ही फ्रेंड्स, मैं प्रीथनका गुप्ता अपनी न्यू सेक्स स्टोरी लेके आपके सामने दोबारा से हाज़िर हू. मेरी पहले की स्टोरीस को प्यार देने के लिए थॅंक योउ. जिन रीडर्स ने मेरी पिछली कहानियाँ नही पढ़ी है, वो उनको भी ज़रूर पढ़ ले. चलिए बढ़ते है आज की कहानी की तरफ.
पहले मैं अपने बारे में बता डू. मैं 24 साल की हो गयी हू, और मेरा फिगर 34-29-36 है. मैं पुंजब के लुधियाना शहर में रहती हू, और नौकरी करती हू. मुझे देख कर लड़के और मर्द मेरे दीवाने हो जाते है, और मेरी चुदाई करना चाहते है. लेकिन मैं इतनी आसानी से हाथ नही आती. आज की ये कहानी मेरी ट्रेन में हुई चुदाई की है. तो चलिए शुरू करते है.
कुछ दिन पहले की बात है. मुझे अचानक से ऑफीस के काम के लिए देल्ही जाना पड़ा. मैने टिकेट बुक कराई और रात की ट्रेन से देल्ही के लिए निकल गयी.
मेरी स्लीपर की टिकेट थी, क्यूंकी एसी टिकेट अवेलबल नही थी. लेकिन मुझे इस बात से कोई दिक्कत नही थी. सफ़र रात का था, तो मैने नाइट सूट ही पहना हुआ था. मेरा नाइट सूट टाइट ब्लॅक पाजामा और ब्लू त-शर्ट है.
जिस कॉमपार्टमेंट में मेरी सीट थी, वो पहले से भरा हुआ था. मेरी सीट मिड्ल सीट थी, इसलिए मैं उपर चढ़ कर बैठ गयी. नीचे एक फॅमिली के मेंबर्ज़ बैठे थे. पॅसेज वाली सीट्स मेरे पहुँचने तक खाली थी.
अभी कुछ देर ही हुई थी मुझे वहाँ बैठे हुए, की तभी एक लड़का पॅसेज वाली सीट पर आके बैठ गया. वो लड़का दिखने में ठीक-ताक था, लेकिन शकल से ही कमीना और तर्की लग रहा था.
उसने बैठते ही आस-पास का जायज़ा लेना शुरू किया, जैसे सब लड़के लेते है. पहले उसने सामने की और वाली सीट्स पर देखा, फिर पीछे देखने लगा. उसके बाद जब उसने उपर देखा, तो उसकी नज़र मुझ पर पड़ी.
मैं उसकी तरफ ही देख रही थी, इसलिए हमारी नज़रें मिल गयी. उसने मेरी तरफ देखते ही स्माइल पास की. उसकी स्माइल में तारक-पन्न और हवस भारी पड़ी थी. मैने कोई रेस्पॉन्स नही दिया, और मूह दूसरी तरफ कर लिया.
कुछ देर में मैं लेट गयी. मैने उसकी तरफ देखा तो अब भी मेरी तरफ ही देख रहा था. उसने दोबारा स्माइल की, और अपने लंड पर हाथ फेरा. जब उसने हाथ फेरा तो मेरी नज़र उसके लंड पर पड़ी. उसका लंड जीन्स में पूरा टाइट हुआ पड़ा था, और काफ़ी बड़ा लग रहा था.
एक बार तो मुझे उसका लंड देख कर कुछ होने लगा. लेकिन मैने अपना ध्यान वहाँ से हटाया और दूसरी तरफ मूह करके लेट गयी. अब मेरी गांद उसकी तरफ थी. कुछ देर बाद मैने धीरे से उसकी तरफ देखा तो वो मेरी गांद को घूर रहा था. सला हवस से भरा पड़ा था.
तभी उपर वाली सीट पर लेती हुई आंटी का पर्स नीचे गिर गया. मौके का फ़ायदा लेते हुए वो लड़का पर्स उठाने के लिए उठा, और आंटी को पकड़ा दिया. इस बीच उसने मेरी गांद पर हाथ रख के दबा दी. इससे मैं उछाल पड़ी. फिर मैने उसकी तरफ गुस्से से देखा, लेकिन वो स्माइल करने लगा.
उसकी इन हरकतों से कहीं ना कहीं मैं उत्तेजित होने लगी थी. मेरे मॅन में आने लगा की क्यूँ ना तोड़ा मज़ा ले लिया जाए. ट्रेन थी, और वो लड़का बिल्कुल अंजान था, और उसका लंड भी तगड़ा था. मैने सोचा क्यूँ ना एक शॉट लगा ही लिया जाए.
ये सोच कर मैने अपना मूह उसकी तरफ घुमा लिया. उसने मुझे देख कर फिर से स्माइल की. इस बार मैने भी स्माइल कर दी. ये देख कर वो खुश हो गया. उसका हॉंसला बढ़ा और उसने मुझे किस करने का इशारा किया. मैने भी स्माइल कर दी.
फिर वो मुझे टाय्लेट की तरफ जाने का इशारा करने लगा. अब तक मेरी छूट ने भी आग पकड़ ली थी. मैं धीरे से उठी, और चप्पल पहन कर टाय्लेट की तरफ चली गयी. जाते हुए जब मैने पीछे मूड कर देखा, तो वो मुझे ही देख रहा था.
मैं फिर टाय्लेट के अंदर जाके उसका इंतेज़ार करने लगी. 2 मिनिट बाद उसने दरवाज़े पर नॉक किया. मैने दरवाज़ा खोला और वो जल्दी से अंदर आ गया.
अब हम दोनो करीब खड़े थे. हम दोनो की साँसें तेज़ थी. उसने कहा-
लड़का: देगी?
मैने कहा: लेलो.
बस फिर वो आयेज बढ़ा, और हम दोनो किस्सिंग करने लगे. किस करते हुए वो मेरे चूतड़ दबाने लगा. मुझे मज़ा आने लगा. हम दोनो वाइल्ड किस्सिंग कर रहे थे.
चूतड़ दबाते हुए ही उसने मेरा पाजामा और पनटी नीचे कर दिए. अब मेरी नंगी गांद उसके हाथो में थी. वो पीछे से मेरी गांद के चियर में हाथ फेरने लगा. उसका हाथ नीचे मेरी छूट को टच होने लगा, जिससे मैं और गरम होने लगी.
फिर वो नीचे बैठा और मेरी छूट को मूह लगा कर चाटने लगा. मैं आहें भरने लगी, और उसके बाल सहलाने लगी. कुछ देर छूट चाटने के बाद वो खड़ा हुआ, और लंड बाहर निकाल दिया.
उसका लंड तगड़ा था, जिसको देख कर मैं खुश हो गयी. उसने मुझे लंड चूसने का इशारा किया, जिसको पा कर मैं नीचे घुटनो पर बैठ गयी. मैने उसके लंड को चाटना शुरू किया और मूह में लेके चूसने लगी. वो मेरे मूह में धक्के देने लगा.
लंड थूक से चिकना करने के बाद मैं खड़ी हो गयी. फिर उसने मुझे घुमाया और विंडो के सहारे झुका दिया. पीछे से वो लंड मेरी छूट पे सेट किया, और धक्का मार कर अंदर कर दिया. मेरी आ निकल गयी.
फिर वो ताबड़तोड़ मेरी छूट में लंड पेलने लगा. हिलती हुई ट्रेन में मेरी फुल स्पीड में चुदाई हो रही थी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. वो छूट छोड़ते हुए मेरे बूब्स को कपड़ों में हाथ डाल कर मसालने लगा. वो मेरे निपल्स खींचने लगा.
मैं भी रिदम में गांद पीछे कर रही थी, ताकि लंड अंदर तक जाए. वो मेरी गांद पर थप्पड़ मारने लगा. कुछ देर उसी पोज़िशन में चुदाई के बाद उसने मुझे सीधी किया. फिर उसने मुझे गोद में उठा कर वॉशबेसिन पर बिता दिया, और सामने से मेरी चुदाई करने लगा.
मैने अपनी त-शर्ट उपर उठा कर ब्रा में से बूब्स बाहर निकाल लिए, जिनको वो चूसने लगा. 10 मिनिट की चुदाई के बाद उसका पानी निकल गया. उसके बाद वो मेरी छूट का दाना रगड़ने लगा, जिससे मेरा पानी भी निकल गया.
फिर हमने कपड़े ठीक किए और बाहर आ गये. मैं अपनी सीट पर जाके सो गयी. सुबा उठी तो वो वहाँ नही था. साला आज भी दोस्तों में मेरी चुदाई का किस्सा बता कर तशण मारता होगा.