्योर नहीं थी जरा भी.

रजनी: तो आप को कैसे मच्योर लोग पसंद हे?

मैंने सही मौका देखा और उसे कहा: बस आप के जैसे ही!

रजनी: मैं?

मैं: जी हां आप के जैसी पर्सनालिटी और नेचर वाले मुझे पसंद हे.

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रजनी: लेकिन मैं तो बहुत बड़ी हूँ और मेरी शादी भी हो चुकी हे.

मैं: लेकिन आप एस अ पर्सन बड़ी अच्छी लगती हो मुझे.

रजनी: ओके.

मैं: सोरी अगर आप को जरा भी बुरा लगा हो तो.

रजनी: अरे नहीं नहीं सर इट्स ओके. चलो मैं चलती हूँ आप पढाओ सोनू को मैं एक घंटे में आप से मिलती हूँ.

मैं: ठीक हे.

उसके बेटे को पढ़ाते हुए मैं उसके बारे में ही सोच रहा था. जो मैंने कहा था शायद वो भी वही सब सोच रही होगी. एक  घंटे के बाद पढाई खत्म कर के उसका बेटा बहार खेलने के लिए चला गया. भाभी मेरे सामने आकर बैठ गयी. उनके हाथ में एक प्लास्टिक की बेग थी जो वो मेरे लिए ले के आई थी.

रजनी: सर ये आप के लिए हे. आप को पसंद आएगा.

मैं: इसमें क्या हे भाभी?

रजनी: आप खुद ही देख लो?

मैं: पर फिर भी क्या हे वो तो बोलिए?

रजनी: अरे बाबा आप खुद ही देखो.

मैंने जब उस बेग को खोला तो अंदर जो था उसे देख के चौंक गया. मैंने उसकी ब्रा और पेंटी में अपना वीर्य छोड़ा था उसने उसका ही शो पिस बना के रखा हुआ था!

मैं: भाभी ये क्या मजाक हे?

रजनी: अरे सर मजाक थोड़ी हे, आप को पसंद नहीं आया क्या? दूसरा चाहिए क्या?

मैं: नहीं, लेकिन ये क्यूँ?

वो मेरे पास आई और मुझे किस करने लगी. वो मुझे ऐसे किस कर रही थी जैसे बहुत ही टाइम से वो सेक्स की भूखी हो. और आज उनकी ये कसर भी पूरी होने वाली थी. हम ऐसे ही 20 मिनिट तक एक दुसरे को किस करते रहे. फिर मैंने उन्के बूब्स को प्रेस करने लगा. थोड़ी देर ऐसे ही किसिंग के साथ बूब्स प्रेसिंग चली. और तभी डोर खुलने की आवाज आई और हम दूर हो गए. सोनू आ गया था खेल के वापस.

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