स्टूडेंट और टीचर के गरम होने की कहानी

ये सॅकी कहानी मेरी और मेरी टीचर की चुदाई की है. इसमे मैने अपनी टीचर के साथ सेक्स फॅंटेसी पूरी की. ये स्टोरी बहुत ही इंट्रेस्टिंग होने वाली है, क्यूंकी आयेज कहानी में कुछ नये कॅरेक्टर्स और जुड़ेंगे. जिसे पढ़ कर आप सब को बहुत मज़ा आएगा.

लड़के अपना लंड पकड़ कर और लड़कियाँ अपनी चूत में उंगलियाँ डाल के तैयार रहे.

मैं अब ज़्यादा बोर ना करते हुए कहानी की शुरुआत करता हू.

मैं अभी ब.कॉम में हू. आगे 19 यियर्ज़ है, लंड 7.6 इंचस लंबा और 3 इंचस मोटा

है. कहानी की दूसरी कॅरक्टर मेरी टीचर अमृता है, जिसका फिगर 36-34-38 है. देखने में वो बिल्कुल माल जैसी लगती है.

ये कहानी शुरू हुई जब मैं कॉलेज के फर्स्ट एअर में था. मैं पढ़ाई और स्पोर्ट्स में अछा था, तो पॉप्युलॅरिटी की कोई दिक्कत नही थी. हर लड़की और सारी टीचर्स मुझसे इंप्रेस थी, इंक्लूडिंग अमृता माँ. अब मैं तो था कॉमर्स बॅकग्राउंड से. पर माँ के पास जाने के लिए बहाना चाहिए था.

मैं हर रोज़ कुछ ना कुछ बहाने से कंप्यूटर लब में माँ के पास बैठा रहता

था. मेरा कॉलेज में हाफ एअर हो गया था, और मैने कॉलेज की 4 लड़कियाँ भी छोड़ ली थी. पर मुझे अब टीचर को छोड़ना था. फिर एक दिन कॉलेज में सब बच्चो और कुछ टीचर्स ने छुट्टी मार ली मौसम बिगड़ने के कारण.

पर मैं बिना ग्रूप देखे कॉलेज पहुँच गया था. तो मैने सोचा अब पढ़ाई कर लेते है. मैं बुक ली और टीचर और स्टूडेंट की सेक्स की कहानी पढ़ रहा था, जिसके कारण मैं टीचर को छोड़ने की फिराक में आ गया.

फिर सबसे पहले मैं कंप्यूटर लब गया, और माँ को देखा. पर माँ नही थी. फिर जैसे ही कंप्यूटर लब से बाहर निकालने वाला था, वाहा माँ मुझसे टकरा गयी और गिर गयी.

मैने माँ को उठाया और माँ को सहारा देके चलाने लगा. मेरा एक हाथ माँ की कमर से होते हुए गांद पर टच हो रहा था. फिर मैने माँ को कॉलेज सिक रूम से पाईं किल्लर लाके दिया, और माँ अपना काम करने बैठ गयी. मैं लब में पॉर्न देखने बैठ गया. पर मैं माँ को भूल गया था, की माँ पीछे ही बैठी थी. मैने पीछे देखा तो माँ नही थी.

फिर मैं लब के वॉशरूम की तरफ गया. वाहा माँ एक हाथ छूट में घुसा के मूठ मार रही थी. तभी वाहा किसी के आने की आहत आई, तो मैं वापस दौड़ के अपनी जगह पे आ गया. लेकिन इस बात से ये पता चल गया की माँ भी प्यासी थी.

कॉलेज के स्टाफ वाले भैया नोटीस देने आए थे, की मौसम और बिगड़ने वाला था, तो प्रिन्सिपल माँ ने कॉलेज की लीव कर दी. फिर मैं अपनी बिके पार्किंग से निकाल ही रहा था, की कॉलेज के बाहर मुझे माँ मिल गयी. मैं वही रुक गया और माँ से पूछा-

मैं: माँ आप यहा क्यू रुके हो?

तो माँ ने बोला: ऑटो का वेट कर रही हू.

तो मैने माँ से बोला: मैं आपको आपके घर छ्चोढ़ देता हू.

माँ का घर कॉलेज से 14 केयेम डोर एक नयी डेवेलप्ड कॉलोनी मैं है. पहले तो माँ माना करने लगी. पर तोड़ा फोर्स करने के बाद मान गयी. बीच रास्ते में गद्दे भी बहुत थे, तो मैं जान-बूझ कर ब्रेक लगा रहा था, जिससे माँ के बूब्स मुझसे टकरा रहे थे.

फिर मैने माँ से बोला: आप मेरी कमर में हाथ डाल के बैठ जाओ.

तो माँ ने ऐसा ही किया. पर माँ के हाथ पे मेरा लंड चुभ रहा था. माँ की मजबूरी और फिरसे धक्का लगने से माँ का हाथ मेरी कमर से हॅट कर मेरे लंड पर आ गया. फिर मैने माँ को देखा तो माँ शर्मा रही थी.

हम थोड़ी आयेज गये तो बहुत तेज़ बारिश शुरू हो गयी. फिर हम एक खेत के पास रुक गये. हम बारिश में भीग रहे थे, तो हम भाग कर झोपड़ी में जेया खड़े हुए. झोपड़ी मैं से आ आ की आवाज़े आ रही थी. मैने और माँ ने जाके देखा की क्या हो रहा था अंदर.

तो वाहा का एक किसान जैसा लड़का, और एक अची लड़की, जो मालकिन जैसी लग रही थी, उसकी छूट चाट रहा था.

वो बोल रहा था: आज तुझे मेरी रंडी कुटिया बनौँगा समझी. रंडी, बेहन की लोदी, आज तेरी गांद का भोंसड़ा पक्का बनौँगा, और तेरी गांद और लोगों से भी चड़वौनगा.

ये सब मेरी और माँ की उत्तेजना बढ़ा रहा था. मैं भी सोच रहा था मैं कैसे माँ को छोड़ूँगा, कैसे माँ को मेरी पर्सनल रंडी बनौँगा, कैसे उनकी चुदाई करूँगा. शायद मैं कामुकता में अपनी जगह भूल गया, और माँ के पास जाके उनके पास खड़ा हो गया. वाहा मुझे उनकी गरम साँसे महसूस हो रही थी.

उसको मालूम नही था हम बाहर खड़े हुए थे, और उसकी आवाज़े सूम के माँ और मैं मादक अवस्था में पहुच गये. फिर हम दोनो ने एक-दूसरे की तरफ देखा, और वाहा से बाहर आ गये. बाहर बारिश कम हो गयी थी.

माँ और मैं आधे रास्ते से घर जेया ही रहे थे, की तभी तेज़ बारिश शुरू हो गयी, और माँ और मैं उसमे भीग गये. जब मैं गाड़ी चला रहा था, और मैने शीशे में माँ को देखा. माँ बिल्कुल सेक्सी लग रही थी. माँ ने जो वाइट मिक्स सारी पहनी थी, उससे उनकी रेड ब्रा दिख रही थी.

पर मैने तोड़ा और कंट्रोल किया. लेकिन माँ ने मेरी नज़रे पढ़ ली. फिर हम माँ के घर पहुँच गये. वो कॉलोनी जस्ट कुछ महीने पहले ही बनी थी, और उनके घर के पास कोई घर नही था. मैं वापस जाने लगा, पर माँ ने मुझे रोक लिया और अंदर आने का इन्विटेशन दिया.

आख़िर मेरे लिए तो ये मौका था, तो मैं भी अंदर चला गया. हम दोनो भीग गये थे तो माँ ड्रेस चेंज करने चली गयी, और मैं उनके नाम से वापस मूठ मारने लगा. तभी माँ ने मुझे ऐसा करते वक़्त देख लिया और मुझ पर चिल्लाने लगी.

अब आयेज की कहानी अगले पार्ट में. सो फ्रेंड्स तीस इस मी स्टोरी. कैसी लगी स्टोरी मेरे को मैल करना आप लोग. मी मैल ईद इस शर्मभी051@गमाल.कॉम

और कोई भी आंटी, गर्ल, या भाभी इंडोरे में मेरे साथ सेक्स करना चाहे, तो मुझे कॉंटॅक्ट कर सकती है.

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