सोहिल 1 पार्ट 1

सोहिल 1 पार्ट 1
लेखक – सीमा सिंह
नमस्कार दोस्तो, मैं आपकी सीमा सिंह, आप मेरे नियमित पाठक को सामने एक नई कहानी लेकर आई हूं मैं चाहती हूं जितना प्यार आपने मेरी और कहानियों को दिया उतना ही प्यार इस कहानी को मिले।
मैं आपको बता देना चाहती हूँ कि मेरी सभी कहानियाँ काल्पनिक हैं, जिनका किसी से भी कोई सम्बन्ध नहीं है, अगर होता भी है, तो यह मात्र संयोग ही होगा।
कहानी शुरू करने से पहले में आपको भूतकाल की एक घटना सुना देती हूं, जिसका खुलासा कहानी में बाद में होगा।
मेरे पिता सरकारी नौकर थे, एक बार उनका ट्रांसपार राजस्थान के एक बॉर्डर के एक बहुत छोटे कस्वे में हो गया, उस कस्बे की 80% आवादी दूसरे धर्म की थी।
वो एक किराए के घर में रहते थे, वही मेरी मां का चक्कर कस्बे के विधायक के भाई से हो गया, मां ने पिता जी को छोड़ दिया और उसके साथ चुदाई का मजा लेने लगी।
पिता जी ने ये बात सब से छुपा ली क्योंकि दूर दूर तक यहां हमारा कोई रिश्तेदार नही था, न कोई मिलने वाला और पिता जी मां को वापिस लोटने के लिए मनाते रहे।
और दूसरी और विधायक के परिवार को भी ये सब पसंद नही था, वो उससे कुछ कहा नहीं पा रहे थे, और विधायक का भाई मेरी मां की चूत और गांड़ की चुदाई किए जा रहा था।
मेरी मां के अलावा विधायक का भाई की तीन और रखैल थी, मां के चुदाई के फलसरूप मेरा जन्म हो गया, उसने मेरा नाम सोहिल रखा।
क्योंकि मेरी मां का तलाक नहीं हुआ था, तो में कागजों में पिता जी का ही नाम चल रहा था, जब में छः माह का था, तो विधायक का भाई एक लड़ाई में मारा गया।
उसके बाद पिता जी मां को मना कर घर ले आए और मां की सारी गलतियों को भूल गए क्योंकि वो मां को बहुत चाहते थे।
मुझे भी अपना लिया था, मेरा राज केवल मां और पिताजी को ही पता था, क्योंकि पिताजी में अपना ट्रांसफर करा लिया।
अब वर्तमान की कहानी पर आते है।
बात उस समय की है, जब मैं बारहवीं में पढ़ता था, उस समय मैं बहुत ही डरपोक, शर्मीला, और सीधे टाइप का लड़का था, और मेरी पहली चुदाई भाभी से साथ कैसे शुरू हुई वहां से कहानी की शुरूआत करते हैं।
शादी में जब मैंने पहली बार भाभी को दुल्हन के रूप में देखा तो बस देखता ही रह गया था, वो दुल्हन के लिबास में स्वर्ग की किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।
बिल्कुल दूध जैसा सफेद रंग, गोल चेहरा, सुर्ख गुलाबी पतले पतले होंठ, बड़ी बड़ी काली आँखें, पतली और लम्बी सुराहीदार गर्दन, काले घने लम्बे बाल।
बड़े बड़े सख्त स्तन, पतली बलखाती कमर, गहरी नाभि, पुष्ट और भरे हुए बड़े-बड़े चूतड़, हालांकि उस समय मुझे सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था।
मगर फिर भी भाभी मुझे बहुत अच्छी लगी, भाभी ने आते ही मां के साथ सारे घर की जिम्मेदारी सम्भाल ली, भाभी सारा दिन घर के कामों में व्यस्त रहती थी।
और जब कभी समय मिलता तो मेरी पढ़ने में भी सहायता करती थी, भाभी ने बी.एस.सी. कर रखी थी, इसलिए मैं भी पढ़ाई में कोई दिक्कत आने पर भाभी से पूछ लेता था।
स्कूल से आने के बाद मैं भी भाभी और मां के घर के कामों में हाथ बंटा देता था, लेकिन भाभी मना करती थी और कहती थी, तुम बस पढ़ाई करो।
ये सब तो मैं और मम्मी जी अपने आप कर लेंगे, मेरे भैया चाहते थे कि मैं आर्मी में आफीसर बनूँ और यह बात उन्होंने भाभी को भी बता रखी थी।
इसलिए पारुल भाभी हमेशा मुझे पढ़ने के लिए बोलती थी, मैं भी पढ़ने में काफ़ी तेज था, हमेशा स्कूल में अव्वल आता था।
समय के साथ साथ मैं और पारुल भाभी एक-दूसरे से बिल्कुल खुल गए थे, अब तो हम दोनों एक दूसरे से हँसी मज़ाक भी कर लेते थे।
मगर अभी तक मैंने पारुल भाभी के बारे में गलत नहीं सोचा था, और वैसे भी सेक्स के बारे में मुझे इतना कुछ पता भी नहीं था।
लेकिन मेरे एक दो दोस्त थे, जो कि सेक्स के बारे में बहुत कुछ जानते थे, वे तो लड़कियों के साथ चुदाई भी कर चुके थे।
उन्होंने ही मुझे पहली बार एक लड़की कि अश्लील और नंगी तस्वीर दिखाई थी, और मुझे हस्तमैथुन करना भी सिखाया था।
एक बार स्कूल से आते समय हम सारे दोस्त सेक्स की चुदाई के बारे में बातें कर रहे थे, कि तभी मेरे एक दोस्त ने मुझसे कहा तू तो ऐसे ही घूम रहा है।
जबकि तेरे तो घर में ही जबरदस्त माल है, मैंने कहा मतलब ? तो दोस्त बोला तेरी भाभी है ना, और वैसे भी तेरे भैया आर्मी में हैं।
जो कि बहुत कम ही तेरी भाभी के साथ रहते है, तेरे भाई के जाने के बाद तेरी भाभी का दिल भी तो चुदाई के लिए करता होगा, इस पर मेरे सारे दोस्त हँसने लगे।
उस समय तो मैंने उसकी बातों को मजाक में उड़ा दिया, मगर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मेरा पारुल भाभी के प्रति नजरिया ही बदल गया।
उस दिन मैं और भाभी ऐसे ही बातें कर रहे थे, और बीच बीच में एक दूसरे से मजाक भी कर रहे थे, कि तभी भाभी ने मेरी बगल में गुदगुदी कर दी और हँसने लगी।
मैं भी पारुल भाभी को गुदगुदी करना चाहता था, इसलिए मैंने भाभी को बिस्तर पर गिरा दिया और दोनों हाथों से उसकी कमर में गुदगुदी करने लगा।
भाभी हँस हँस कर दोहरी हो गई और उन्होंने अपने दोनों घुटने मोड़ लिए, जिससे पारुल भाभी की साड़ी और पेटीकोट कमर तक उलट गए।
और उनकी दूध सी गोरी जांघें और गुलाबी रंग की पैन्टी दिखने लगी, जिसे देखते ही मेरे रोम रोम में एक तूफ़ान सा उठने लगा और मेरा लंड उत्तेजित हो गया।
पारुल भाभी ने जल्दी से अपने कपड़े ठीक करे, और हँसते हुए कहने लगी, तुम बहुत शरारती हो गए हो, वे उठ कर कमरे से बाहर चली गईं।
भाभी जा चुकी थी, मगर मुझे तो जैसे सांप सूँघ गया था, मेरे सामने अब भी पारुल भाभी की नँगी गोरी जांघें और उसकी गुलाबी पैन्टी घूम रही थी।
कुछ देर बाद भाभी खाने की प्लेट लेकर कमरे में आईं और मुस्कुराते हुए कहा चलो खाना खा लो, उन्होंने खाने की प्लेट को बिस्तर पर रख दिया।
और मेरे पास ही बैठ गई, मैं चुपचाप उठ कर खाना खाने लगा, मगर मेरा लंड अब भी उत्तेजित था, जो कि मेरी हाफ़ पैंट में उभरा हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
जिसे मैं बार बार दबा कर पारुल भाभी से छुपाने की कोशिश कर रहा था, शायद भाभी को भी मेरी इस हालत का अहसास हो गया था।
इसलिए भाभी ने हँसते हुए कहा, कुछ चाहिए, तो आवाज दे देना, मैं रसोई में जा रही हूँ, मुझे रह रह कर उस दिन वाली मेरे दोस्तों की बातें याद आने लगी।
और वो सही भी कह रहे थे, इस घटना ने मेरा सब कुछ बदल कर रख दिया, अब मैं पारुल भाभी को वासना की नजरों से देखने लगा।
अब मैं भाभी के अधिक से अधिक पास रहने की कोशिश करता रहता, इसका अहसास शायद भाभी को भी हो गया था, मगर भाभी कुछ नहीं कहती थी।
हमारे घर में दो ही कमरे हैं जिसमें से एक कमरे में मम्मी पापा रहते है, और दूसरे कमरा भाभी का है, मैंने ड्राईंग रूम में ही अपना बिस्तर लगा रखा है।
और वहीं पढ़ाई करता हूँ, एक बार रात को पढ़ते समय गणित का एक प्रश्न मुझसे हल नहीं हो रहा था, इसलिए पूछने के लिए मैं भाभी के पास चला गया।
और भाभी के कमरे का दरवाजा बजा कर उनको बताया, मगर भाभी ने दरवाजा नहीं खोला और कहा अभी मैं सो रही हूँ, कल बता दूँगी।
मैं वापस आकर फिर से अपनी पढ़ाई करने लगा, मगर कुछ देर बाद भाभी ने पता नहीं क्या सोचकर दरवाजा खोल दिया, और कमरे से ही आवाज देकर मुझे बुला लिया।
मैं कमरे में गया तो देखा कि भाभी ने काले रंग की पतली सी एक नाईटी पहनी हुई थी, जिसमें से उसकी नीले रंग की ब्रा और पैन्टी साफ दिख रही थी।
और यहाँ तक कि कमरे की टयूब लाईट की रोशनी में उसका दूधिया गोरा बदन स्पष्ट दिखाई दे रहा था, भाभी का यह उत्तेजक रूप देखकर मेरी हालत पतली होने लगी।
और मेरे लंड में उत्तेजित होकर मेरी हाफ़ पैंट में उभार सा बना लिया, मैं बस भाभी को ही देखे जा रहा था, शायद भाभी ने भी मेरी हाफ़ पैंट में मेरे लंड के उभार को देख लिया था।
भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा बोलो क्या पूछना है ? मेरी आवाज नहीं निकल रही थी, इसलिए मैंने हाथ के इशारे से किताब में वो प्रश्न बता दिया।
और भाभी मुझे बिस्तर पर बिठा कर समझाने लगी, मगर मेरा ध्यान पढ़ने में कहाँ था, मैं तो बस पारुल भाभी को ही देखे जा रहा था।
और मेरा लिंग तो मेरी हाफ पैंट को फाड़ कर बाहर आने को हो रहा था, कुछ देर में ही भाभी ने वो सवाल हल कर दिया और कहा समझ आ गया ?
मैंने झूठ मूठ में ही ‘हाँ’ कह दिया, जबकि मैंने तो ठीक से किताब की तरफ भी नहीं देखा था, मैं तो बस भाभी के अर्ध नग्न पार्ट को ही देखे जा रहा था।
पारुल भाभी ने कहा तो फिर चलो अब मुझे सोना है, भाभी के कमरे से आने को मेरा दिल तो नहीं हो रहा था, मगर फिर भी मैं वहाँ से आ गया।
और उसके बाद पारुल भाभी ने फिर से दरवाजा बन्द कर लिया, पारुल भाभी के गोरे बदन को देखने के बाद मुझे बहुत मजा आ रहा था।
और पारुल भाभी को याद करके मेरे लंड ने तो पानी छोड़ छोड़ कर मेरे अण्डरवियर को भी गीला कर दिया था, मगर अब क्या करें ?
तभी मुझे एक तरीका सूझा और मैंने फिर से भाभी के कमरे का दरवाजा बजा दिया, भाभी ने दरवाजा खोल कर मुस्कुराते हुए पूछा अब क्या हुआ ?
मैंने कहा भाभी एक बार फिर से बता दो, मुझसे नहीं हो रहा है, भाभी फिर से मुझे वो सवाल समझाने लगी, मगर मेरा ध्यान तो भाभी पर ही था।
और वैसे भी मैं पढ़ने भी कहाँ आया था, मैं तो पारुल भाभी की पारदर्शी नाईटी से दिखाई देते उनके नंगे अंगों को देखने आया था।
कुछ देर में ही भाभी ने वो सवाल फिर से हल कर दिया, मुझे फिर से उनके कमरे से आना पड़ा, कुछ देर बाद मैंने एक नया सवाल लेकर फिर से भाभी का दरवाजा बजा दिया।
इस बार पारुल भाभी दरवाजा खोलकर मुझे देखकर हँसने लगी और हँसते हुए कहा फिर से, मैंने कहा नहीं ये दूसरा है।
शायद पारुल भाभी समझ गई थी, कि मैं बार बार क्यों आ रहा हूँ, इसलिए वो हँसने लगी और हँसते हुए कहा सारी पढ़ाई आज ही करनी है क्या ?
मेरे बार बार भाभी का दरवाजा बजाने की आवाज सुनकर पापा अपने कमरे से बाहर आ गए और पापा के आते ही भाभी दरवाजे के पीछे छुप गई।
पापा ने मुझे डांटते हुए कहा क्यों परेशान कर रहा है भाभी को ? मैंने कहा मैं तो बस पढ़ने आया था।
पापा ने कहा तो फिर बार बार दरवाजा क्यों बजा रहा है ? मैंने बताया वो सवाल पूछने के लिए आना पड़ता है।
पापा ने कहा तुम कल से अपनी भाभी के कमरे में ही बिस्तर क्यों नहीं लगा लेते हो, वो तुम्हारी खबर भी लेती रहेगी और तुम्हें पढ़ा भी देगी।
इतना कह कर पापा वापस अपने कमरे में चले गए, भाभी के कमरे में बिस्तर लगाने की बात से मुझे बहुत खुशी हुई ।
क्योंकि अब तो रात भर भाभी के साथ ही रहूँगा, पापा के जाते ही मैं अपना सामान भाभी के कमरे में लाने लगा, मगर भाभी ने मना कर दिया।
और हँसते हुए कहा अभी रात को रहने दो, मैं कल तुम्हारा सामान यहाँ ले आउँगी, अभी तो ये बताओ तुम्हें पूछना क्या है ?
मैंने एक नया सवाल पारुल भाभी के सामने रख दिया, मगर भाभी ने कहा तुम्हें पहले वाला समझ आ गया ? मैंने जल्दी से ‘हाँ’ कह दिया।
भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा तो ठीक है जरा मुझे पहले वाला करके तो दिखाओ ? मैं हल करने तो लग गया, मगर मुझे आ नहीं रहा था।
और आता भी कहाँ से मैंने ठीक से देखा ही कहाँ था, भाभी को पता चल गया था, कि मुझे वो सवाल नहीं आ रहा है, और मैं बार बार उनके पास किस लिए आ रहा हूँ।
इसलिए वो जान बूझकर मेरी खिंचाई कर रही थी, पारुल भाभी हँसने लगी और कहा अभी सो जाओ, कल पढ़ लेना।
मैं चुपचाप भाभी के कमरे से वापस आ गया और आकर सो गया, मैं सोचने लगा कि अब तो भाभी मुझे अपने कमरे में कभी नहीं सुलाएंगी।
और डर भी लग रहा था, कि कहीं भाभी ये सब मम्मी पापा को ना बता दें, सुबह मेरी पारुल भाभी से बात तक करने कि हिम्मत नहीं हुई।
और मैं चुपचाप स्कूल चला गया, जब मैं स्कूल से वापस घर आया तो देखा कि मेरा सारा सामान ड्राईंग रूम से गायब था।
मैंने बाहर जाकर देखा तो भाभी किचन में खाना बना रही थी, वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी, मैंने भाभी के कमरे में जाकर देखा।
तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा, क्योंकि मेरा सारा सामान भाभी ने अपने कमरे में लगा रखा था, मगर मेरा बिस्तर नहीं था।
मेरी पारुल भाभी से बात करने कि हिम्मत तो नहीं हो रही थी, मगर फ़िर भी मैं पूछने के लिए भाभी के पास किचन में चला गया।
भाभी ने बताया इतना सामान कमरे में नहीं आएगा, तुम मेरे साथ बिस्तर पर ही सो जाना और वैसे भी डबलबेड है, हम दोनों आराम से सो सकते हैं।
यह बात सुनकर तो मैं इतना खुश हुआ जैसे कि मुझे कोई खजाना मिल गया हो, मगर मैंने जाहिर नहीं किया और रात होने का इंतजार करने लगा।
भाभी ने दिन से ही सलवार कमीज पहन रखा था, और रात को भी उसे ही पहनकर सो गई, इसलिए मुझे कुछ भी देखने को नहीं मिला।
ऊपर से भाभी के इतना नजदीक होने के कारण मेरा लंड रात भर उत्तेजित ही बना रहा, जिस कारण मुझे रात भर नींद भी नहीं आई।
अगले दिन भाभी ने साड़ी पहनी, इसलिए मैं दिन भर यह सोच कर खुश होता रहा कि शायद भाभी आज रात को सोते समय नाईटी पहनेंगी और मुझे कुछ देखने को मिलेगा।
मगर रात को भी भाभी ने कपड़े नहीं बदले बस अपनी साड़ी को ही उतारा, भाभी ने साड़ी को उतार कर मेज पर रख दिया।
और मुझे पढ़ाने के लिए मेरे पास मुझसे बिल्कुल सट कर बैठ गई, नीचे उन्होंने काले रंग का पेटीकोट और ऊपर भी काले रंग का ही ब्लाउज पहन रखा था।
जिसके बीच से भाभी का गोरा पेट दिखाई दे रहा था, गोरा पेट देख कर मेरा लंड उत्तेजित हो गया, मुझे डर लगने लगा, कहीं भाभी को मेरा उत्तेजित लंड दिखाई ना दे जाए।
इसलिए मैंने भाभी को मना कर दिया, और कहा मुझे कुछ पूछना होगा तो मैं आपको बता दूँगा, आप सो जाओ, भाभी ने कहा ठीक है।
वे बिस्तर पर एक तरफ जाकर सो गई, मगर सोते समय भाभी का पेटीकोट उनके घुटनों तक पहुँच गया, और भाभी की दूधिया सफेद पिण्डलियाँ दिखने लगी।
मैं पढ़ाई करने लगा, मगर मेरा पढ़ाई में बिल्कुल भी ध्यान नहीं था, और मैं चोर निगाहों से बार बार पारुल भाभी को ही देख रहा था।
मैं चाह रहा था, कि भाभी का पेटीकोट थोड़ा सा और ऊपर खिसक जाए, मगर तभी बिजली चली गई, जिससे कमरे में अंधेरा हो गया।
और मेरा सारा मजा खराब हो गया, अब मैं कुछ नहीं कर सकता था, इसलिए मैं बिस्तर पर जाकर सो गया, मगर मेरा लंड अब भी उत्तेजित था।
जो कि मुझे सोने नहीं दे रहा था, मैं बार बार करवट बदल रहा था, मगर नींद नहीं आ रही थी, तभी भाभी ने करवट बदली और वो मेरे बिल्कुल पास आ गईं।
अब तो मुझमे भी थोड़ी सी हिम्मत आ गई, मैं सोने का नाटक करते हुए करवट बदल कर पारुल भाभी से बिल्कुल चिपक गया।
और एक हाथ भाभी के बूब्स पर रख दिया व दूसरे हाथ से अपने लंड को सहलाने लगा, पारुल भाभी के नर्म स्तन ऐसे लग रहे थे मानो मैंने अपना हाथ मक्खन पर रखा हो।
मुझे डर लग रहा था, कहीं पारुल भाभी जाग ना जाएं और मेरा दिल डर के मारे जोरों से धक धक कर रहा था, मगर फ़िर भी मैं धीर धीरे भाभी के स्तन को सहलाने लगा।
मैं पहली बार किसी के वक्ष को छू रहा था, भाभी के नर्म मुलायम स्तनों के अहसास ने मुझे इतना उत्तेजित कर दिया कि मेरा कपड़ों में ही रस स्खलित हो गया।
जिससे मेरा हाथ और कपड़े गीले हो गए, मैं डर गया कहीं पारुल भाभी को ये बात पता ना चल जाए, इसलिए मैं जल्दी से करवट बदल कर सो गया और पता नहीं कब मुझे नींद आ गई।
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