हेलो दोस्तों, मेरा नाम आकाश पटेल है. मैं आमेडबॅड का रहने वाला हू. मेरी उमर 22 साल है. मेरी हाइट 6 फीट 1 इंच है और रंग मेरा गोरा है. मेरा लंड 6.5 इंच का लंबा मोटा है.
ये कहानी मेरी सबसे पहले चुदाई की कहानी है. तो अगर मुझसे कोई ग़लती हो जाए, तो माफ़ कर देना. अब चलिए शुरू करते है.
तो ये सेक्स कहानी तब की है जब में 1स्ट्रीट एअर में था. तब मैं टुटीओन जाता था मेरे घर से सिर्फ़ 5 मिनिट डोर एक सोसाइटी में. वहाँ दोनो बहने रहती थी, और हमे टुटीओन्स देती थी.
उसमे से एक का नाम था लबड़ी पटेल. वो 24 साल की थी, और उसका रंग गोरा. उसके फिगर के चर्चे पूरी सोसाइटी में होते थे, क्यूंकी वो दिखती ही इतनी माल थी. उसके बड़े-बड़े बूब्स जो उसके कपड़ों के अंदर से भी दिखते थे, और उसकी वो मोटी रसीली गांद जो जीन्स पहन कर भी च्छुपति नही थी.
तो एक दिन क्या हुआ की मैं रोज़ की तरह टुटीओन जेया रहा था. लबड़ी माँ के घर पहुँचने के बाद मैं देखता हू की मैं तोड़ा जल्दी आ चुका था. क्यूंकी वहाँ कोई नही था, इसलिए लबड़ी माँ मुझे अंदर ले लेती है, और बाल्कनी में जाके बैठो बोलती है.
मैं भी चला जाता हू. लेकिन मेरा मॅन कुछ लगता नही है, तो मैं उठ के घर घूमने लगता हू. तब मुझे पता चलता है की लबड़ी माँ नहा रही थी. तो मैं चुपके से देखने चला जाता हू. वहाँ हल्की सी गॅप से मुझे दिखता है.
उनका वो नंगा बदन जिसपे साबुन लगा था, और वो अपनी छूट में उंगली कर रही होती है. ये सब देख के मेरा खड़ा हो जाता है, और मेरे से रहा नही जाता. तो मैं हिलने लगता हू. लेकिन थोड़ी देर बाद कोई डोरबेल बजता है, तो मैं जल्दी से वापस बाल्कनी में चला जाता हू.
फिर लबड़ी माँ मुझे आवाज़ लगती है की डोर खोल दे. मैं डोर खोल देता हू, तो बाकी के बच्चे होते है टुटीओन वाले. और तब ही लबड़ी माँ भी बाहर आ जाती है.
वो बाहर आके सीधा मुझे देखती है और बस देखती ही रह जाती है. क्यूंकी मेरा लंड अभी भी खड़ा होता है, और पंत के अंदर दिख रहा था. मैं भी वहाँ से चला जाता हू शरम की वजह से.
फिर 2 घंटे बाद हम लोगों की च्छुटी हो जाती है. मैं सोच रहा था की आज जल्दी क्यूँ छ्चोढ़ रहे थे, की तभी लबड़ी माँ मुझे रोक लेती है, और सब के जाने के बाद डोर लॉक कर देती है. अब बस घर में हम दो ही थे.
लबड़ी: आकाश तुम थोड़ी देर पहले क्या कर रहे थे?
मे: मैं? कुछ नही.
लबड़ी: सच-सच बोलो.
मे: सच में कुछ नही कर रहा था.
फिर लबड़ी माँ मुझे सोफा के उपर बैठने बोलती है.
लबड़ी: अब बताओ.
मे: सच में माँ कुछ नही कर रहा था.
लबड़ी: अछा, ऐसी बात है.
मे: हा.
लबड़ी माँ तोड़ा झुक के मुझे घूर्ने लगती है, और मुझे उनके बड़े बूब्स सॉफ दिखाई देते है. इस वहाँ से मेरा सोया हुआ लंड फिर से खड़ा हो जाता है.
लबड़ी: अगर कुछ नही कर रहे थे तो ये क्या है?
लबड़ी माँ ये बोल कर मेरा लंड पकड़ लेती है, और ज़ोर से दबाने लगती है.
फिर वो बोलती है: तो ये क्या है, हा?
मुझे दर्द होने लगता है, इसलिए मैं सब बता देता हू.
मे: मैं आपको नहाते हुए देख कर हिला रहा था.
लबड़ी: अछा इतनी हिम्मत!
मे: क्या करू माँ, आप हो ही इतनी माल.
लबड़ी: क्या कहा?
लबड़ी माँ ने फिर मेरा लंड दबाना छ्चोढ़ दिया, और फिर हस्स के मुझे देखा और सीधा किस करने लगी.
वो बोली: इतना बड़ा लंड तो मेरे ब्फ का भी नही है. आज तू दिखा की तेरे लंड में कितना दूं है.
ये बोल कर लबड़ी माँ ने मेरी पंत उतरी, और मेरा लंड को पकड़ लिया. फिर वो मेरा लंड चूसने लगी. लबड़ी माँ बड़े ज़ोर-ज़ोर से लंड चूस रही थी, जैसे लॉलिपोप चूस रही हो. मुझसे तो रहा नही गया, इसलिए मेरा 5 मिनिट में मूठ निकल जाता है. लबड़ी माँ मेरा पूरा मूठ पी लेती है और बोलती है-
माँ: चूतिया! इतने बड़े लंड का क्या फ़ायदा जब इतना जल्दी मूठ निकल जाता है?
लेकिन मेरा लंड फिर से खड़ा हो जाता है, तो लबड़ी माँ शॉक भी होती है, और खुश भी. फिर वो मेरे लंड को फिर से चूसने लगती है. लेकिन इस बार आराम से. फिर 2 मिनिट बाद मेरा लंड पूरी तरह लबड़ी माँ की थूक से गीला हो चुका था.
अब मैं उनके कपड़े उतारने लगता हू. लबड़ी माँ ने ब्रा नही पहनी होती, तो उनके बूब्स ओपन होते है. अब उनके दोनो बूब्स पे गोरी-गोरी चुचि मेरा इंतेज़ार कर रहे होते है. फिर मैं उनके बूब्स चूसने लगता हू, और साथ में उनकी चुचि से खेलने लगता हू.
फिर लबड़ी माँ की जीन्स निकाल देता हू, और साथ में पनटी भी. अब वो पूरी तरह नंगी हो चुकी थी. उनसे मेरा बड़ा लंड खाली देखा नही जाता, इसलिए वो मेरा लंड पकड़ती है, और उल्टा घूम के मेरे लंड को अपनी गांद के होल पे घिसने लगती है. मैं भी फिर अपना लंड सीधा उसकी गांद में डाल देता हू, तो लबड़ी माँ चिल्लाने लगती है-
माँ: आह ह उम्म.
फिर लबड़ी माँ को दीवार से चिपका के धीरे-धीरे गांद मारना शुरू करता हू. करीब 30 मिनिट तक गांद मारने के बाद लबड़ी माँ की गांद सुन्न हो जाती है. लेकिन मैं फिर भी उनकी गांद मारते रहता हू. फिर 10 मिनिट बाद जब मेरा फिर से मूठ निकालने वाला होता है, तो लबड़ी माँ बोलती है की गांद में छ्चोढ़ दे अपना मूठ.
तो में भी अपना मूठ उनकी गांद में छ्चोढ़ देता हू. फिर मैं तक जाता हू, इसलिए बेड पे जाके लेट जाता हू, तो लबड़ी माँ आके बोलती है-
माँ: ह्म, तेरे बड़े लंड से चूड़ने में मज़ा आया. लेकिन मेरी छूट चुदाई बाकी है, तो अपना लंड जल्दी खड़ा कर.
तो मैं बोल देता हू: आप तो एक नंबर की रांड़ हो, देखो ना तक गया हू मैं.
तो लबड़ी माँ हासणे लगती है और मेरे पास आके मेरे दोनो गोट्तों को चाटने लगती है. फिर अचानक से मेरे दोनो गोट्ते अपने मूह में लेती है. मुझे जो ओर्गसम आता है वाह, क्या कहने उसके. मेरा लंड फिर से खड़ा हो जाता है. ये देख कर लबड़ी माँ देरी ना करते हुए सीधा मेरे लंड पे बैठ जाती है.
फिर बैठने के बाद उछालने लगती है और चिल्लाने लगती है: ऊओ एस एस. ह फक मे हार्डर एसस्स आह ह आह.
करीब 20 मिनिट तक अपनी छूट चुदाई करने के बाद वो तक जाती है. उसके बाद मेरे उपर लेट जाती है, तो मैं भी उठ के उसको गोद में उठा लेता हू, और उसकी छूट चुदाई हवा में करने लगता हू. उनको और मज़ा आने लगता है. इधर मैं उनको हवा में छोड़ रहा होता हू, और उनकी गांद से मेरा मूठ बाहर गिर रहा होता है.
थोड़ी देर बाद मेरा मूठ निकालने वाला होता है, तो लबड़ी माँ को बेड पे लिटा देता हू, और फिर अपना पूरा मूठ उनके बदन पे गिरा देता हू. फिर लबड़ी माँ कहती है-
माँ: बड़ा मज़ा आया. ऐसे मज़े हम आयेज भी करते रहेंगे.
ये बोल कर फिर वो हासणे लगती है. उसके बाद मैं तका हुआ घर चला जाता हू. उस दिन के बाद से जब भी हमारा मॅन होता था, हम चुदाई करते थे.
आशा करता हू की आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी. अगर किसी लड़की को सेक्स के बारे में टिप्स चाहिए, या सेक्स के बारे में बातें करनी हो, या फिर आपको सेक्स करना है तो कैसे करे, उसके लिए आप मुझे एमाइल कर सकती है.
इस कहानी का फीडबॅक मुझे मेरे एमाइल के द्वारा दे, और मैं कहानी लिखने में क्या इंप्रूव्मेंट कर सकता हू ज़रूर बताइए. चलिए मिलते है अगली कहानी में