बहन को चोदने की भाई की कोशिश की कहानी

हेलो दोस्तों, मैं सतीश हाजिर हूं अपनी एक सच्ची कहानी लेकर जिसमें मैं बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी सगी शादी-शुदा बहन को चोदा। कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में थोड़ा बता देता हूं। मेरा नाम सतीश है। मैं हरियाणा से हूं। मेरी उमर 22 साल है‌। मेरी आज तक कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनी है, क्योंकि लड़कियों से बात करने में मेरे को डर सा लगा रहता है। इसलिए मैं मुठ मार के ही काम चलाता हूं।

मेरे परिवार में मां, पापा, दादी और 1 बहन है। पापा खेती-बाड़ी करते है, और मां हाउसवाइफ है। मेरी बहन की शादी 5 साल पहले हो गई हैं, और वो जीजा जी के साथ शहर में रहती है। मेरी दीदी की उमर 26 साल है। मेरी बहन का साइज़ 32-30-32 का है। कोई भी मेरी बहन को एक बार देख ले, तो उसका मेरी बहन को चोदने का मन पक्का होगा।

मेरी बहन की शादी 5 साल पहले हो चुकी है। लेकिन अभी भी उनको कोई बच्चा नहीं है। मेरी दी बहुत शरीफ़ लड़की रही है। शादी से पहले दी का कोई बॉयफ्रेंड नहीं था। दी ने बी.ए. किया हुआ है। दी सीधा घर से कॉलेज और कॉलेज से घर आती थी। मेरे साथ दी फ्रैंडली थी। कॉलेज के 1 साल बाद दी की शादी हो गई थी।

मेरे मन में पहले दीदी के लिए कोई गलत विचार नहीं थे। पर बात लगभग एक साल पहले की है, जब एक रात मेरी दीदी हमारे घर रहने आई थी। तब मेरे मन में दीदी के लिए पहली बार गलत फीलिंग आई थी। उस समय सर्दियों के दिन थे। दीदी मेरे साथ मेरे बेड पर ही सो रही थी। रात को 1 बजे मेरी नींद खुल गई। तब मेरा एक हाथ दीदी के बूब्स पर था। मैंने पहले तो अपना हाथ दीदी के बूब्स से हटा लिया, और थोड़ी देर इस बारे मे सोचने लगा कि ये ठीक नहीं था।

पर इस हरकत से मेरा लंड खड़ा हो गया था। मेरे लंड का साइज 8 इंच का है। अब एक मन तो कर रहा था कि दीदी के बूब्स को फिर से छू लूं। लेकिन डर भी बहुत लग रहा था कि अगर दीदी की नींद खुल गई तो दी क्या सोचेगी मेरे बारे में। पर लंड का हम क्या कर सकते है? इस पर किसी डर का कोई फर्क नहीं पड़ता है।

मैंने भी थोड़ी हिम्मत जुटा कर दी के बूब्स पर हाथ रख दिया। मैंने थोड़ी देर हाथ ऐसे ही बूब्स पर रखे, फिर दी की तरफ देखा कि दी कही जाग तो नहीं गई थी। लेकिन दी आराम से सो रही थी। फिर मैंने पूरा एक बूब्स अपने हाथ में ले लिया दी का। 1 बूब्स मेरे हाथ में समा गया था। दी रात को सूट सलवार ही पहन के सोती थी। उस दिन दी ने अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी। दी के बूब्स बहुत मुलायम थे।

फिर मैंने थोड़ी और हिम्मत करके दीदी के बूब्स को धीरे-धीरे सहलाया। मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गई थी। अब मैं दीदी की चूत को टच करना चाहता था, लेकिन इसमें मुझे डर बहुत लगने लग गया था कि अगर दीदी उठ गई तो मेरा क्या होगा। इसलिए मैंने रिस्क लेना ठीक नहीं समझा, और मैं ये यही पर रोक के बाथरूम में गया।‌

फिर मैंने दीदी के नाम की पहली बार मुठ मारी। आज पहली बार मुझे मुठ मारने में भी बहुत मज़ा आया था। मुठ मारने के बाद मैं दीदी के साथ जाके सो गया। फिर मैं सुबह ही उठा। फिर दिन भर देखा सब कुछ नोर्मल था। फिर रात हो गई। मैंने सोचा आज मैं दी की चूत ज़रूर टच करूंगा। यही सोच कर मैं अपने रूम में जाके लेट गया, और दी का इंतजार करता रहा।

लेकिन उस रात दीदी मेरे रूम में आई ही नहीं। फिर मैंने बाहर निकल के देखा कि दी कहा थी। तो मैंने पाया कि दी मां के साथ सो रही थी। फिर 3-4 दिन ऐसे ही चलता रहा। मैं रात में दी का इंतजार करता पर दी मां के साथ ही सोती थी। फिर जीजू दीदी को लेकर चले गए। अब मैं हर रोज यह सोचता रहता कि काश मैंने कुछ आगे किया होता। अब मुझे खुद पर भी गुस्सा आने लगा था‌। ऐसे ही 6 महीने निकल गए और दी फिर से हमारे साथ रहने आने वाली थी।

मैं बहुत खुश हुआ कि अबकी बार मैं आगे बढ़ूंगा और हो सके तो दीदी की चुदाई भी जरूर करूंगा। फिर दी हमारे साथ रहने आ गई थी। अब मैं दी को हमेशा गौर से देखता कि मैंने पहले दी को पेलने की कोशिश क्यूं नहीं की। अब गर्मियों के दिन आ गए थे। हम सब घर के आंगन में ही सोते थे। अब मेरा काम भी बनना बहुत मुश्किल था, क्योंकि गर्मी में दी के साथ मैं अगर कोई गलत हरकत करता सबके सामने, तो कोई देख ना ले इस बात का डर लगा रहता था।

इसलिए मैं ऐसी कोई हरकत नहीं करना चाहता था कि बात हाथ से निकल जाए, और मैं दीदी को चोद ना पाऊं। इसलिए मैंने इंतजार करना ही सही समझा, और मैं दी की हर मूवमेंट पर नज़र रखता था। एक दिन की बात है, शाम का टाइम था, और दीदी झाड़ू लगा रही थी। मैं कुर्सी पे सामने बैठा था। दी जैसे ही झाड़ू लगाने के लिए झुकी, उनके बूब्स बिल्कुल साफ-साफ दिख रहे थे।

एक तो दीदी ने ढीला कुर्ता पहना था, उपर से ब्रा भी नहीं पहनी थी, जिस कारण से दीदी की बूब्स साफ दिख रहे थे। उनके निप्पल मेरे को साफ नज़र आ रहे थे। ये देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था। मन तो कर रहा था कि अभी दी को यही पटक लूं, और उनके बूब्स को अच्छी तरह से मसलूं, और बूब्स को बारी-बारी चूस लूं। यहीं सोच कर मेरा बुरा हाल हो गया था, और मेरी बरजस्त से बाहर हो गया था।

क्यूंकि मैंने पहली बार किसी लेडी के बूब्स को निप्पल तक देखा था। वो भी मेरी सगी बहन के। फिर मैं वहां से सीधा बाथरूम गया और दी के बूब्स के बारे में सोच के मुठ मारने लगा। पहली बार मेरा पानी इतना निकला था। उस रात मैंने दी के नाम की 3 बार और मुठ मारी। फिर दिन ऐसे ही निकलते गए। दी जब भी झुक के काम करती, मैं तुरंत दी के सामने चला जाता, जिससे दी के बूब्स के दर्शन अच्छे से हो सके।

ऐसे ही दिन निकलते गए और फिर से दी अपने सुसराल चली गई। मैं इस बार भी कुछ नहीं कर पाया। अब मैंने सोच लिया था कि अगर दीदी की लेनी है तो पहले अच्छे से प्लानिंग करनी पड़ेगी, नहीं तो ऐसे दीदी कभी नहीं चोदने देगी। अब दी 4 महीने के बाद आने वाली थी। मैंने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी। मैंने बहुत सी सेक्स स्टोरी पढ़ी और उनमें से बातें मुझे सही लगी उन को सोच लिया कि दी पर ऐसे ही ट्राई करूंगा।

मैंने बहुत से स्टोरी लेखक से भी बात की और उन्होंने मुझे अलग-अलग आइडिया दिए। मैंने सभी के आइडिया सुने लेकिन मेरे को 2-3 आइडिया अच्छे लगे, और मैंने उन्हीं आइडिया पर अमल करने की सोची। अब टाइम हो गया था कि दीदी घर पर 1 महीने के लिए रहने आने वाली थी, और मैं भी इस बार रेडी था दी को चोदने के लिए। ये बताऊंगा मैं सभी को अगले पार्ट में कि मैं अपनी दी को चोद पाता हूं कि नहीं।

तो कैसी लगी दोस्तों आपको मेरी कहानी, प्लीज कमेंट करके बताना मेरी जी-मेल आईडी [email protected] पर। अगले पार्ट के लिए भी जरूर कमेंट करे।

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