शादी के 7 साल बाद भी कुँवारी

मेरा नाम जय है, उम्र 20 पिछले हफ्ते, मुझे दिल्ली से एक कॉल आया..
मैं गुड़गांवा से दिल्ली पहुँचा..

वो मुझे स्टेशन पर लेने, खुद ही आई थी..
फोन पर उसने, मुझे अपनी कार का नंबर बताया था..
मैंने स्टेशन के बाहर पार्किंग के पास पहुँच कर, उसकी कार को खोज़ लिया पर मैं अभी उसके सामने नहीं गया..
कार में एक 20 साल की खूबसूरत, आँखों पर चश्मे, बॉय कट बाल, गुलाबी रंग की साड़ी पहने हुए, एक स्मार्ट और सेक्सी शादीशुदा लेडी बैठी हुई थी..
कुछ देर, मैं दूर से उसे देखता रहा..
वो तत्पर निगाहों से, भीड़ में मुझे खोज रही थी..
मैंने अपनी पहचान उसे बता दी थी की मैं नीली जीन्स और सफेद शर्ट पहने हुए हूँ..
करीब 5 मिनट बाद, जब मैं उसे नहीं दिखा तो उसने मुझे मोबाइल पर कॉल किया..
मैं पास में खड़ा, सब देख रहा था..
तभी, मेरे मोबाइल की बेल बजी..
फिर मैंने उसकी कार के पास जाकर, मोबाइल चालू किया..
मेरे हैलो बोलते ही वो घबराहट भरे लहजे में बोली – जय, आप कहाँ हो.. .. मैं कब से आपका इंतज़ार कर रही हूँ.. ..
मैं मुस्कुराया और उसके सामने निकल कर, खड़ा हो गया..
मैंने बोला – मैं, यहाँ हूँ.. ..
हम दोनों, अपना मोबाइल अपने कान पर लगाए हुए थे..
उसने मुझे देखा और बस कुछ पल, मुझे देखती रही, चुप चाप..

मैंने फिर कहा – हैलो.. .. क्या हुआ.. ..
वो कुछ हड़बड़ाई और बोली – नहीं नहीं, कुछ नहीं.. .. अंदर आ जाओ.. ..
और, मैं कार में बैठ गया..
वो मुझे देखे जा रही थी..
मैंने कहा – चलें.. ..
वो बोली – हाँ हाँ.. .. चलो.. .. और, हम चल पड़े..
रास्ते में मैंने पूछा – हम कहाँ चल रहे हैं.. ..
वो बोली – मेरे घर में.. ..
कुछ देर बाद, कार एक कॉलोनी के एक आलीशान से दिखने वाले घर के अंदर दाखिल हो गई..
ना जाने ये संयोग था या ज़्यादातर बड़े अमीर लोग ही, जिगोलो की सेवाएँ लेते हैं..
फिर, हम कार से उतरे..
उसने चाभी से दरवाज़ा खोला और हम अंदर आ गये..
अंदर का हाल देख कर, मैं तो चकरा सा गया..
बिल्कुल फिल्मों की तरह का घर था, वो..
मैं सोफे पर जा कर बैठ गया..
उसने कहा – आप खाना खा लीजिए.. ..
मैंने कहा – अरे नहीं, नहीं.. .. अभी नहीं.. .. मुझे भूख नहीं है.. ..
फिर उसने टीवी चालू किया और मेरे पास खड़ी खड़ी, टीवी देखने लगी..
वो कुछ पहल नहीं कर रही थी या कहिए, वो समझ ही नहीं पा रही थी की करना क्या है..

यह कहानी भी पड़े  दोस्त की प्यासी बीवी का समर्पण

एक जिगोलो होने के नाते, मैं समझ गया की ये इसका पहला अनुभव है, किसी पराए मर्द के साथ..
वो साड़ी पहने हुए खड़ी थी और साड़ी में उसके नितंब (चूतड़) के शेप ग़ज़ब ढा रहे थे..
उसके नितंब देख कर, मैं पगलाया जा रहा था..
मैंने ही पहल करने की सोची और धीरे से, उसका हाथ पकड़ा..
उसका हाथ पकड़ते ही, उसने सिर उठा कर और आँखें बंद करके अपनी गर्दन मेरी तरफ घुमाई..
मेरे दिल की तो धड़कन बढ़ गई..
अब वो मेरी आँखों में आँखें डाले, बड़ी लाचार नज़रों से मुझे देखने लगी..
कुछ पल, हम एक दूसरे को यून्हीं देखते रहे..
अचानक, वो पलटी और मुझसे लिपट गई..
अब वो घुटनों के बल थी और मैं सोफे पर..
कुछ देर, वो मुझसे लिपटी रही..
मैं उसकी धड़कन और धौकनी की तरह चलती, उसकी साँसें महसूस कर सकता था..
वो मुझे कस कर, अपनी बाहों में लिए थी..
थोड़ी देर बाद, मैंने उस के कंधे पकड़ कर उसे उठाया तो देखा की उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे..
ये देख कर, मैं हैरान हो गया..
मैंने पूछा – क्या बात है, मेडम.. .. आप रो क्यूँ रही हैं.. ..
मैंने उसका चेहरा, अपने दोनों हाथों में ले लिया और उसके आँसू पोछे..
वो कुछ देर तो शांत रही, फिर उठ कर मेरा पास वाले सोफे पर बैठ कर बोली – मेरे पति मुझे शारीरिक सुख नहीं दे पाते.. .. वो “नपुंसक” हैं.. ..
ये सुनकर, मैं हैरान रह गया..
मैंने सोचा – इतनी सुंदर और जवान औरत और पति नमार्द.. .. वाह, भाई कुदरत का इंसाफ़.. ..
खैर, उसने आगे बताया – हमारी शादी को 7 साल हो गये हैं पर मैं अभी तक “कुँवारी” हूँ.. .. मैं ज़्यादा अमीर परिवार से नहीं थीं और जब मेरी सास, हमारे घर रिश्ता लेकर आई तो मेरे घर वाले फूले नहीं समाए.. .. क्यूंकी मेरे पति का परिवार, काफ़ी नामी और रहीस था.. .. जैसा की आप देख ही सकते हैं.. .. हालाकी मेरी दादी ने कहा की अगर ये लोग, अपने से इतने नीचे तबगे में शादी कर रहे हैं तो कुछ गड़बड़ ज़रूर है पर किसी ने उनकी बात नहीं सुनी और तर्क दिया की मैं बहुत सुंदर हूँ और लड़के को पसंद आ गई होंगी.. .. सुंदरता के आगे, अमीरी ग़रीबी नहीं देखी जाती.. .. शादी के बाद से तो मेरे पति, मेरी तरफ देखते भी नहीं.. .. मेरे मायके वाले यानी मेरी माँ कहती हैं की शादी के बाद पति ही सब कुछ होता है, जैसा भी हो.. .. अब तो मेरा आत्म हत्या करने को मन करता है.. .. आख़िर औरत तो मैं भी हूँ.. .. क्या करूँ, जब दूसरो को देखती हूँ तो ये “जिस्म की तड़फ़” अब मुझसे सहन नहीं होती.. .. ये तो अच्छा हुआ की कहीं से मुझे तुम्हारी मेल आई डी मिली और मैंने पहली और आखरी बार, ये प्रयास किया.. .. और आज तुम यहाँ हो.. ..
ये सुनकर, मुझे उस पर दया आ गई..
फिर मैंने उस से बोला – तुम्हें आत्म हत्या करने की कोई ज़रूरत नहीं है.. .. ये सब कुदरत का खेल है.. .. उसने शरीर दिया है तो भूख भी दी है.. .. उस भूख को मिटाने के लिए, कोई भी काम ग़लत नहीं है.. .. तुम जब चाहो, मुझे बुला सकती हो.. .. बेफ़िक्र रहो और खुश रहो.. .. हमारा राज़, ताउम्र राज़ ही रहेगा.. ..
उसने कहा – आप जानते नहीं, मेरे पति और ससुर काफ़ी रुतबे वाले और नामी लोग हैं.. .. अगर, उन्हें भनक भी लग गई तो मुझे कहीं का नहीं छोड़ेंगें.. ..
इस पर, मैंने कहा – आप चिंता मत करो.. .. जब आपको ऐसा लगे की हमारा मिलना पूरी तरह सुरक्षित है तभी आप मुझे संपर्क करना.. .. और बाकी आप, ऊपर वाले पर छोड़ दीजिए.. .. वैसे भी कल क्या होगा, ये सोच कर आज मत खराब कीजिए.. .. खुश रहिए और जिंदगी के मज़े लीजिए.. ..
मेरी बातों से उसे कुछ अच्छा लगा..

यह कहानी भी पड़े  ऑनलाइन फ्रेंड से अपनी बीवी की चुदाई

Pages: 1 2 3 4

Comments 1

Dont Post any No. in Comments Section

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!