सेक्स कहानी अब आयेज-
उस दिन के बाद, मेरे अंदर एक अजीब सी बेकरारी घर कर गयी थी. डॉक्टर अमित के हल्के टच और उस एहसास ने मुझे बेचैन कर दिया था. अगली बार उनसे मिलने का इंतेज़ार मुश्किल हो रहा था. मैं घर से निकालने से पहले खुद को और भी ध्यान से तैयार करती. नयी-नयी, हल्की-फुल्की सरीस पहनती. मेकप भी ऐसा करती की आँखों में वो चमक बनी रहे. एक अजीब सी ख्वाहिश थी उन्हे फिर से अपनी तरफ खींचने की.
पर यार, किस्मत का खेल भी अजीब होता है. अगली 2-3 कनसल्टिंग में, कुछ ऐसा हुआ की मेरी चाहत अधूरी रह गयी. एक बार मेरी बेटी मेरे साथ आ गयी. वो इतनी प्यारी है की मेरे साथ ही चिपकी रहती थी, एक पल के लिए भी डोर नही होती थी. डॉक्टर अमित के कॅबिन में भी वो मेरे बगल में ही बैठी रही. और तो और, उनके कॅबिन में भी नर्स और एक जूनियर डॉक्टर स्टाफ में मौजूद थे.
माहौल ऐसा बन गया था की खुल कर बात करना तो डोर की बात, आँखों ही आँखों में इशारे करने का मौका भी नही मिला. डॉक्टर अमित भी बिल्कुल प्रोफेशनल बने रहे, जैसे कुछ हुआ ही ना हो हमारे बीच. वो बस मेरी रिपोर्ट देखते, कुछ सवाल पूछते, और फिर आयेज का प्लान बताते. उनका हाथ भी इस बार बस चेकप तक ही सीमित रहा, कोई सहलाना नही, कोई च्चिपी हुई उंगली नही.
मैं अंदर ही अंदर घुट रही थी. मेरा जिस्म उनके छ्होटे से टच को भी तरस रहा था. वो आ निकालने वाला एहसास, मैं उन सब को बहुत मिस कर रही थी. हर पल बस यहीं सोचती रहती की कब वो अकेले मिलेंगे, कब ये स्टाफ और फॅमिली मेंबर्ज़ बीच से हटेंगे.
क्लिनिक से बाहर आने के बाद भी, मेरे दिल में वो अधूरी प्यास बाकी थी. मैं अंदर ही अंदर तड़पति रहती, उनके एक हल्के से टच के लिए, एक शरारती मुस्कान के लिए. वो दिन मेरे लिए इंतेज़ार और बेचैनी से भरे होते थे.
वो अधूरी प्यास और तड़प मेरे अंदर बढ़ती जेया रही थी. हर पल बस यही सोचती की कब डॉक्टर अमित से अकेले मिलूंगी, कब वो जादुई टच फिर से महसूस होगा. और फिर एक दिन, वो मौका आया.
मुझे हॉस्पिटल जाना था, और मेरे साथ मेरा बेटा आ रहा था. मैने इस दिन को ख़ास बनाने का सोचा. मैने अपनी कपबोर्ड खोली और एक गहरे लाल रंग की शिफ्फॉन सारी निकली. इसके साथ एक मॅचिंग स्लीव्ले ब्लाउस था, जिसका गला काफ़ी गहरा था और बाजू पुर खुले थे, जो मेरे भारी बूब्स को और भी ज़्यादा उभरता था.
इस सारी को पहनते ही मेरा जिस्म जैसे मचलने लगा. मैं आईने के सामने खड़ी हो गयी. मेरी कमर पर सारी इतनी कस्स के बँधी थी, की मेरी पतली कमर और उसके नीचे भारी चुतताड का कर्व बिल्कुल सॉफ दिख रहे थे.
ब्लाउस में मेरे बूब्स ऐसे कस्स कर भरे थे, की उनकी गोलाई हर तरफ से उभर रही थी, और जब मैं साँस लेती, तो वो और भी उपर-नीचे होते. हर अंग से जैसे सेक्सीनेस और सेडक्षन तपाक रहा था.
जब मैं घर से निकली, तो खुद को एक-दूं बदला हुआ महसूस कर रही थी. हर कदम में एक अलग ही कॉन्फिडेन्स था, एक नशा था. ऑटो में बैठते ही, ड्राइवर ने भी मुझे घूर कर देखा, और उसकी नज़र बार-बार मेरे खुले हुए बाज़ुओं और ब्लाउस में से झलकते बूब्स पर जेया रही थी. उसके चेहरे पर हवस सॉफ दिख रही थी. मेरा बेटा तो मोबाइल में रील्स देखने में बिज़ी था उसको तो कुछ एहसास ही नही था की उसकी मम्मी आज सेक्सी माल बनी हुई थी.
हॉस्पिटल पहुँचते ही, जैसे ही मैने अंदर कदम रखा, वहाँ का माहौल ही बदल गया. हर तरफ से नज़रें मुझ पर टिक गयी. सेक्यूरिटी गुआर्द से लेकर रिसेप्षन पर बैठी लड़की तक, सब मुझे एक बार ज़रूर घूरते थे. वहाँ जीतने भी मर्द मौजूद थे, उनकी नज़रें तो जैसे मुझ पर से हॅट ही नही रही थी. कुछ लोग तो खुले आम घूर रहे थे. उनकी आँखों में प्यास सॉफ दिख रही थी.
कुछ शरमा कर जल्दी से नज़रें हटा लेते, पर फिर एक बार ज़रूर देखते. उन सब की नज़रें मेरे बूब्स की गोलाई, मेरी पतली कमर, और सारी में से दिखते चुततादों पर टिकी थी. एक पल के लिए तो मुझे शरम आई, पर फिर एक अजीब सी गर्मी मेरे अंदर दौड़ गयी.
मुझे उनकी हवस भारी नज़रें बुरी नही लग रही थी, बल्कि कहीं ना कहीं अची लग रही थी. मैं उन सब की नज़रों का केन्द्रा बन चुकी थी, और ये एहसास मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई फिल्म स्तर हू, जिसे सब देख रहे थे.
मैं अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी, ये जानते हुए की मेरी अदाओं का जादू चल रहा था. मैं अपने अपायंटमेंट के लिए रिसेप्षन पर डॉक्टर अमित के कॅबिन के बाहर बैठी थी. हर पल एक-एक सदी जैसा लग रहा था.
हर आने जाने वाला मर्द मुझे घूर रहा था, और मैं उनकी नज़रों को महसूस कर रही थी. मेरे अंदर की आग और भी सुलगने लगी थी. थोड़ी देर में, मेरी धड़कन तेज़ हो गयी जब डॉक्टर अमित अपने कॅबिन से बाहर आए.
उनकी नज़र सीधी मुझ पर पड़ी. जैसे ही उन्होने मुझे लाल सारी और स्लीव्ले ब्लाउस में देखा, उनकी आँखें चमक उठी, बिल्कुल उसी तरह जैसे किसी शिकारी को उसका शिकार मिल गया हो. उनके चेहरे पर एक छ्होटी, नॉटी स्माइल आई, जिसे उन्होने जल्दी से च्छूपा लिया, पर मैने वो पकड़ ली थी. उन्होने हल्का सा सिर हिलाया और मैं शर्मा गयी.
और फिर जो हुआ, वो मुझे हैरान कर गया. उस दिन उन्होने मुझे एक से डेढ़ घंटा बाहर ही बिता कर रखा. उन्होने एक-एक करके अपने बाद आए हुए सारे पेशेंट्स चेक कर लिए, सब को अंदर बुलाते रहे, पर मुझे आख़िर में बुलाया. मैं हैरान थी की वो ऐसा क्यूँ कर रहे थे.
आख़िरकार, मेरी बारी आई. मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था, जैसे अभी बाहर निकल आएगा. जब मैं अंदर उनके कॅबिन में गयी, उन्होने मुझे देखा और एक हल्की सी स्माइल दी. उनकी आँखों में वही नॉटी चमक थी जो मैने बाहर देखी थी.
मैं उस स्माइल से ही हल्की शर्मा गयी, और मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी शुरू हो गयी. मुझे पता था, आज कुछ ज़रूर होगा, कुछ अलग. और जैसा की मैने सोचा था, उस दिन उनके साथ कोई स्टाफ नही था, हम दोनो अकेले ही थे रूम में.
उन्होने मुझे देख कर एक लुभावनी मुस्कान दी और धीरे से पूछा: आज भी आपका बेटा बाहर मोबाइल में ग़मे खेल रहा है रीता जी?
उनकी आवाज़ में एक च्चिपी हुई बेकरारी थी, जैसे वो यही सुनना चाहते हो.
मैने अपनी नज़रें नीचे करते हुए, हल्की सी शरम और दबी हुई हवस के साथ जवाब दिया: हा, अब उसको ग़मे खेलने का मौका मिलना चाहिए, डॉक्टर.
मेरी आवाज़ में एक मादक एहसास था, जैसे मैं उन्हे खुद को पेश कर रही हू. उनके चेहरे पर वो नॉटी स्माइल और गहरी हो गयी.
वो धीमे से बोले: आप यहाँ बैठिए, मैं बस दो मिनिट में आता हू.
उनकी बात सुन कर मेरी धड़कन और तेज़ हो गयी. वो दो मिनिट, 10-15 मिनिट में बदल गये. मैं उनका बेसब्री से इंतेज़ार कर रही थी, और हर पल मेरी चाहत और बेकरारी बढ़ा रहा था. कमरा एक अजीब सी खामोशी में डूबा था, जो मेरी धड़कन को और भी तेज़ कर रही थी.
जब वो वापस आए, तो उनके चेहरे पर वही नॉटी स्माइल और गहरी हो गयी. उन्होने मेरे साथ बहुत मज़ाक किया. मेरी प्राब्लम सुन कर मुझे अछा भी लगा, पर उनकी आँखों में वो शरारत अब और भी गहरी हो चुकी थी, जैसे वो मेरे अंदर कुछ पढ़ रहे हो. मेरी दबी हुई ख्वाहिशो को पहचान रहे हो.
मैं बातें तो सुन रही थी, पर मेरा ध्यान कहीं और ही था, उनकी नज़रों में और उस कमरे की घुटन में. फिर उन्होने मुझे चेकप के लिए बेंच पर सोने को कहा. मेरा जिस्म एक-दूं से गरम हो गया, जैसे वो इस पल का ही इंतेज़ार कर रहे हो.
मैं बेंच पर लेट गयी. वो मेरे क़रीब आए, और मैं शरम के मारे आँखें नही उठा पा रही थी. उस दिन की वो आहह अब भी मेरे कानो में गूँज रही थी, और उसकी यादें मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी. जब उनका हाथ मेरी कमर को छ्छूता, एक करेंट सा दौड़ गया मेरे शरीर में. मैं तिलमिला गयी.
पहले तो वो रेग्युलर चेकप कर रहे थे, जैसे हर बार होता है, पर उस दिन उनका टच कुछ अलग था. उनकी उंगलियाँ मेरी स्किन पर जैसे नाच रही थी, हर टच में एक नशा था. मुझे लगा जैसे वो मेरी बॉडी को सिर्फ़ चेक नही कर रहे, बल्कि सहला रहे हो, जैसे हर हिस्से को प्यार कर रहे हो.
मैने अपनी आँखें बंद कर ली, और मेरे गले से हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकालने लगी. मेरी साँसें तेज़ हो गयी थी, और मेरे अंदर एक गरम लेहायर सी दौड़ रही थी. कुछ 1-2 मिनिट बाद जब मुझे रियलाइज़ हुआ की मैं ये क्या कर रही हू, तब तक तो मैं अपनी आँखें बंद करके अपने होंठ चबा रही थी, खुद को रोकने की बेकार कोशिश में. मेरा शरीर अब पूरी तरह से उनके इशारों पर था, कामुकता में डूबा हुआ.
और फिर वो पल आया. कुछ 2 मिनिट बाद, मुझे शॉक लगा, जब महसूस हुआ की वो मेरी नाभि में उंगली डाल कर हिला रहे है. मेरी ज़ोर की आ निकल गयी, और साथ में मैं गरम, तेज़ साँसें छ्चोढ़ रही थी. फिर धीरे-धीरे उनका हाथ मेरी सारी के उपर से मेरे बूब्स पर लगा. और जब उन्होने मेरा एक बूब हल्का सा दबाया, तब मैं एक-दूं से चौक गयी और मेरी आँखें खुल गयी.
मैने देखा, उनका चेहरा मेरे एक-दूं क़रीब था, उनकी गरम साँसें मेरे चेहरे पर पद रही थी. उनकी आँखें नशीली हो गयी थी, और उनमे एक अजीब सी आग थी, जो सीधा मेरी रूह तक उतार रही थी. मेरा जिस्म उनकी नज़रों में डूब चुका था.
मैं (हानफते हुए, दबी हुई हवस के साथ): ये क्या कर रहे हो आप?
उनके होंठो पर एक दहशत भारी मुस्कान थी.
डॉक्टर: आपको जो ट्रीटमेंट की ज़रूरत है, रीता जी, वो दे रहा हू.
मैं (आँखों में हवस लिए, धीरे से): आप में इतनी हिम्मत कैसे आई?
डॉक्टर (नज़रें मिलते हुए, एक कामुक मुस्कान के साथ): हिम्मत? वो तो आपकी नज़रों ने दी है, रीता जी. मैं बहुत दिन से नोटीस कर रहा हू, आप मेरे से चूड़ने के लिए मचल रही है. आज मैं आपकी छूट को शांत कर देता हू.
मैं (तोड़ा झीजक कर): पर कोई आ गया तो? और अगर मैं जल्दी बाहर नही गयी तो मेरा बेटा परेशन हो जाएगा.
डॉक्टर: आपका बेटा तो मोबाइल में बिज़ी है, और कोई नही आएगा. सब घर चले गये, बस अब हम ही है.
ऐसा बोल कर उन्होने मुझे वही नॉटी स्माइल दिया, और मेरे बूब्स को मसल दिया. मेरे शरीर में करेंट दौड़ गया, और मैं उनके हाथो में पूरी तरह से काँप रही थी.
उन्होने अपने होंठ मेरे क़रीब कर दिए. मेरी तो साँसें तेज़ हो गयी थी, पर मेरे होंठ ना जाने कब हल्के से खुल गये, जैसे वो खुद उनको दावत दे रहे हो. और वो मुझे किस करने लगे, गहराई से, शिद्दत से. मैं कुछ समझ ही नही पा रही थी की क्या हो रहा था. मेरा दिमाग़ सुन्न हो चुका था, पर कुछ सेकेंड्स के बाद मेरा जिस्म खुद-बा-खुद उनको रेस्पॉन्स देने लगा.
वो किस करते हुए मेरा पल्लू कब गिरा दिया और कब मेरे ब्लाउस के हुक्स खुल गये, मुझे एहसास ही नही हुआ. मैं अंदर ब्रा नही पहनी थी, क्यूंकी मेरा ब्लाउस डीप कट था. मेरी साँसें अब और भी तेज़ हो चुकी थी.
उन्होने मेरा हाथ पकड़ कर खड़ा किया और मेरा ब्लाउस निकाल दिया. मैं उनके सामने लाल सारी में थी, मेरे बूब्स ब्लाउस से निकालने को बेकरार थे. फिर वो बोले-
वो क्या बोले, और आयेज क्या हुआ, वो अगले पार्ट में पता चलेगा.