सुलह के बाद बहन के साथ हार्ड सेक्स की कहानी

तो जैसा की आप लोगों ने पिछली सेक्स स्टोरी में पढ़ा होगा. मैं शिखा से गुस्सा हो कर उसके फ्लॅट से लौटा और फिर उसके फोन कॉल्स नही लिए. ना ही उसके मेसेजस के रिप्लाइ किए.

ना मैने वरुण को रिप्लाइ किया. शिखा ने औदिॉस वीडियोस भेजे मुझे रेकॉर्ड करके सॉरी बोलते हुए, रोते हुए. पर मैने जान-बूझ कर किसी का रिप्लाइ नही दिया. मैं उसे तड़पाना चाहता था. उसे डरना चाहता था की मुझे खो सकती है वो.

और ऐसा होने भी लगा था. शिखा ऑडियो में बोलती थी की: रोहिणी ने आप को छ्चीन लिया है मुझसे. वरना मेरी छूट मारे बिना आप महीने भर तो नही रुक सकते भैया.

पर मैने सब इग्नोर कर दिया. इधर रोहिणी भी पार्लर सेट उप में बिज़ी थी, और मैने भी एनर्जी सप्प्लिमेंट वग़ैरा शुरू किए, जिससे स्पर्म क्वालिटी और स्टॅमिना इंप्रूव हो मेरा.

चुदाई मशीन बन कर रह गया था मैं. हवस में खुद के उपर कुछ ध्यान ही नही दे रहा था. पर साथ-साथ मैं सिद्धि पर भी पूरी नज़र रखे था, और रोहिणी को भी बोलता रहता था उसे सेट करने को. रोहिणी भी मुझे अलग-अलग आइडियास देती थी, पर बहुत टेढ़ी खीर था सिद्धि की छूट मिलना.

अब मैं कभी-कभी सिद्धि को वॉक पर मिल जया करता था, और उसकी फिटनेस की तारीफ करते-करते फ्लर्ट करने लगता था. पर बात बनते हुए नही दिखती थी, और मेरी मायूसी बढ़ रही थी.

ऐसे ही करते-करते 2 महीने निकल गये. शिखा का लास्ट मेसेज था की उसके एग्ज़ॅम स्टार्ट हो रहे थे, तो वो स्टडीस पर ध्यान नही दे पा रही थी. वो चाहती थी की मैं उसके पास चला जौ 2-3 दीनो के लिए, वरना वो फैल हो जाएगी.

वरुण का भी मेसेज आया की: भैया शिखा बहुत डिस्टर्ब है. आप उससे बात नही कर रहे है इस वजह से.

तो एक दिन फ्राइडे शाम मैं ऑफीस से वापस आया और फ्रेश हो कर बैठा ही था, की रोहिणी का कॉल आया की फ्लॅट पर आओ जल्दी. मुझे लगा उसे पाईं हो रहा था, तो मैं भागता हुआ गया. दरवाज़ा खोला तो वो स्माइल करते हुए मुझे देखने लगी.

विवेक: अर्रे यार, मैं तो दर्र ही गया था. मुझे लगा आप को कुछ प्राब्लम हो रही है.

रोहिणी: अर्रे नही, मुझे कोई प्राब्लम नही है. मैं बिल्कुल ठीक हू. तुम्हारे लिए एक सर्प्राइज़ है.

ये कह कर उसने मेरा हाथ पकड़ा, और बेडरूम की तरफ जाने लगी. हम बेडरूम में पहुँचे तो उसने अंदर धक्का दिया, और डोर लॉक कर लिया. अंदर बेड फुल फूलों से सज़ा था, और बेड पर कोई लड़की दुल्हन बनी घूँघट लिए बैठी थी, जैसे अपने हज़्बेंड का वेट कर रही हो की कब वो आए और घूँघट खोल कर छूट मारे. मैं तोड़ा कन्फ्यूषन में तो था.

रोहिणी: अब खड़े-खड़े मेरा मूह क्या देख रहे हो? जाओ घूँघट खोलो उसका.

मैं गया और घूँघट उठाया, तो वो शिखा थी. वो दुल्हन बनी बैठी थी, और हाए क्या क़यामत लग रही थी. मैं बता नही सकता हू यारों दुल्हन के लाल जोड़े और ज्यूयलरी में रोहिणी भाभी ने क्या मस्त मेकप करके उसे सजाया था. मैं तो मैं, कामदेव भी उसे देख लेते उस दिन तो बिना छोड़े नही रह पाते. शिखा ने मुझे देख कर स्माइल किया.

रोहिणी: चलो भाई अब तुम लोग यही बेड पर लाडो, और अपना झगड़ा ख़तम करो. विवेक क्यूँ तडपा रहे हो मेरी बेचारी शिखा को इतना? क्या ग़लत बोला उसने, यही ना के वो अपनी मा तुमसे नही छुड़वाना चाहती? तो इसमे ग़लत क्या है? कों ही होगा जो अपनी मा किसी से चुडवाएगा यार?

विवेक: पर भाभी आप को इसने उसके पीछे का रीज़न नही बताया होगा.

रोहिणी: मुझे सब बताया है उसने. बेमतलब बेचारी को इतना परेशन किया हुआ है बदमाश! सुबह से रो रही है बेचारी मेरी बच्ची. चलो अब उसे प्यार करो और गुस्सा ख़तम करो.

शिखा: भैया सॉरी ना यार. पर आप मेरी जगह होते तो क्या करते आप बताओ? मैं बुरी फ़ससी हू आंटी, एक तरफ मेरी मा और दूसरी तरफ मेरा प्यार. मैं क्या करू? दोनो में से मैं किसी को खोना नही चाहती, और दोनो को ही हर्ट नही करना चाहती हू (शिखा रोने लग गयी ये सब बोलते-बोलते).

शिखा: पर मुझे लग रहा है मैं अपने प्यार को खो दूँगी और फिर मा को हर्ट करूँगी. अब आप ही बताओ भैया क्या करू मैं?

रोहिणी वहीं कुर्सी डाल कर बैठ जाती है और कहती है: कुछ नही होगा बेटू, आप चिंता मत करो. ये तो पागल है विवेक. चलो विवेक अब गुस्सा छ्चोढो, और अपनी दुल्हनिया को खूब प्यार करो. देखो बेचारी कितनी तड़प रही है तुम्हारे लिए.

रोहिणी: सुबह से आई हुई है मेरे पास, और बस एक ही सवाल कर रही है भैया को कैसे मनौ आंटी. अब ख़तम करो गुस्सा यार, और प्यार करो अपनी दुल्हन को.

देखो गुस्सा तो मेरा जब शिखा का घूँघट उठाया था तभी फुर्र हो गया था. बहुत सुंदर दिख रही थी वो. बस तोड़ा नाटक कर रहा था. शिखा बेड से उठी, और मेरे सामने हाथ जोड़ कर खड़ी हो गयी.

शिखा: भैया छ्चोढ़ भी दो गुस्सा. यार सॉरी मेरी बात बुरी लगी हो तो. आप बताओ तो पैर पद जौ.

शिखा झुकने लगी तो मैने पकड़ लिया.

विवेक: अर्रे पागल है क्या? तू जान है मेरी. तू अकेली तदपि है क्या? मैं भी कितना तडपा हू तेरे लिए पागल. पूच भाभी को जब से आया हू तुझसे झगड़ कर इन्हे भी हाथ नही लगाया है मैने.

मैने शिखा को ज़ोर से हग किया. वो रोते-रोते मुझे ज़ोर से हग किए रही.

शिखा: बहुत बुरे हो भैया आप. यार कितने मेसेज किए, कितनी कॉल्स की, एक का भी रिप्लाइ नही दिया? नेक्स्ट वीक एग्ज़ॅम है मेरे. मैं ध्यान ही नही दे रही थी. फैल हो जौंगी मैं पक्का.

विवेक: कुछ नही होगा मेरी जान. अब 2-3 दिन में तेरी सारी टेन्षन निकाल दूँगा मैं. फिर खूब ध्यान लगा कर पढ़ाई करना.

ये कह कर मैने उसके होंठो को अपने होंठो में दबा लिया, और ज़ोर-ज़ोर से किस करने लगा. शिखा तोड़ा झटपटा रही थी, और आँखें मटका कर रोहिणी भाभी की तरफ इशारा कर रही थी.

मैने किस तोड़ी और उसके बूब्स पकड़ लिए. हाए, रेड ब्लाउस में दुल्हन के गेट उप में बवाल लग रही थी शिखा. मुझसे कंट्रोल नही हो रहा था. मैने उसे बेड पर धक्का दिया.

शिखा: क्या भैया, आंटी के सामने ही शुरू हो गये आप तो? रुक जाओ प्लीज़, मुझे शरम आ रही है.

रोहिणी: कोई बात नही बेटू. तुम शरम छ्चोढो और एंजाय करो, मैं जेया रही हू.

विवेक: नही भाभी प्लीज़, आप यही बैठो, और देखो हम दोनो का प्यार. एक-दो रौंद अपनी इस बीवी को छोड़ लू. फिर आपकी भी बजता हू. आज फिर तीनो साथ में करेंगे.

शिखा: भैया यार प्लीज़ आंटी के सामने नही.

वो आयेज कुछ और बोलती उससे पहले उसके उपर टूट पड़ा मैं, और उसके होंठो को किस करने लगा. शिखा तोड़ा झिझक रही थी, और आँखों से इशारे कर रही थी की आंटी के सामने नही. मैने किस तोड़ी तो दोनो की साँसे फूल रही थी.

विवेक: क्यूँ शर्मा रही है यार? खुल कर मज़े कर ना. जब भाभी के पास आई, और उन्हे सारी बात बताई, तब तो नही शरमाई. और फिर जब उन्होने मेकप करके रेडी ही चूड़ने के लिए किया है, तो कैसी शरम मेरी रंडी?

शिखा ने मेरे हल्के से थप्पड़ मारा और अपना मूह च्छूपा लिया. फिर मैने उसके हाथ नीचे किए और उसको बहुत आचे से निहारा. बहुत सुंदर और बहुत ही ज़्यादा सेडक्टिव लग रही थी यार.

विवेक: थॅंक्स भाभी, मेरी शिखा को रेडी करने के लिए. आज सच में बहुत सुंदर लग रही है मेरी बीवी. मुझसे कंट्रोल नही हो रहा है. आज इसे ऐसा छोड़ूँगा के ये रो पड़ेगी.

शिखा: हाए भैया, नही प्लीज़ ऐसा मत करना मेरे साथ. आंटी अब तो मुझे दर्र लग रहा है इस दरिंदे से.

मैने शिखा का ब्लाउस पकड़ा और उसके बटन्स खोल दिए. उसने ब्रा नही पहना था, तो बूब्स लटक कर बाहर आ गये और उसने शर्मा कर च्छूपा लिए. अब वो एक हाथ से बूब्स और एक हाथ से चेहरा च्छूपा रही थी.

शिखा: भैया प्लीज़, आंटी को बाहर जाने दो ना प्लीज़. मेरे आचे भैया, मेरे पति देव, प्लीज़ सुन लो.

अफ यार, क्या नज़ारा था. खुला हुआ रेड ब्लाउस, उसमे से दो गोरे-गोरे पपीते की शेप के बूब्स. उन पर एक ग्रीन कलर का नेकलेस. हाए कोई क्यूँ ना पागल हो जाए ये सब देख कर?

मैने शिखा के बूब्स पकड़े और उछाल-उछाल कर खेलने लगा. शिखा अभी भी शर्मा रही थी रोहिणी की वजह से. फिर मैं झुका और उसके बूब्स को मूह में भर कर चूसने लगा, काटने लगा. शिखा बहुत कंट्रोल कर रही थी की आवाज़ ना करे, पर कब तक कंट्रोल करती बेचारी.

फिर शिखा भी मदहोश होने लगी और मेरा सिर पकड़ कर मेरे बालों में हाथ घूमने लगी. धीरे-धीरे उसकी साँसे भी भारी होने लगी. मैं लगातार उसके बूब्स चूस रहा था, काट रहा था, हाथो से खींच रहा था. कभी-कभी दांतो से निपल दबा कर ज़ोर से काट लेता या खींच लेता.

अब शिखा से भी कंट्रोल नही हो रहा था, और वो भी फुल मज़े में आ गयी थी. अब वो भी ज़ोर-शोर से चिल्ला देती, पर बीच-बीच में तोड़ा शर्मा भी जाती, तो मेरे सिर पर टपली मार देती.

शिखा: भैया-भैया, सुनो आअहह भैया प्लीज़ नही, ना करो.

मैने शिखा के बूब्स काफ़ी देर तक चूज़ और काटे. मतलब जगह-जगह मेरे दातों के निशान पद गये और हर जगह से लाल हो गये बूब्स.

रोहिणी: बहुत कमीने हो विवेक. ज़रा भी तरस नही कर रहे हो बेचारी पर. कैसे कर दिए बेचारी के बूब्स.

शिखा: आंटी प्लीज़ अब आप ऐसे मत बोलो. मैं मॅर जौंगी शरम से.

विवेक: अर्रे ज़्यादा शरम आ रही है क्या तुझे? चल ठीक है, भाभी चलो फटाफट नंगी हो जाओ आप भी.

शिखा: क्या!

भाभी उधर से उठ कर बेड की साइड आ कर अपने कपड़े निकालने लगी, और मैं शिखा के होंठ पीने लगा. मैं उसको हर जगह चूसने लगा. उसकी छ्चाटी को हर जगह बीते करके निशान छ्चोढ़ दिए अपने प्यार के. उसकी गर्दन चूसी. फिर उसकी जॉलाइन चूस्टे-चूस्टे गालो तक गया. उन्हे मूह में भर कर चूसा.

फिर वापस होंठ पीते-पीते उसके लहँगे में हाथ डाला, और उसकी गीली छूट को च्छुआ. उधर रोहिणी भाभी बेड के सिरहाने नंगी हो कर बैठ कर हमे देख रही थी. मैने शिखा के होंठ पीते-पीते उसकी छूट में डुमदार उंगली करना शुरू किया, तो वो मछली की तरह तड़पने लगी.

शिखा: एम्म उहह माआ आंटी.

शिखा अपने पैर सिकोडती तो कभी अपनी कमर को मोदती. फिर मैने सब कुछ बंद कर दिया, और झट से लहँगे में घुस गया. मैने एक झटके में उसकी चड्डी उतरी और छूट को मूह में भर लिया. फिर ज़ोर-ज़ोर से छूट चूसने लगा.

उसके दाने को मैं ऐसे चूस्टा जैसे गाए का बच्चा उसका तान्न चूस्टा है. वो पागल हो रही थी और लहँगे के उपर से ही मेरे मूह को दबा रही थी. अपनी कमर को वो आयेज-पीछे डाए-बाए घुमा रही थी.

शिखा: आअहह हाए भैया, मेरा निकल जाएगा उफफफ्फ़. और करो, पी जाओ इसे. बहुत सताया है आपने. सॉरी आंटी एम्म्म, मेरी वजह से आपकी छूट भी प्यासी रही. पर अब सब की छूट से पानी बहेगा. भैया एम्म, मेरा निकला भैया, मैं गयी!

शिखा ऐसे ही जोश में बड़बड़ाते हुए झाड़ गयी, और मैं नीचे उसकी छूट पीटा रहा, और चाट कर पूरी सॉफ कर दी. फिर मूह में तोड़ा रस्स भर कर बाहर निकला लहँगे से और रोहिणी भाभी के होंठो की तरफ गया. मैने सारा माल मूह का उसके मूह में भर दिया और उसे पीला दिया.

फिर हम दोनो किस करने लगे बहुत जोश में. भाभी भी बहुत दीनो से भारी पड़ी थी, तो वो भी फुल जोश में थी. बुत पेट निकल आने की वजह से उतनी एनर्जी और फुर्ती में नही कर पा रही थी, और जल्दी ही हाँफने लगी. वो मुझे हटा कर साँस लेने लगी. इधर शिखा भी थोड़ी नॉर्मल हो आई थी तब तक.

विवेक: भाभी कैसा लगा शिखा की छूट का स्वाद?

शिखा एक-दूं शॉक में थी.

रोहिणी: बहुत स्वीट है मेरी बेटू की चूत.

शिखा ने अपनी बॉडी समेत ली और मूह धक लिया.

शिखा: आंटी आप भी, भैया बहुत कुत्ते हो यार आप.

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