सोनिया की चुदाई की कहानी – 2

मुझे उसके नशीले होंठों कामुक्त निप्पलों़़ सैक्सी नाभी मीठी योर्नी सब का स्वाद पता था। मुझे उसकी पीठ़़ उसके नितम्बों उसके हाथ मेरे ट्टटों पर और मेरा लण्ड पर उसकी कोमल चूत की पकड़। सब का र्स्पश पता था। उसकी सिस्कियां जो संगीत की तरह थी उन पर नाचना आता था। ओह कितना उतेजित करने वाला मेरे लण्ड को चूसना उसकी ज़ुबान का मेरे लण्ड के टोपे पर झूमना उसके मूंह की नर्मी जो मेरे लण्ड को और भी उतेजित कर रही थी कि मैं आपे से बाहर हो कर अपने वीर्य की वर्षा उसके स्तनों हाथाे़ं बांहों योनि पर करने से रुक नहीं पाया। इन सब चीज़ों का ज्ञान मुझे उन पलों में आया जब सोनिया और मैं कस कर आलिंगन कर रहे थे और कामुक्ता के बुखार में विर्सजित हो कर अपनी अन्दर की भावनाआ को प्रकट कर रहे थे। मैंने अपने हाथों को उसके नितम्बों से सरका कर उसके उभरे हुये स्तनों पर रख दिया।

हम अचनक अलग हुये और आंखे खोली। सोनिया ने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे कार की लाइट में एक हिरण चौंकता है और सिर हिला कर बोली “हम ऐसे नहीं कर सकते”। मैंने बुझे स्वर में कहा “सोनिया हम तैय्यार हैं। हमें अब अगला कदम लेना है।” वोह चीखी “नहीं। हम चुदाई नहीं कर सकते। हमारे सम्बंध दफ्तर के काम के कारण हैं। हम इक्ठ्ठे काम करते हैं।” “ओह सोनिया। तुमने वही अनुभव किया जो मैंने अनुभव किया। मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं सोनिया बिलकुल वैसे ही जैसे तुम्हारी चूत मेरे लण्ड की प्यासी है।” मैं बहुत उतेजित था और मेरी सांस भी फूल रही थी। किसी तरह शब्द मेरे मूंह से निकले “मैं तुम्हारे कपड़े उतारूंगा और तुम मेरे। तुम मेरे लण्ड को अपने हाथ में लेने को तत्पर हो। तुम मेरे बड़े लोड़े को अपने मूंह में ले कर इसका स्वाद लेने का इन्तज़ार नहीं कर सकती। मुझे पता है कि अभी जो चुम्मा लिया था वह चुदाई से कम नहीं था। हमने चुदाई तो कर ली है बस अब फिर से करनी है।” उसने सिर हिला कर कहा “नहीं।” “तुम मेरी जान हो और मैं तुम्हारा ग्ा़ुलाम।” वह चुपचाप मेरी तरफ देखती रहै।

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“सोनिया”

मैं उसकी तरफ बढ़ा “यह हमारे बस में नहीं है। और कोई रास्ता भी नहीं है। मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है और तुम्हें मेरी। जब हम कर नहीं लेते तुम मेरे बारे में सोचती रहोगी। तुम करना चाहती हो।” मैं सोनिया को अपनी बांहों में लेने के लिये और उसका चुम्म लेने के लिये आगे बढ़ा “तुम्हें यह चहिये। तुम्हें दुनिया में इस पल इससे ज़्यादा और कुछ नहीं चाहिये।” वह झटक कर अचानक अलग हो गयी और कस के मेरे गाल पर एक थप्पड़ मारा। “नहीं” वह चिल्लाई। “मैं ऑफिस का तुम्हारा एक किस्सा नहीं बनना चाहती। मुझे तुम्हारा लौडा नहीं चाहिये।” अब वह गुस्से से लाल हो गई थी। “मुझे तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है। एक दिन मेरा भी शौहर होगा जे मेरी चूत की चुदाई करेगा। मैं उसका इन्तज़ार कर सकती हूं। जब वोह चाहेगा मैं उसका लण्ड भी चूसूंगी। और तुम्हारी बीवी भी तो है। तुम एक अय्याश हरामज़ादे हो।”

मैं उसके गुस्से से दंग रह गया। क्या मैंने उसकी उतेजित अवस्था को गलत समझा था। क्या उसका पैंट के ऊपर से लण्ड का छूना उसकी मुस्कानाे़ं उसकी चुलबुलेपन को गलत पढ़ा था। क्या मैं इतना गया गुज़रा हूंऋ वह ऐसे झूठ क्यों बोल रही हैऋ क्या मैं पागल हो गया हूंऋ सोनिया कमरे में आगे पीछे घूमने लगी और वैसे ही जोर जोर से बोलने लगी ” और यह प्यार व्यार तकदीर सच्ची मोहब्बत। यह सब जो तुम कह रहे हो कहीं नहीं मिलते। मेरे पास प्यार है और मुझे यह किसी साथ में काम करने वाले से एक अशलील किस्से के रूप में नहीं चाहिये। मेरे से ऐसी बातें न करो।” मेरे दिल में तूफान चल रहा था। मेरा सिर चक्कर खा रहा था और मैं बाथरूम की तरफ भागा। लम्बी सांसे ले कर और मुॅह पर पानी फेंक कर मैंने अपनी दिल की तेज़ रफ्तार को कम किया। फिर मैं वपिस रूम में आ कर बैड पर लेट गया। एक टक छत को देखता रहा। मेरा दिमाग उबल रहा था। मैंने अपने दफ्तर का सबसे अच्छा दोस्त तो खो ही दिया था। और यदि वह इस बारे में हमारे मैनेजर से कह देती है तो शायद नौकरी भी। और बात अगर घर तक पहुंच जाती है तो शादी का भी क्या कहना। लगता है कि मैं पागल हो रहा हूं। मैंने अपना सर तकिये पर रखा और रोने वाला हो गया। मैंने अपने आप से कहा “अनिल इस बार तो अपनी चुदा ली है।” शायद मेरी आंख कुछ पलों के लिये लग गयी क्योंकि जब होश आया तो मेरी गालें गीली थीं। किसी ने पुकारा “अनिल”।

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मैंने अपनी गालें पोंछी और बोला “क्या”।

“अनिल मेरी तरफ देख सकते हो”

मैंने सिर हिला कर नहीं का इशारा किया। मेरे कंधों पर हाथ रख कर बोली “आई एम सॉरी अनिल। मैंने सब गलत बोला था। मेरे पास मेरा कुंवारापन है और तुम्हारे पास तुम्हारी बीवी और”

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